बांदीपोरा में आतंकी हमले से निपटने की तैयारी, दो निर्माणाधीन इमारतों में छिपे चार काल्पनिक आतंकियों को सुरक्षाबलों ने किया निष्क्रिय

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बांदीपोरा में आतंकी हमले से निपटने की तैयारी, दो इमारतों में छिपे चार काल्पनिक आतंकियों को सुरक्षाबलों ने किया निष्क्रिय

जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले में सुरक्षाबलों ने संभावित आतंकी हमले से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए एक संयुक्त एंटी-फिदायीन मॉक ड्रिल आयोजित की। इस अभ्यास का उद्देश्य सुरक्षा एजेंसियों की परिचालन क्षमता, आपसी तालमेल और किसी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने की व्यवस्था का आकलन करना था। अभ्यास के दौरान दो निर्माणाधीन इमारतों में छिपे चार काल्पनिक आतंकियों को खोजकर निष्क्रिय करने का परिदृश्य तैयार किया गया। इसके बाद संबंधित टीमों ने परिसर की तलाशी ली और विस्फोटक या अन्य संदिग्ध वस्तुओं की आशंका की जांच की।

यह अभ्यास 28 अक्टूबर 2026 को बांदीपोरा स्थित जिला पुलिस लाइंस (DPL) परिसर में आयोजित किया गया। इसमें जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) बांदीपोरा, जिला पुलिस लाइंस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की तीसरी बटालियन, 14 राष्ट्रीय राइफल्स और 27 असम राइफल्स के जवानों ने हिस्सा लिया। विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त भागीदारी का उद्देश्य यह देखना था कि किसी अचानक पैदा हुई सुरक्षा चुनौती के दौरान सभी टीमें एक साथ किस तरह काम करती हैं।

दो निर्माणाधीन इमारतों में बनाया गया आतंकी हमले का काल्पनिक परिदृश्य

मॉक ड्रिल में ऐसी स्थिति की कल्पना की गई, जिसमें चार संदिग्ध आतंकी दो निर्माणाधीन इमारतों के भीतर मौजूद हों। इस तरह के अभ्यास में सुरक्षा बलों को निर्धारित परिदृश्य के अनुसार कार्रवाई करते हुए संदिग्धों की पहचान करने, परिसर को सुरक्षित बनाने और संभावित खतरे को समाप्त करने की प्रक्रिया का प्रदर्शन करना होता है।

अभ्यास के दौरान चार काल्पनिक आतंकियों को दोनों इमारतों में खोजा गया और निर्धारित परिदृश्य के तहत निष्क्रिय किया गया। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये वास्तविक आतंकियों के मारे जाने या किसी वास्तविक मुठभेड़ की खबर नहीं थी। यह सुरक्षा तैयारियों को जांचने के लिए आयोजित एक पूर्व नियोजित अभ्यास था।

इस प्रकार की ड्रिल सुरक्षा बलों को आपात परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारियों का अभ्यास करने का अवसर देती है। इसमें विभिन्न इकाइयों के बीच समन्वय, उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार कार्रवाई जैसे पहलुओं का आकलन किया जा सकता है।

कई सुरक्षा एजेंसियों ने मिलकर लिया हिस्सा

बांदीपोरा में आयोजित अभ्यास की प्रमुख विशेषता विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त भागीदारी रही। इसमें SOG बांदीपोरा, जिला पुलिस लाइंस, CRPF की तीसरी बटालियन, 14 राष्ट्रीय राइफल्स और 27 असम राइफल्स के कर्मी शामिल हुए।

अलग-अलग एजेंसियों के जवानों का एक साथ अभ्यास करना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी वास्तविक सुरक्षा संकट में कई इकाइयों को एक ही समय पर अपनी-अपनी जिम्मेदारियां निभानी पड़ सकती हैं। ऐसी स्थिति में सूचनाओं का आदान-प्रदान, एक-दूसरे की कार्रवाई से तालमेल और आपात प्रतिक्रिया की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है।

इस अभ्यास का उद्देश्य इन्हीं क्षमताओं का मूल्यांकन करना था। संयुक्त ड्रिल के माध्यम से यह समझने का अवसर मिलता है कि अलग-अलग इकाइयां निर्धारित परिस्थितियों में किस प्रकार समन्वित कार्रवाई करती हैं और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत हो सकती है।

