99.95% टाइम पर चली दिल्ली मेट्रो, DMRC का बड़ा दावा; जानिए कौन सी मेट्रो रही देरी से

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नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो ने समय पर ट्रेन संचालन के मामले में एक नया रिकॉर्ड बनाया है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) के मुताबिक, 2026 में मेट्रो ट्रेनों की समयपालन दर यानी पंक्चुअलिटी 99.95 प्रतिशत रही है। खास बात यह है कि DMRC देरी की गणना के लिए काफी सख्त मानक अपनाता है। अगर कोई ट्रेन अपने निर्धारित गंतव्य पर 59 सेकंड से ज्यादा देर से पहुंचती है, तो उसे देरी से चलने वाली ट्रेन माना जाता है।

दिल्ली मेट्रो के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नेटवर्क लगातार विस्तार कर रहा है और रोजाना यात्रियों की संख्या भी करोड़ों के करीब पहुंच चुकी है। DMRC के अनुसार, मौजूदा समय में मेट्रो नेटवर्क पर औसतन 64.06 लाख यात्री यात्राएं प्रतिदिन दर्ज की जा रही हैं। इसके बावजूद ट्रेनों की समयपालन दर करीब 100 प्रतिशत के आसपास बनाए रखना संचालन की मजबूती को दिखाता है।

2003 में 98.27% से अब 99.95%

दिल्ली मेट्रो की पंक्चुअलिटी में पिछले दो दशकों में लगातार सुधार हुआ है। DMRC के आंकड़ों के मुताबिक, 2003 में ट्रेनों की समयपालन दर 98.27 प्रतिशत थी। 2005 तक यह बढ़कर 99.64 प्रतिशत हो गई। इसके बाद भी मेट्रो की पंक्चुअलिटी लगभग 99.9 प्रतिशत के आसपास बनी रही और अब 2026 में यह आंकड़ा 99.95 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

इसका मतलब है कि हर 10,000 ट्रेन संचालन में बेहद कम सेवाएं ही DMRC के तय मानक के अनुसार देरी वाली श्रेणी में आती हैं। हालांकि 99.95 प्रतिशत का आंकड़ा यह नहीं बताता कि हर ट्रेन बिल्कुल निर्धारित सेकंड पर पहुंची, बल्कि यह DMRC के निर्धारित पंक्चुअलिटी मानक के अनुसार ट्रेन संचालन को दर्शाता है।

कौन सी मेट्रो रही देरी वाली?

DMRC के मौजूदा आंकड़े पूरे नेटवर्क की 99.95 प्रतिशत पंक्चुअलिटी बताते हैं। उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में किसी एक खास लाइन को सबसे ज्यादा देरी वाली लाइन घोषित नहीं किया गया है। इसलिए किसी विशेष लाइन को ‘सबसे ज्यादा लेट’ बताना सही नहीं होगा।

DMRC के अनुसार, किसी ट्रेन के गंतव्य स्टेशन पर निर्धारित समय से 60 सेकंड या उससे ज्यादा की देरी होने पर उसे पंक्चुअल नहीं माना जाता है। यह मानक यात्रियों के लिए मामूली लग सकता है, लेकिन इतने बड़े नेटवर्क में हजारों सेवाओं पर इसे लागू करना काफी सख्त संचालन मानक है।

रोजाना 64 लाख से ज्यादा यात्री

दिल्ली मेट्रो का नेटवर्क पिछले वर्षों में काफी तेजी से बढ़ा है। DMRC के मुताबिक, शुरुआती दौर में जहां रोजाना करीब 82 हजार यात्री यात्राएं होती थीं, वहीं अब औसत दैनिक यात्री यात्राएं 64.06 लाख तक पहुंच चुकी हैं। 8 अगस्त 2025 को नेटवर्क ने एक दिन में 81 लाख से अधिक यात्री यात्राओं का रिकॉर्ड भी बनाया था।

यात्रियों की इतनी बड़ी संख्या के बीच ट्रेन संचालन में थोड़ी सी गड़बड़ी भी कई लाइनों और स्टेशनों पर असर डाल सकती है। इसके बावजूद पंक्चुअलिटी को 99.95 प्रतिशत पर बनाए रखना DMRC के लिए बड़ी उपलब्धि है।

ट्रेन में खराबी भी कम हुई

समय पर ट्रेन चलने के साथ-साथ मेट्रो की तकनीकी विश्वसनीयता का भी प्रदर्शन बेहतर हुआ है। DMRC के अनुसार, Mean Distance Between Failures (MDBF) यानी किसी सेवा प्रभावित करने वाली खराबी से पहले ट्रेन द्वारा तय की जाने वाली औसत दूरी 27.2 लाख कार-किलोमीटर रही।

MDBF जितना अधिक होता है, सामान्य तौर पर इसका मतलब होता है कि ट्रेन या संबंधित सिस्टम को सेवा प्रभावित करने वाली खराबी का सामना कम बार करना पड़ रहा है। DMRC ने इसे अपने संचालन की विश्वसनीयता का महत्वपूर्ण संकेतक बताया है।

दुनिया की टॉप मेट्रो प्रणालियों में शामिल

DMRC के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय संस्था Community of Metros (COMET) के 45 प्रमुख मेट्रो सिस्टमों के साथ किए जाने वाले बेंचमार्किंग में दिल्ली मेट्रो दो मिनट की देरी के मानक पर दुनिया की टॉप पांच सबसे विश्वसनीय मेट्रो प्रणालियों में शामिल है।

यह उपलब्धि दिल्ली मेट्रो के बढ़ते नेटवर्क के संदर्भ में और महत्वपूर्ण हो जाती है। मौजूदा नेटवर्क करीब 416.5 किलोमीटर तक फैल चुका है और इसमें 303 स्टेशन तथा 12 लाइनें शामिल हैं।

व्यस्त कॉरिडोर पर घटा ट्रेन हेडवे

DMRC ने यह भी बताया कि कुछ सबसे व्यस्त कॉरिडोर पर ट्रेनों के बीच का अंतर यानी हेडवे शुरुआती वर्षों के करीब सात मिनट से घटकर अब 2 मिनट 18 सेकंड तक आ गया है। इसका सीधा फायदा यात्रियों को मिलता है, क्योंकि उन्हें अगली ट्रेन के लिए कम समय इंतजार करना पड़ता है।

यात्री संख्या में भारी बढ़ोतरी के बावजूद ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी, समयपालन और तकनीकी विश्वसनीयता को बनाए रखना दिल्ली मेट्रो के संचालन के लिए बड़ी चुनौती है।

99.95% का आंकड़ा क्यों है खास?

दिल्ली मेट्रो के 99.95 प्रतिशत पंक्चुअलिटी आंकड़े का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब नेटवर्क लगातार विस्तार कर रहा है। नई लाइनें और स्टेशन जुड़ रहे हैं, यात्रियों की संख्या बढ़ रही है और रोजाना हजारों ट्रेन सेवाओं का संचालन हो रहा है।

कुल मिलाकर, DMRC के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली मेट्रो ने 2026 में 99.95 प्रतिशत ट्रेन पंक्चुअलिटी हासिल की है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि मेट्रो की हर ट्रेन बिल्कुल समय पर चली, बल्कि DMRC के सख्त 59-सेकंड वाले मानक के आधार पर इतनी बड़ी संख्या में सेवाएं समय पर संचालित हुईं। फिलहाल उपलब्ध आंकड़ों में किसी एक मेट्रो लाइन को सबसे ज्यादा देरी वाली घोषित नहीं किया गया है।

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