
‘चिकन लेग पीस’ फेम उल्हास कामठे की मौत की खबर निकली अफवाह, हार्ट अटैक नहीं आया था पैनिक अटैक
सोशल मीडिया पर अपने खास अंदाज में चिकन और मटन खाते हुए वीडियो बनाने के लिए मशहूर उल्हास कामठे, जिन्हें लोग ‘चिकन लेग पीस मैन’ के नाम से भी जानते हैं, रविवार को अचानक चर्चा में आ गए। उनके स्वास्थ्य को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसके साथ दावा किया गया कि उन्हें हार्ट अटैक आया है और उनकी मौत हो गई है। इस खबर से उनके प्रशंसकों और फॉलोअर्स के बीच चिंता फैल गई।
हालांकि, सामने आई जानकारी के मुताबिक उल्हास कामठे की मौत की खबर सही नहीं है। उन्हें मुंबई में एक हॉरर फिल्म के प्रीमियर के दौरान घबराहट और पैनिक अटैक की शिकायत हुई थी। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी जांच और इलाज किया। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें करीब एक घंटे बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और उनकी तबीयत ठीक बताई गई।
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही था कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रही स्थिति को हार्ट अटैक क्यों बताया गया और क्या वास्तव में उल्हास कामठे की जान को कोई खतरा हुआ था? उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शुरुआती सोशल मीडिया दावों में हार्ट अटैक की बात कही गई, लेकिन बाद में सामने आया कि मामला पैनिक या एंग्जायटी अटैक का था। उनकी मौत की खबर अफवाह निकली।
वायरल वीडियो के बाद फैली मौत की खबर
उल्हास कामठे की पहचान उनके फूड वीडियो से बनी है। उनके वीडियो में वह चिकन या मटन खाते हुए अपने खास अंदाज में ‘चिकन लेग पीस’ कहते दिखाई देते हैं। यही अंदाज इंटरनेट पर लोकप्रिय हुआ और उन्हें सोशल मीडिया पर बड़ी पहचान मिली।
उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आते ही पुराने और नए वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जाने लगे। कुछ पोस्ट में वीडियो के साथ यह दावा किया गया कि उल्हास को हॉरर फिल्म देखते समय हार्ट अटैक आया और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। कई पोस्ट ने इस घटना को उनकी मौत से जोड़ दिया।
ऐसे दावों के कारण उनके प्रशंसकों में भ्रम की स्थिति पैदा हुई। कुछ लोगों ने उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई, जबकि कई यूजर्स ने बिना पुष्टि किए मौत की खबर साझा कर दी। लेकिन बाद में उपलब्ध जानकारी और फिल्म के निर्देशक की ओर से दी गई स्वास्थ्य संबंधी जानकारी से स्पष्ट हुआ कि उल्हास कामठे की मौत नहीं हुई है।
इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति की तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आने पर अपुष्ट दावों को तेजी से सच मान लिया जाता है। खासकर जब किसी वायरल वीडियो के साथ गंभीर बीमारी या मौत का दावा जोड़ दिया जाता है, तो लोग बिना पुष्टि किए उसे आगे साझा करने लगते हैं।
हॉरर फिल्म ‘झाड़ फूंक’ के प्रीमियर में बिगड़ी तबीयत
यह घटना मुंबई में हॉरर फिल्म ‘झाड़ फूंक’ के प्रीमियर के दौरान हुई। उल्हास कामठे फिल्म देखने पहुंचे थे। बताया गया कि फिल्म के शुरुआती हिस्से में एक डरावना दृश्य देखने के बाद उन्हें अचानक घबराहट महसूस हुई और उनकी तबीयत बिगड़ गई।
उनके साथ मौजूद दोस्तों और फिल्म की टीम ने स्थिति को गंभीरता से लिया और उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने उनकी जांच की और इलाज किया। घटना के बाद फिल्म के प्रीमियर और उल्हास की स्वास्थ्य स्थिति दोनों चर्चा में आ गए।
