‘चैट डिलीट होने के बाद कैसे पकड़े जाते हैं?’ केतन मर्डर केस में आरोपी की सर्च हिस्ट्री आई सामने

4

‘चैट डिलीट होने के बाद कैसे पकड़े जाते हैं?’ केतन मर्डर केस में आरोपी की सर्च हिस्ट्री आई सामने

महाराष्ट्र के पुणे जिले के लोहगढ़ किले में केतन अग्रवाल की मौत के मामले में पुलिस की चार्जशीट से कई अहम डिजिटल जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस का आरोप है कि केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित साथी चेतन चौधरी ने घटना से पहले हत्या की योजना बनाई थी। जांच में आरोपियों के मोबाइल फोन, ऑनलाइन सर्च, सोशल मीडिया चैट और कॉल रिकॉर्ड की पड़ताल की गई। इसी जांच के दौरान कथित तौर पर ऐसी सर्च हिस्ट्री भी मिली, जिसमें हत्या से पहले और केतन की मौत के बाद की गतिविधियों से जुड़े सवाल शामिल थे।

मामले में सामने आई जानकारी के मुताबिक, सिया ने केतन की मौत के बाद कथित तौर पर ChatGPT और अन्य ऑनलाइन माध्यमों पर यह जानने की कोशिश की कि शोक कैसे जताया जाए और परिवार के सामने दुखी कैसे दिखाई दिया जाए। पुलिस ने यह भी दावा किया है कि उसने केतन की मौत से पहले ChatGPT से उसकी मां को माफी मांगने वाला भावुक संदेश लिखने में मदद मांगी थी। ये बातें पुलिस की चार्जशीट और जांच से जुड़ी रिपोर्टों पर आधारित हैं। अदालत में आरोपों की सुनवाई और सबूतों का मूल्यांकन होना अभी बाकी है। (India Today, India Today)

क्या थी आरोपी की कथित सर्च हिस्ट्री?

पुणे पुलिस की चार्जशीट के अनुसार, केतन की मौत के बाद सिया ने ऑनलाइन यह जानने की कोशिश की कि किसी करीबी की मृत्यु पर किस तरह प्रतिक्रिया दी जाती है और परिवार के सामने शोक कैसे व्यक्त किया जाता है। जांचकर्ताओं का दावा है कि उसने यह भी खोजा कि ज्यादा दुखी या भावुक कैसे दिखाई दिया जा सकता है।

पुलिस के मुताबिक, केतन के परिवार के लोग जब लोहगढ़ किले के पास पहुंचे, तो उन्हें सिया के व्यवहार को लेकर संदेह हुआ। इसके बाद घर लौटने पर उसने कथित तौर पर इंटरनेट पर शोक जताने और दुखी दिखने से संबंधित जानकारी खोजी। पुलिस ने इन सर्च को डिजिटल सबूतों के रूप में चार्जशीट में शामिल किया है।

जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया कि सिया ने केतन की मौत से पहले ChatGPT की मदद से उसकी मां को भेजने के लिए माफी का संदेश तैयार करने की कोशिश की थी। पुलिस का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड से घटना से पहले और बाद की गतिविधियों को समझने में मदद मिली। हालांकि, किसी ऑनलाइन सर्च का अर्थ अपने-आप में अपराध की पुष्टि नहीं होता। उसकी अहमियत इस बात पर निर्भर करती है कि वह दूसरे सबूतों और घटनाक्रम से किस तरह जुड़ती है। (India Today)

पहले की घटनाओं और मामलों को भी किया गया था सर्च

चार्जशीट के अनुसार, पुलिस को आरोपियों की कथित ऑनलाइन गतिविधियों में लोनावला और आसपास के इलाकों में खाई या ऊंचाई से गिरने की घटनाओं से जुड़ी जानकारी भी मिली। जांचकर्ताओं का दावा है कि आरोपियों ने पहले हुई कुछ मौतों और चर्चित आपराधिक मामलों के बारे में जानकारी जुटाई थी।

