दिल्ली के किराड़ी समेत 4 इलाकों को जलभराव से मिलेगी राहत, 4.5 किमी ट्रंक ड्रेन को मंजूरी, लाखों लोगों को होगा फायदा

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दिल्ली में हर साल बारिश के मौसम में जलभराव की समस्या से जूझने वाले हजारों परिवारों के लिए राहत की खबर सामने आई है। राजधानी के पश्चिमी हिस्से में लंबे समय से बारिश के पानी की निकासी की समस्या झेल रहे किराड़ी समेत चार विधानसभा क्षेत्रों के लिए एक बड़ी ट्रंक ड्रेन परियोजना को मंजूरी मिल गई है। करीब 4.5 किलोमीटर लंबी इस ड्रेन का निर्माण रेलवे लाइन के समानांतर किया जाएगा और इसके जरिए बारिश के पानी को तेजी से बाहर निकालने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।

मंगलवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई बैठक में व्यय वित्त समिति यानी EFC ने इस परियोजना को मंजूरी दी। प्रस्तावित ड्रेन की अनुमानित लागत 263.45 करोड़ रुपये बताई गई है और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग को इसे दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। परियोजना से किराड़ी के साथ मुंडका, बवाना और नांगलोई जाट विधानसभा क्षेत्रों के कई हिस्सों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

दिल्ली में तेजी से हुए शहरीकरण और बड़ी संख्या में विकसित हुई अनधिकृत कॉलोनियों के कारण कई इलाकों में मौजूदा जल निकासी व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। भारी बारिश के दौरान जब नालियों की क्षमता से ज्यादा पानी जमा हो जाता है, तो सड़कें, गलियां और कई बार घरों के आसपास के क्षेत्र पानी में डूब जाते हैं। किराड़ी और आसपास के इलाकों में यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है।

नई ट्रंक ड्रेन को इसी समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना के रूप में देखा जा रहा है।

4.5 किलोमीटर लंबी होगी नई ड्रेन

प्रस्तावित ट्रंक ड्रेन करीब 4.5 किलोमीटर लंबी होगी। इसे रेलवे लाइन के साथ बनाया जाएगा और इसका एक प्रमुख उद्देश्य आसपास की छोटी तथा माध्यमिक नालियों से आने वाले बारिश के पानी को एक बड़े आउटफॉल सिस्टम तक पहुंचाना होगा।

परियोजना से संबंधित सरकारी दस्तावेजों में 4.5 किलोमीटर लंबी नई ड्रेन को मुंडका हॉल्ट स्टेशन से सप्लीमेंटरी ड्रेन तक विकसित करने का प्रस्ताव दर्ज है। इसका इस्तेमाल 70 से अधिक अनधिकृत कॉलोनियों के बारिश के पानी की निकासी के लिए किया जाना है।

नई ड्रेन को केवल एक स्थानीय नाली के रूप में नहीं बल्कि बड़े जल निकासी नेटवर्क के हिस्से के तौर पर विकसित किया जा रहा है। इसका मतलब है कि आसपास की छोटी नालियों और आंतरिक ड्रेनेज नेटवर्क से आने वाले पानी को मुख्य ट्रंक ड्रेन में जोड़ा जाएगा।

इस तरह बारिश के दौरान अलग-अलग इलाकों में पानी जमा होने के बजाय उसे एक निर्धारित मार्ग से आगे ले जाने की व्यवस्था बनाई जाएगी।

किन चार विधानसभा क्षेत्रों को मिलेगा फायदा?

