
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने E20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) नीति को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने यह नीति देश के हितों के बजाय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के लिए लागू की। हालांकि, केंद्र सरकार ने इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। केजरीवाल ने E20 नीति में बदलाव की मांग करते हुए तीन प्रमुख मांगें भी रखीं और इसके समर्थन में आंदोलन तेज करने का ऐलान किया।
केजरीवाल ने कहा कि उनकी पहली मांग यह है कि पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को शुद्ध पेट्रोल और E20 पेट्रोल के बीच अपनी पसंद का विकल्प दिया जाए। उनका तर्क है कि सभी वाहनों की तकनीकी क्षमता समान नहीं होती, इसलिए वाहन मालिकों को अपनी जरूरत के अनुसार ईंधन चुनने का अधिकार मिलना चाहिए।
दूसरी मांग के रूप में उन्होंने सरकार से E20 नीति पर तैयार अध्ययन और तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की अपील की। उनका कहना है कि यदि सरकार के पास इस नीति के पक्ष में वैज्ञानिक और तकनीकी आधार हैं, तो उन्हें जनता के सामने रखा जाना चाहिए ताकि लोगों की शंकाएं दूर हो सकें।
तीसरी मांग में केजरीवाल ने कहा कि यदि E20 ईंधन को अनिवार्य बनाया जाता है, तो उसकी कीमत शुद्ध पेट्रोल की तुलना में कम होनी चाहिए। उनके अनुसार, यदि उपभोक्ताओं को विकल्प नहीं दिया जा रहा है, तो कम से कम मूल्य निर्धारण ऐसा होना चाहिए जिससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
AAP प्रमुख ने घोषणा की कि पार्टी इस मुद्दे पर जनता के हस्ताक्षर अभियान चलाएगी और प्रधानमंत्री आवास तक मार्च करेगी, जहां सरकार को ज्ञापन सौंपा जाएगा। उनका कहना है कि यह अभियान केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार E20 नीति का बचाव करती रही है। सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होती है, किसानों को लाभ मिलता है और पेट्रोल की कीमतों पर वैश्विक तेल बाजार के उतार-चढ़ाव का असर सीमित करने में मदद मिलती है। हाल ही में पेट्रोलियम मंत्रालय ने दावा किया कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के बिना दिल्ली में पेट्रोल की कीमत काफी अधिक हो सकती थी।
E20 ईंधन को लेकर देश में राजनीतिक और तकनीकी बहस लगातार जारी है। एक ओर विपक्ष उपभोक्ताओं की पसंद, पुराने वाहनों पर संभावित प्रभाव और नीति की पारदर्शिता जैसे मुद्दे उठा रहा है, वहीं केंद्र सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।