‘हनुमान चालीसा पढ़ रहा था, सबको मरने नहीं दे सकता…’ कैप्टन स्मित ने PM मोदी को सुनाई विमान में हमले की आपबीती

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‘हनुमान चालीसा पढ़ रहा था, सबको मरने नहीं दे सकता…’ कैप्टन स्मित ने PM मोदी को सुनाई विमान में हमले की आपबीती

फ्लाईदुबई की दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट में हुए हमले के बाद चर्चा में आए भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत में उस भयावह पल की आपबीती सुनाई, जब विमान तेजी से नीचे की ओर जा रहा था और उनकी जान भी खतरे में थी। 2 अक्टूबर को हुई वीडियो कॉल में स्मित ने बताया कि वह घायल अवस्था में भी कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश कर रहे थे, क्योंकि उनके मन में यह बात थी कि वह विमान में सवार सभी लोगों को मरने नहीं दे सकते।

स्मित ने प्रधानमंत्री को बताया कि मुश्किल समय में वह लगातार हनुमान चालीसा पढ़ रहे थे। उनके मुताबिक, जब उन्हें लगा कि विमान नीचे गिर रहा है, तब उन्होंने खुद को उठने और कॉकपिट का दरवाजा खोलने के लिए आखिरी ताकत लगाने को कहा। दरवाजा खुलने के बाद यात्री और क्रू के अन्य सदस्य अंदर पहुंचे और हमलावर सह-पायलट को काबू करने में मदद मिली। इस घटना में स्मित गंभीर रूप से घायल हुए, लेकिन विमान में मौजूद अन्य लोगों की मदद से बड़ा हादसा टल गया।

PM मोदी से बातचीत में भावुक हुए कैप्टन स्मित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कैप्टन स्मित मच्छर से वीडियो कॉल पर बात कर उनका हालचाल जाना और उनके साहस की सराहना की। बातचीत के दौरान स्मित भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें प्रधानमंत्री से बात करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने मोदी को अपना आदर्श बताया।

प्रधानमंत्री ने स्मित से कहा कि देश उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहा है। उन्होंने मुश्किल परिस्थिति में स्मित के साहस, धैर्य और सूझबूझ की तारीफ की। मोदी ने कहा कि उन्होंने बहुत कम समय में अहम फैसले लिए और कई लोगों की जान बचाने में भूमिका निभाई।

बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत उन्हें वापस आने का इंतजार कर रहा है। उन्होंने स्मित और उनके परिवार को जरूरत पड़ने पर हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। प्रधानमंत्री ने स्मित की मां गीताबेन से भी बातचीत की और उनके परिवार के धैर्य तथा संस्कारों का उल्लेख किया।

‘हनुमान चालीसा पढ़ रहा था, भगवान की कृपा थी’

कैप्टन स्मित ने प्रधानमंत्री को बताया कि जब भी वह किसी कठिन परिस्थिति में होते हैं, तो हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। विमान में हमले के दौरान भी वह लगातार इसका पाठ कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि भगवान की कृपा उनके साथ थी।

स्मित के मुताबिक, हमले के बाद वह जमीन पर गिर गए थे और उन्हें महसूस हुआ कि विमान तेजी से नीचे जा रहा है। उस समय उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती कॉकपिट का दरवाजा खोलना था। उन्होंने खुद को समझाया कि यही आखिरी मौका है और उन्हें किसी भी तरह दरवाजे तक पहुंचना होगा।

उन्होंने बताया कि चोटों और हमले के बावजूद उन्होंने दरवाजा खोलने की कोशिश जारी रखी। जब दरवाजा खुला, तो दूसरे लोग अंदर पहुंच सके। स्मित ने इस दौरान यात्रियों और क्रू के योगदान को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि इस घटना में केवल उनका ही नहीं, बल्कि वहां मौजूद अन्य लोगों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।

‘मैं अपनी जान बचाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन…’

स्मित ने बातचीत में बताया कि उस समय वह अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, लेकिन उनके मन में यह भी था कि विमान में मौजूद बाकी लोगों को बचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि वह सबको मरने नहीं दे सकते थे।

यह बात उस क्षण की गंभीरता को दिखाती है। कॉकपिट में हुए हमले के बाद विमान का नियंत्रण प्रभावित हुआ और वह तेजी से नीचे की ओर जाने लगा। ऐसे समय में घायल पायलट के लिए दरवाजे तक पहुंचना और उसे खोलना बेहद कठिन था। इसके बावजूद स्मित ने कोशिश जारी रखी।

अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, विमान लगभग 14,000 फीट नीचे आया। स्मित ने गंभीर चोटों के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की, जिसके बाद यात्रियों और क्रू के सदस्यों ने हमलावर को काबू करने में मदद की। इसके बाद विमान में मौजूद फ्लाईदुबई के दूसरे पायलटों ने नियंत्रण संभाला और विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया।

दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट में क्या हुआ था?

