बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर मंडराया खतरा? 1979 के तेहरान बंधक संकट जैसी आशंकाओं ने बढ़ाई चिंता

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बगदाद। इराक की राजधानी बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास के आसपास बढ़ते सुरक्षा जोखिमों ने एक बार फिर 1979 के तेहरान बंधक संकट की यादें ताजा कर दी हैं। हाल के दिनों में ईरान समर्थित शिया मिलिशिया समूहों की गतिविधियों, क्षेत्रीय तनाव और अमेरिका समर्थित सैन्य अभियानों के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि अमेरिकी राजनयिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जा सकता है। हालांकि अब तक बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर किसी नए हमले या घेराबंदी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां हालात पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात की तुलना 1979 में ईरान की राजधानी तेहरान में हुए अमेरिकी दूतावास संकट से इसलिए की जा रही है, क्योंकि उस समय भी राजनीतिक उथल-पुथल और अमेरिका विरोधी माहौल के बीच प्रदर्शनकारियों ने दूतावास पर कब्जा कर लिया था। उस घटना में 52 अमेरिकी राजनयिकों और कर्मचारियों को 444 दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया था, जिसने अमेरिका-ईरान संबंधों को दशकों तक प्रभावित किया।

मौजूदा संकट की पृष्ठभूमि में अमेरिका, ईरान और उसके सहयोगी समूहों के बीच बढ़ा तनाव प्रमुख कारण माना जा रहा है। हाल के महीनों में अमेरिकी और सहयोगी देशों की सैन्य कार्रवाइयों तथा क्षेत्र में सक्रिय ईरान समर्थित गुटों के बीच टकराव बढ़ा है। इसी दौरान कुछ ईरान समर्थित संगठनों की ओर से अमेरिकी हितों को निशाना बनाने की धमकियां भी सामने आई हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, इराकी सरकार ने बगदाद के अत्यधिक सुरक्षित ग्रीन ज़ोन और अमेरिकी दूतावास के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है। अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती, प्रवेश मार्गों की निगरानी और संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है। बताया जा रहा है कि ये कदम संभावित विरोध प्रदर्शनों या किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के उद्देश्य से उठाए गए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बगदाद की स्थिति तेहरान 1979 जैसी पूरी तरह नहीं है। उस समय ईरान में नई इस्लामी क्रांति के बाद केंद्रीय सत्ता परिवर्तन हो चुका था और अमेरिकी दूतावास सीधे क्रांतिकारी छात्रों के निशाने पर आ गया था। जबकि वर्तमान में इराक की सरकार आधिकारिक रूप से अमेरिकी दूतावास की सुरक्षा की जिम्मेदार है और वह किसी भी प्रकार के हमले या घुसपैठ को रोकने की कोशिश कर रही है। हालांकि ईरान समर्थित कुछ सशस्त्र गुटों का प्रभाव अब भी इराक की सुरक्षा स्थिति को जटिल बनाता है।

यह पहली बार नहीं है जब बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर खतरे की आशंका बनी हो। इससे पहले भी ईरान समर्थित गुटों द्वारा रॉकेट और ड्रोन हमलों के प्रयास, ग्रीन ज़ोन में विरोध प्रदर्शन और अमेरिकी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन्हीं घटनाओं के कारण अमेरिका समय-समय पर अपने नागरिकों और राजनयिक कर्मचारियों के लिए सुरक्षा सलाह जारी करता रहा है।

क्षेत्रीय जानकारों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इराक एक बार फिर दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक टकराव का केंद्र बन सकता है। हालांकि फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है कि बगदाद में 1979 जैसी बंधक स्थिति बनने वाली है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को हल्के में नहीं ले रही हैं। इसी कारण अमेरिकी दूतावास और अन्य पश्चिमी राजनयिक मिशनों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है तथा हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

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