मध्य प्रदेश में गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना की धूम, सबसे ज्यादा दूध देने वाले पशुपालकों को मिलेंगे 1 लाख रुपये; 208 गांवों में प्रतियोगिता

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मध्य प्रदेश में गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना की धूम, सबसे ज्यादा दूध देने वाले पशुपालकों को मिलेंगे 1 लाख रुपये; 208 गांवों में प्रतियोगिता

मध्य प्रदेश में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार की ओर से एक विशेष पहल की गई है। प्रदेश में पहली बार गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रतियोगिता के माध्यम से उन पशुपालकों को सम्मानित और पुरस्कृत किया जाएगा, जिनकी गायें उत्कृष्ट दुग्ध उत्पादन करती हैं। प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाले पशुपालकों को एक लाख रुपये तक की पुरस्कार राशि दी जाएगी। इस योजना का उद्देश्य केवल दूध उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि देशी नस्ल की गायों का संरक्षण करना और ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को एक मजबूत आजीविका के रूप में विकसित करना भी है।

इस प्रतियोगिता में प्रदेश के चयनित 208 वृंदावन ग्रामों को शामिल किया गया है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम 27 अक्टूबर 2026 को शुरू हुआ था और 31 अक्टूबर 2026 को इसका अंतिम दिन निर्धारित किया गया है। यानी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के इच्छुक पशुपालकों के पास भागीदारी के लिए सीमित समय बचा है। सरकार की इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन करने वाले लोगों के बीच उत्साह देखने को मिल रहा है। खास बात यह है कि प्रतियोगिता में किसी एक विशेष वर्ग के पशुपालकों को ही अवसर नहीं दिया गया है, बल्कि सभी वर्गों के पशुपालक इसमें भाग ले सकते हैं।

पहली बार 208 वृंदावन ग्रामों में हो रही प्रतियोगिता

मध्य प्रदेश सरकार की इस योजना के तहत पहले चरण में प्रदेश के 208 चयनित वृंदावन ग्रामों में प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। इन गांवों को दुग्ध उत्पादन और देशी गोवंश के संरक्षण के आदर्श केंद्रों के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। प्रतियोगिता के आयोजन के पीछे यह विचार है कि ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध पशुधन की क्षमता को बेहतर तरीके से पहचाना जाए और अच्छे पशुपालन के तरीकों को प्रोत्साहित किया जाए।

ग्रामीण भारत में खेती के साथ पशुपालन लंबे समय से आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन रहा है। कई परिवार खेती के अतिरिक्त गाय और भैंस पालकर अपनी आमदनी बढ़ाते हैं। दूध की बिक्री से मिलने वाली नियमित आय परिवारों को आर्थिक सहारा देती है। ऐसे में यदि पशुपालकों को बेहतर नस्ल, उचित देखभाल और वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए, तो उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार प्रतियोगिता इसी दिशा में एक प्रयास है। इसके जरिए उन पशुपालकों की पहचान की जाएगी, जिनकी गायें बेहतर दुग्ध उत्पादन कर रही हैं। प्रतियोगिता में प्राप्त परिणामों के आधार पर विजेताओं का चयन किया जाएगा और उन्हें निर्धारित पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी।

पहले साल इस प्रतियोगिता को 208 वृंदावन ग्रामों तक सीमित रखा गया है। इस चरण से प्राप्त अनुभव के आधार पर आने वाले वर्षों में इसे प्रदेश के अन्य विकासखंडों तक विस्तारित करने की योजना बनाई गई है।

पहले स्थान पर एक लाख, दूसरे पर 50 हजार और तीसरे पर 25 हजार रुपये

इस प्रतियोगिता का सबसे आकर्षक पहलू इसमें दी जाने वाली पुरस्कार राशि है। उत्कृष्ट दुग्ध उत्पादन करने वाले पशुपालकों को उनके प्रदर्शन के आधार पर तीन प्रमुख श्रेणियों में पुरस्कृत किया जाएगा।

प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले पशुपालक को एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी। दूसरे स्थान पर रहने वाले पशुपालक को 50 हजार रुपये और तीसरे स्थान पर आने वाले पशुपालक को 25 हजार रुपये प्रदान किए जाएंगे।