इस परियोजना से मुख्य रूप से चार विधानसभा क्षेत्रों को फायदा मिलने की उम्मीद है। इनमें किराड़ी, मुंडका, बवाना और नांगलोई जाट शामिल हैं।

इन इलाकों के कई हिस्से लंबे समय से जलभराव की समस्या से प्रभावित रहे हैं। खासकर भारी बारिश के दौरान कई अनधिकृत कॉलोनियों और घनी आबादी वाले इलाकों में पानी जमा होने की समस्या सामने आती रही है।

सरकार के अनुसार प्रस्तावित ट्रंक ड्रेन से इन क्षेत्रों में रहने वाले लाखों लोगों को बेहतर जल निकासी सुविधा मिल सकती है। किराड़ी क्षेत्र की 70 से अधिक अनधिकृत कॉलोनियां इस परियोजना से सीधे लाभान्वित होने वाली प्रमुख बस्तियों में शामिल हैं।

इन चार विधानसभा क्षेत्रों का भौगोलिक विस्तार बड़ा है और यहां अलग-अलग तरह की आवासीय तथा औद्योगिक बस्तियां मौजूद हैं। इसलिए मुख्य ड्रेन बनने के बाद इसका असर केवल एक सड़क या एक कॉलोनी तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है।

किराड़ी में सबसे गंभीर है जलभराव की समस्या

किराड़ी दिल्ली के उन इलाकों में शामिल है जहां मानसून के दौरान जलभराव की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। इलाके में बड़ी संख्या में अनधिकृत कॉलोनियां हैं और कई जगहों पर पुरानी जल निकासी व्यवस्था वर्तमान आबादी के हिसाब से पर्याप्त नहीं मानी जाती।

सरकारी दस्तावेजों में भी किराड़ी विधानसभा क्षेत्र को गंभीर जलभराव से प्रभावित क्षेत्र बताया गया है। प्रस्तावित नई ड्रेन को किराड़ी की 70 अनधिकृत कॉलोनियों के लिए अंतिम बारिश के पानी की निकासी का प्रमुख माध्यम बनाने की योजना है।

बारिश के दौरान पानी की निकासी धीमी होने पर सड़कों पर लंबे समय तक पानी जमा रह सकता है। इससे यातायात प्रभावित होने के साथ-साथ पैदल चलने वालों और स्थानीय निवासियों के लिए भी परेशानी पैदा होती है।

कई इलाकों में जलभराव का असर बिजली, सीवर व्यवस्था और स्थानीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। ऐसे में बड़ी क्षमता वाली ट्रंक ड्रेन से पानी को तेजी से बाहर निकालने की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।

मुंडका के कई इलाके भी होंगे शामिल

मुंडका विधानसभा क्षेत्र के कई आवासीय और औद्योगिक इलाकों को भी इस परियोजना का लाभ मिलेगा। इनमें रानीखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र और वेणु एन्क्लेव के साथ कई अनधिकृत कॉलोनियां शामिल हैं।

रतन पार्क, राजधानी पार्क, जे.जे. क्लस्टर कॉलोनी, राजेंद्र पार्क एक्सटेंशन, राम नगर, कुंवर सिंह नगर और निलोठी गांव जैसे इलाकों का भी परियोजना के लाभार्थी क्षेत्रों में उल्लेख किया गया है।

इन क्षेत्रों में आबादी के विस्तार के साथ-साथ निर्माण गतिविधियां भी बढ़ी हैं। इससे बारिश के पानी के प्राकृतिक प्रवाह और पुराने ड्रेनेज सिस्टम पर दबाव बढ़ सकता है।

नई ट्रंक ड्रेन का उद्देश्य इसी अतिरिक्त पानी को मुख्य निकासी नेटवर्क से जोड़ना है।

बवाना में रोहिणी के आसपास के क्षेत्र भी जुड़ेंगे

बवाना विधानसभा क्षेत्र के तहत रोहिणी सेक्टर 20, 21 और 22 के कुछ हिस्सों को भी इस जल निकासी व्यवस्था से फायदा मिलने की जानकारी सामने आई है। इन क्षेत्रों से आने वाले पानी को मुख्य ड्रेनेज नेटवर्क से जोड़ने की योजना है।

शहरी इलाकों में जब नई कॉलोनियां और सड़कें तेजी से बनती हैं तो बारिश के पानी के लिए उपलब्ध खुली जमीन कम हो जाती है। इससे पानी के जमीन में प्राकृतिक रूप से समाने की क्षमता घट सकती है और सतही जल प्रवाह बढ़ सकता है।

