
राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत, पुश्तैनी संपत्ति बेचकर बकाया चुकाने का प्रस्ताव, बोले- 1200 थिएटर में रिलीज होनी थी फिल्म
बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव से जुड़े करीब डेढ़ दशक पुराने चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को हुई सुनवाई कई मायनों में अहम रही। अदालत ने अभिनेता को फिलहाल कुछ राहत दी है, लेकिन साथ ही बकाया रकम चुकाने के लिए स्पष्ट व्यवस्था करने की शर्त भी रखी है। यह मामला वर्ष 2010 में उनकी फिल्म ‘अता-पता लापता’ के निर्माण के लिए लिए गए करीब 5 करोड़ रुपये के वित्तीय सहयोग से जुड़ा है। बाद में रकम लौटाने के लिए दिए गए चेक कथित तौर पर बाउंस हो गए और मामला अदालतों तक पहुंच गया।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राजपाल यादव खुद मौजूद रहे। उन्होंने अदालत के सामने पिछले कई वर्षों के दौरान हुए आर्थिक और पेशेवर नुकसान का जिक्र किया। अभिनेता ने बताया कि जिस फिल्म के लिए आर्थिक मदद ली गई थी, वह विवादों और कानूनी समस्याओं के कारण सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हो सकी। उनके मुताबिक फिल्म को लगभग 1200 थिएटरों में रिलीज किया जाना था, लेकिन आखिरकार एक भी थिएटर में रिलीज नहीं हो पाई। उन्होंने दावा किया कि इससे उन्हें लगभग 17 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
सुनवाई के दौरान अदालत ने राजपाल यादव की ओर से बकाया राशि के भुगतान की दिशा में किए गए इंतजामों को भी ध्यान में रखा। अभिनेता की तरफ से 1.15 करोड़ रुपये के डिमांड ड्राफ्ट की व्यवस्था की गई थी। इसके अलावा उनकी पुश्तैनी संपत्ति के संभावित खरीदार की ओर से 85 लाख रुपये उपलब्ध कराने की बात कही गई। अदालत ने इस प्रस्ताव को रिकॉर्ड पर लिया और भुगतान की आगे की प्रक्रिया तय करने की बात कही।
15 साल से ज्यादा पुराना है विवाद
राजपाल यादव का यह कानूनी विवाद कोई नया मामला नहीं है। इसकी शुरुआत लगभग 2010 में हुई थी, जब अभिनेता अपनी फिल्म ‘अता-पता लापता’ बना रहे थे। शिकायतकर्ता कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का आरोप है कि उसने फिल्म के निर्माण के लिए राजपाल यादव को करीब 5 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी थी। बाद में इस रकम की वापसी को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हुआ।
शिकायतकर्ता के अनुसार, वर्ष 2012 में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता हुआ था। इसमें राजपाल यादव, उनकी पत्नी और उनकी कंपनी की ओर से ब्याज सहित करीब 11 करोड़ रुपये लौटाने की सहमति का दावा किया गया। इसके बाद 2013 में रकम के भुगतान के लिए सात चेक दिए गए। प्रत्येक चेक करीब 1.05 करोड़ रुपये का बताया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि ये सभी चेक बाउंस हो गए।
चेक बाउंस होने के बाद कंपनी ने कानूनी रास्ता अपनाया। मामला निचली अदालत से होते हुए दिल्ली हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। इतने लंबे समय तक चलने के कारण यह मामला राजपाल यादव के करियर के साथ भी जुड़ गया है।
फिल्म ‘अता-पता लापता’ बनी विवाद की वजह
‘अता-पता लापता’ राजपाल यादव के लिए खास फिल्म थी क्योंकि उन्होंने इसमें अभिनय के साथ निर्देशन की जिम्मेदारी भी संभाली थी। फिल्म को लेकर अभिनेता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि इसके निर्माण और रिलीज से जुड़ी परिस्थितियों ने उनके करियर और आर्थिक स्थिति पर बड़ा असर डाला।
बुधवार की सुनवाई के दौरान उन्होंने अदालत को बताया कि फिल्म के कारण उन्हें लगभग 17 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म के लिए जिस वित्तीय विवाद ने जन्म लिया, उसने बाद में उनकी कमाई और पेशेवर छवि को प्रभावित किया।
राजपाल यादव के मुताबिक फिल्म को बड़े स्तर पर रिलीज करने की योजना थी। उन्होंने अदालत में कहा कि इसे करीब 1200 सिनेमाघरों में रिलीज किया जाना था। लेकिन विवाद के चलते फिल्म किसी भी थिएटर में रिलीज नहीं हो सकी। यह दावा अभिनेता ने खुद सुनवाई के दौरान किया।
