
देश में विदेशी मूल के सोने की कथित तस्करी के खिलाफ Directorate of Revenue Intelligence यानी DRI ने बड़ी कार्रवाई की है। मुंबई जोनल यूनिट ने ‘ऑपरेशन बॉर्डर बुलियन बस्ट’ के तहत मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, अहमदाबाद और गुवाहाटी में एक साथ छापेमारी और तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई में 6.61 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना बरामद किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब ₹10.36 करोड़ बताई गई है। मामले में एक कथित मास्टरमाइंड समेत कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
DRI की शुरुआती जांच के मुताबिक, यह कथित नेटवर्क भारत-बांग्लादेश सीमा से विदेशी मूल का सोना देश में लाने के बाद उसे अलग-अलग शहरों तक पहुंचाने के लिए कूरियर नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा था। एजेंसी का दावा है कि शुरुआती दस्तावेजी जांच में 2026 के पहले नौ महीनों के दौरान करीब 318 किलोग्राम तस्करी का सोना इस नेटवर्क के जरिए अलग-अलग जगहों पर पहुंचाए जाने की जानकारी सामने आई है। इसकी अनुमानित कीमत लगभग ₹475 करोड़ बताई गई है। हालांकि यह आंकड़ा जांच के दौरान मिले प्रारंभिक दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित है और मामले की जांच अभी जारी है।
23 सितंबर से शुरू हुआ ऑपरेशन
DRI के मुंबई जोनल यूनिट ने यह विशेष अभियान 23 सितंबर को शुरू किया था। एजेंसी को कथित तौर पर खुफिया जानकारी मिली थी कि पश्चिम बंगाल और असम में भारत-बांग्लादेश सीमा के रास्ते विदेशी मूल का सोना भारत में लाया जा रहा है।
जांच एजेंसी के अनुसार, सीमा क्षेत्र से भारत में आने के बाद सोने को एक जगह पर रखने के बजाय छोटे-छोटे कूरियर पैकेज में अलग-अलग शहरों तक भेजा जाता था। इन पैकेजों को गुवाहाटी और कोलकाता से मुंबई, दिल्ली और अहमदाबाद में मौजूद कथित प्राप्तकर्ताओं तक पहुंचाया जाता था।
इस सूचना के आधार पर DRI ने अलग-अलग शहरों में एक साथ कार्रवाई की। अधिकारियों ने लाइव कूरियर कंसाइनमेंट को इंटरसेप्ट किया और कथित तौर पर उनमें विदेशी मूल का सोना बरामद किया। इसके बाद उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश की गई जिन्हें ये कंसाइनमेंट डिलीवर किए जाने थे।
पांच शहरों में एक साथ छापेमारी
DRI की कार्रवाई मुंबई तक सीमित नहीं रही। एजेंसी ने मुंबई के साथ दिल्ली, कोलकाता, अहमदाबाद और गुवाहाटी में भी तलाशी और इंटरसेप्शन की कार्रवाई की।
जांच के दौरान गुवाहाटी और कोलकाता से मुंबई, दिल्ली और अहमदाबाद भेजे जा रहे कूरियर पैकेजों को कथित तौर पर रोका गया। इन कंसाइनमेंट को लेने वाले सात लोगों को हिरासत में लिया गया।
इसके बाद एजेंसी ने उन जगहों पर भी तलाशी ली जहां से कथित तौर पर कंसाइनमेंट भेजे गए थे। कोलकाता में कथित consignors और shippers से जुड़े ठिकानों पर भी कार्रवाई की गई, जिसके बाद तीन अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया।
इसके बाद जांच को आगे बढ़ाते हुए मुंबई में एक कथित मास्टरमाइंड को भी पकड़ा गया। एजेंसी के मुताबिक, उस व्यक्ति पर कथित तौर पर तस्करी के सोने की खेप भेजने और उसकी डिलीवरी की व्यवस्था करने में समन्वय की भूमिका निभाने का संदेह है।
₹10.36 करोड़ का सोना जब्त
ऑपरेशन के दौरान DRI ने कुल 6.61 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना बरामद किया। इसकी अनुमानित कीमत ₹10.36 करोड़ बताई गई है।
एजेंसी ने इस सोने को Customs Act, 1962 के संबंधित प्रावधानों के तहत जब्त किया है। बरामदगी कथित तौर पर उन कूरियर कंसाइनमेंट से हुई जिन्हें देश के अलग-अलग शहरों में भेजा जा रहा था।
यह बरामदगी उस कथित नेटवर्क की पूरी गतिविधि का केवल एक हिस्सा बताई जा रही है। DRI का कहना है कि दस्तावेजों की शुरुआती जांच में इससे कहीं बड़ी मात्रा में सोने की आवाजाही के संकेत मिले हैं।
318 किलो सोने की तस्करी का दावा
DRI की शुरुआती जांच के अनुसार, कथित सिंडिकेट ने 2026 के पहले नौ महीनों के दौरान लगभग 318 किलोग्राम विदेशी मूल के सोने को कूरियर नेटवर्क के जरिए अलग-अलग जगहों तक पहुंचाया।
इस सोने की अनुमानित कीमत करीब ₹475 करोड़ बताई गई है। यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि ₹475 करोड़ का आंकड़ा कथित तौर पर पूरे नेटवर्क द्वारा पहले पहुंचाए गए सोने के अनुमानित मूल्य से संबंधित है, जबकि इस मौजूदा कार्रवाई में जब्त किया गया सोना 6.61 किलोग्राम है, जिसकी कीमत लगभग ₹10.36 करोड़ बताई गई है।
यानी जांच एजेंसी ने जो कथित नेटवर्क पकड़ा है, उसकी गतिविधियां केवल उस सोने तक सीमित नहीं बताई जा रही हैं जो छापेमारी के दौरान बरामद हुआ।
कैसे काम करता था कथित कूरियर नेटवर्क?
