दिल्ली जिमखाना क्लब को केंद्र का ‘कारण बताओ’ नोटिस, पूछा- क्यों न खाली कराई जाए 27.3 एकड़ सरकारी जमीन?

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देश के प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक क्लबों में शामिल दिल्ली जिमखाना क्लब एक बार फिर चर्चा में है। केंद्र सरकार ने क्लब के खिलाफ बेदखली की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए पब्लिक प्रीमिसेस (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में क्लब से पूछा गया है कि उसके खिलाफ बेदखली का आदेश क्यों न पारित किया जाए। सरकार का कहना है कि क्लब जिस 27.3 एकड़ सरकारी जमीन पर स्थित है, उसकी लीज समाप्त हो चुकी है और अब यह भूमि राष्ट्रीय महत्व की सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए आवश्यक है।

नोटिस के अनुसार, यह भूमि नई दिल्ली के 2, सफदरजंग रोड स्थित अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र में स्थित है। केंद्र सरकार का दावा है कि राष्ट्रपति द्वारा लीज डीड की संबंधित शर्तों के तहत भूमि को सार्वजनिक उद्देश्य के लिए पुनः अपने अधिकार में लेने का निर्णय लिया गया था। सरकार का कहना है कि लीज समाप्त होने के बाद क्लब का परिसर पर बने रहना “अनधिकृत कब्जा” की श्रेणी में आता है।

एस्टेट ऑफिसर की ओर से जारी नोटिस में दिल्ली जिमखाना क्लब को 7 जुलाई 2026 तक अपना लिखित जवाब दाखिल करने और उसी दिन व्यक्तिगत रूप से या अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि क्लब तय समय पर जवाब नहीं देता या सुनवाई में उपस्थित नहीं होता, तो उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर एकतरफा (Ex-Parte) कार्रवाई करते हुए बेदखली का आदेश पारित किया जा सकता है।

केंद्र सरकार का कहना है कि संबंधित भूमि रक्षा अवसंरचना, सार्वजनिक सुरक्षा, प्रशासनिक जरूरतों और अन्य जनहित परियोजनाओं के लिए आवश्यक है। सरकार के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी में स्थित इतनी महत्वपूर्ण सरकारी जमीन का उपयोग व्यापक सार्वजनिक हित में किया जाना चाहिए। इसी आधार पर भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने पहले क्लब की लीज समाप्त करने की कार्रवाई की थी और परिसर खाली करने के लिए भी नोटिस जारी किया गया था।

सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, क्लब को मई 2026 में लीज समाप्त होने की सूचना दी गई थी और 5 जून तक परिसर खाली करने को कहा गया था। सरकार का आरोप है कि निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बावजूद क्लब ने परिसर खाली नहीं किया, जिसके बाद अब कानूनी बेदखली प्रक्रिया अगले चरण में पहुंच गई है।

दिल्ली जिमखाना क्लब का इतिहास एक सदी से भी अधिक पुराना है। इसकी स्थापना ब्रिटिश शासनकाल में हुई थी और वर्ष 1928 में तत्कालीन सरकार ने इसे स्थायी लीज पर भूमि आवंटित की थी। स्वतंत्रता के बाद यह क्लब देश के सबसे प्रतिष्ठित सामाजिक और खेल संस्थानों में शामिल हो गया। यहां वरिष्ठ नौकरशाहों, सैन्य अधिकारियों, न्यायपालिका, उद्योग जगत और विभिन्न क्षेत्रों की कई प्रमुख हस्तियां सदस्य रही हैं।

हालांकि पिछले कुछ वर्षों से क्लब प्रशासन को लेकर भी विवाद सामने आते रहे हैं। वर्ष 2022 में राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) के आदेश के बाद क्लब के प्रबंधन में केंद्र सरकार की ओर से नियुक्त समिति ने जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद से क्लब के प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन और संचालन से जुड़े कई मुद्दे चर्चा में रहे हैं।

इस मामले पर पहले दिल्ली हाईकोर्ट में भी सुनवाई हो चुकी है। क्लब ने लीज समाप्त करने के सरकारी निर्णय को चुनौती दी थी। उस दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया था कि यदि बेदखली की कार्रवाई की जाएगी तो वह पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए ही की जाएगी। अदालत ने तत्काल राहत देने से इनकार किया था और मामले की सुनवाई जारी है।

अब कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद मामला निर्णायक चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। यदि क्लब अपने पक्ष में संतोषजनक जवाब और कानूनी आधार प्रस्तुत नहीं कर पाता, तो एस्टेट ऑफिसर बेदखली का आदेश जारी कर सकते हैं। दूसरी ओर क्लब के पास भी अपने अधिकारों और दावों को कानूनी रूप से प्रस्तुत करने का अवसर रहेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला प्रशासनिक और न्यायिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बना रहेगा।

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