इन पुरस्कारों का उद्देश्य पशुपालकों को केवल आर्थिक लाभ देना नहीं है, बल्कि उन्हें बेहतर पशुपालन के लिए प्रेरित करना भी है। जब किसी गांव में एक पशुपालक को उसके अच्छे प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया जाता है, तो दूसरे पशुपालकों को भी अपने पशुओं की देखभाल, पोषण और नस्ल सुधार पर ध्यान देने की प्रेरणा मिल सकती है।

प्रतियोगिता में पुरस्कार पाने के लिए केवल पशु पालना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि निर्धारित मापदंडों के अनुसार दुग्ध उत्पादन के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके आधार पर प्रतियोगिता के परिणाम तैयार होंगे।

इस प्रकार की प्रतियोगिता गांवों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का वातावरण बनाने में भी मदद कर सकती है। पशुपालक एक-दूसरे के अनुभवों से सीख सकेंगे और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए बेहतर तरीकों को अपनाने की दिशा में प्रयास कर सकेंगे।

कुल 624 पुरस्कारों पर खर्च होंगे लगभग 3.64 करोड़ रुपये

पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने इस प्रतियोगिता के लिए कुल 624 पुरस्कार निर्धारित किए हैं। इन पुरस्कारों के माध्यम से उत्कृष्ट दुग्ध उत्पादन करने वाले पशुपालकों को लगभग 3 करोड़ 64 लाख रुपये की राशि वितरित की जाएगी।

यह राशि प्रदेश में पशुपालन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए निर्धारित की गई है। योजना के माध्यम से बड़ी संख्या में पशुपालकों को उनके प्रदर्शन के आधार पर पहचान और प्रोत्साहन देने की व्यवस्था की गई है।

624 पुरस्कार निर्धारित किए जाने से स्पष्ट होता है कि यह पहल केवल कुछ चुनिंदा पशुपालकों तक सीमित रखने के बजाय व्यापक स्तर पर प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

हालांकि, पुरस्कार प्राप्त करने के लिए पशुपालकों को निर्धारित नियमों और मूल्यांकन प्रक्रिया का पालन करना होगा। प्रतियोगिता में प्राप्त आवेदनों का परीक्षण किया जाएगा और संबंधित समितियां उपलब्ध जानकारी का सत्यापन करने के बाद विजेताओं के नामों को अंतिम रूप देंगी।

इस योजना में पुरस्कार राशि के उपयोग को लेकर भी विशेष प्रावधान किया गया है। पुरस्कार के रूप में मिलने वाली राशि का शत-प्रतिशत उपयोग देशी गोवंश की खरीद, संरक्षण और संवर्धन के लिए ही किया जा सकेगा। इसका अर्थ है कि पुरस्कार की राशि को योजना के मूल उद्देश्य से जोड़कर रखा गया है, ताकि इससे देशी गायों के पालन को वास्तविक प्रोत्साहन मिल सके।

देशी नस्ल की गायों के संरक्षण पर विशेष ध्यान

गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार प्रतियोगिता का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य देशी नस्ल की गायों को संरक्षित करना और उनकी उपयोगिता को बढ़ावा देना है। योजना के तहत गिर, साहीवाल, थारपारकर, मालवी और निवाड़ी सहित अन्य उन्नत अधिसूचित स्वदेशी नस्लों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

भारत में अलग-अलग भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों के अनुसार कई प्रकार की देशी गोवंश नस्लें पाई जाती हैं। इन नस्लों का संरक्षण पशुधन की विविधता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। देशी नस्लों की पहचान, उनके प्रजनन और उनके पालन को प्रोत्साहित करने से पारंपरिक पशुधन संसाधनों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

मध्य प्रदेश में भी कई स्थानीय और अन्य स्वदेशी नस्लों के पशुपालन की परंपरा रही है। मालवी और निवाड़ी जैसी नस्लें प्रदेश के पशुधन संसाधनों से जुड़ी हुई हैं। इसके अलावा गिर, साहीवाल और थारपारकर जैसी नस्लें भी भारतीय पशुपालन क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखती हैं।