फिल्म की रिलीज न हो पाने को लेकर राजपाल यादव ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई और फिल्म रुक गई। उनके अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम का असर उनकी ब्रांड वैल्यू और काम पर पड़ा।
राजपाल यादव ने अदालत में खुद रखी अपनी बात
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान राजपाल यादव ने खुद जजों के सामने अपनी स्थिति बताई। उन्होंने अपने लंबे करियर और पिछले कई वर्षों में हुए नुकसान का उल्लेख किया।
अभिनेता ने बताया कि उन्होंने अपने करियर में करीब 200 से 250 फिल्मों में काम किया है। उन्होंने पिछले 13 वर्षों में हुए कथित आर्थिक नुकसान का भी जिक्र किया। राजपाल ने कहा कि ‘अता-पता लापता’ के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा और वह लगातार इस कानूनी विवाद में फंसे रहे।
उन्होंने अदालत में यह भी कहा कि इस विवाद की वजह से उनकी पेशेवर छवि प्रभावित हुई। उनके अनुसार, फिल्म के रुकने और विवाद के सार्वजनिक होने से उनके काम पर असर पड़ा।
राजपाल यादव की बात सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बातचीत को कुछ हल्का करते हुए अभिनेता से कहा कि वह अच्छी फिल्म बनाकर लोगों का मनोरंजन करें। अदालत की ओर से यह भी कहा गया कि इससे उनकी छवि दोबारा बनाने में मदद मिल सकती है।
‘सोलह सावन झेल के’ नाम से फिल्म बनाने की बात
सुनवाई के दौरान राजपाल यादव ने अपने अंदाज में अदालत को जवाब भी दिया। उन्होंने कहा कि 2010 से 2026 तक उनके साथ जो कुछ हुआ, उसके आधार पर उन्होंने एक फिल्म का नाम सोच रखा है। उन्होंने इसका नाम ‘सोलह सावन झेल के’ बताया।
इस बातचीत के दौरान अदालत का माहौल कुछ हल्का हुआ। हालांकि मामला गंभीर कानूनी विवाद से जुड़ा है और अदालत ने भुगतान की शर्तों को लेकर अपना रुख स्पष्ट रखा।
राजपाल यादव ने अदालत में जिस तरह अपने अनुभवों का उल्लेख किया, उससे यह भी सामने आया कि अभिनेता इस लंबे विवाद को अपने जीवन और करियर के एक बड़े अध्याय के रूप में देखते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दी राहत?
सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव की ओर से बकाया रकम चुकाने के लिए किए जा रहे इंतजामों को ध्यान में रखते हुए उन्हें फिलहाल अंतरिम राहत दी है। हालांकि अदालत ने 2 करोड़ रुपये जमा करने की शर्त को पूरी तरह खत्म नहीं किया।
राजपाल यादव की ओर से 1.15 करोड़ रुपये के डिमांड ड्राफ्ट अदालत की रजिस्ट्री में जमा करने की व्यवस्था की गई। बाकी 85 लाख रुपये एक संभावित खरीदार की ओर से दिए जाने की बात कही गई है। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार संभावित खरीदार अदालत में मौजूद था और 85 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा करने के लिए तैयार था।
अदालत ने इस व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए राजपाल यादव को फिलहाल राहत दी। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर के लिए रखी गई है।
यह राहत अंतिम रूप से मामले का निपटारा नहीं है। भुगतान और कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
पुश्तैनी संपत्ति बेचकर भुगतान की तैयारी
राजपाल यादव की ओर से अदालत में बताया गया कि बकाया राशि चुकाने के लिए वह अपनी पुश्तैनी संपत्ति बेचने की प्रक्रिया में हैं। संभावित खरीदार की ओर से 85 लाख रुपये देने की बात कही गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रस्ताव को सुनवाई के दौरान स्वीकार किया और भुगतान की व्यवस्था को रिकॉर्ड पर लिया। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिकायतकर्ता कंपनी को बकाया रकम की वसूली हो सके।
राजपाल यादव की ओर से यह भी संकेत दिया गया कि वह अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार रकम जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। इस व्यवस्था के पूरा होने पर आगे की राशि के भुगतान का कार्यक्रम तय किया जा सकता है।
पहले कोर्ट ने दी थी कड़ी चेतावनी
यह वही मामला है जिसमें कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव के प्रति काफी सख्त रुख अपनाया था। 5 अक्टूबर की सुनवाई में अदालत ने पाया था कि अभिनेता ने पहले दिए गए निर्देश के मुताबिक पूरी राशि जमा नहीं की थी।
