
यूपी में ब्लड बैंकों पर बड़ी कार्रवाई, 14 केंद्रों पर गिरी गाज; कहीं खराब मशीनों से जांच तो कहीं गलत तरीके से रखा जा रहा था खून
उत्तर प्रदेश में मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण रक्त उपलब्ध कराने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने ब्लड सेंटरों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। प्रदेश में चलाए जा रहे विशेष जांच अभियान के दौरान कई रक्त केंद्रों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। कहीं अनिवार्य संक्रमण जांच में लापरवाही मिली, तो कहीं खराब मशीनों के बावजूद रक्त और उसके घटक मरीजों को जारी किए जा रहे थे। कुछ केंद्रों पर रक्त के सुरक्षित भंडारण और तापमान नियंत्रण की व्यवस्था भी मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई।
30 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, विभाग की कार्रवाई में कुल 14 ब्लड सेंटरों के संचालन पर रोक लगाए जाने की बात कही गई है। इस कार्रवाई के पीछे मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चिंताएं हैं। हालिया विशेष अभियान के तहत 10 जिलों में 40 चैरिटेबल ब्लड सेंटरों का औचक निरीक्षण किया गया था। इनमें गंभीर कमियां मिलने पर सात केंद्रों में रक्त और रक्त घटकों से जुड़ी गतिविधियां तत्काल रोक दी गईं। अन्य केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
जांच में सामने आई अनियमितताओं में अनिवार्य ELISA जांच नहीं करना, सामान्य रैपिड किट से संक्रमण की जांच करना, तापमान रिकॉर्ड का रखरखाव नहीं करना, खराब उपकरणों के बावजूद रक्त जारी करना और प्रशिक्षित कर्मचारियों की अनुपस्थिति जैसी बातें शामिल हैं। विभाग का कहना है कि रक्त की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण अभियान आगे भी जारी रहेगा।
10 जिलों के 40 ब्लड सेंटरों का हुआ औचक निरीक्षण
उत्तर प्रदेश FSDA के आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के निर्देश पर प्रदेश के 10 जिलों में विशेष निरीक्षण अभियान चलाया गया। इसके तहत चैरिटेबल ट्रस्ट और सोसाइटी द्वारा संचालित 40 रक्त केंद्रों की जांच की गई।
निरीक्षण का उद्देश्य यह पता लगाना था कि रक्त केंद्रों में रक्तदाताओं से रक्त लेने से लेकर उसकी जांच, भंडारण और मरीजों तक आपूर्ति करने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार चल रही है या नहीं।
जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान दिया गया। इनमें रक्त की गुणवत्ता, संक्रमण संबंधी अनिवार्य जांच, तापमान नियंत्रण, कोल्ड चेन, स्टॉक रजिस्टर, लाइसेंस की वैधता और प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों की उपलब्धता शामिल थी।
जिलावार निरीक्षण की स्थिति इस प्रकार रही:
- लखनऊ में 13 ब्लड सेंटरों की जांच की गई।
- आगरा में पांच केंद्रों का निरीक्षण हुआ।
- कानपुर में पांच ब्लड सेंटर जांच के दायरे में आए।
- मुजफ्फरनगर में चार केंद्रों की जांच की गई।
- बिजनौर में चार केंद्रों का निरीक्षण हुआ।
- अलीगढ़ में तीन ब्लड सेंटरों की जांच की गई।
- गाजियाबाद में दो केंद्रों का निरीक्षण हुआ।
- वाराणसी में दो केंद्रों की जांच की गई।
- गोरखपुर में एक केंद्र का निरीक्षण हुआ।