फिल्म के निर्देशक राजन रामगोपाल वर्मा ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि उल्हास उनके करीबी दोस्त हैं और प्रीमियर में टीम का उत्साह बढ़ाने पहुंचे थे। निर्देशक के मुताबिक, फिल्म शुरू होने के कुछ समय बाद ही उल्हास को घबराहट की शिकायत हुई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा।
निर्देशक ने दी स्वास्थ्य की जानकारी
घटना के बाद फिल्म के निर्देशक की ओर से सामने आई जानकारी ने वायरल दावों पर स्थिति स्पष्ट करने में मदद की। निर्देशक के अनुसार, डॉक्टरों ने जांच के बाद पैनिक अटैक की पुष्टि की। इलाज के बाद उल्हास कामठे को करीब एक घंटे में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
इस जानकारी के बाद यह स्पष्ट हुआ कि सोशल मीडिया पर चल रही हार्ट अटैक और मौत की खबरें सही नहीं थीं। उपलब्ध रिपोर्टों में उल्हास की स्थिति को पैनिक या एंग्जायटी अटैक बताया गया है। उनकी तबीयत ठीक होने की जानकारी भी सामने आई।
हालांकि, किसी व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के बारे में अंतिम और विस्तृत जानकारी संबंधित व्यक्ति, परिवार या उपचार करने वाले डॉक्टरों की पुष्टि से ही मानी जानी चाहिए। इस मामले में उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, निर्देशक ने घटना की जानकारी दी और उल्हास को अस्पताल से छुट्टी मिलने की बात कही।
हार्ट अटैक और पैनिक अटैक में अंतर
उल्हास कामठे की घटना के बाद सोशल मीडिया पर हार्ट अटैक और पैनिक अटैक को लेकर भी भ्रम देखने को मिला। दोनों स्थितियों में व्यक्ति को अचानक असहजता, घबराहट या शारीरिक परेशानी महसूस हो सकती है, लेकिन ये अलग-अलग स्वास्थ्य स्थितियां हैं।
पैनिक अटैक में व्यक्ति को अचानक तीव्र डर या बेचैनी महसूस हो सकती है। इसके साथ दिल की धड़कन तेज होना, सांस लेने में परेशानी, पसीना आना, चक्कर या बेचैनी जैसे लक्षण हो सकते हैं। दूसरी ओर, हार्ट अटैक हृदय की रक्त आपूर्ति में गंभीर बाधा से जुड़ी चिकित्सा स्थिति है और इसमें तत्काल चिकित्सकीय सहायता की जरूरत होती है।
इन दोनों स्थितियों के लक्षण कभी-कभी मिलते-जुलते हो सकते हैं। इसलिए केवल किसी वायरल वीडियो या व्यक्ति के बाहरी व्यवहार को देखकर यह तय करना सही नहीं है कि उसे हार्ट अटैक आया है या पैनिक अटैक। सही पहचान के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी होती है।
उल्हास कामठे के मामले में उपलब्ध रिपोर्टों में डॉक्टरों की जांच के बाद पैनिक अटैक की बात कही गई है। इसलिए इस घटना को हार्ट अटैक या मौत के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।
क्या ज्यादा चिकन और मटन खाने से बिगड़ी तबीयत?
उल्हास कामठे के फूड वीडियो उनकी लोकप्रियता का मुख्य कारण रहे हैं। वह अक्सर बड़ी मात्रा में चिकन और मटन खाते हुए वीडियो बनाते हैं। उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर के बाद कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में उनके खानपान को लेकर टिप्पणियां की गईं और घटना को ज्यादा मांसाहार से जोड़ने की कोशिश हुई।
लेकिन उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उनकी तबीयत हॉरर फिल्म के प्रीमियर के दौरान डरावना दृश्य देखने के बाद बिगड़ी थी। रिपोर्टों में पैनिक या एंग्जायटी अटैक का उल्लेख है। ऐसे में बिना चिकित्सकीय पुष्टि के घटना को उनके खानपान से जोड़ना उचित नहीं है।
किसी व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के बारे में निष्कर्ष निकालने के लिए उसके खानपान, जीवनशैली या सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले वीडियो को अकेले आधार नहीं बनाया जा सकता। किसी बीमारी या अचानक तबीयत बिगड़ने के कारण का निर्धारण चिकित्सकीय जांच के बाद ही किया जा सकता है।
कौन हैं उल्हास कामठे?
