
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में हालिया हिंसक प्रदर्शन के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों में अब तक पांच अलग-अलग थानों में 10 प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं। जांच एजेंसियां प्रदर्शन स्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, ड्रोन वीडियो, मीडिया रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की गहन जांच कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि हिंसा में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की पहचान कर उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच में आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया जा रहा है। फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (Facial Recognition System – FRS) की मदद से वीडियो और तस्वीरों में दिखाई देने वाले संदिग्धों की पहचान की जा रही है। इसके अलावा घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग को विभिन्न पुलिस डेटाबेस से मिलाकर संदिग्धों की भूमिका की पुष्टि की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस का कहना है कि अलग-अलग स्थानों से प्राप्त शिकायतों के आधार पर अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। इन मामलों में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, पुलिसकर्मियों पर हमला करने, कानून-व्यवस्था बाधित करने और अन्य संबंधित धाराओं के तहत जांच आगे बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, वीडियो साक्ष्यों का विश्लेषण कर यह भी पता लगाया जा रहा है कि हिंसा की शुरुआत किन परिस्थितियों में हुई और किन लोगों ने इसमें सक्रिय भूमिका निभाई।
जांच एजेंसियां प्रदर्शन स्थल के अलावा आसपास के इलाकों में लगे निजी और सरकारी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी एकत्र कर रही हैं। पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि किसी के पास घटना से जुड़े फोटो या वीडियो हैं, तो उन्हें जांच में सहयोग के लिए उपलब्ध कराएं। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और इन्हीं के आधार पर कई संदिग्धों की पहचान संभव हो रही है।
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि हिंसा या तोड़फोड़ में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। जिन लोगों की पहचान वीडियो और तकनीकी विश्लेषण के माध्यम से होगी, उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर गिरफ्तारी की कार्रवाई भी की जाएगी। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी तरह साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की जांच की जाएगी।
फेशियल रिकग्निशन तकनीक का उपयोग दिल्ली पुलिस पहले भी विभिन्न जांच और सुरक्षा अभियानों में कर चुकी है। हालांकि इस तकनीक के इस्तेमाल को लेकर समय-समय पर निजता और निगरानी संबंधी बहस भी होती रही है। इस बार पुलिस का कहना है कि इसका उपयोग केवल जांच में उपलब्ध साक्ष्यों के विश्लेषण और संदिग्धों की पहचान के उद्देश्य से किया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है और जैसे-जैसे नए डिजिटल साक्ष्य सामने आएंगे, कार्रवाई का दायरा भी बढ़ सकता है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि घटना से जुड़ी किसी भी अपुष्ट जानकारी या अफवाह पर विश्वास न करें तथा केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। पुलिस ने यह भी दोहराया है कि कानून-व्यवस्था भंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत जवाबदेह बनाया जाएगा।