योजना के अंतर्गत इन नस्लों के संरक्षण और संवर्धन पर ध्यान देने का उद्देश्य पशुपालकों को देशी गोवंश के महत्व से जोड़ना है। इसके लिए केवल पुरस्कार देना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पशुओं के उचित रखरखाव, संतुलित आहार, स्वास्थ्य देखभाल और प्रजनन संबंधी बेहतर व्यवस्थाओं को भी महत्व देना होगा।

देशी नस्लों के संरक्षण से जुड़ी ऐसी पहल ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक पशुपालन ज्ञान को आगे बढ़ाने में भी सहायक हो सकती है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और पशुपालकों के अनुभवों को बेहतर प्रबंधन के साथ जोड़कर पशुधन क्षेत्र को मजबूत किया जा सकता है।

पशुपालकों की आय बढ़ाना है योजना का प्रमुख लक्ष्य

मध्य प्रदेश सरकार की इस पहल का एक बड़ा उद्देश्य पशुपालकों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाना है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवारों के लिए दूध उत्पादन नियमित आमदनी का माध्यम होता है। यदि पशुपालक बेहतर उत्पादकता वाली गायों का पालन करते हैं, तो उन्हें दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में अधिक अवसर मिल सकते हैं।

दूध उत्पादन पर पशु की नस्ल के साथ-साथ उसके स्वास्थ्य, खानपान, आवास और देखभाल का भी प्रभाव पड़ता है। इसलिए पशुपालन को केवल पशु खरीदने और दूध बेचने तक सीमित नहीं समझा जा सकता। इसके लिए नियमित देखभाल और सही प्रबंधन की आवश्यकता होती है।

प्रतियोगिता के माध्यम से उत्कृष्ट दुग्ध उत्पादन करने वाले पशुपालकों को सम्मानित करने से गांवों में इस व्यवसाय के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार हो सकता है। इससे युवा और अन्य ग्रामीण परिवार भी पशुपालन को आय के एक संभावित साधन के रूप में देखने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।

सरकार की योजना में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया है। दूध उत्पादन से जुड़े कार्यों में पशुपालकों के साथ-साथ दूध संग्रह, परिवहन, प्रसंस्करण और बिक्री जैसी गतिविधियां भी महत्वपूर्ण होती हैं। इन गतिविधियों के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना रहती है।

हालांकि, पशुपालन से होने वाली आय को बढ़ाने के लिए पशुओं की देखभाल के साथ बाजार तक पहुंच और दूध के उचित मूल्य जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना आवश्यक है। प्रतियोगिता इस दिशा में पशुपालकों को प्रोत्साहित करने वाली एक पहल के रूप में देखी जा रही है।

मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना के अंतर्गत मिली स्वीकृति

गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना को मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना के अंतर्गत लागू करने की स्वीकृति मिल चुकी है। इसके माध्यम से राज्य में पशुपालन से जुड़ी गतिविधियों को प्रोत्साहन देने और देशी गोवंश के संरक्षण के लिए एक व्यवस्थित प्रयास किया जा रहा है।

योजना का स्वरूप इस तरह तैयार किया गया है कि पुरस्कार प्राप्त करने वाले पशुपालकों को मिलने वाली आर्थिक सहायता का उपयोग भी देशी गोवंश के विकास से जुड़ा रहे।

पुरस्कार राशि का उपयोग पूरी तरह देशी गोवंश की खरीद, संरक्षण और संवर्धन के लिए निर्धारित किया गया है। इस प्रावधान के पीछे उद्देश्य यह है कि प्रतियोगिता में जीतने वाले पशुपालक प्राप्त राशि को आगे पशुधन विकास में लगा सकें।

इससे योजना के अंतर्गत मिलने वाला आर्थिक प्रोत्साहन भविष्य में भी पशुपालन गतिविधियों को आगे बढ़ाने का माध्यम बन सकता है। देशी नस्लों की खरीद और उनके संरक्षण के लिए उपलब्ध राशि का उपयोग पशुपालकों को अपनी पशुधन क्षमता बढ़ाने में सहायता दे सकता है।

इस व्यवस्था में यह भी महत्वपूर्ण है कि पुरस्कार राशि का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के अनुसार ही किया जाए। इसके लिए योजना के नियमों का पालन और संबंधित विभागीय प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

