
CJP के तिरंगा मार्च से पहले दिल्ली में बढ़ी हलचल, सेंट्रल पार्क दो दिन बंद, पुलिस की चेतावनी से गरमाया माहौल
16 अक्टूबर के मार्च से पहले कनॉट प्लेस में सुरक्षा बढ़ी
देश की राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले कनॉट प्लेस में हलचल तेज हो गई है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने 16 अक्टूबर 2026 को शाम 5 बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा लेकर पहुंचने की अपील की है। इस घोषणा के बाद नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को आम लोगों के लिए बंद रखने का आदेश जारी किया। वहीं, दिल्ली पुलिस ने भी प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर लोगों से प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन करने वाली किसी सभा में शामिल नहीं होने की अपील की है।
इस पूरे घटनाक्रम में तीन प्रमुख बातें सामने आई हैं। पहली, CJP अपने सदस्यों की गिरफ्तारी के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को तिरंगा मार्च के जरिए उठाना चाहती है। दूसरी, प्रशासन ने कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क को दो दिन के लिए बंद करने का फैसला किया है। तीसरी, दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रस्तावित मार्च पर रोक लगाने से इनकार किया है, लेकिन पुलिस ने अदालत में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाने का भरोसा दिया है।
NDMC के नोटिस में पार्क बंद रखने की वजह ‘प्रशासनिक कारण’ बताई गई है। नोटिस में विस्तृत कारण नहीं दिए गए। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने अपने बयान में क्षेत्र में लागू प्रतिबंधात्मक आदेशों और सुरक्षा व्यवस्था का उल्लेख किया है। पुलिस ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय ध्वज लेकर चलने और राष्ट्रगान गाने से जुड़ी गतिविधियां निर्धारित नियमों, सम्मान और गरिमा के अनुरूप होनी चाहिए।
प्रस्तावित मार्च को लेकर CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने लोगों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने दिल्ली से बाहर रहने वाले लोगों से भी अपने-अपने शहरों में तिरंगा मार्च निकालने का आग्रह किया। दूसरी ओर, पुलिस ने साफ किया है कि लागू निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
NDMC ने 16 और 17 अक्टूबर को पार्क बंद रखने का आदेश दिया
नई दिल्ली नगरपालिका परिषद ने 15 अक्टूबर को जारी सार्वजनिक नोटिस में कहा कि कनॉट प्लेस का सेंट्रल पार्क 16 और 17 अक्टूबर 2026 को आम जनता के लिए बंद रहेगा। नोटिस में बंदी का कारण प्रशासनिक बताया गया है। यह आदेश उस समय सामने आया, जब CJP ने अगले दिन इसी स्थान पर तिरंगा मार्च आयोजित करने का ऐलान किया था।
कनॉट प्लेस दिल्ली का प्रमुख व्यावसायिक और सार्वजनिक क्षेत्र है। यहां दुकानों, बाजारों, कार्यालयों और सार्वजनिक परिवहन के कारण दिनभर लोगों की आवाजाही रहती है। सेंट्रल पार्क इस क्षेत्र के बीचोंबीच स्थित है और आम लोग यहां घूमने, बैठने तथा अन्य गतिविधियों के लिए आते हैं। ऐसे में पार्क का दो दिन बंद रहना स्थानीय लोगों, पर्यटकों और आसपास के कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण है।
NDMC के आदेश में यह नहीं कहा गया कि पार्क को विशेष रूप से CJP के मार्च को रोकने के लिए बंद किया गया है। आधिकारिक नोटिस में केवल प्रशासनिक कारणों का उल्लेख किया गया। हालांकि, समय को देखते हुए यह फैसला प्रस्तावित प्रदर्शन और कनॉट प्लेस में बढ़ाई जा रही सुरक्षा व्यवस्था के बीच आया है।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि NDMC ने पार्क में अनधिकृत प्रवेश रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है। पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे प्रतिबंधात्मक आदेशों के उल्लंघन की स्थिति पैदा करने वाले जमावड़े से दूर रहें।