- प्रयागराज में एक ब्लड सेंटर की जांच की गई।
इस अभियान में औषधि निरीक्षकों की अंतरजनपदीय टीमें शामिल थीं। अलग-अलग जिलों के अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी दी गई, ताकि निरीक्षण में स्थानीय स्तर पर किसी तरह की ढिलाई न रहे।
अनिवार्य ELISA जांच के बिना जारी किया जा रहा था रक्त
जांच के दौरान सबसे गंभीर कमियों में से एक अनिवार्य संक्रमण जांच से जुड़ी लापरवाही थी। कुछ ब्लड सेंटरों में रक्त की जांच निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नहीं की जा रही थी। कहीं ELISA मशीन खराब होने के बावजूद रक्त और रक्त घटक जारी किए जा रहे थे, तो कहीं संक्रमण की जांच के लिए सामान्य रैपिड किट का इस्तेमाल किया जा रहा था।
रक्त की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संक्रमण संबंधी निर्धारित परीक्षण बेहद जरूरी होते हैं। रक्तदान के बाद रक्त को मरीज तक पहुंचाने से पहले यह सुनिश्चित करना होता है कि उसमें HIV, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, सिफलिस और मलेरिया जैसे संक्रमणों की जांच निर्धारित मानकों के अनुसार की गई है।
ELISA यानी Enzyme-Linked Immunosorbent Assay एक प्रयोगशाला आधारित जांच तकनीक है। रक्त केंद्रों में निर्धारित संक्रमण जांच के लिए स्वीकृत परीक्षण प्रक्रिया और उपकरणों का इस्तेमाल जरूरी होता है।
सामान्य रैपिड किट से जांच करना हर परिस्थिति में निर्धारित परीक्षण का विकल्प नहीं माना जा सकता। यदि किसी केंद्र में जरूरी जांच पूरी किए बिना रक्त जारी किया जाता है, तो मरीजों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
लखनऊ के कुछ केंद्रों में ऐसी ही गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। रिपोर्टों के मुताबिक, लिटल स्टार ब्लड सेंटर में ELISA मशीन खराब होने के बावजूद रक्त और रक्त घटक जारी किए जा रहे थे। रामा चैरिटेबल ब्लड सेंटर में भी अनिवार्य जांच पूरी किए बिना रक्त जारी करने की बात सामने आई।
खराब उपकरणों के बावजूद जारी हो रहा था खून
ब्लड सेंटरों में जांच के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीनों का सही तरीके से काम करना बेहद जरूरी है। यदि कोई मशीन खराब हो जाए, तो संबंधित जांच को निर्धारित वैकल्पिक व्यवस्था और नियमों के तहत पूरा किया जाना चाहिए। लेकिन जांच में कुछ केंद्रों पर उपकरणों की खराब स्थिति के बावजूद रक्त जारी किए जाने की अनियमितता सामने आई।
लिटल स्टार ब्लड सेंटर में ELISA मशीन खराब होने के बावजूद रक्त और उसके घटकों को जारी करने की बात सामने आई। इस केंद्र पर प्रभारी चिकित्सा अधिकारी और तकनीकी कर्मचारियों की अनुपस्थिति भी पाई गई।
रामा चैरिटेबल ब्लड सेंटर में भी संक्रमण जांच से संबंधित कमियां मिलीं। इसके अलावा फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा (FFP) को निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत प्लेटलेट एजिटेटर में रखने की अनियमितता सामने आई।
इन मामलों से स्पष्ट होता है कि रक्त केंद्रों में केवल मशीनों का उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। उनका सही संचालन, नियमित रखरखाव और प्रशिक्षित कर्मचारियों की मौजूदगी भी जरूरी है।
