
अहमदाबाद एयरपोर्ट पर बड़ी कार्रवाई, बैंकॉक से ट्रॉली बैग में लाया गया ₹13 करोड़ का गांजा; दो यात्री गिरफ्तार
गुजरात के अहमदाबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कस्टम्स विभाग की एयर इंटेलिजेंस यूनिट (AIU) ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। बैंकॉक से थाई एयरवेज की फ्लाइट से अहमदाबाद पहुंचे दो यात्रियों के चेक-इन ट्रॉली बैग से करीब 13 करोड़ रुपये कीमत का हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, जब्त किए गए पदार्थ का कुल वजन 13.012 किलोग्राम है। दोनों यात्रियों को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट यानी NDPS एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया है।
इस कार्रवाई के बाद कस्टम्स विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि प्रतिबंधित पदार्थ बैंकॉक में कहां से हासिल किया गया था और अहमदाबाद में इसकी डिलीवरी किसे दी जानी थी। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस मामले के पीछे किसी संगठित तस्करी नेटवर्क की भूमिका हो सकती है। हालांकि, नेटवर्क और संभावित अन्य आरोपियों के बारे में अभी जांच जारी है।
खुफिया जानकारी के आधार पर यात्रियों को रोका गया
यह कार्रवाई अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर की गई। कस्टम्स अधिकारियों को पहले से खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर यात्रियों की प्रोफाइलिंग की जा रही थी और उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी।
इसी दौरान बैंकॉक से अहमदाबाद पहुंची थाई एयरवेज की फ्लाइट TG-343 के दो यात्रियों पर अधिकारियों को संदेह हुआ। दोनों यात्रियों को आगे की जांच के लिए रोका गया। इसके बाद उनके चेक-इन ट्रॉली बैग की एक्स-रे स्कैनिंग कराई गई।
स्कैनिंग के दौरान बैग के भीतर कुछ संदिग्ध वस्तुएं दिखाई दीं। इसके बाद कस्टम्स अधिकारियों ने दोनों ट्रॉली बैग खोलकर उनकी विस्तृत तलाशी ली। तलाशी के दौरान अधिकारियों को वैक्यूम-सीलबंद पैकेट मिले, जिनमें हरे रंग का पदार्थ रखा हुआ था।
14 वैक्यूम-सीलबंद पैकेट में मिला गांजा
कस्टम्स अधिकारियों के मुताबिक, दोनों यात्रियों के ट्रॉली बैग से कुल 14 वैक्यूम-सीलबंद पैकेट बरामद किए गए। इन पैकेटों में मौजूद पदार्थ की प्राथमिक जांच की गई। ड्रग डिटेक्शन किट से परीक्षण करने पर पदार्थ की पहचान हाइड्रोपोनिक गांजा के रूप में हुई।
जब्त किए गए पदार्थ का कुल वजन 13.012 किलोग्राम बताया गया है। अधिकारियों ने इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 13 करोड़ रुपये आंकी है। यह बरामदगी अहमदाबाद एयरपोर्ट पर हाल के समय में सामने आए बड़े मादक पदार्थों के मामलों में से एक है।
कस्टम्स विभाग ने गांजे को जब्त कर लिया और दोनों यात्रियों के खिलाफ NDPS एक्ट, 1985 की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की। दोनों को गिरफ्तार कर आगे की पूछताछ की जा रही है।
क्या है हाइड्रोपोनिक गांजा?
