भोपाल के MLA रेस्ट हाउस में हंगामा! कांग्रेस विधायक के आवंटित कमरे में आपत्तिजनक हालत में मिले युवक-युवती

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MLA रेस्ट हाउस में कांड! कांग्रेस विधायक के कमरे में आपत्तिजनक हालत में मिले युवक-युवती, विधानसभा सचिवालय को दी शिकायत

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित विधायक विश्राम गृह में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां महिदपुर से कांग्रेस विधायक दिनेश जैन ‘बॉस’ को आवंटित कमरे में एक युवक और युवती कथित तौर पर आपत्तिजनक हालत में मिले। बताया जा रहा है कि दोनों पुलिस की वर्दी पहने हुए थे। अचानक विधायक के वहां पहुंचने पर दोनों घबरा गए और कुछ ही देर में मौके से चले गए।

यह घटना 2 नवंबर 2026 की बताई जा रही है, लेकिन इसकी जानकारी सामने आने के बाद 7 नवंबर को मामला चर्चा में आ गया। विधायक ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर सुरक्षा चूक बताते हुए मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय के प्रमुख सचिव को लिखित शिकायत दी है। शिकायत के बाद विधानसभा सचिवालय ने लोक निर्माण विभाग यानी PWD को जांच के निर्देश दिए हैं।

अब जांच का मुख्य सवाल यह है कि विधायक के नाम पर आवंटित कमरे तक बाहरी लोग कैसे पहुंचे और उन्हें कमरे की चाबी किसने उपलब्ध कराई।

दिल्ली से लौटे थे कांग्रेस विधायक दिनेश जैन

जानकारी के मुताबिक, महिदपुर से कांग्रेस विधायक दिनेश जैन बॉस 2 नवंबर को दिल्ली से भोपाल लौटे थे। दोपहर करीब दो से तीन बजे के बीच वह विधायक विश्राम गृह पहुंचे। यहां के ब्लॉक नंबर 3 में उन्हें दो कमरे आवंटित किए गए थे।

विधायक ने बताया कि उन्होंने अपने आवंटित कमरों में जाने के लिए केयरटेकर से चाबी मांगी। उन्हें एक कमरे की चाबी उपलब्ध कराई गई, जबकि दूसरे कमरे की चाबी तत्काल नहीं मिली।

जब वह कमरे के पास पहुंचे तो उन्हें पता चला कि उनके नाम पर आवंटित दूसरे कमरे में पहले से कोई मौजूद है। अंदर पहुंचने पर उन्होंने एक युवक और युवती को कथित तौर पर आपत्तिजनक स्थिति में देखा।

विधायक के अचानक सामने आने से दोनों घबरा गए। बताया गया कि वे कुछ समय के लिए वहां रुके और फिर मौका मिलते ही वहां से चले गए।

कमरा नंबर 14 और 15 को लेकर क्या है पूरा मामला?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, विधायक दिनेश जैन को ब्लॉक नंबर 3 में कमरा नंबर 14 और 15 आवंटित किए गए थे। विधायक जब वहां पहुंचे तो उन्होंने पहले कमरा नंबर 15 की चाबी मांगी, लेकिन उन्हें बताया गया कि उसकी चाबी उपलब्ध नहीं है। इसके बाद उन्हें कमरा नंबर 14 की चाबी दी गई।

विधायक का आरोप है कि पास के कमरे में युवक और युवती मौजूद थे। इस घटनाक्रम ने उन्हें हैरान कर दिया, क्योंकि दोनों की मौजूदगी के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी।

इस मामले में अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में कमरों के नंबर और घटनाक्रम के कुछ विवरण अलग-अलग बताए गए हैं। इसलिए कमरे की चाबी और प्रवेश से जुड़ी पूरी स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

पुलिस की वर्दी में होने की बात भी आई सामने

इस मामले में एक और चर्चा का विषय युवक और युवती की कथित वर्दी है। कुछ स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि दोनों पुलिस की वर्दी पहने हुए थे।

हालांकि, उनकी पहचान, विभाग में पद और वहां पहुंचने का उद्देश्य अभी आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है। पुलिस विभाग या विधानसभा सचिवालय की ओर से भी इस संबंध में कोई विस्तृत सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई है।

इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों वास्तव में पुलिसकर्मी थे या किसी अन्य कारण से वर्दी पहने हुए थे। जांच में उनकी पहचान और कमरे तक पहुंचने की परिस्थितियों का पता लगाया जाना महत्वपूर्ण होगा।

विधायक ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

घटना के बाद दिनेश जैन ने विधायक विश्राम गृह की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि जब विधायक भोपाल से बाहर रहते हैं, तब उनके कमरों की चाबियां मुख्य काउंटर पर केयरटेकर के पास जमा रहती हैं।

कमरों की सफाई और रखरखाव के लिए कर्मचारियों को जरूरत के अनुसार चाबी दी जाती है। विधायक का आरोप है कि इसी व्यवस्था का गलत इस्तेमाल कर कोई बाहरी व्यक्ति उनके आवंटित कमरे तक पहुंच सकता है।