गलत तापमान पर रक्त रखने से बढ़ सकता है खतरा
रक्त और उसके अलग-अलग घटकों को सुरक्षित रखने के लिए निर्धारित तापमान बनाए रखना आवश्यक होता है। रक्त केंद्रों में कोल्ड चेन व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रक्त संग्रह से लेकर मरीज तक पहुंचने के बीच उसकी गुणवत्ता प्रभावित न हो।
निरीक्षण में कुछ केंद्रों पर तापमान नियंत्रण और रिकॉर्ड रखने में गंभीर कमियां सामने आईं। कहीं तापमान लॉग नियमित रूप से दर्ज नहीं किए जा रहे थे, तो कहीं भंडारण व्यवस्था की निगरानी संतोषजनक नहीं थी।
खराब डीप फ्रीजर या अन्य भंडारण उपकरण रक्त के कुछ घटकों की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। विशेष रूप से प्लाज्मा और अन्य रक्त घटकों को निर्धारित तापमान पर रखना आवश्यक होता है। उपकरणों में खराबी आने पर समय पर मरम्मत और वैकल्पिक सुरक्षित व्यवस्था की जरूरत होती है।
ब्लड सेंटरों में तापमान रिकॉर्ड इसलिए भी महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इससे यह पता लगाया जा सकता है कि रक्त और उसके घटकों को पूरी अवधि में उचित परिस्थितियों में रखा गया या नहीं।
यदि तापमान नियंत्रण में लापरवाही होती है, तो रक्त की गुणवत्ता और मरीज की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से FSDA की टीमों ने भंडारण उपकरणों, तापमान लॉग और कोल्ड चेन व्यवस्था की जांच को अभियान का प्रमुख हिस्सा बनाया।
रक्त लेने और मरीजों को देने का रिकॉर्ड भी अधूरा
जांच के दौरान कई केंद्रों पर रक्तदाताओं और रक्त प्राप्त करने वाले मरीजों से संबंधित रिकॉर्ड भी अधूरे पाए गए। कुछ स्थानों पर मरीजों का पूरा विवरण दर्ज नहीं किया जा रहा था। वहीं तापमान रिकॉर्ड और स्टॉक रजिस्टर का रखरखाव भी सही तरीके से नहीं हो रहा था।
ब्लड बैंक में रिकॉर्ड का महत्व बहुत अधिक होता है। प्रत्येक रक्त यूनिट का स्रोत, रक्तदाता का विवरण, जांच की स्थिति, भंडारण और मरीज तक उसकी आपूर्ति का रिकॉर्ड होना चाहिए। इससे जरूरत पड़ने पर किसी भी यूनिट की पूरी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
यदि रक्तदाता और मरीज का रिकॉर्ड अधूरा हो, तो रक्त की आपूर्ति की पूरी प्रक्रिया को ट्रैक करना मुश्किल हो सकता है। किसी संक्रमण या गुणवत्ता संबंधी शिकायत की स्थिति में भी जांच प्रभावित हो सकती है।
जांच टीमों ने रक्त प्राप्तकर्ताओं के नाम, हस्ताक्षर और मोबाइल नंबर जैसे विवरणों के रिकॉर्ड की भी पड़ताल की। कुछ केंद्रों में ये जानकारी पूरी तरह दर्ज नहीं थी।
इसके अलावा स्टॉक रजिस्टर में रक्त और उसके घटकों की उपलब्धता तथा इस्तेमाल का सही विवरण रखना भी आवश्यक है। रिकॉर्ड में गड़बड़ी होने से रक्त के प्रबंधन और वितरण में पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है।
लखनऊ के तीन ब्लड सेंटरों पर कार्रवाई
हालिया अभियान में लखनऊ के तीन ब्लड सेंटरों के संचालन पर रोक लगाई गई। इनमें लिटल स्टार ब्लड सेंटर, रामा चैरिटेबल ब्लड सेंटर और KHS चैरिटेबल ब्लड सेंटर शामिल हैं।
लिटल स्टार ब्लड सेंटर में ELISA मशीन खराब होने के बावजूद रक्त जारी करने, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी और तकनीकी कर्मचारियों की अनुपस्थिति जैसी कमियां सामने आईं। जांच में फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा में लाल रक्त कोशिकाओं के अंश पाए जाने की बात भी रिपोर्ट की गई।