हाइड्रोपोनिक गांजा, गांजे की ऐसी किस्म है जिसे पारंपरिक मिट्टी में उगाने के बजाय पानी और पोषक तत्वों वाले नियंत्रित वातावरण में विकसित किया जाता है। इस तकनीक में पौधों की जड़ों को मिट्टी के बजाय पोषक तत्वों से युक्त पानी या अन्य माध्यम से आवश्यक तत्व दिए जाते हैं।
हाइड्रोपोनिक तरीके से उगाए गए गांजे को कई मामलों में अधिक शक्तिशाली और महंगे उत्पाद के रूप में पेश किया जाता है। इसकी मांग और कीमत के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी अवैध तस्करी के मामले सामने आते रहे हैं।
हालांकि, किसी विशेष बरामदगी में पदार्थ की वास्तविक संरचना, गुणवत्ता और बाजार मूल्य की पुष्टि जांच और परीक्षण की प्रक्रिया पर निर्भर करती है। अहमदाबाद मामले में अधिकारियों ने प्राथमिक जांच के आधार पर इसे हाइड्रोपोनिक गांजा बताया है और इसकी अनुमानित कीमत करीब 13 करोड़ रुपये बताई है।
ट्रॉली बैग की जांच में सामने आया मामला
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से आने वाले यात्रियों के सामान की जांच के दौरान कस्टम्स विभाग यात्रियों की प्रोफाइलिंग, खुफिया जानकारी और एक्स-रे स्कैनिंग जैसे तरीकों का इस्तेमाल करता है। इस मामले में भी अधिकारियों ने पहले यात्रियों को संदेह के आधार पर रोका और फिर उनके चेक-इन बैग की जांच की।
एक्स-रे स्कैनिंग में संदिग्ध वस्तुएं दिखाई देने के बाद बैगों की गहन तलाशी ली गई। इसी प्रक्रिया के दौरान वैक्यूम-सीलबंद पैकेट सामने आए। प्राथमिक परीक्षण में पदार्थ के गांजा होने की पुष्टि होने के बाद उसे जब्त कर लिया गया।
अधिकारियों ने बरामदगी के बाद दोनों यात्रियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। जांच का उद्देश्य केवल बरामद पदार्थ की उत्पत्ति का पता लगाना ही नहीं, बल्कि यह भी जानना है कि इस खेप को भारत में किसके पास पहुंचाया जाना था।
तस्करी के नेटवर्क की जांच
कस्टम्स विभाग अब इस मामले के संभावित अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय संपर्कों की जांच कर रहा है। अधिकारियों को यह पता लगाना है कि गांजा बैंकॉक में किससे प्राप्त किया गया था, इसे भारत लाने की व्यवस्था किसने की और अहमदाबाद में इसकी डिलीवरी लेने वाला व्यक्ति या समूह कौन था।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि दोनों यात्रियों ने यह सामान अपने स्तर पर लाया था या उन्हें किसी अन्य व्यक्ति या गिरोह ने इसके लिए तैयार किया था। ऐसे मामलों में यात्रियों के संपर्कों, यात्रा संबंधी जानकारी और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जाती है।
फिलहाल अधिकारियों ने संभावित नेटवर्क के बारे में आशंका जताई है, लेकिन किसी बड़े गिरोह की भूमिका की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। दोनों गिरफ्तार यात्रियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई
भारत में गांजा और अन्य प्रतिबंधित मादक पदार्थों से जुड़े अपराधों पर NDPS एक्ट, 1985 के तहत कार्रवाई की जाती है। इस कानून में मादक पदार्थों के अवैध कब्जे, परिवहन, आयात, निर्यात और तस्करी से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
अहमदाबाद एयरपोर्ट पर हुई बरामदगी के बाद कस्टम्स विभाग ने दोनों यात्रियों को संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।
गिरफ्तारी और बरामदगी के बावजूद आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा। फिलहाल जांच एजेंसियां इस खेप से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।
एयरपोर्ट पर निगरानी और कस्टम्स की कार्रवाई
अहमदाबाद एयरपोर्ट पर हुई यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के जरिए मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए कस्टम्स विभाग की निगरानी व्यवस्था को भी रेखांकित करती है। यात्रियों की प्रोफाइलिंग, खुफिया जानकारी और सामान की तकनीकी जांच के आधार पर संदिग्ध यात्रियों को रोककर तलाशी ली जाती है।
इस मामले में भी अधिकारियों ने खुफिया जानकारी के आधार पर यात्रियों की गतिविधियों पर नजर रखी। संदेह होने पर उन्हें रोका गया और एक्स-रे स्कैनिंग के बाद ट्रॉली बैग की तलाशी ली गई। इसी प्रक्रिया के दौरान करीब 13 करोड़ रुपये कीमत का प्रतिबंधित पदार्थ बरामद हुआ।
कस्टम्स विभाग की जांच अब बरामदगी से आगे बढ़कर कथित तस्करी के स्रोत, डिलीवरी व्यवस्था और संभावित सहयोगियों की पहचान पर केंद्रित है।
आगे क्या?
अहमदाबाद एयरपोर्ट पर 13.012 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक गांजे की बरामदगी के बाद दोनों यात्रियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अब जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि इतनी बड़ी खेप को भारत लाने की योजना किसने बनाई और इसके पीछे कौन-कौन शामिल हो सकता है।
कस्टम्स विभाग यह भी जांच कर रहा है कि गांजा बैंकॉक में कहां से आया और अहमदाबाद में इसकी आपूर्ति किसे की जानी थी। यदि जांच में अन्य व्यक्तियों या किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल यह मामला अंतरराष्ट्रीय उड़ान के जरिए कथित मादक पदार्थ तस्करी और एयरपोर्ट पर कस्टम्स की कार्रवाई से जुड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही तस्करी के पूरे नेटवर्क और इस खेप के अंतिम गंतव्य को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।