
ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े चर्चित मामले में एक बड़ा और नाटकीय मोड़ सामने आया है। यौन शोषण और पोक्सो कानून के तहत शिकायत दर्ज कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी ने अब अपने ही आरोपों को लेकर नया दावा किया है। उन्होंने कहा है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ दर्ज कराई गई शिकायत और एफआईआर उनके द्वारा दबाव में की गई थी तथा इसके पीछे रामचंद्र दास की भूमिका थी। इस बयान के बाद कई महीनों से चर्चा में बने इस मामले ने नया राजनीतिक और धार्मिक आयाम ले लिया है।
आशुतोष ब्रह्मचारी ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उन पर दबाव बनाया गया था और उन्हें एक विशेष दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी कार्रवाई के पीछे आश्रम और उससे जुड़े विवादों की पृष्ठभूमि थी। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ लोगों द्वारा आश्रम की संपत्तियों और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर अलग तरह की योजनाएं बनाई जा रही थीं।
गौरतलब है कि इसी वर्ष फरवरी में प्रयागराज की एक विशेष पोक्सो अदालत के निर्देश पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके एक शिष्य के खिलाफ यौन शोषण तथा पोक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। शिकायत आशुतोष ब्रह्मचारी की ओर से दायर याचिका के आधार पर दर्ज हुई थी, जिसमें दो नाबालिगों के कथित शोषण के आरोप लगाए गए थे। अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था।
एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया था। उस समय आशुतोष ब्रह्मचारी ने अदालत के आदेश का स्वागत करते हुए कहा था कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर भरोसा है और जांच के माध्यम से सच सामने आएगा। उन्होंने उस समय आरोपों को गंभीर बताते हुए कार्रवाई की मांग की थी।
दूसरी ओर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शुरू से ही सभी आरोपों को निराधार और साजिश का हिस्सा बताया था। उन्होंने कहा था कि उनका अंतःकरण साफ है और वे जांच में पूरा सहयोग देंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि उन्हें बदनाम करने और उनकी धार्मिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
मामले में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम तब सामने आया जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य को अग्रिम जमानत प्रदान की। अदालत ने अपने आदेश में जांच के दौरान सामने आए कुछ तथ्यों और परिस्थितियों का उल्लेख किया तथा सभी पक्षों को मीडिया में बयानबाजी से बचने की सलाह भी दी थी।
अब आशुतोष ब्रह्मचारी के नए बयान ने पूरे मामले को नई दिशा दे दी है। यदि उनके दावे सही साबित होते हैं तो इससे प्रारंभिक शिकायत और उसके पीछे की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल खड़े हो सकते हैं। वहीं दूसरी ओर यह भी संभव है कि जांच एजेंसियां और न्यायालय इन नए आरोपों की भी स्वतंत्र रूप से जांच करें ताकि पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता स्पष्ट हो सके।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आपराधिक मामले में शिकायतकर्ता द्वारा बाद में दिए गए नए बयान स्वतः मामले को समाप्त नहीं कर देते। जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों, दस्तावेजों और अन्य प्रमाणों के आधार पर अपना निष्कर्ष तैयार करती हैं। इसलिए इस मामले में भी अंतिम स्थिति न्यायिक प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
धार्मिक और सामाजिक महत्व वाले इस विवाद पर अब विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थक इस घटनाक्रम को अपने पक्ष की पुष्टि के रूप में देख रहे हैं, जबकि अन्य पक्षों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। फिलहाल इस प्रकरण में नया मोड़ आने के बाद सभी की नजरें जांच एजेंसियों और न्यायालय की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।