रामा चैरिटेबल ब्लड सेंटर में अनिवार्य ELISA जांच पूरी किए बिना रक्त जारी करने, FFP को निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत प्लेटलेट एजिटेटर में रखने और तय दर से अधिक शुल्क वसूलने जैसी अनियमितताएं मिलीं। यहां कर्मचारियों की अनुपस्थिति भी सामने आई।
KHS चैरिटेबल ब्लड सेंटर में प्रभारी चिकित्सा अधिकारी और तकनीकी कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। इसके अलावा मास्टर रजिस्टर तथा ELISA और TTI परीक्षण से संबंधित रजिस्टर समय पर अपडेट नहीं किए गए थे। परिसर की साफ-सफाई को लेकर भी कमियां बताई गईं।
इन तीनों केंद्रों में रक्त और रक्त घटकों से संबंधित गतिविधियों पर रोक लगाई गई है।
आगरा, अलीगढ़, गोरखपुर और लखीमपुर खीरी के केंद्र भी कार्रवाई की जद में
लखनऊ के अलावा आगरा, अलीगढ़, गोरखपुर और लखीमपुर खीरी में भी निरीक्षण के दौरान गंभीर अनियमितताएं मिलीं।
आगरा के श्री बालाजी चैरिटेबल ब्लड सेंटर में अनिवार्य ELISA और स्टरलिटी परीक्षण नहीं किए जाने की बात सामने आई। रक्त प्राप्तकर्ताओं का पूरा विवरण, तापमान लॉग और स्टॉक रिकॉर्ड भी उचित तरीके से दर्ज नहीं थे।
अलीगढ़ के न्यू बापू रक्त सेंटर में अनिवार्य TTI जांच और CPDA सॉल्यूशन से जुड़ी प्रक्रियाओं में कमियां मिलीं। यहां भी ELISA परीक्षण, तापमान रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और तकनीकी कर्मचारियों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठे।
गोरखपुर के मानया चैरिटेबल ब्लड सेंटर में प्रभारी चिकित्सा अधिकारी और तकनीकी कर्मचारी अनुपस्थित मिले। तापमान रिकॉर्डिंग में अनियमितता और अधूरे दस्तावेज भी सामने आए।
लखीमपुर खीरी के अनुभव चैरिटेबल ब्लड सेंटर में बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण से जुड़ा जरूरी अनुबंध उपलब्ध नहीं था। इसके अलावा तापमान निगरानी, अलार्म सिस्टम और स्टॉक रजिस्टर में भी कमियां पाई गईं।
इन सात केंद्रों में रक्त और रक्त घटकों से संबंधित गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई।
तय कीमत से अधिक वसूली की शिकायतें भी मिलीं
जांच अभियान में केवल रक्त की गुणवत्ता और भंडारण ही नहीं, बल्कि मरीजों से वसूले जाने वाले शुल्क की भी जांच की गई।
लखनऊ में कुछ ब्लड सेंटरों पर निर्धारित दर से अधिक पैसे लेने की शिकायतें सामने आईं। 30 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ केंद्रों पर रक्त, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा के लिए तय शुल्क से 1000 रुपये तक अधिक वसूली के मामले सामने आए।
रामा चैरिटेबल ब्लड सेंटर में भी निर्धारित शुल्क से ज्यादा पैसे लेने की अनियमितता बताई गई। मरीजों और उनके परिजनों को अक्सर आपात स्थिति में रक्त की जरूरत होती है। ऐसे में तय दर से अधिक शुल्क वसूलना उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकता है।
ब्लड सेंटरों के निरीक्षण में कीमतों और शुल्क संबंधी रिकॉर्ड की जांच इसलिए की जाती है, ताकि मरीजों से निर्धारित नियमों के अनुसार ही राशि ली जाए।
रक्त की सुरक्षा के लिए किन जांचों का होना जरूरी?