ऐसे में बड़े ड्रेनेज नेटवर्क की जरूरत बढ़ जाती है। बवाना और आसपास के क्षेत्रों में भी नई ट्रंक ड्रेन इसी व्यापक व्यवस्था का हिस्सा होगी।

नांगलोई जाट के इलाकों को भी राहत की उम्मीद

नांगलोई जाट विधानसभा क्षेत्र के जे.जे. क्लस्टर नांगलोई, अध्यापक नगर और शिवराम पार्क जैसे इलाकों को भी प्रस्तावित ड्रेन का लाभ मिलने की जानकारी दी गई है।

इन इलाकों में भी बारिश के दौरान पानी की निकासी से जुड़ी समस्याएं सामने आती रही हैं। नई ड्रेन बनने के बाद स्थानीय नालियों को मुख्य आउटफॉल से जोड़ने की क्षमता बेहतर हो सकती है।

हालांकि किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का वास्तविक असर उसके निर्माण, कनेक्टिविटी और रखरखाव पर निर्भर करता है। इसलिए परियोजना पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अलग-अलग इलाकों में जलभराव कितनी मात्रा में कम होता है।

760 क्यूसेक होगी ड्रेन की डिस्चार्ज क्षमता

प्रस्तावित ड्रेन का डिजाइन डिस्चार्ज करीब 760 क्यूसेक रखा गया है। इसका अर्थ है कि ड्रेन को भारी बारिश के दौरान बड़ी मात्रा में पानी को आगे ले जाने की क्षमता के हिसाब से डिजाइन किया जा रहा है।

सरकारी परियोजना दस्तावेजों में भी 760 क्यूसेक की डिस्चार्ज क्षमता का उल्लेख है। इसका उद्देश्य बारिश के मौसम में पानी की निकासी को बेहतर बनाना है।

ड्रेनेज सिस्टम की क्षमता निर्धारित करते समय उस क्षेत्र में संभावित बारिश, कैचमेंट क्षेत्र, मौजूदा नालियों से आने वाले पानी और भविष्य में बढ़ने वाले जल प्रवाह जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है।

इसलिए बड़ी क्षमता वाली ट्रंक ड्रेन को आसपास के छोटे ड्रेनेज नेटवर्क से जोड़ना परियोजना की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगा।

70 से अधिक अनधिकृत कॉलोनियों को सीधा लाभ

इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका लाभ बड़ी संख्या में अनधिकृत कॉलोनियों को मिलने की उम्मीद है। सरकारी दस्तावेजों में किराड़ी की 70 अनधिकृत कॉलोनियों के लिए इस ड्रेन को मुख्य आउटफॉल के रूप में विकसित करने की बात कही गई है।

दिल्ली के कई हिस्सों में अनधिकृत कॉलोनियां तेजी से विकसित हुई हैं। कई जगहों पर बुनियादी शहरी सुविधाएं आबादी की गति के अनुरूप विकसित नहीं हो पाईं। जल निकासी भी ऐसी ही सुविधाओं में शामिल है।

जब बारिश होती है तो इन कॉलोनियों से निकलने वाला पानी आसपास की सड़कों और निचले क्षेत्रों में जमा हो सकता है। नई ट्रंक ड्रेन इस पानी को एक बड़े नेटवर्क में ले जाने का रास्ता तैयार करेगी।

रेलवे लाइन के किनारे बनेगी ड्रेन

परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ड्रेन का निर्माण रेलवे लाइन के साथ किया जाएगा। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार यह ड्रेन उत्तरी रेलवे की भूमि के साथ विकसित करने का प्रस्ताव है और रेलवे के साथ इस संबंध में समझौता भी किया जा चुका है।