उल्हास कामठे एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और फूड वीडियो क्रिएटर हैं। उन्हें इंटरनेट पर ‘चिकन लेग पीस मैन’ के नाम से जाना जाता है। उनकी लोकप्रियता की शुरुआत उस खास अंदाज से हुई, जिसमें वह चिकन लेग पीस खाते हुए यह वाक्य बोलते थे।
उनका एक वीडियो 2019 में टिकटॉक पर वायरल हुआ था। इसके बाद उनके वीडियो दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी लोकप्रिय होने लगे। उनकी पहचान उनके खाने के वीडियो, खास अंदाज और लोगों के बीच वायरल हुए मीम्स से जुड़ गई।
उल्हास कामठे सोशल मीडिया के अलावा मुंबई में जिम और अन्य कारोबार से भी जुड़े रहे हैं। उनके फूड वीडियो के कारण उन्हें बड़ी संख्या में दर्शकों ने पहचाना। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ‘चिकन लेग पीस’ वाक्यांश इंटरनेट पर एक लोकप्रिय मीम और पहचान बन गया।
उनकी पहचान केवल खाने के वीडियो तक सीमित नहीं रही। वह मनोरंजन से जुड़े कुछ कार्यक्रमों और अन्य गतिविधियों में भी दिखाई दिए हैं। उनकी वायरल लोकप्रियता ने उन्हें सोशल मीडिया पर एक अलग पहचान दिलाई।
सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
उल्हास कामठे की तबीयत बिगड़ने की खबर के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की और उनके लिए शुभकामनाएं साझा कीं। वहीं, कुछ यूजर्स ने उनके खाने के वीडियो और मांसाहार को लेकर तंज कसे।
कुछ पोस्ट में उनकी तबीयत बिगड़ने की घटना को ‘कर्म’ से जोड़कर टिप्पणियां की गईं। अन्य यूजर्स ने उनके खानपान को लेकर आलोचना की। हालांकि, कई लोगों ने इस तरह की प्रतिक्रियाओं को असंवेदनशील बताया और कहा कि किसी व्यक्ति की तबीयत खराब होने पर उसका मजाक नहीं उड़ाना चाहिए।
किसी व्यक्ति के खानपान या सोशल मीडिया कंटेंट से असहमति हो सकती है, लेकिन बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के दौरान अपमानजनक टिप्पणियां करना उचित नहीं माना जा सकता। इस घटना ने ऑनलाइन ट्रोलिंग और किसी की निजी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर संवेदनशीलता की जरूरत पर भी चर्चा शुरू की।
वायरल वीडियो देखते समय क्या ध्यान रखें?
उल्हास कामठे से जुड़ा मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली स्वास्थ्य संबंधी खबरों को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत बताता है। किसी वीडियो में व्यक्ति को असहज या बीमार दिखाई देने का अर्थ यह नहीं है कि उसके साथ वही घटना हुई है, जिसका दावा पोस्ट में किया जा रहा है।
कई बार पुराने वीडियो को नई घटना बताकर साझा किया जाता है। कुछ पोस्ट में वीडियो के साथ गलत कैप्शन जोड़ दिया जाता है, जबकि कुछ मामलों में शुरुआती जानकारी अधूरी होती है और बाद में स्थिति स्पष्ट होती है।
ऐसी खबरों को साझा करने से पहले व्यक्ति, परिवार, संबंधित संस्था या विश्वसनीय समाचार रिपोर्टों की पुष्टि देखना जरूरी है। खासकर मौत, गंभीर बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने जैसे दावों को बिना पुष्टि आगे साझा करने से भ्रम और चिंता बढ़ सकती है।
उल्हास कामठे के मामले में भी शुरुआती पोस्टों में हार्ट अटैक और मौत का दावा किया गया, जबकि बाद में सामने आई जानकारी ने इसे पैनिक अटैक बताया। इसलिए इस घटना के बारे में तथ्यात्मक जानकारी साझा करना जरूरी है।
‘झाड़ फूंक’ फिल्म भी चर्चा में
उल्हास कामठे की तबीयत बिगड़ने की घटना के बाद हॉरर फिल्म ‘झाड़ फूंक’ का प्रीमियर भी चर्चा में आ गया। फिल्म 30 अक्टूबर 2026 को जियोहॉटस्टार पर रिलीज हुई। इसमें पद्मिनी कोल्हापुरे, सुंबुल तौकीर खान, यशपाल शर्मा और हर्ष राजपूत जैसे कलाकार नजर आए हैं।
फिल्म के प्रीमियर के दौरान हुई घटना ने फिल्म से जुड़ी खबरों को भी सोशल मीडिया पर अधिक चर्चा दिलाई। हालांकि, उल्हास की तबीयत बिगड़ने की घटना को फिल्म के प्रचार या किसी अन्य उद्देश्य से जोड़ने का कोई आधार उपलब्ध जानकारी में नहीं है। रिपोर्टों के मुताबिक, वह फिल्म देखने पहुंचे थे और स्क्रीनिंग के दौरान उन्हें घबराहट हुई।
फिलहाल क्या है उल्हास कामठे की स्थिति?
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उल्हास कामठे को हॉरर फिल्म के प्रीमियर के दौरान पैनिक अटैक आया था। उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच और इलाज किया। निर्देशक की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, उन्हें करीब एक घंटे बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और उनकी तबीयत ठीक बताई गई।
इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल हो रही उनकी मौत की खबर सही नहीं है। इसी तरह, हार्ट अटैक का दावा भी उपलब्ध जानकारी से मेल नहीं खाता। सामने आई रिपोर्टों में पैनिक या एंग्जायटी अटैक का उल्लेख है।
उल्हास कामठे की घटना ने उनके प्रशंसकों को चिंता में जरूर डाल दिया, लेकिन बाद में सामने आई जानकारी से राहत मिली। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि उनकी मौत की खबर अफवाह है और वायरल वीडियो को गलत दावे के साथ साझा किया गया था।