रिपोर्टों के मुताबिक, सर्च में मेघालय के राजा रघुवंशी हत्याकांड और लोहगढ़ क्षेत्र में पहले हुई एक युवती की मौत से संबंधित जानकारी शामिल थी। पुलिस ने यह भी दावा किया कि आरोपियों ने यह समझने की कोशिश की कि ऐसे मामलों में जांच किस तरह आगे बढ़ती है और पुलिस को कौन-कौन से सुराग मिलते हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चेतन की ऑनलाइन सर्च में लोहगढ़ में एक कानून की छात्रा की मौत और मशरूम से जुड़ी विषाक्तता की जानकारी भी सामने आई। पुलिस इन सर्च को कथित योजना और आरोपियों की गतिविधियों के संदर्भ में देख रही है। लेकिन इनका वास्तविक उद्देश्य क्या था, इसका अंतिम निर्धारण अदालत में पेश किए गए सबूतों और बचाव पक्ष की दलीलों के बाद ही होगा। (Indian Express, India Today)

डिलीट चैट और सर्च हिस्ट्री पुलिस तक कैसे पहुंची?

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर मोबाइल से चैट डिलीट कर दी जाए, तो पुलिस उसे कैसे हासिल कर सकती है? डिजिटल फॉरेंसिक जांच में किसी फोन से जानकारी मिटा देना हमेशा यह सुनिश्चित नहीं करता कि वह रिकॉर्ड पूरी तरह और हर जगह से समाप्त हो गया है।

किसी मोबाइल में संदेश डिलीट करने के बाद भी उससे जुड़ा कुछ डेटा डिवाइस के स्टोरेज, ऐप के डेटाबेस, बैकअप या दूसरे तकनीकी रिकॉर्ड में मौजूद रह सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि कौन-सा ऐप इस्तेमाल हुआ, फोन का ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है, डेटा किस तरह मिटाया गया और जांच के समय डिवाइस की स्थिति क्या थी।

पुलिस जांच में जब्त मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा सकता है। विशेषज्ञ उपलब्ध तकनीकी तरीकों से डिलीट किए गए रिकॉर्ड, ऐप डेटा, फाइलों, मेटाडेटा और दूसरे डिजिटल निशानों की जांच करते हैं। हालांकि, हर डिलीट किया गया संदेश वापस मिल जाए, इसकी गारंटी नहीं होती। डेटा ओवरराइट हो चुका हो या एन्क्रिप्शन और ऐप की तकनीकी सीमाएं हों, तो रिकवरी मुश्किल या असंभव भी हो सकती है।

केतन मामले में पुलिस ने पहले बताया था कि सिया और चेतन ने घटना से पहले और बाद की चैट डिलीट की थीं। दोनों के फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए थे। बाद की चार्जशीट से जुड़ी रिपोर्टों में पुलिस द्वारा डिजिटल रिकॉर्ड और चैट हासिल किए जाने की बात कही गई है। जांचकर्ताओं ने सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म से मिले रिकॉर्ड को भी केस का हिस्सा बनाया है। (NDTV, Indian Express)

फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट का भी आरोप

पुलिस की चार्जशीट में एक कथित फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट का भी उल्लेख है। जांचकर्ताओं का दावा है कि आरोपियों ने ‘माही’ नाम से एक अकाउंट बनाया था, जिसके जरिए केतन से संपर्क किया गया। पुलिस के अनुसार, इस अकाउंट के माध्यम से केतन को 18 जून को लोहगढ़ किले आने के लिए मनाया गया।

जांच में यह भी दावा किया गया कि अकाउंट और उससे जुड़ी चैट हटाए जाने के बावजूद तकनीकी जांच के दौरान उनसे संबंधित रिकॉर्ड हासिल किए गए। पुलिस का आरोप है कि डिजिटल बातचीत का इस्तेमाल केतन को किले तक लाने के लिए किया गया था। यह दावा चार्जशीट का हिस्सा है और अदालत में इसकी जांच होगी।

पुलिस ने इस मामले में मोबाइल डेटा, चैट, कॉल रिकॉर्ड, तस्वीरों, सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयानों को एक साथ रखकर घटनाक्रम तैयार करने की कोशिश की है। डिजिटल सबूतों का महत्व इसलिए भी है क्योंकि घटना के समय की पूरी जानकारी केवल प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से उपलब्ध नहीं हो सकती। (Indian Express)

18 जून को लोहगढ़ किले में क्या हुआ था?