अभ्यास के बाद अधिकारियों और संबंधित कर्मियों के बीच समीक्षा सत्र भी आयोजित किया गया। इस दौरान प्रदर्शन का आकलन करने और भविष्य में तैयारियों को बेहतर बनाने के लिए संभावित सुधार के क्षेत्रों पर चर्चा की गई।

तलाशी और विस्फोटक की आशंका की जांच पर भी रहा जोर

काल्पनिक आतंकियों को निष्क्रिय करने के बाद अभ्यास का अगला चरण परिसर की जांच और सुरक्षा सुनिश्चित करने से जुड़ा था। इसके लिए AST/BDS टीम ने स्निफर डॉग की सहायता से इलाके की तलाशी और सैनिटाइजेशन किया।

BDS का संबंध बम निरोधक दस्ते से है। ऐसी टीमों की भूमिका संदिग्ध विस्फोटक वस्तुओं और संभावित विस्फोटक खतरों की पहचान तथा उनसे निपटने की निर्धारित प्रक्रिया में महत्वपूर्ण होती है। इस अभ्यास में स्निफर डॉग की सहायता से भी परिसर की जांच की गई, ताकि किसी संभावित विस्फोटक या अन्य खतरे की आशंका को परखा जा सके।

क्षेत्र को सैनिटाइज करने का मतलब केवल इमारतों की तलाशी लेना नहीं, बल्कि संबंधित परिसर को सुरक्षित घोषित करने से पहले संभावित खतरों की जांच करना भी है। अभ्यास के दौरान परिसर की पूरी तरह तलाशी ली गई, उसे सुरक्षित बनाने की प्रक्रिया पूरी की गई और अंत में सुरक्षित घोषित किया गया।

यह चरण इसलिए भी अहम है, क्योंकि किसी सुरक्षा अभियान में मुख्य खतरे को निष्क्रिय करने के बाद आसपास के क्षेत्र की जांच करना और संभावित जोखिमों का आकलन करना भी आवश्यक होता है।

चिकित्सा सहायता और घायलों के प्रबंधन की भी जांच

मॉक ड्रिल में केवल सुरक्षा कार्रवाई पर ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि आपात स्थिति में चिकित्सा सहायता और संभावित घायलों के प्रबंधन की व्यवस्था को भी परखा गया। अभ्यास के दौरान एंबुलेंस की तैनाती और काल्पनिक रूप से घायल लोगों को संभालने की प्रक्रिया का आकलन किया गया।

किसी भी आपात स्थिति में चिकित्सा सहायता की व्यवस्था सुरक्षा प्रतिक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। यदि किसी घटना में लोग घायल हो जाएं, तो समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने और उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए संबंधित टीमों के बीच तालमेल जरूरी होता है।

इस अभ्यास में काल्पनिक हताहतों के प्रबंधन को शामिल करके यह जांचने का प्रयास किया गया कि ऐसी स्थिति में चिकित्सा संसाधनों का इस्तेमाल किस तरह किया जा सकता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी वास्तविक व्यक्ति के घायल होने या किसी वास्तविक हमले में एंबुलेंस बुलाए जाने की बात नहीं कही गई है। चिकित्सा संबंधी गतिविधियां मॉक ड्रिल का हिस्सा थीं।

ब्रीफिंग और डीब्रीफिंग के जरिए प्रदर्शन की समीक्षा

अभ्यास पूरा होने के बाद ब्रीफिंग और डीब्रीफिंग सत्र आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य पूरी कार्रवाई की समीक्षा करना और उन क्षेत्रों की पहचान करना था, जहां आगे सुधार किया जा सकता है।

ऐसे सत्रों में अभ्यास के दौरान अपनाई गई प्रक्रियाओं, अलग-अलग इकाइयों के बीच तालमेल और आपात प्रतिक्रिया की व्यवस्था पर चर्चा की जा सकती है। इससे सुरक्षा कर्मियों को अपनी तैयारियों का मूल्यांकन करने और भविष्य के अभ्यासों को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

बांदीपोरा की इस ड्रिल में भी परिसर की तलाशी और सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद समीक्षा प्रक्रिया अपनाई गई। इसके साथ ही पूरे परिसर को सुरक्षित घोषित करने के बाद अभ्यास समाप्त किया गया।

एंटी-फिदायीन मॉक ड्रिल का उद्देश्य क्या है?