रेलवे भूमि के इस्तेमाल के लिए अनुमति और समन्वय आवश्यक होता है। इस परियोजना के लिए रेलवे की ओर से काम की अनुमति दिए जाने और संबंधित विभागों के बीच समझौता होने की जानकारी सरकारी दस्तावेजों में दर्ज है।

रेलवे कॉरिडोर के साथ ड्रेन बनाने से एक ऐसा निर्धारित मार्ग उपलब्ध होगा जहां बड़े पैमाने पर जल निकासी का नेटवर्क विकसित किया जा सकता है।

हालांकि निर्माण के दौरान रेलवे संचालन, उपयोगिताओं और आसपास के क्षेत्रों से जुड़े तकनीकी पहलुओं का भी ध्यान रखना होगा।

परियोजना की लागत 263.45 करोड़ रुपये

मंगलवार को मंजूर किए गए मौजूदा प्रस्ताव की लागत 263.45 करोड़ रुपये बताई गई है। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग इस परियोजना को लागू करेगा और दिसंबर 2027 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

पहले के सरकारी दस्तावेजों में इसी 4.5 किलोमीटर ड्रेन की अनुमानित लागत करीब 220.93 करोड़ रुपये दर्ज थी। उस समय परियोजना की लंबाई लगभग 4.48 किलोमीटर बताई गई थी।

समय के साथ परियोजना के अनुमान, लागत और कार्यक्षेत्र में बदलाव हो सकते हैं। इसलिए वर्तमान मंजूरी में बताई गई लागत और समयसीमा को मौजूदा परियोजना स्थिति के संदर्भ में देखना जरूरी है।

ड्रेनेज मास्टर प्लान का हिस्सा

दिल्ली में जलभराव की समस्या को लेकर सरकार ने व्यापक ड्रेनेज मास्टर प्लान तैयार किया है। इसका उद्देश्य केवल किसी एक सड़क या इलाके की नाली को चौड़ा करना नहीं बल्कि पूरे शहर के प्रमुख जल निकासी नेटवर्क को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

इस योजना के तहत बड़े ट्रंक ड्रेन विकसित करने, पुराने ड्रेनेज सिस्टम की क्षमता बढ़ाने और बारिश के पानी को प्रमुख आउटफॉल तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।

इससे पहले दिल्ली सरकार ने चार बड़े ट्रंक ड्रेन प्रोजेक्ट को प्राथमिकता देने की योजना बताई थी। इनमें मुंडका हॉल्ट से सप्लीमेंटरी ड्रेन, एमबी रोड स्टॉर्मवॉटर ड्रेन नेटवर्क, किराड़ी-रिठाला ट्रंक ड्रेन और एनएच-10 के साथ स्टॉर्मवॉटर ड्रेन नेटवर्क शामिल थे।

इस व्यापक योजना का लक्ष्य अलग-अलग जलभराव प्रभावित क्षेत्रों को बड़े और वैज्ञानिक जल निकासी नेटवर्क से जोड़ना है।

केवल नाली बनाने से नहीं होगा समाधान

बारिश के पानी की निकासी के लिए मुख्य ड्रेन का निर्माण महत्वपूर्ण है, लेकिन अकेले ट्रंक ड्रेन से हर जगह जलभराव खत्म होना जरूरी नहीं है। स्थानीय गलियों और कॉलोनियों की छोटी नालियों को भी मुख्य नेटवर्क से सही तरीके से जोड़ना होगा।

यदि छोटी नालियां बंद हों, उनमें कचरा जमा हो या उनका स्तर मुख्य ड्रेन से सही तरीके से न जुड़ा हो तो बड़ी ट्रंक ड्रेन की क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाएगा।

इसीलिए परियोजना में माध्यमिक और छोटी नालियों को मुख्य ट्रंक सिस्टम से जोड़ने की व्यवस्था महत्वपूर्ण है। पहले से मौजूद सरकारी योजना में भी आसपास की कई सेकेंडरी ड्रेनों के पानी को मुख्य ड्रेन में एकीकृत करने की बात कही गई है।