इस घटनाक्रम में पार्क बंद करने के प्रशासनिक आदेश और पुलिस की सुरक्षा संबंधी चेतावनी को अलग-अलग समझना जरूरी है। पार्क बंद रखने का निर्णय NDMC ने जारी किया है, जबकि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पुलिस की है। प्रस्तावित कार्यक्रम की अनुमति, स्थान और स्वरूप को लेकर अंतिम स्थिति लागू आदेशों तथा प्रशासनिक निर्देशों से तय होगी।
अभिजीत दिपके की लोगों से अपील: शाम 5 बजे तिरंगा लेकर पहुंचें
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने 16 अक्टूबर को शाम 5 बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च आयोजित करने का ऐलान किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर संदेश साझा कर लोगों से राष्ट्रीय ध्वज लेकर कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की। उनके अनुसार, इस मार्च का उद्देश्य तिरंगे के सम्मान, CJP सदस्यों की गिरफ्तारी के विरोध और चुनाव आयोग की जवाबदेही से जुड़े सवालों को सार्वजनिक रूप से उठाना है।
दिपके ने अपने संदेश में कहा कि उनकी पार्टी के सदस्य सौरव दास और आशुतोष रंका को तिरंगा फहराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि राष्ट्रीय ध्वज फहराना अपराध कैसे हो सकता है। इसी आधार पर उन्होंने राजनीतिक दलों, नागरिक समाज के संगठनों और आम नागरिकों से मार्च में शामिल होने की अपील की।
दिपके ने दिल्ली से बाहर रहने वाले लोगों से भी अपने शहरों में तिरंगा मार्च निकालने का आग्रह किया। उनका कहना है कि जो लोग राजधानी नहीं आ सकते, वे अपने क्षेत्र में शाम के समय राष्ट्रीय ध्वज के साथ कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं। इस अपील के जरिए CJP अपने संदेश को दिल्ली से बाहर भी पहुंचाना चाहती है।
दिपके ने यह भी कहा कि उन्हें जेल जाने की चिंता नहीं है और वह तिरंगा लहराने के अपने संकल्प पर कायम रहेंगे। उनके बयान से स्पष्ट है कि पार्टी इस कार्यक्रम को केवल एक स्थानीय सभा के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय ध्वज और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े अपने अभियान के हिस्से के रूप में पेश कर रही है।
हालांकि, किसी कार्यक्रम का घोषित उद्देश्य और सार्वजनिक स्थान पर उसे आयोजित करने की कानूनी स्थिति अलग-अलग विषय हैं। नागरिकों को अपनी मांगें उठाने और शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक सभाओं, जुलूसों और भीड़ के नियंत्रण के लिए लागू नियमों का पालन भी जरूरी है। दिल्ली पुलिस ने इसी संदर्भ में प्रतिबंधात्मक आदेशों का हवाला दिया है।
CJP किन मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रही है?
CJP का प्रस्तावित तिरंगा मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने के मुद्दे से जुड़ा है। पार्टी चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर सवाल उठा रही है और अपने विरोध को राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान से जोड़कर लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है।
भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची की जांच करना और उसे अद्यतन बनाना है। इसके तहत रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाता है और आवश्यक संशोधनों की प्रक्रिया अपनाई जाती है। दूसरी ओर, कुछ विपक्षी दलों और संगठनों ने आशंका जताई है कि इस प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम भी गलत तरीके से हट सकते हैं।
CJP इसी व्यापक बहस के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठा रही है। पार्टी के अनुसार, मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया की जवाबदेही से जुड़े प्रश्नों पर सार्वजनिक चर्चा जरूरी है।
हालांकि, मतदाता सूची से किसी नाम का हटना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि संबंधित व्यक्ति को जानबूझकर मतदान से वंचित किया गया। नाम हटने के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं, जैसे किसी मतदाता की मृत्यु, स्थायी रूप से स्थान बदलना, दोहराई गई प्रविष्टियां या पात्रता से संबंधित अन्य परिस्थितियां। इसलिए किसी विशेष मामले में अनियमितता का निष्कर्ष निकालने के लिए संबंधित रिकॉर्ड और साक्ष्यों की जांच जरूरी होती है।