एंटी-फिदायीन मॉक ड्रिल एक ऐसा अभ्यास है, जिसमें सुरक्षा बल संभावित आत्मघाती या अन्य गंभीर आतंकी हमले जैसी काल्पनिक स्थिति से निपटने की तैयारी करते हैं। इसका उद्देश्य वास्तविक हमले का इंतजार करने के बजाय पहले से निर्धारित परिस्थितियों में अपनी प्रतिक्रिया और समन्वय को परखना होता है।

इस तरह के अभ्यास में अलग-अलग सुरक्षा इकाइयों की भूमिकाओं, आपात स्थिति में प्रतिक्रिया, परिसर की जांच, चिकित्सा सहायता और सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्रक्रिया जैसे पहलुओं का परीक्षण किया जा सकता है। अभ्यास से प्राप्त अनुभव के आधार पर प्रशिक्षण और समन्वय में सुधार के अवसर भी पहचाने जा सकते हैं।

हालांकि, किसी एक मॉक ड्रिल के आयोजन से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि भविष्य में हर संभावित स्थिति से निपटने की सभी चुनौतियां समाप्त हो गई हैं। इसका महत्व तैयारियों की समीक्षा, कमियों की पहचान और आगे सुधार की प्रक्रिया में है।

बांदीपोरा में सुरक्षा तैयारियों पर क्यों दिया गया जोर?

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों के लिए विभिन्न परिस्थितियों में समन्वित प्रतिक्रिया की तैयारी महत्वपूर्ण रहती है। बांदीपोरा में आयोजित इस अभ्यास का घोषित उद्देश्य भी संभावित आतंकी हमले की स्थिति में परिचालन तत्परता, एजेंसियों के बीच तालमेल और आपात प्रतिक्रिया की व्यवस्था को परखना था।

इस अभ्यास में सुरक्षा कार्रवाई के साथ विस्फोटक की आशंका की जांच, परिसर को सुरक्षित घोषित करने और चिकित्सा सहायता के प्रबंधन को भी शामिल किया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि ड्रिल केवल काल्पनिक आतंकियों को निष्क्रिय करने तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसके बाद की सुरक्षा और आपात व्यवस्थाओं का भी परीक्षण किया गया।

हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में इस अभ्यास को किसी खास खुफिया चेतावनी या तत्काल संभावित हमले से जोड़ने वाली पुष्टि नहीं दी गई है। इसलिए इसे सुरक्षा बलों की तैयारी और समन्वय पर केंद्रित एक नियमित अभ्यास के रूप में ही समझना उचित है।

निष्कर्ष

28 अक्टूबर को बांदीपोरा के जिला पुलिस लाइंस परिसर में आयोजित एंटी-फिदायीन मॉक ड्रिल में पुलिस, CRPF, राष्ट्रीय राइफल्स और असम राइफल्स के कर्मियों ने संयुक्त रूप से भाग लिया। अभ्यास के दौरान दो निर्माणाधीन इमारतों में मौजूद चार काल्पनिक आतंकियों को निर्धारित परिदृश्य के तहत निष्क्रिय किया गया। इसके बाद स्निफर डॉग की सहायता से परिसर की तलाशी और सैनिटाइजेशन किया गया।

ड्रिल में चिकित्सा सहायता, एंबुलेंस की तैनाती और काल्पनिक घायलों के प्रबंधन की व्यवस्था भी परखी गई। पूरी जांच के बाद परिसर को सुरक्षित घोषित किया गया और समीक्षा सत्र के साथ अभ्यास समाप्त हुआ।

इस संयुक्त अभ्यास का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा एजेंसियों की परिचालन तैयारी को मजबूत करना, आपसी समन्वय का आकलन करना और किसी संभावित आपात स्थिति में प्रभावी प्रतिक्रिया देने की क्षमता में सुधार के अवसर पहचानना था।

तथ्य-जांच नोट: उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, यह एक काल्पनिक आतंकी हमले पर आधारित मॉक ड्रिल थी, वास्तविक मुठभेड़ नहीं। अभ्यास में चार काल्पनिक आतंकियों को निष्क्रिय करने, स्निफर डॉग की मदद से तलाशी लेने और चिकित्सा प्रतिक्रिया का परीक्षण करने की जानकारी दी गई है। किसी वास्तविक आतंकी हमले या वास्तविक हताहत की पुष्टि इन रिपोर्टों में नहीं है।

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