
गैंगस्टर अनमोल बिश्नोई से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में गृह मंत्रालय ने बड़ा आदेश जारी किया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि आगामी एक वर्ष तक देश की कोई भी पुलिस यूनिट या जांच एजेंसी — चाहे वह राज्य पुलिस हो, दिल्ली पुलिस, NIA या किसी अन्य केंद्रीय एजेंसी — अनमोल बिश्नोई को कस्टडी में नहीं ले पाएगी। यह आदेश BNSS की धारा 303 के तहत जारी किया गया है, जिसके अनुसार ऐसे मामलों में गिरफ्तारी या कस्टडी पर रोक लगाई जा सकती है।
अनमोल बिश्नोई, जो कि तिहाड़ जेल में बंद है, कई बड़े आपराधिक मामलों का आरोपी माना जाता है। उस पर रंगदारी, धमकी, सुपारी किलिंग और गैंग से जुड़े कई गंभीर आरोप हैं। इसके बावजूद, गृह मंत्रालय का यह आदेश उसकी कस्टडी को लेकर पुलिस और जांच एजेंसियों की सीमाएं तय करता है।
मिली जानकारी के अनुसार, मंत्रालय ने यह निर्णय इसलिए लिया क्योंकि कई राज्यों की पुलिस, साथ ही केंद्रीय एजेंसियां, अनमोल बिश्नोई को अपने-अपने मामलों में कस्टडी पर लेने की तैयारी कर रही थीं। इससे जेल और सुरक्षा एजेंसियों पर समन्वय और प्रबंधन से जुड़ा बड़ा दबाव बन रहा था। मंत्रालय ने हालात का जायजा लेने के बाद यह फैसला लिया कि फिलहाल एक साल तक उसकी कस्टडी किसी भी एजेंसी को नहीं सौंपी जाएगी।
इस आदेश में कहा गया है कि अनमोल बिश्नोई फिलहाल तिहाड़ में ही न्यायिक हिरासत में रहेगा और इस अवधि में उसकी सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही, पुलिस और एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने मामलों की जांच तो जारी रखें, लेकिन पूछताछ या कस्टडी के लिए आवेदन फाइल नहीं करेंगे। माना जा रहा है कि यह फैसला इसलिए भी लिया गया है ताकि एजेंसियों के बीच होने वाली रस्साकशी और लॉजिस्टिक मुद्दों से बचा जा सके।
इस मामले में यह भी सामने आया है कि अनमोल बिश्नोई को लेकर कई राज्यों की पुलिस लगातार अनुरोध कर रही थी। कुछ राज्यों ने कोर्ट में प्रोडक्शन वारंट के लिए भी अर्जी दी थी। ऐसे में गृह मंत्रालय के निर्णय से उन सभी प्रक्रियाओं पर भी रोक लग गई है। आदेश के अनुसार, BNSS 303 लागू होने के बाद कोई भी जांच एजेंसी उसे एक साल के भीतर किसी तरह की पूछताछ के लिए भी बाहर नहीं ले जा सकेगी।
इस फैसले के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हलचल बढ़ गई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम उसकी सुरक्षा को देखते हुए उठाया गया होगा, क्योंकि अनमोल बिश्नोई जैसे हाई-प्रोफाइल गैंगस्टर को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना हमेशा जोखिम भरा माना जाता है। इसके अलावा, कई बड़े गैंग पहले भी ऐसे अवसरों में खतरनाक घटनाओं को अंजाम देने की कोशिश कर चुके हैं।
गृह मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में यह भी साफ किया गया है कि तिहाड़ प्रशासन को अनमोल बिश्नोई की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। जेल प्रशासन को कहा गया है कि वह उसकी निगरानी 24×7 बढ़ाए, उसकी बैरक की सुरक्षा सुनिश्चित करे और हर गतिविधि पर सख्त नज़र रखे।
इस कार्रवाई के बाद विपक्ष ने सरकार से सवाल किए हैं कि आखिर एक गैंगस्टर को इतनी लंबी कस्टडी सुरक्षा क्यों दी जा रही है। सरकार से जवाब मांगते हुए कुछ राजनीतिक दलों ने कहा कि ऐसी छूट सामान्य कैदियों या आरोपियों को नहीं मिलती, इसलिए इसका आधार सार्वजनिक होना चाहिए।
हालांकि, मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय पूरी तरह सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों पर आधारित है। एजेंसियों को भी इस फैसले की सूचना दे दी गई है और उन्हें लिखा गया है कि किसी भी परिस्थिति में आदेश का उल्लंघन नहीं किया जाए।
फिलहाल अनमोल बिश्नोई से जुड़े केस अलग-अलग एजेंसियों द्वारा आगे भी जांचे जाएंगे, लेकिन उसकी शारीरिक कस्टडी में अगले एक वर्ष तक कोई भी बदलाव नहीं होगा। यह आदेश लागू होने के बाद जेल प्रशासन ने उसकी बैरक की सुरक्षा बढ़ा दी है और रूटीन जांच भी कड़ी कर दी है।