इसी तरह, किसी अधिकारी के इस्तीफे की राजनीतिक मांग और उस अधिकारी के खिलाफ कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया अलग-अलग हैं। CJP अपनी मांगों को प्रदर्शन के माध्यम से सामने रखना चाहती है, जबकि प्रशासन की जिम्मेदारी सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना और लागू नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।
सौरव दास और आशुतोष रंका की गिरफ्तारी से शुरू हुआ विवाद
प्रस्तावित मार्च की पृष्ठभूमि में CJP के सदस्यों सौरव दास और आशुतोष रंका की गिरफ्तारी का मामला भी महत्वपूर्ण है। रिपोर्टों के अनुसार, 13 अक्टूबर को CJP के कई सदस्य जंतर-मंतर पहुंचे थे। पुलिस का कहना है कि जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद कुछ सदस्य एक निजी परिसर से होकर वहां पहुंचे और पुलिस के काम में बाधा उत्पन्न हुई। इसके बाद पार्टी के सदस्यों को हिरासत में लिया गया और उनके खिलाफ मामले दर्ज किए गए।
रिपोर्टों में बताया गया कि सौरव दास और आशुतोष रंका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। CJP का कहना है कि दोनों को तिरंगा फहराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराना अपराध नहीं है।
यहां CJP के दावे और पुलिस की ओर से बताई गई कार्रवाई के कारणों में अंतर है। पार्टी अपने सदस्यों की गिरफ्तारी को तिरंगे से जोड़ रही है, जबकि पुलिस की ओर से जंतर-मंतर पर प्रवेश, लागू नियमों और पुलिस के काम में कथित बाधा जैसे पहलुओं का उल्लेख किया गया है। किसी गिरफ्तारी की वास्तविक कानूनी स्थिति समझने के लिए दर्ज आरोपों, पुलिस के आधिकारिक विवरण और अदालत के आदेशों को देखना जरूरी है।
राष्ट्रीय ध्वज के इस्तेमाल से जुड़े नियम और सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन आयोजित करने के नियम अलग-अलग विषय हैं। किसी व्यक्ति को राष्ट्रीय ध्वज लेकर चलने या उसका सम्मान करने का अधिकार होने के बावजूद उसे किसी सार्वजनिक स्थान पर सभा आयोजित करते समय लागू प्रतिबंधों का पालन करना पड़ सकता है।
इसी कारण इस मामले में यह देखना जरूरी है कि गिरफ्तारी के समय वास्तव में क्या हुआ, पुलिस ने किन आरोपों के तहत कार्रवाई की और अदालत ने संबंधित व्यक्तियों की हिरासत के बारे में क्या आदेश दिया। CJP ने दोनों सदस्यों की गिरफ्तारी को अपने विरोध अभियान का प्रमुख मुद्दा बनाया है और इसी के बाद तिरंगा मार्च की घोषणा की गई।
दिल्ली पुलिस ने प्रतिबंधात्मक आदेशों का हवाला दिया
दिल्ली पुलिस ने 15 अक्टूबर को प्रस्तावित मार्च को लेकर सार्वजनिक अपील जारी की। पुलिस के अनुसार, कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू हैं। पुलिस ने आम लोगों से ऐसे किसी भी जमावड़े में शामिल न होने की अपील की, जो इन आदेशों का उल्लंघन करता हो।
BNSS की धारा 163 के तहत सक्षम अधिकारी कुछ परिस्थितियों में शांति, सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर सकते हैं। ऐसे आदेशों का उद्देश्य संभावित अव्यवस्था, लोगों की सुरक्षा को खतरे और सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान जैसी परिस्थितियों को रोकना हो सकता है। किसी क्षेत्र में लागू आदेशों की वास्तविक शर्तें और अवधि संबंधित आधिकारिक निर्देशों से निर्धारित होती हैं।
पुलिस ने कहा कि आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। उसने राष्ट्रीय ध्वज लेकर चलने और राष्ट्रगान गाने के दौरान निर्धारित नियमों, सम्मान और गरिमा का पालन करने पर भी जोर दिया।
पुलिस की चेतावनी का अर्थ यह नहीं है कि राष्ट्रीय ध्वज लेकर चलने या राष्ट्रगान गाने की हर गतिविधि पर सामान्य रूप से रोक लगा दी गई है। पुलिस ने संकेत दिया कि उपयुक्त स्थान पर सीमित समूह को तिरंगा लेकर राष्ट्रगान गाने की सुविधा देने पर विचार किया जा सकता है। लेकिन यह प्रस्तावित मार्च में बड़ी सभा की अनुमति के समान नहीं है।
इस स्थिति में आयोजकों और प्रतिभागियों के लिए लागू आदेशों की जानकारी रखना महत्वपूर्ण है। यदि किसी सभा या प्रदर्शन के लिए अनुमति आवश्यक है, तो संबंधित शर्तों का पालन करना जरूरी होगा। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन होने पर कार्रवाई की जा सकती है।