2027-28 से प्रदेश के सभी 313 विकासखंडों में होगी प्रतियोगिता

गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना को आने वाले वर्षों में और व्यापक बनाने की तैयारी है। पहले साल 208 चयनित वृंदावन ग्रामों में प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है, जबकि दूसरे साल से इसे प्रदेश के सभी 313 विकासखंडों तक विस्तारित करने की योजना बनाई गई है।

योजना के अनुसार, वर्ष 2027-28 से लेकर वर्ष 2030-31 तक मध्य प्रदेश के सभी 313 विकासखंडों में विकासखंड स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।

इस विस्तार का उद्देश्य प्रदेश के अधिक से अधिक पशुपालकों को योजना से जोड़ना है। अभी पहले चरण में चयनित गांवों के माध्यम से इस पहल को आगे बढ़ाया जा रहा है। आने वाले वर्षों में विकासखंड स्तर पर प्रतियोगिता आयोजित होने से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के पशुपालकों को अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिल सकेगा।

विकासखंड स्तर पर प्रतियोगिताओं का आयोजन होने से स्थानीय स्तर पर उत्कृष्ट पशुपालकों की पहचान करना भी आसान हो सकता है। अलग-अलग क्षेत्रों में पशुपालन की परिस्थितियां और उपलब्ध नस्लें अलग हो सकती हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर प्रतियोगिता आयोजित करने से क्षेत्रीय पशुधन संसाधनों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।

इस योजना का दीर्घकालिक उद्देश्य वृंदावन ग्रामों और विकासखंडों को दुग्ध उत्पादन तथा देशी गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के आदर्श केंद्रों के रूप में विकसित करना है।

यदि इस पहल को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो इससे पशुपालन के क्षेत्र में बेहतर प्रबंधन और उत्पादन को बढ़ावा देने के अवसर पैदा हो सकते हैं।

प्रतियोगिता के संचालन के लिए बनाई गई समितियां

प्रतियोगिता को पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए विकासखंड और जिला स्तर पर समितियों का गठन किया गया है। इन समितियों की भूमिका प्रतियोगिता के आवेदन प्राप्त करने से लेकर परिणामों के परीक्षण और विजेताओं के चयन तक महत्वपूर्ण होगी।

विकासखंड स्तरीय समिति में अनुभाग अधिकारी (राजस्व) के साथ पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी शामिल किए गए हैं। विकासखंड पशु चिकित्सा अधिकारी को इस समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है।

विकासखंड स्तरीय समिति का प्रमुख कार्य प्रतियोगिता में भाग लेने वाले पशुपालकों से आवेदन प्राप्त करना होगा। इसके बाद आवेदनों का संकलन किया जाएगा और निर्धारित मापदंडों के अनुसार उनका परीक्षण किया जाएगा।

प्रतियोगिता से संबंधित परिणाम तैयार होने के बाद उन्हें जिले के उपसंचालक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग के पास भेजा जाएगा। इसके बाद जिला स्तर पर प्राप्त प्रस्तावों का परीक्षण किया जाएगा।

जिला स्तरीय समिति में कलेक्टर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उपसंचालक, किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के उपसंचालक तथा सहकारी संस्थाओं के उप पंजीयक को शामिल किया गया है।

यह समिति निर्धारित नियमों और मापदंडों के अनुसार प्राप्त प्रस्तावों की जांच और सत्यापन करेगी। इसके बाद पुरस्कार के लिए चयनित पशुपालकों के नामों को स्वीकृति दी जाएगी।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रतियोगिता में भाग लेने वाले पशुपालकों के प्रदर्शन का मूल्यांकन निर्धारित व्यवस्था के तहत किया जाए और पुरस्कारों का वितरण उचित तरीके से हो।

एक परिवार से केवल एक प्रतिभागी या एक गाय ले सकेगी हिस्सा

प्रतियोगिता के नियमों में भागीदारी को लेकर भी एक महत्वपूर्ण प्रावधान रखा गया है। योजना के अनुसार, वृंदावन ग्राम या विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिता में एक परिवार से केवल एक प्रतिभागी या एक गाय ही शामिल हो सकेगी।

इस नियम का उद्देश्य प्रतियोगिता में परिवारों की भागीदारी को निर्धारित सीमा में रखना है। इससे एक ही परिवार की ओर से कई प्रतिभागियों या गायों को शामिल करने की स्थिति को नियंत्रित किया जा सकेगा।