पुरानी समस्या का स्थायी समाधान बनाने की कोशिश

दिल्ली के कई हिस्सों में बारिश के दौरान जलभराव की समस्या हर साल दोहराई जाती है। कुछ इलाकों में बारिश बंद होने के बाद भी पानी लंबे समय तक जमा रहता है।

इससे स्थानीय यातायात प्रभावित होता है और कई बार लोगों को अपने घरों और दुकानों तक पहुंचने में परेशानी होती है।

ऐसे में सरकार द्वारा प्रस्तावित बड़ी ट्रंक ड्रेन का उद्देश्य बार-बार अस्थायी पंपिंग या छोटी मरम्मत करने के बजाय एक स्थायी जल निकासी नेटवर्क तैयार करना है।

हालांकि स्थायी समाधान का वास्तविक मूल्यांकन तभी संभव होगा जब परियोजना पूरी हो और मानसून के दौरान इसकी क्षमता का परीक्षण हो।

दिल्ली में चार बड़े ट्रंक ड्रेन प्रोजेक्ट

नई परियोजना को दिल्ली के व्यापक ड्रेनेज सुधार कार्यक्रम के संदर्भ में देखा जा रहा है। इससे पहले सरकार ने चार बड़े ट्रंक ड्रेन प्रोजेक्ट को प्राथमिकता देने की जानकारी दी थी।

इनमें पश्चिमी दिल्ली के किराड़ी-मुंडका क्षेत्र के अलावा दक्षिण दिल्ली का एमबी रोड क्षेत्र, उत्तर-पश्चिम दिल्ली का किराड़ी-रिठाला क्षेत्र और एनएच-10 के साथ जल निकासी व्यवस्था शामिल है। इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 1,000 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई थी।

इन योजनाओं का उद्देश्य अलग-अलग जलभराव हॉटस्पॉट को मुख्य जल निकासी नेटवर्क से जोड़ना है।

एमबी रोड और अन्य क्षेत्रों में भी चल रहा काम

दक्षिण दिल्ली में एमबी रोड के लाडो सराय टी-पॉइंट से पुल प्रहलादपुर तक बारिश के पानी की निकासी सुधारने के लिए अलग परियोजना शामिल की गई है। इसी तरह किराड़ी-रिठाला क्षेत्र और एनएच-10 के आसपास भी ड्रेनेज सुधार योजनाएं चल रही हैं।

इससे संकेत मिलता है कि दिल्ली में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए सरकार अलग-अलग इलाकों में एक साथ बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट आगे बढ़ा रही है।

हालांकि इन सभी परियोजनाओं की समयसीमा और प्रगति अलग-अलग है। इसलिए हर क्षेत्र को राहत मिलने का समय भी अलग हो सकता है।

बारिश के पानी को सीवर सिस्टम से अलग करने पर जोर

शहरी जल निकासी में एक महत्वपूर्ण समस्या यह होती है कि बारिश का पानी और सीवेज सिस्टम एक-दूसरे पर दबाव बढ़ा सकते हैं। बड़े स्टॉर्मवॉटर ड्रेन का उद्देश्य बारिश के पानी को अलग मार्ग से बाहर निकालना है ताकि सीवर नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

दिल्ली के ड्रेनेज मास्टर प्लान में भी प्रमुख ट्रंक ड्रेन की क्षमता बढ़ाकर बारिश के पानी को सुरक्षित तरीके से आगे ले जाने और सीवर सिस्टम पर दबाव कम करने का लक्ष्य बताया गया है।

किराड़ी और आसपास के इलाकों में नई ड्रेन इसी दृष्टिकोण का हिस्सा है।

अनियोजित शहरीकरण से बढ़ी समस्या

किराड़ी, मुंडका, बवाना और नांगलोई जाट जैसे इलाकों में पिछले वर्षों में तेजी से शहरी विस्तार हुआ है। कई क्षेत्रों में आवासीय कॉलोनियां, औद्योगिक क्षेत्र और अन्य निर्माण गतिविधियां बढ़ीं।

जब खुले क्षेत्र कम होते हैं तो बारिश का पानी जमीन में समाने के बजाय सतह पर बहता है। यदि उसके लिए पर्याप्त निकासी व्यवस्था न हो तो जलभराव बढ़ सकता है।

इसीलिए नई ड्रेन परियोजना को केवल नाली निर्माण के रूप में नहीं बल्कि शहरी जल प्रबंधन के बड़े प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

अब आगे क्या होगा?

परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद निर्माण से जुड़े अगले चरणों में टेंडर, साइट तैयारी, तकनीकी कार्य और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय शामिल होगा। सरकारी रिकॉर्ड में इस परियोजना के लिए रेलवे के साथ समन्वय और निर्माण संबंधी प्रक्रियाओं का उल्लेख पहले से मौजूद है।

नई मंजूरी के बाद परियोजना के कार्यान्वयन की गति महत्वपूर्ण होगी। दिसंबर 2027 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

यदि निर्धारित समय में निर्माण पूरा होता है और स्थानीय छोटी नालियां भी मुख्य ड्रेन से प्रभावी रूप से जुड़ती हैं, तो मानसून के दौरान इन क्षेत्रों में पानी की निकासी की क्षमता में उल्लेखनीय बदलाव आ सकता है।

लाखों लोगों को राहत की उम्मीद

किराड़ी, मुंडका, बवाना और नांगलोई जाट के जिन इलाकों में हर साल बारिश के दौरान जलभराव की परेशानी सामने आती है, वहां नई ट्रंक ड्रेन से बेहतर जल निकासी की उम्मीद की जा रही है।

70 से अधिक अनधिकृत कॉलोनियों को सीधे लाभ मिलने की बात सामने आई है। इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्रों, आवासीय कॉलोनियों और आसपास के दूसरे हिस्सों में भी अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है।

हालांकि राहत का वास्तविक असर परियोजना पूरी होने और उसके बाद होने वाली भारी बारिश के दौरान ही स्पष्ट होगा।

फिलहाल 4.5 किलोमीटर लंबी ट्रंक ड्रेन को मंजूरी मिलना उन इलाकों के लिए महत्वपूर्ण विकास है जहां जलभराव वर्षों से स्थानीय समस्या बना हुआ है। परियोजना का उद्देश्य बारिश के पानी को व्यवस्थित तरीके से मुख्य आउटफॉल तक पहुंचाना, छोटी नालियों को बड़े नेटवर्क से जोड़ना और जल निकासी की क्षमता बढ़ाना है।

अगर निर्माण तय समयसीमा में पूरा होता है और ड्रेनेज नेटवर्क का नियमित रखरखाव भी सुनिश्चित किया जाता है, तो किराड़ी, मुंडका, बवाना और नांगलोई जाट के कई हिस्सों में मानसून के दौरान होने वाले जलभराव को कम करने में मदद मिल सकती है।

इस परियोजना के साथ दिल्ली के व्यापक ड्रेनेज मास्टर प्लान पर भी नजर रहेगी। राजधानी में लगातार बढ़ती आबादी, तेजी से हो रहे निर्माण और बदलते मौसम के बीच बारिश के पानी की निकासी अब केवल मानसून की समस्या नहीं बल्कि शहरी बुनियादी ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। ऐसे में बड़ी ट्रंक ड्रेन परियोजनाओं की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे स्थानीय नालियों, सीवर सिस्टम और बड़े आउटफॉल नेटवर्क के साथ कितनी प्रभावी तरह से जुड़ती हैं।

फिलहाल किराड़ी समेत चार विधानसभा क्षेत्रों के लिए मंजूर यह परियोजना उन लाखों लोगों के लिए उम्मीद लेकर आई है जो हर मानसून जलभराव के कारण परेशानी झेलते हैं। अब चुनौती इस योजना को कागज से जमीन पर उतारने और तय समय में प्रभावी जल निकासी व्यवस्था तैयार करने की है।

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