11 लोगों के समूह के लिए संभावित व्यवस्था
दिल्ली पुलिस ने कहा कि वह उपयुक्त स्थान पर 11 लोगों के एक सीमित समूह को राष्ट्रीय ध्वज लेकर राष्ट्रगान गाने की सुविधा देने पर विचार कर सकती है। यह संकेत प्रस्तावित मार्च से पहले सामने आया। हालांकि, इसे CJP के पूरे कार्यक्रम या बड़ी सभा की सामान्य अनुमति नहीं माना जाना चाहिए।
पुलिस के अनुसार, मौजूदा सुरक्षा स्थिति और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए आम लोगों को ऐसे जमावड़े से दूर रहना चाहिए जो निषेधाज्ञा का उल्लंघन कर सकता है। पुलिस ने यह भी कहा कि तिरंगे और राष्ट्रगान से जुड़ी गतिविधियां निर्धारित नियमों के अनुसार होनी चाहिए।
इस प्रस्ताव का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पुलिस ने सीमित समूह के लिए संभावित व्यवस्था का संकेत दिया है, न कि CJP के घोषित मार्च को बिना शर्त मंजूरी दी है। किसी भी अनुमति की वास्तविक स्थिति संबंधित अधिकारियों के अंतिम निर्णय और लागू शर्तों पर निर्भर करेगी।
CJP ने 16 अक्टूबर को शाम 5 बजे सेंट्रल पार्क में लोगों को बुलाया है। वहीं, NDMC ने पार्क को दो दिन के लिए बंद रखने का आदेश दिया है और पुलिस ने क्षेत्र में लागू प्रतिबंधात्मक आदेशों का हवाला दिया है। इन परिस्थितियों में कार्यक्रम का स्वरूप और स्थान प्रशासनिक फैसलों से प्रभावित हो सकता है।
15 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस की ओर से सीमित समूह के प्रस्ताव पर CJP की औपचारिक प्रतिक्रिया स्पष्ट नहीं थी। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि पार्टी ने इस व्यवस्था को स्वीकार कर लिया है या उसके कार्यक्रम के स्वरूप में बदलाव निश्चित हो गया है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने मार्च पर रोक लगाने से इनकार किया
CJP के प्रस्तावित मार्च को रोकने की मांग लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। यह याचिका कनॉट प्लेस के पालिका बाजार में कारोबार करने वाले एक रेहड़ी-पटरी विक्रेता की ओर से दायर की गई। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि सेंट्रल पार्क विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल नहीं है और प्रस्तावित कार्यक्रम से आसपास के कारोबार तथा लोगों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
याचिका में आशंका जताई गई कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस बैरिकेडिंग और आवाजाही पर प्रतिबंधों से व्यापारियों, पैदल यात्रियों और यातायात व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, त्योहारों के मौसम में बाजार में कारोबार प्रभावित होने से दुकानदारों और छोटे व्यापारियों को नुकसान हो सकता है।
15 अक्टूबर को मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रस्तावित मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने पुलिस के उस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया, जिसमें कहा गया था कि कानून के तहत व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
अदालत का मार्च पर रोक न लगाना अपने आप में यह नहीं दर्शाता कि कार्यक्रम को हर प्रकार की गतिविधि के लिए बिना शर्त अनुमति मिल गई है। सार्वजनिक सभा से संबंधित लागू आदेश, पुलिस की जिम्मेदारियां और प्रशासनिक निर्देश अपनी जगह लागू रहते हैं। अदालत ने पुलिस का आश्वासन रिकॉर्ड किया और मामले में अगली सुनवाई के लिए 3 नवंबर 2026 की तारीख बताई गई।
इस घटनाक्रम में अदालत, पुलिस और स्थानीय व्यापारियों की चिंताएं अलग-अलग हैं। याचिकाकर्ता ने बाजार और आवाजाही पर संभावित प्रभाव की बात कही, पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने का आश्वासन दिया और CJP ने अपने कार्यक्रम की घोषणा की। इन सभी पहलुओं का संतुलन लागू नियमों और प्रशासनिक कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
व्यापारियों को क्यों है चिंता?