25 वर्षीय केतन अग्रवाल की 18 जून 2026 को पुणे जिले के लोहगढ़ किले में ऊंचाई से गिरने के बाद मौत हो गई थी। शुरुआती तौर पर इसे दुर्घटना माना गया था। बाद में पुलिस ने जांच के दौरान हत्या की साजिश का आरोप लगाया और सिया गोयल तथा चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया।

पुलिस का आरोप है कि केतन को किले के एक सुनसान स्थान पर ले जाया गया और वहां से नीचे धकेला गया। जांचकर्ताओं के अनुसार, सिया और चेतन के साथ रितेश हांगे की भूमिका भी कथित साजिश में सामने आई। पुलिस ने सितंबर 2026 में तीनों के खिलाफ 5,053 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की।

चार्जशीट में पुलिस ने कथित योजना, डिजिटल बातचीत, फोन रिकॉर्ड, तस्वीरों और गवाहों के बयानों का उल्लेख किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पहले भी किले के इलाके का दौरा किया था और घटना से पहले योजना पर चर्चा की थी। ये सभी अभियोजन पक्ष के आरोप हैं। अदालत में आरोपियों को अपना पक्ष रखने और सबूतों को चुनौती देने का अधिकार है। (India Today)

5,053 पन्नों की चार्जशीट में क्या-क्या शामिल?

पुलिस ने चार्जशीट में कथित साजिश और घटना से पहले तथा बाद की गतिविधियों का विस्तृत विवरण दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, इसमें गवाहों के बयान, मोबाइल फोन डेटा, सोशल मीडिया चैट, कॉल रिकॉर्ड, तस्वीरें और सीसीटीवी फुटेज जैसे सबूत शामिल हैं।

जांचकर्ताओं ने कथित तौर पर आरोपियों के बीच हुई बातचीत और उनके ऑनलाइन व्यवहार को भी घटनाक्रम से जोड़ने की कोशिश की है। पुलिस का दावा है कि इन डिजिटल रिकॉर्ड से आरोपियों के संपर्क, योजना और घटना के बाद के व्यवहार को समझने में मदद मिली।

हालांकि, चार्जशीट दाखिल होने का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं है। यह अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में पेश किया गया मामला और उपलब्ध सबूतों का संकलन है। अब अदालत यह तय करेगी कि किन आरोपों पर मुकदमा चलेगा और सुनवाई के दौरान कौन-से सबूत स्वीकार्य तथा विश्वसनीय माने जाएंगे।

क्या डिलीट चैट अपने-आप में अपराध साबित करती है?

किसी व्यक्ति द्वारा चैट डिलीट करना अपने-आप में हत्या या किसी अन्य अपराध का प्रमाण नहीं माना जा सकता। लोग निजी कारणों से भी संदेश हटाते हैं। लेकिन यदि जांच में डिलीट किए गए रिकॉर्ड के साथ अन्य परिस्थितिजन्य सबूत मिलते हैं, तो पुलिस उन्हें पूरे घटनाक्रम के संदर्भ में पेश कर सकती है।

इस मामले में पुलिस का दावा है कि चैट और सर्च हिस्ट्री को कथित योजना, फर्जी अकाउंट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सबूतों के साथ देखा गया। बचाव पक्ष को इन सबूतों की विश्वसनीयता, उनकी प्राप्ति की प्रक्रिया और उनके अर्थ को अदालत में चुनौती देने का अवसर मिलेगा।

इसलिए ‘चैट डिलीट होने के बाद कैसे पकड़े जाते हैं’ का जवाब केवल इतना नहीं है कि पुलिस हर डिलीट संदेश वापस ला सकती है। असल में डिजिटल जांच कई स्रोतों से उपलब्ध रिकॉर्ड और तकनीकी निशानों को जोड़कर की जाती है। केतन अग्रवाल मामले में भी पुलिस ने कथित डिलीट चैट, ऑनलाइन सर्च और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को अपनी चार्जशीट का हिस्सा बनाया है। अब इन सबूतों की कानूनी अहमियत अदालत में तय होगी।

Share it :

End