जांच एजेंसी के अनुसार, कथित तस्करी नेटवर्क का तरीका छोटे-छोटे कंसाइनमेंट के जरिए सोने को अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाने का था।
बताया गया है कि भारत-बांग्लादेश सीमा के जरिए विदेशी मूल का सोना कथित तौर पर भारत में लाया जाता था। इसके बाद इसे गुवाहाटी और कोलकाता जैसे शहरों से कूरियर पैकेज के जरिए देश के अन्य हिस्सों में भेजा जाता था।
मुंबई, दिल्ली और अहमदाबाद में मौजूद कथित प्राप्तकर्ताओं तक इन पैकेजों को पहुंचाया जाता था। DRI ने इसी कूरियर श्रृंखला को तोड़ने के लिए एक साथ कई शहरों में कार्रवाई की।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सीमा क्षेत्र से सोना भारत में पहुंचाने से लेकर अंतिम खरीदार या प्राप्तकर्ता तक पहुंचाने के बीच कितने लोग और कितने स्तर शामिल थे।
11 लोगों की गिरफ्तारी
इस मामले में DRI ने कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें कूरियर कंसाइनमेंट के कथित प्राप्तकर्ता, कथित consignors और shippers से जुड़े लोग तथा एक कथित मास्टरमाइंड शामिल हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार, सात लोगों को उन कंसाइनमेंट की डिलीवरी लेने के दौरान पकड़ा गया जिन्हें गुवाहाटी और कोलकाता से अलग-अलग शहरों में भेजा गया था। इसके बाद कोलकाता में कथित तौर पर कंसाइनमेंट भेजने वालों से जुड़े ठिकानों पर कार्रवाई हुई और तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया।
एक अलग कार्रवाई में मुंबई से कथित मास्टरमाइंड को पकड़ा गया। एजेंसी का आरोप है कि वह नेटवर्क में सोने की खेपों की आवाजाही और डिलीवरी के समन्वय में भूमिका निभा रहा था।
गिरफ्तार लोगों की वास्तविक भूमिका, नेटवर्क का पूरा ढांचा और अन्य संभावित आरोपियों की पहचान जांच आगे बढ़ने के साथ स्पष्ट हो सकती है।
जांच अभी जारी
DRI ने संकेत दिया है कि मामला केवल बरामद सोने और गिरफ्तार किए गए 11 लोगों तक सीमित नहीं है। एजेंसी अब कथित तस्करी नेटवर्क के दूसरे हिस्सों की जांच कर रही है।
विशेष रूप से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि भारत-बांग्लादेश सीमा से सोना किस तरीके से देश के भीतर लाया जाता था, इसके पीछे कौन लोग थे और अलग-अलग शहरों में इसके वितरण की व्यवस्था कौन संभाल रहा था।
इसके अलावा एजेंसी यह भी जांच रही है कि कथित नेटवर्क में कौन लोग वित्तीय लेनदेन, कूरियर व्यवस्था, परिवहन और अंतिम बिक्री से जुड़े थे।
DRI की प्रारंभिक जांच में सामने आए 318 किलोग्राम सोने के आंकड़े की भी जांच दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। इसलिए इसे फिलहाल एजेंसी द्वारा जांच में सामने आया अनुमान मानना जरूरी है, न कि अदालत द्वारा स्थापित तथ्य।
विदेशी मूल के सोने की तस्करी पर DRI की नजर
विदेशी मूल के सोने की तस्करी लंबे समय से राजस्व और सीमा शुल्क एजेंसियों के लिए चुनौती रही है। सोने की कीमत और घरेलू बाजार में इसकी मांग के कारण अवैध तरीके से सोना लाने वाले नेटवर्क अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करते हैं।
इस मामले में खास बात कूरियर नेटवर्क का कथित इस्तेमाल है। बड़ी खेप को एक साथ भेजने के बजाय छोटे पैकेजों में सोना भेजने से निगरानी से बचने की कोशिश की जा सकती है। जांच एजेंसी का दावा है कि इसी तरह के नेटवर्क के जरिए कथित रूप से बड़ी मात्रा में सोने को अलग-अलग शहरों में पहुंचाया गया।
‘ऑपरेशन बॉर्डर बुलियन बस्ट’ के दौरान एक साथ पांच शहरों में कार्रवाई किए जाने से पता चलता है कि जांच केवल स्थानीय स्तर पर नहीं बल्कि सीमा क्षेत्र से लेकर अंतिम डिलीवरी पॉइंट तक कथित नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने पर केंद्रित है।
आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं?