कनॉट प्लेस दिल्ली का प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र है। यहां बड़े बाजारों, दुकानों, रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की मौजूदगी के कारण सार्वजनिक सभा या यातायात प्रतिबंधों का असर कारोबार पर पड़ सकता है।
प्रस्तावित मार्च को लेकर बाजार और व्यापार से जुड़े लोगों ने पुलिस से सुरक्षा की मांग की थी। पुलिस के बयान के अनुसार, कुछ संगठनों ने आशंका जताई कि अनधिकृत जमावड़े या अव्यवस्थित गतिविधियों से उनके प्रतिष्ठानों और व्यापार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। यह चिंता त्योहारों के मौसम में विशेष महत्व रखती है, जब बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ सकती है।
पालिका बाजार के एक विक्रेता की याचिका में भी यह आशंका उठाई गई कि प्रदर्शन के दौरान बैरिकेडिंग और आवाजाही पर प्रतिबंधों से कारोबार प्रभावित हो सकता है। याचिकाकर्ता ने अदालत से कार्यक्रम पर रोक लगाने की मांग की थी।
हालांकि, व्यापार पर वास्तविक प्रभाव कितना होगा, यह घटनाक्रम और प्रशासनिक व्यवस्था पर निर्भर करेगा। यदि यातायात का मार्ग बदला जाता है, प्रवेश सीमित होता है या सुरक्षा जांच बढ़ाई जाती है, तो आसपास आने-जाने वाले लोगों को अतिरिक्त समय लग सकता है। लेकिन इन संभावित प्रभावों की वास्तविक सीमा के बारे में निष्कर्ष कार्यक्रम के दौरान उपलब्ध जानकारी से ही निकाला जा सकता है।
पुलिस ने व्यापारियों की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कदम उठाने की बात कही है। साथ ही, आम लोगों से प्रतिबंधात्मक आदेशों का पालन करने की अपील की है।
तिरंगा मार्च, सार्वजनिक विरोध और कानून-व्यवस्था का सवाल
इस विवाद ने सार्वजनिक विरोध के अधिकार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन का प्रश्न सामने रखा है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिक और राजनीतिक संगठन अपनी मांगों को सार्वजनिक रूप से उठा सकते हैं। लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर सभाओं, जुलूसों और यातायात से संबंधित नियमों का पालन भी जरूरी होता है।
CJP का कहना है कि उसका कार्यक्रम तिरंगे के सम्मान, चुनावी जवाबदेही और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग से जुड़ा है। पार्टी ने इस आयोजन के जरिए लोगों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की है। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि कनॉट प्लेस में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू हैं और किसी भी अवैध जमावड़े से सार्वजनिक सुरक्षा तथा संपत्ति को खतरा हो सकता है।
इन दोनों पक्षों के बीच वास्तविक स्थिति लागू आदेशों और प्रशासन की ओर से तय की गई शर्तों से स्पष्ट होगी। किसी प्रदर्शन की मांगों पर सहमति या असहमति और उस प्रदर्शन को किस स्थान पर तथा किन शर्तों के तहत आयोजित किया जा सकता है, ये अलग-अलग प्रश्न हैं।
राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान और सार्वजनिक सुरक्षा, दोनों महत्वपूर्ण विषय हैं। किसी आयोजन के दौरान ध्वज और राष्ट्रगान से संबंधित नियमों का पालन करना आवश्यक है। इसी तरह, पुलिस और प्रशासन को भी अपनी कार्रवाई लागू कानूनों के अनुरूप करनी होती है।
इस मामले में विवाद का केंद्र केवल तिरंगा मार्च नहीं है। इसमें CJP सदस्यों की गिरफ्तारी, चुनाव आयोग की जवाबदेही, मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने और सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए स्थान चुनने जैसे कई मुद्दे जुड़े हैं। इसलिए घटनाक्रम को समझने के लिए इन मुद्दों को एक साथ देखने के साथ-साथ उनके कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं को अलग-अलग समझना भी जरूरी है।
16 अक्टूबर को क्या स्थिति बन सकती है?
