बिजनौर: निजी नर्सिंग होम में प्रैक्टिस करते पकड़े गए CMO, महिला आयोग की टीम को देखकर टॉयलेट में जाकर छिपे

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उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के चांदपुर कस्बे में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) एक निजी नर्सिंग होम में अवैध रूप से प्रैक्टिस करते हुए पकड़े गए। यह खुलासा तब हुआ जब महिला आयोग की टीम अचानक निरीक्षण करने वहां पहुंची। टीम को देखते ही CMO इतना घबरा गए कि तुरंत टॉयलेट में जाकर छिप गए, लेकिन टीम ने उन्हें वहीं से बरामद कर लिया।

यह प्रकरण प्रशासनिक लापरवाही और निजी अस्पतालों की अनियमितताओं की पोल खोलने वाला बन गया है। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें CMO और अस्पताल संचालकों की हड़बड़ाहट साफ दिखाई देती है।


अचानक पहुंची महिला आयोग की टीम, मचा हड़कंप

महिला आयोग की सदस्य संगीता तेवतिया अपने दल के साथ चांदपुर में एक निजी नर्सिंग होम का निरीक्षण करने पहुंचीं। उन्हें पहले से शिकायतें मिल रही थीं कि यह अस्पताल बिना उचित लाइसेंस और योग्य चिकित्सकों के संचालित हो रहा है। इसके अलावा वहाँ मरीजों के साथ लापरवाही और महिला कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए थे।

जैसे ही महिला आयोग की टीम अस्पताल के अंदर दाखिल हुई, वहां अफरा-तफरी मच गई। टीम ने जब एक कमरे में जाकर देखा तो वहां बिजनौर के CMO एक मरीज की जांच करते हुए पाए गए। टीम को देखते ही CMO घबरा गए और तुरंत टॉयलेट की ओर भागे। कुछ क्षणों बाद टीम ने उन्हें वहीं से ढूंढ निकाल लिया।


CMO की किरकिरी—सरकारी पद पर रहते निजी प्रैक्टिस का आरोप

सरकारी नियमों के अनुसार, CMO जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को निजी प्रैक्टिस करने की अनुमति नहीं होती। ऐसे पद पर कार्यरत रहते हुए किसी प्राइवेट अस्पताल में मरीजों को देखना न केवल अनुशासनहीनता है बल्कि यह स्वास्थ्य विभाग की नैतिकता पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।

CMO पर आरोप है कि वे इस नर्सिंग होम में लंबे समय से आता-जाता कर रहे थे। यह भी बताया जा रहा है कि वे निजी लाभ के लिए अस्पताल प्रबंधन के साथ मिलकर काम करते थे। इस मामले के उजागर होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है और कई अधिकारी सवालों के घेरे में हैं।


अस्पताल की हालत देख दंग हुई महिला आयोग टीम

नर्सिंग होम के अंदर का दृश्य बेहद चौकाने वाला था। टीम ने पाया कि:

  • अस्पताल का लाइसेंस संदिग्ध था

  • वार्डों में साफ-सफाई का अभाव

  • उपकरण पुराने और खराब हालत में

  • कई नर्सें बिना ट्रेनिंग के काम करती मिलीं

  • मरीजों को बिना सही जांच के दवाइयाँ लिखी जा रही थीं

महिला आयोग सदस्य संगीता तेवतिया ने कहा कि किसी भी अस्पताल में इतनी लापरवाही अस्वीकार्य है। उन्होंने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया।


टॉयलेट में छिपे CMO का वीडियो वायरल

घटना का सबसे हैरान करने वाला हिस्सा वह वीडियो है जिसमें CMO टीम को देखते ही टॉयलेट में छिपते नज़र आते हैं। टीम के सदस्यों ने जब दरवाजा खुलवाया तो वे शर्मिंदा अंदाज में बाहर निकलते दिखाई दिए। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं।

लोगों ने लिखा:

  • “अगर जिले का CMO यही करेगा तो बाकी डॉक्टरों से क्या उम्मीद?”

  • “सरकारी तनख्वाह, निजी कमाई… दोहरा खेल चल रहा था।”

  • “जांच होनी चाहिए कि कितने समय से यह गोरखधंधा चल रहा था।”

यह वीडियो पूरे स्वास्थ्य तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।


नर्सिंग होम संचालकों पर कार्रवाई की तैयारी

महिला आयोग की टीम ने अस्पताल प्रबंधन से तुरंत जवाब मांगा और सभी कागज़ात दिखाने को कहा। लेकिन कई दस्तावेज या तो गायब थे या गैरकानूनी पाए गए। टीम ने तुरंत अस्पताल को नोटिस जारी किया और संचालन पर रोक लगाने की संस्तुति की।

संचालकों से यह भी पूछताछ की जा रही है कि:

  • उन्होंने CMO को किस आधार पर बुलाया?

  • क्या यह एक नियमित व्यवस्था थी?

  • क्या अस्पताल में गैर-प्रशिक्षित स्टाफ को knowingly रखा गया था?

जिला प्रशासन अब पूरे मामले की गहन जांच कर रहा है।


राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल

इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग के कई अफसरों पर भी सवाल उठ रहे हैं। चर्चा यह है कि इतनी बड़ी अनियमितता बिना अधिकारियों की मिलीभगत के संभव नहीं। विपक्षी दलों ने भी तंज कसना शुरू कर दिया है।

कई राजनीतिक नेताओं ने कहा:

  • “अगर CMO निजी प्रैक्टिस करेगा तो जनता का भरोसा कैसे बचेगा?”

  • “यह मामला सस्पेंशन और FIR तक जाना चाहिए।”

  • “स्वास्थ्य विभाग में बड़े स्तर पर सफाई की जरूरत है।”

स्थानीय जनता भी पूरे मामले से नाराज़ है और सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है।


अगले कदम—क्या होगी सजा?

महिला आयोग ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी है। इसके आधार पर संभव है कि:

  • CMO के खिलाफ विभागीय जांच बैठे

  • नर्सिंग होम पर तत्काल सीलिंग की कार्रवाई हो

  • अस्पताल प्रबंधन पर FIR दर्ज हो

  • स्वास्थ्य विभाग में अन्य संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो

यदि जांच में CMO दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें निलंबन, सेवा से हटाने या कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।


निष्कर्ष: सिस्टम की खामियों का खुला सच

यह घटना सिर्फ एक अधिकारी के निजी प्रैक्टिस करने का मामला नहीं है। यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र की गहरी खामियों का आईना है। जब सरकारी अधिकारी खुद नियमों का उल्लंघन करने लगें, तो जनता की सुरक्षा और भरोसा दोनों खतरे में पड़ जाते हैं।

महिला आयोग की इस कार्रवाई ने न केवल एक नर्सिंग होम की सच्चाई उजागर की है, बल्कि यह भी दिखाया है कि निरीक्षण और जवाबदेही कितनी आवश्यक है। अब सवाल है कि क्या सरकार और प्रशासन इस मामले को उदाहरण बनाकर कड़ी कार्रवाई करेगा, या फिर यह भी कई अन्य मामलों की तरह धीरे-धीरे ठंडा पड़ जाएगा।

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