रक्त चढ़ाने से पहले संक्रमण संबंधी जांच मरीजों की सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। रक्त केंद्रों में निर्धारित मानकों के अनुसार कई संक्रमणों की जांच की जाती है।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- HIV: मानव प्रतिरक्षा अपूर्णता वायरस से संबंधित संक्रमण की जांच।
- HBsAg: हेपेटाइटिस बी संक्रमण की पहचान के लिए परीक्षण।
- HCV: हेपेटाइटिस सी संक्रमण की जांच।
- VDRL: सिफलिस संक्रमण की जांच से संबंधित परीक्षण।
- मलेरिया: रक्त में मलेरिया संक्रमण की मौजूदगी की जांच।
इन परीक्षणों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रक्त के माध्यम से मरीजों तक संक्रमण पहुंचने का जोखिम कम किया जा सके।
इसके साथ रक्त और उसके घटकों को निर्धारित तापमान पर सुरक्षित रखना, स्टॉक का रिकॉर्ड बनाए रखना और प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों की उपलब्धता भी जरूरी है।
यदि इन प्रक्रियाओं में लापरवाही होती है, तो रक्त की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और मरीजों के लिए जोखिम पैदा हो सकता है।
ब्लड सेंटरों में डॉक्टर और तकनीकी कर्मचारी भी मिले अनुपस्थित
निरीक्षण में कुछ केंद्रों पर प्रभारी चिकित्सा अधिकारी और तकनीकी कर्मचारियों की अनुपस्थिति भी सामने आई। ब्लड सेंटर के संचालन में प्रशिक्षित कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
रक्त संग्रह, जांच, अलग-अलग घटकों की तैयारी, भंडारण और मरीजों को रक्त जारी करने जैसे काम निर्धारित प्रशिक्षण और जिम्मेदारी के अनुसार किए जाने चाहिए।
यदि प्रभारी चिकित्सा अधिकारी या तकनीकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं, तो रक्त की गुणवत्ता और प्रक्रिया की निगरानी प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि निरीक्षण टीमों ने कर्मचारियों की उपस्थिति और योग्यता से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की।
कुछ केंद्रों में स्टाफ की अनुपस्थिति के साथ मशीनों की खराब स्थिति और रिकॉर्ड में कमियां भी मिलीं। इन सभी अनियमितताओं को मिलाकर विभाग ने कार्रवाई की।
अन्य ब्लड सेंटरों को कारण बताओ नोटिस
FSDA ने जिन केंद्रों में गंभीर अनियमितताएं पाईं, वहां रक्त और रक्त घटकों से संबंधित गतिविधियों पर रोक लगा दी। वहीं अन्य केंद्रों में मिली कमियों को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
कारण बताओ नोटिस का उद्देश्य संबंधित संस्थानों से यह जानना होता है कि निरीक्षण में मिली कमियों के संबंध में उनका क्या पक्ष है और नियमों के उल्लंघन पर उनके खिलाफ आगे कार्रवाई क्यों न की जाए।
आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के अनुसार, जिन केंद्रों में गंभीर अनियमितताएं मिली हैं, वहां तत्काल रोक लगाने के साथ बाकी केंद्रों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
इस अभियान को नियमित रूप से जारी रखने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य केवल कुछ केंद्रों को बंद करना नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में रक्त की जांच, भंडारण और आपूर्ति की प्रक्रिया को निर्धारित मानकों के अनुसार सुनिश्चित करना है।
बंद केंद्रों में मौजूद रक्त का क्या होगा?
किसी ब्लड सेंटर का संचालन रोक दिए जाने के बाद वहां उपलब्ध रक्त और रक्त घटकों के सुरक्षित प्रबंधन का सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
ऐसी स्थिति में संबंधित रक्त को बिना जांच के दूसरे मरीजों को जारी नहीं किया जा सकता। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, बंद किए गए केंद्रों में मौजूद रक्त और रक्त घटकों के सुरक्षित निस्तारण के लिए निर्देश जारी किए गए हैं।
कुछ पूर्व कार्रवाई के मामलों में विभाग ने यह व्यवस्था भी बताई थी कि उपलब्ध रक्त को सरकारी ब्लड सेंटरों में भेजकर अनुभवी पैथोलॉजिस्ट से उसकी जांच कराई जा सकती है। जांच में गुणवत्तायुक्त पाए जाने वाले रक्त का उपयोग निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जा सकता है, जबकि दूषित या अवमानक रक्त को नष्ट किया जाना चाहिए।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कार्रवाई के दौरान पहले से संग्रहित रक्त भी मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरा न बने।
मरीजों की सुरक्षा के लिए क्यों जरूरी है सख्त निगरानी?