प्रस्तावित मार्च से पहले NDMC का आदेश, पुलिस की चेतावनी और हाईकोर्ट की सुनवाई के परिणाम ने स्थिति को संवेदनशील बना दिया है। सेंट्रल पार्क दो दिन तक आम लोगों के लिए बंद रहेगा। पुलिस ने आम जनता से प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन करने वाली सभा में शामिल न होने की अपील की है और सीमित समूह के लिए संभावित व्यवस्था का संकेत दिया है।
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने लोगों को शाम 5 बजे तिरंगा लेकर पहुंचने के लिए कहा है। पार्टी ने दिल्ली के बाहर रहने वाले लोगों से भी अपने-अपने शहरों में कार्यक्रम आयोजित करने की अपील की है। दूसरी ओर, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था से संबंधित आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
ऐसे में कार्यक्रम का वास्तविक स्वरूप आयोजकों के फैसलों, पुलिस की व्यवस्था और लागू प्रतिबंधों पर निर्भर करेगा। फिलहाल किसी संभावित टकराव या अव्यवस्था को निश्चित मानना उचित नहीं होगा। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की बात कही है, जबकि अदालत ने मार्च पर रोक लगाने के बजाय पुलिस के आश्वासन को रिकॉर्ड किया है।
आम लोगों के लिए महत्वपूर्ण है कि वे सेंट्रल पार्क बंद रहने की सूचना और पुलिस की सार्वजनिक अपील को ध्यान में रखें। कनॉट प्लेस जाने वाले लोगों को स्थानीय प्रतिबंधों और यातायात संबंधी निर्देशों की जानकारी लेकर अपनी यात्रा की योजना बनानी चाहिए।
निष्कर्ष: तिरंगा मार्च से पहले प्रशासन और CJP आमने-सामने
CJP के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले दिल्ली के कनॉट प्लेस में सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। NDMC ने सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को बंद रखने का आदेश दिया है। दिल्ली पुलिस ने BNSS की धारा 163 के तहत लागू प्रतिबंधात्मक आदेशों का हवाला देते हुए लोगों से प्रतिबंधित जमावड़े से दूर रहने की अपील की है।
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने 16 अक्टूबर को शाम 5 बजे तिरंगा लेकर सेंट्रल पार्क पहुंचने का आह्वान किया है। पार्टी इस कार्यक्रम को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने और चुनाव आयोग की जवाबदेही की मांग से जोड़ रही है। दिपके ने अपने दो साथियों की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान को भी कार्यक्रम का प्रमुख मुद्दा बनाया है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रदर्शन पर रोक लगाने से इनकार किया, लेकिन पुलिस का यह आश्वासन रिकॉर्ड पर लिया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। पुलिस ने सीमित समूह के लिए तिरंगा लेकर राष्ट्रगान गाने की संभावित व्यवस्था का संकेत दिया है, लेकिन इसे पूरे मार्च की बिना शर्त अनुमति नहीं माना जा सकता।
अब कार्यक्रम की स्थिति लागू प्रतिबंधों, आयोजकों के रुख और प्रशासनिक व्यवस्था पर निर्भर करेगी। इस घटनाक्रम में सार्वजनिक विरोध के अधिकार, राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान, बाजार की गतिविधियों और कानून-व्यवस्था से जुड़े प्रश्न एक साथ सामने आए हैं। आगे की स्थिति इस बात से स्पष्ट होगी कि आयोजक और प्रशासन लागू नियमों के तहत किस तरह कदम उठाते हैं।