DRI की जांच अभी जारी है और एजेंसी कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। ऐसे में आगे और गिरफ्तारियां या बरामदगी होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि 2026 के पहले नौ महीनों में कथित तौर पर 318 किलोग्राम सोने की आवाजाही से जुड़े दस्तावेजों में किन लोगों के नाम सामने आते हैं और क्या मौजूदा गिरफ्तार आरोपियों के बीच कोई संगठित संरचना थी।
एजेंसी का कहना है कि दस्तावेजी साक्ष्यों की शुरुआती जांच से कथित रूप से करीब ₹475 करोड़ मूल्य के सोने की आवाजाही का पता चला है। अब जांच अधिकारी इस दावे को अन्य साक्ष्यों से जोड़कर पूरे नेटवर्क की भूमिका निर्धारित करने में जुटे हैं।
ऑपरेशन की बड़ी बातें एक नजर में
इस कार्रवाई की प्रमुख बातें इस प्रकार हैं:
- DRI मुंबई जोनल यूनिट ने 23 सितंबर से ‘ऑपरेशन बॉर्डर बुलियन बस्ट’ शुरू किया।
- कार्रवाई मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, अहमदाबाद और गुवाहाटी में की गई।
- 6.61 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना जब्त किया गया।
- जब्त सोने की अनुमानित कीमत ₹10.36 करोड़ बताई गई है।
- कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
- गिरफ्तार लोगों में एक कथित मास्टरमाइंड भी शामिल है।
- DRI के अनुसार, कथित नेटवर्क ने 2026 के पहले नौ महीनों में करीब 318 किलोग्राम सोना पहुंचाया।
- इस सोने की अनुमानित कीमत लगभग ₹475 करोड़ बताई गई है।
- कथित नेटवर्क भारत-बांग्लादेश सीमा से लेकर देश के अलग-अलग शहरों तक फैला हुआ था।
- सोने की कथित डिलीवरी के लिए छोटे कूरियर कंसाइनमेंट का इस्तेमाल किया जाता था।
- पूरे नेटवर्क और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की जांच अभी जारी है।
फिलहाल क्या सामने आया है?
DRI की इस कार्रवाई में फिलहाल सबसे बड़ी बरामदगी 6.61 किलोग्राम विदेशी मूल के सोने की हुई है, जिसकी कीमत करीब ₹10.36 करोड़ बताई गई है। 11 लोगों की गिरफ्तारी के साथ एजेंसी ने कथित कूरियर आधारित तस्करी नेटवर्क की कई कड़ियों तक पहुंचने का दावा किया है।
हालांकि जांच अभी शुरुआती चरण में है। करीब 318 किलोग्राम सोने की कथित आवाजाही और ₹475 करोड़ के अनुमानित मूल्य से जुड़े दावों की पुष्टि जांच के दौरान जुटाए जा रहे दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों से होनी है।
फिलहाल DRI का फोकस कथित नेटवर्क के उन हिस्सों तक पहुंचने पर है जो भारत-बांग्लादेश सीमा से सोने की आवाजाही, कूरियर के जरिए परिवहन, अलग-अलग शहरों में डिलीवरी और घरेलू बाजार में कथित वितरण से जुड़े हो सकते हैं।
‘ऑपरेशन बॉर्डर बुलियन बस्ट’ इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कार्रवाई एक ही शहर तक सीमित न रहकर पांच शहरों में एक साथ की गई। अब जांच के आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि कथित नेटवर्क का वास्तविक आकार कितना बड़ा था और इसमें गिरफ्तार किए गए 11 लोगों की भूमिकाएं क्या थीं।
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