यह घटना फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में हुई थी, जो दुबई से तेल अवीव जा रही थी। 30 सितंबर को उड़ान के दौरान कॉकपिट में पायलटों के बीच हिंसक घटना हुई। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, सह-पायलट ने कैप्टन स्मित मच्छर पर हमला किया और उन्हें चाकू से घायल कर दिया।

घटना के बाद विमान की ऊंचाई तेजी से कम होने लगी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विमान को निर्धारित गंतव्य के बजाय सऊदी अरब के तबुक की ओर मोड़ा गया। वहां विमान की सुरक्षित लैंडिंग कराई गई। रिपोर्टों के अनुसार, विमान में यात्रियों और क्रू सहित 170 से अधिक लोग सवार थे। अलग-अलग रिपोर्टों में कुल संख्या अलग बताई गई है, लेकिन विमान में मौजूद सभी लोगों के सुरक्षित बचने की पुष्टि की गई है।

कॉकपिट का दरवाजा खुलने के बाद यात्रियों और क्रू के सदस्यों ने हमलावर को काबू करने में मदद की। विमान में मौजूद दूसरे पायलटों ने नियंत्रण संभाला। इस तरह आपात स्थिति के बीच विमान को सुरक्षित उतारा जा सका।

तबुक में प्राथमिक इलाज, फिर अबू धाबी में उपचार

हमले में गंभीर रूप से घायल कैप्टन स्मित को शुरुआती इलाज के लिए सऊदी अरब के तबुक स्थित अस्पताल ले जाया गया था। बाद में उन्हें आगे के इलाज और स्वास्थ्य लाभ के लिए संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी में स्थानांतरित किया गया। प्रधानमंत्री से बातचीत के समय वह अस्पताल में भर्ती थे और उनका उपचार जारी था।

विदेश मंत्रालय की ओर से भी उनके स्वास्थ्य और मामले पर नजर रखे जाने की जानकारी दी गई। संयुक्त अरब अमीरात में भारतीय दूतावास और दुबई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में रहे। भारतीय राजनयिकों ने स्मित के परिवार से भी संपर्क किया और उन्हें आवश्यक सहायता का भरोसा दिया।

स्मित ने प्रधानमंत्री से बातचीत में कहा कि उन्हें ठीक होने में समय लग सकता है, लेकिन उन्हें अपनी रिकवरी को लेकर भरोसा है। उन्होंने इसे धीरे-धीरे पूरी होने वाली प्रक्रिया बताया और उम्मीद जताई कि वह पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगे।

मां से भी बात की प्रधानमंत्री ने

प्रधानमंत्री मोदी ने कैप्टन स्मित की मां गीताबेन से भी बातचीत की। उन्होंने परिवार के धैर्य और स्मित को मिले संस्कारों की सराहना की। बातचीत में प्रधानमंत्री ने परिवार को भरोसा दिलाया कि जरूरत पड़ने पर सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

स्मित ने बताया कि विदेश में रहने के बावजूद उनका परिवार भारतीय परंपराओं और मूल्यों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने छोटे बेटे के साथ नियमित रूप से हनुमान चालीसा पढ़ते हैं। उनके लिए यह पाठ कठिन समय में साहस और मानसिक संबल का माध्यम है।

इस बातचीत में प्रधानमंत्री ने स्मित के साहस के साथ-साथ उनके परिवार की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश उनके स्वस्थ होकर लौटने की प्रतीक्षा कर रहा है।

हमले के पीछे की वजह की जांच जारी

विमान में हुए हमले के पीछे सह-पायलट का उद्देश्य क्या था, इसकी जांच की जा रही है। शुरुआती रिपोर्टों में इसे विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कथित कोशिश से जोड़कर देखा गया है, लेकिन घटना के पीछे की पूरी वजह और परिस्थितियों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

इजरायली अधिकारियों और अन्य संबंधित एजेंसियों ने घटना को गंभीरता से लिया है। हमले के दौरान विमान के नियंत्रण पर असर पड़ा था और यात्रियों की सुरक्षा खतरे में आ गई थी। हालांकि, कॉकपिट का दरवाजा खुलने, यात्रियों और क्रू की मदद तथा दूसरे पायलटों के नियंत्रण संभालने से विमान को सुरक्षित उतारा जा सका।

सह-पायलट की पहचान और उसके कथित मकसद को लेकर सामने आ रही जानकारियों को जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। घटना से जुड़े तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि और जांच की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है।

पायलट की सूझबूझ और यात्रियों की मदद से टला बड़ा हादसा

कैप्टन स्मित मच्छर की प्रधानमंत्री से बातचीत ने विमान में हुए हमले के उन पलों को सामने रखा, जिनमें कुछ ही सेकंड में लिए गए फैसलों का महत्व था। स्मित ने घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की। दरवाजा खुलने के बाद यात्रियों और क्रू ने हमलावर को काबू करने में मदद की और दूसरे पायलटों ने विमान को सुरक्षित उतारा।

स्मित ने अपने बयान में बार-बार यह स्पष्ट किया कि इस घटना में अन्य लोगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण थी। उन्होंने इसे केवल अपनी बहादुरी की कहानी के रूप में पेश नहीं किया, बल्कि यात्रियों और क्रू के सहयोग को भी श्रेय दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी बहादुरी और सूझबूझ की सराहना की। वहीं, अस्पताल में उपचार करा रहे स्मित ने भरोसा जताया कि वह धीरे-धीरे स्वस्थ होंगे। उनके हनुमान चालीसा पढ़ने और आखिरी ताकत लगाकर दरवाजा खोलने की बात ने इस घटना को लेकर लोगों का ध्यान खींचा है। फिलहाल जांच जारी है और कैप्टन स्मित के पूरी तरह स्वस्थ होकर भारत लौटने का इंतजार किया जा रहा है।

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