उन्होंने सवाल उठाया कि बिना उनकी अनुमति के किसी दूसरे व्यक्ति को उनके कमरे में प्रवेश कैसे मिला। उनके अनुसार, यह केवल निजी आवंटित कमरे का मामला नहीं, बल्कि सरकारी परिसर की सुरक्षा और कर्मचारियों की जवाबदेही से भी जुड़ा है।

विधायक ने आशंका जताई कि यदि कमरों की चाबी और प्रवेश व्यवस्था पर नियंत्रण नहीं है, तो भविष्य में कोई गंभीर घटना भी हो सकती है।

विधानसभा सचिवालय को लिखित शिकायत

दिनेश जैन ने मामले को लेकर मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय के प्रमुख सचिव को लिखित शिकायत दी। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।

विधायक ने शिकायत में यह जानना चाहा कि उनके नाम पर आवंटित कमरे में युवक और युवती कैसे पहुंचे। साथ ही यह भी पता लगाने की मांग की कि कमरे की चाबी किस कर्मचारी के पास थी और किसकी अनुमति से किसी अन्य व्यक्ति को वहां प्रवेश मिला।

विधानसभा सचिवालय ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए इसे लोक निर्माण विभाग को भेज दिया है।

PWD ने शुरू की मामले की जांच

विधायक की शिकायत के बाद लोक निर्माण विभाग ने जांच शुरू कर दी है। विभाग का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि विश्राम गृह में कमरों के आवंटन और चाबियों के रखरखाव की व्यवस्था में कहां चूक हुई।

जांच के दौरान संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ की जा सकती है। इसके अलावा कमरे की चाबी किसे दी गई, उस दिन ड्यूटी पर कौन कर्मचारी मौजूद था और आगंतुकों की एंट्री का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध है या नहीं, इन पहलुओं की भी पड़ताल की जा सकती है।

कुछ स्थानीय रिपोर्टों में CCTV फुटेज और ड्यूटी रजिस्टर की जांच किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि युवक-युवती वहां किस तरह पहुंचे और किसी कर्मचारी की लापरवाही थी या नहीं।

मध्य प्रदेश विधानसभा के जनसंपर्क अधिकारी ने भी घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि विधायक की लिखित शिकायत के बाद PWD मामले की जांच कर रहा है।

सरकारी विश्राम गृह की व्यवस्था पर उठे सवाल

विधायक विश्राम गृह ऐसा सरकारी परिसर है, जहां राज्य के विधायकों को विधानसभा और अन्य आधिकारिक कार्यों के दौरान ठहरने के लिए कमरे आवंटित किए जाते हैं।

ऐसे परिसर में कमरों का आवंटन, चाबियों का प्रबंधन, आगंतुकों की पहचान और सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है। किसी दूसरे व्यक्ति का विधायक के नाम पर आवंटित कमरे तक पहुंच जाना इन व्यवस्थाओं की समीक्षा की जरूरत को सामने लाता है।

इस घटना के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या विश्राम गृह में आने-जाने वाले लोगों का उचित रिकॉर्ड रखा जाता है। क्या किसी कमरे की चाबी देने से पहले संबंधित विधायक की अनुमति ली जाती है? क्या केयरटेकर के पास चाबियों के इस्तेमाल का लिखित रिकॉर्ड मौजूद रहता है?

इन सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद मिल सकते हैं।

क्या कर्मचारियों की लापरवाही से हुआ मामला?

विधायक ने अपनी शिकायत में चाबी रखने और कमरे तक पहुंच की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि उनकी अनुपस्थिति में कमरे की चाबी काउंटर पर रहती है और इसका दुरुपयोग हुआ हो सकता है।

हालांकि, अभी तक यह साबित नहीं हुआ है कि किसी कर्मचारी ने जानबूझकर युवक-युवती को कमरे में प्रवेश दिया था। यह भी स्पष्ट नहीं है कि दोनों को चाबी किसने दी या वे किसी अन्य रास्ते से वहां पहुंचे।

इसी वजह से PWD की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच में यदि किसी कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

जांच रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी पूरी तस्वीर

फिलहाल मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विधायक की शिकायत के आधार पर जांच शुरू हो चुकी है। जांच अधिकारियों को यह पता लगाना होगा कि युवक-युवती की पहचान क्या है, वे वहां किस उद्देश्य से पहुंचे थे और उन्हें विधायक के कमरे तक पहुंच कैसे मिली।

इसके साथ ही विश्राम गृह में चाबियों के रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की जा सकती है।

जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक किसी कर्मचारी या संबंधित व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।

निष्कर्ष

भोपाल के विधायक विश्राम गृह में कांग्रेस विधायक दिनेश जैन बॉस के नाम पर आवंटित कमरे में युवक और युवती के कथित तौर पर आपत्तिजनक हालत में मिलने की घटना ने सरकारी परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विधायक ने विधानसभा सचिवालय को शिकायत देकर जांच और कार्रवाई की मांग की है। सचिवालय ने मामला PWD को सौंप दिया है और विभाग ने जांच शुरू कर दी है।

अब यह देखना होगा कि जांच में कमरे की चाबी और प्रवेश व्यवस्था को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या किसी कर्मचारी की लापरवाही साबित होती है।

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