उस समय अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि राजपाल यादव को अपने वादे का पालन करना चाहिए। अदालत ने उन्हें भुगतान के लिए अंतिम मौका देने की बात कही थी।
अदालत के सामने उस समय राजपाल यादव की तरफ से केवल 50 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट की जानकारी दी गई थी, जबकि इससे पहले 2 करोड़ रुपये जमा करने की बात कही गई थी। इस पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया और जेल जाने की संभावना की चेतावनी भी दी थी।
बुधवार की सुनवाई में स्थिति कुछ बदली क्योंकि अभिनेता की ओर से 1.15 करोड़ रुपये के भुगतान की व्यवस्था सामने आई और बाकी 85 लाख रुपये के लिए संपत्ति बेचने का प्रस्ताव अदालत के सामने रखा गया।
दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनाई थी तीन महीने की सजा
इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट पहले ही राजपाल यादव की सजा को बरकरार रख चुका है। 10 जुलाई 2026 को हाई कोर्ट ने चेक बाउंस से जुड़े मामलों में अभिनेता को तीन महीने की जेल की सजा सुनाई थी।
हाई कोर्ट का फैसला उन मामलों से संबंधित था जिनमें सात चेक के बाउंस होने का विवाद था। अदालत ने शिकायतकर्ता कंपनी को रकम देने का निर्देश भी दिया था।
रिपोर्टों के मुताबिक, निचली अदालत ने पहले राजपाल यादव को छह महीने की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में तीन महीने कर दिया गया था। इसके बाद मामला आगे की न्यायिक प्रक्रिया से गुजरता हुआ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
राजपाल यादव और उनकी पत्नी ने पुराने फैसलों को चुनौती दी थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने अपील दाखिल करने में हुई लंबी देरी को लेकर भी अलग से विचार किया था।
पहले ही बड़ी रकम का भुगतान किया जा चुका है
इस मामले में अदालत के सामने यह जानकारी भी आई कि राजपाल यादव पहले ही करीब 2 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुके हैं। हाई कोर्ट के आदेश में इस राशि को बाकी देनदारी में समायोजित किए जाने की बात सामने आई थी।
लेकिन शिकायतकर्ता कंपनी का कहना है कि अभी भी बड़ी रकम बकाया है। यही कारण है कि भुगतान को लेकर अदालत में लगातार सुनवाई हो रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी यह स्पष्ट किया है कि मामले को केवल सजा के सवाल के रूप में नहीं देखा जा सकता। शिकायतकर्ता की रकम की वसूली भी महत्वपूर्ण है। इसी वजह से अदालत भुगतान की व्यवस्था पर ध्यान दे रही है।
शिकायतकर्ता कंपनी का क्या कहना है?
मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का कहना है कि उसने वर्ष 2010 में फिल्म के लिए राजपाल यादव को आर्थिक सहायता दी थी। कंपनी का दावा है कि बाद में भुगतान के लिए जो चेक दिए गए, वे बाउंस हो गए।
कंपनी की ओर से अदालत में पेश वकील ने पहले की सुनवाई में कहा था कि उन्हें केवल अपनी रकम वापस चाहिए। उनका पक्ष रहा है कि राजपाल यादव ने कई बार भुगतान को लेकर आश्वासन दिए, लेकिन वह पूरी तरह पूरा नहीं हुआ।
सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में शिकायतकर्ता की रकम की वसूली को महत्वपूर्ण माना है। अदालत ने राजपाल यादव को भुगतान की दिशा में ठोस कदम उठाने का अवसर दिया है।
भाई श्रीपाल यादव ने भी जताई उम्मीद
राजपाल यादव के भाई श्रीपाल यादव ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए लंबे समय से चले आ रहे विवाद के खत्म होने की उम्मीद जताई है। उनका कहना है कि लगभग 15 साल से चली आ रही परेशानी के बाद अब परिवार की बात सुनी जा रही है।
परिवार की तरफ से यह उम्मीद भी जताई गई है कि लंबे समय से चले आ रहे विवाद के कारण जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई का रास्ता अब निकल सकता है। हालांकि अदालत की कार्यवाही अभी पूरी नहीं हुई है और भुगतान तथा अपील से जुड़े मुद्दे आगे भी सुनवाई का हिस्सा रहेंगे।
श्रीपाल यादव के बयान में परिवार की उस परेशानी की झलक भी दिखाई देती है जो इस लंबे कानूनी विवाद के दौरान बनी रही। फिल्म की रिलीज रुकने और वित्तीय विवाद के चलते राजपाल यादव के करियर पर असर पड़ने का दावा खुद अभिनेता ने भी अदालत में किया है।
फिल्म की रिलीज क्यों नहीं हो पाई?