प्रतियोगिता में सभी वर्गों के पशुपालकों को हिस्सा लेने का अवसर दिया गया है। हालांकि, उन्हें योजना के निर्धारित नियमों और पात्रता संबंधी शर्तों का पालन करना होगा।

पशुपालकों के लिए यह जरूरी है कि वे प्रतियोगिता में आवेदन करने से पहले संबंधित विभागीय अधिकारियों से प्रक्रिया और आवश्यक जानकारी प्राप्त कर लें। इससे आवेदन से जुड़ी गलतियों और अन्य परेशानियों से बचा जा सकता है।

प्रतियोगिता के पीछे सरकार की क्या है सोच?

गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार प्रतियोगिता को केवल एक पुरस्कार वितरण कार्यक्रम के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इसके पीछे पशुपालन क्षेत्र को व्यवस्थित रूप से प्रोत्साहित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की व्यापक सोच है।

इस पहल के माध्यम से सरकार गांवों में दूध उत्पादन बढ़ाने, अधिक दूध देने वाली गायों के पशुपालकों को प्रोत्साहित करने और उत्कृष्ट दुग्ध उत्पादक पशुओं की पहचान करने पर ध्यान दे रही है।

इसके अलावा पशुपालकों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा विकसित करना भी योजना का एक प्रमुख उद्देश्य है। जब पशुपालकों को उनके प्रदर्शन के आधार पर सम्मान और पुरस्कार मिलता है, तो इससे दूसरे लोगों को भी बेहतर परिणाम हासिल करने की प्रेरणा मिल सकती है।

देशी नस्ल की गायों का संरक्षण भी इस प्रतियोगिता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आधुनिक पशुपालन व्यवस्था में नस्ल सुधार और उत्पादकता बढ़ाने के प्रयासों के साथ स्थानीय पशुधन संसाधनों को सुरक्षित रखना भी आवश्यक है।

योजना के तहत गिर, साहीवाल, थारपारकर, मालवी और निवाड़ी जैसी नस्लों पर ध्यान देने से देशी गोवंश के संरक्षण को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

इसके साथ ही पशुपालकों की आय में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है। इस तरह प्रतियोगिता को पशुधन विकास, ग्रामीण रोजगार और दुग्ध उत्पादन को एक साथ आगे बढ़ाने की पहल के रूप में देखा जा सकता है।

31 अक्टूबर तक प्रतियोगिता में भाग लेने का मौका

मध्य प्रदेश के चयनित 208 वृंदावन ग्रामों में चल रही गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार प्रतियोगिता का समापन 31 अक्टूबर 2026 को होगा। प्रतियोगिता की शुरुआत 27 अक्टूबर को हुई थी और अब पशुपालकों के लिए अंतिम दिन नजदीक है।

इस प्रतियोगिता में उत्कृष्ट दुग्ध उत्पादन करने वाले पशुपालकों को उनके प्रदर्शन के अनुसार पुरस्कार दिए जाएंगे। प्रथम पुरस्कार के रूप में एक लाख रुपये, द्वितीय पुरस्कार के रूप में 50 हजार रुपये और तृतीय पुरस्कार के रूप में 25 हजार रुपये निर्धारित किए गए हैं।

इसके अलावा विभाग की ओर से कुल 624 पुरस्कारों के लिए लगभग 3.64 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है।

प्रतियोगिता में सभी वर्गों के पशुपालक भाग ले सकते हैं, लेकिन एक परिवार से केवल एक प्रतिभागी या एक गाय को शामिल करने का प्रावधान है।

आने वाले वर्षों में इस योजना का विस्तार प्रदेश के सभी 313 विकासखंडों तक किया जाना प्रस्तावित है। वर्ष 2027-28 से 2030-31 तक विकासखंड स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।

कुल मिलाकर, गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार प्रतियोगिता मध्य प्रदेश में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने की एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके जरिए सरकार उत्कृष्ट पशुपालकों को आर्थिक प्रोत्साहन देने के साथ देशी गोवंश के संरक्षण और संवर्धन पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। यदि योजना अपने निर्धारित उद्देश्यों के अनुसार प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो यह ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को मजबूत बनाने और पशुपालकों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में सहायक हो सकती है।

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