रक्त की जरूरत कई गंभीर परिस्थितियों में पड़ती है। दुर्घटना, बड़ी सर्जरी, प्रसव संबंधी जटिलताओं और कुछ बीमारियों के इलाज में मरीजों को रक्त या उसके घटकों की आवश्यकता हो सकती है।
ऐसे समय में मरीज और उनके परिजन ब्लड सेंटर पर भरोसा करते हैं कि उन्हें सुरक्षित और जांचा हुआ रक्त मिलेगा। इसलिए रक्त केंद्रों की जिम्मेदारी केवल रक्त उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।
यदि संक्रमण जांच अधूरी हो, तापमान नियंत्रण खराब हो या रिकॉर्ड सही तरीके से न रखा जाए, तो मरीजों के लिए खतरा पैदा हो सकता है। HIV और हेपेटाइटिस जैसे संक्रमण दूषित रक्त के माध्यम से फैल सकते हैं।
इसी वजह से रक्त केंद्रों के लिए तय नियमों का पालन करना अनिवार्य है। नियमित निरीक्षण से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि संस्थान इन नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश में FSDA के विशेष अभियान ने ब्लड सेंटरों की कार्यप्रणाली से जुड़ी कई गंभीर कमियों को सामने लाया है। 10 जिलों में 40 केंद्रों के औचक निरीक्षण के दौरान सात केंद्रों में इतनी गंभीर अनियमितताएं मिलीं कि उनके रक्त और रक्त घटकों से संबंधित संचालन पर तत्काल रोक लगानी पड़ी। व्यापक कार्रवाई के तहत कुल 14 केंद्रों पर रोक लगाए जाने की खबर भी सामने आई है।
जांच में कहीं ELISA मशीन खराब होने के बावजूद रक्त जारी किया जा रहा था, तो कहीं संक्रमण जांच की निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं हो रहा था। कुछ केंद्रों में रक्त के भंडारण, तापमान रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और कर्मचारियों की उपलब्धता में भी कमियां मिलीं। निर्धारित दर से अधिक शुल्क वसूलने की शिकायतें भी सामने आईं।
FSDA आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के निर्देश पर चल रहे अभियान का उद्देश्य मरीजों को सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराना और ब्लड सेंटरों में नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। अब अन्य केंद्रों को जारी नोटिस के जवाब और आगे की जांच के आधार पर अगली कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि जीवन बचाने के लिए इस्तेमाल होने वाले रक्त की जांच, भंडारण और आपूर्ति में किसी भी तरह की लापरवाही मरीजों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इसलिए ब्लड सेंटरों की नियमित निगरानी और तय मानकों का सख्ती से पालन बेहद जरूरी है।
तथ्य-जांच नोट: 28-29 अक्टूबर की रिपोर्टों में 10 जिलों के 40 केंद्रों की जांच के बाद सात केंद्रों में रक्त संबंधी गतिविधियां रोकने की पुष्टि मिलती है। 30 अक्टूबर की कुछ रिपोर्टों में कुल 14 केंद्रों पर कार्रवाई का आंकड़ा दिया गया है। इसलिए सात केंद्रों का विवरण हालिया निरीक्षण अभियान से संबंधित है, जबकि 14 का आंकड़ा व्यापक कार्रवाई के कुल संदर्भ में है। रैपिड किट, ELISA मशीन, तापमान नियंत्रण और अधिक शुल्क से जुड़ी कमियां अलग-अलग केंद्रों की निरीक्षण रिपोर्टों में दर्ज हैं।