‘अता-पता लापता’ राजपाल यादव की महत्वाकांक्षी परियोजना थी। अभिनेता ने इसे निर्देशित भी किया था। लेकिन फिल्म के निर्माण और वित्तीय विवाद के बीच मामला कानूनी लड़ाई में बदल गया।
राजपाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि फिल्म को 1200 सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना थी। उनके अनुसार, विवाद के कारण फिल्म एक भी थिएटर में रिलीज नहीं हो सकी।
अभिनेता ने यह भी दावा किया कि फिल्म के कारण उन्हें करीब 17 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। हालांकि फिल्म के निर्माण की वास्तविक लागत, संभावित कमाई और नुकसान से जुड़े आंकड़े अभिनेता द्वारा अदालत में बताए गए दावे के रूप में ही देखे जाने चाहिए।
कानूनी विवाद और फिल्म की रिलीज के बीच संबंध को लेकर भी अलग-अलग पक्ष हो सकते हैं। अदालत में फिलहाल मुख्य मुद्दा वित्तीय देनदारी और चेक बाउंस से जुड़े मामलों का है।
16 साल की कहानी को फिल्म में बदलना चाहते हैं राजपाल?
सुनवाई के दौरान ‘सोलह सावन झेल के’ नाम का उल्लेख इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि राजपाल यादव ने इसे 2010 से 2026 के बीच उनके साथ हुई घटनाओं से जोड़कर बताया।
यह स्पष्ट नहीं है कि ऐसी फिल्म वास्तव में निर्माण के चरण में है या यह अभिनेता द्वारा अदालत में कही गई एक कल्पनात्मक बात थी। फिलहाल इसे उनकी ओर से व्यक्त एक विचार के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
अदालत में हुई बातचीत ने मामले के गंभीर कानूनी पक्ष के बीच एक मानवीय और हल्का क्षण जरूर पैदा किया। मुख्य न्यायाधीश ने भी अभिनेता को फिल्म बनाने और लोगों का मनोरंजन करने की सलाह दी।
आगे क्या होगा?
अब इस मामले में अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होनी है। तब तक राजपाल यादव की ओर से भुगतान की व्यवस्था को आगे बढ़ाने और बकाया राशि चुकाने के लिए तय प्रक्रिया पर नजर रहेगी।
सबसे अहम बात यह होगी कि 85 लाख रुपये के भुगतान की व्यवस्था पूरी होती है या नहीं और उसके बाद बाकी बकाया रकम के लिए अदालत किस तरह का कार्यक्रम तय करती है।
राजपाल यादव के लिए यह मामला केवल तीन महीने की सजा से जुड़ा मुद्दा नहीं है। यह उनके करियर, वित्तीय दायित्वों और लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई से भी जुड़ा हुआ है। दूसरी तरफ शिकायतकर्ता कंपनी का मुख्य उद्देश्य अपनी बकाया रकम की वसूली है।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अभिनेता को भुगतान की व्यवस्था करने का अवसर दिया है, लेकिन मामले का अंतिम समाधान अभी बाकी है। अदालत ने यह भी संकेत दिया है कि राहत का आधार भुगतान की दिशा में वास्तविक और ठोस कदम हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि 2010 में शुरू हुआ एक फिल्मी प्रोजेक्ट आखिरकार 15 साल से ज्यादा लंबे कानूनी विवाद में बदल गया। ‘अता-पता लापता’ की रिलीज, वित्तीय समझौते, चेक बाउंस, निचली अदालत के फैसले, दिल्ली हाई कोर्ट की सजा और अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, इस मामले ने कई कानूनी और व्यक्तिगत मोड़ देखे हैं।
बुधवार की सुनवाई में राजपाल यादव ने अपने आर्थिक और पेशेवर नुकसान की बात अदालत के सामने रखी, जबकि अदालत ने उन्हें आगे बढ़कर बकाया चुकाने का रास्ता अपनाने का अवसर दिया। पुश्तैनी संपत्ति बेचने का प्रस्ताव और 1.15 करोड़ रुपये के डिमांड ड्राफ्ट की व्यवस्था इसी दिशा में उठाया गया कदम है।
अब सबकी नजर अगली सुनवाई पर होगी, जहां अदालत भुगतान की प्रगति और राजपाल यादव की अपील से जुड़े आगे के कदमों पर विचार करेगी। फिलहाल उन्हें मिली राहत सशर्त है और अंतिम कानूनी स्थिति आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।