
देशभर में अनिवार्य रूप से लागू किए गए E20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल को लेकर जारी विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा आलोचकों को चुनौती दिए जाने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता और उद्यमी तहसीन पूनावाला ने दावा किया है कि वह ऐसे एक नहीं बल्कि छह लोगों को सामने लाने के लिए तैयार हैं, जिनका आरोप है कि E20 ईंधन के इस्तेमाल के बाद उनके वाहनों में गंभीर तकनीकी समस्याएं आईं। हालांकि पूनावाला ने इसके लिए एक शर्त भी रखी है। उन्होंने कहा कि यह मुलाकात मीडिया की मौजूदगी में होनी चाहिए और इसका सीधा प्रसारण (लाइव स्ट्रीमिंग) भी किया जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे।
यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब नितिन गडकरी ने हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा कि यदि कोई यह साबित कर दे कि केवल E20 पेट्रोल के कारण किसी कार, बाइक या स्कूटर में खराबी आई है, तो वह स्वयं उस मामले की जांच कराने के लिए तैयार हैं। उन्होंने आलोचकों से कहा कि वे कम से कम एक ऐसा वास्तविक उदाहरण सामने लाएं, जहां वैज्ञानिक रूप से यह सिद्ध हो सके कि वाहन की खराबी की वजह केवल एथेनॉल मिश्रित ईंधन था। मंत्री ने यह भी कहा कि यदि किसी के पास ऐसा मामला है तो वह संबंधित वाहन निर्माता और उन्हें सीधे शिकायत भेज सकता है।
गडकरी की इस चुनौती के जवाब में तहसीन पूनावाला ने कहा कि उनके पास ऐसे छह वाहन मालिक हैं, जो दावा करते हैं कि E20 पेट्रोल का उपयोग करने के बाद उनके वाहनों में माइलेज कम हुआ, इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित हुई या अन्य तकनीकी दिक्कतें सामने आईं। उन्होंने कहा कि यदि मंत्री समय और स्थान तय करें तो वे इन सभी लोगों को उनके सामने पेश करेंगे। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक होनी चाहिए, मीडिया मौजूद रहे और बैठक का लाइव प्रसारण किया जाए ताकि किसी भी पक्ष के बयान को लेकर भ्रम की स्थिति न बने।
तहसीन पूनावाला पिछले कुछ दिनों से E20 नीति के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। उन्होंने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का भी नेतृत्व किया और आरोप लगाया कि E20 पेट्रोल लागू करने से पहले आम उपभोक्ताओं और वाहन मालिकों की चिंताओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उनका कहना है कि विशेष रूप से पुराने मॉडल के वाहनों के मालिकों को ईंधन दक्षता और इंजन प्रदर्शन को लेकर शिकायतें हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
दूसरी ओर केंद्र सरकार लगातार इस नीति का बचाव कर रही है। सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल भारत की ऊर्जा सुरक्षा, कच्चे तेल के आयात में कमी, किसानों की आय बढ़ाने और कार्बन उत्सर्जन घटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पेट्रोलियम मंत्रालय और सड़क परिवहन मंत्रालय का कहना है कि नए वाहन E20 ईंधन के अनुरूप विकसित किए जा रहे हैं और यह ईंधन वैज्ञानिक परीक्षणों तथा नियामकीय प्रक्रियाओं के बाद ही लागू किया गया है। सरकार यह भी स्वीकार करती है कि कुछ वाहनों में माइलेज में मामूली अंतर आ सकता है, लेकिन इसे सामान्य तकनीकी प्रभाव माना जाता है।
हाल के दिनों में E20 पेट्रोल को लेकर बहस तब और तेज हो गई जब सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान एथेनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर की गई कुछ टिप्पणियां सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। इसके बाद सरकार ने स्पष्ट किया कि उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है और E20 कार्यक्रम पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार जारी रहेगा। इसी बीच देश के विभिन्न हिस्सों से कुछ वाहन मालिकों ने ईंधन दक्षता और प्रदर्शन से जुड़ी शिकायतें भी सार्वजनिक रूप से साझा कीं, जबकि सरकार का कहना है कि अब तक ऐसा कोई निर्णायक वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आया है जो केवल E20 ईंधन को वाहन क्षति का कारण साबित करता हो।
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी वाहन के प्रदर्शन पर ईंधन के अलावा इंजन की स्थिति, वाहन की उम्र, रखरखाव, ईंधन प्रणाली की गुणवत्ता और निर्माता द्वारा निर्धारित तकनीकी मानकों का भी प्रभाव पड़ता है। इसलिए यदि किसी वाहन में समस्या आती है तो उसका तकनीकी परीक्षण आवश्यक होता है। केवल व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। विशेषज्ञों का सुझाव है कि ऐसे मामलों में वाहन निर्माता, अधिकृत सर्विस सेंटर और स्वतंत्र तकनीकी जांच की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
फिलहाल नितिन गडकरी की चुनौती और तहसीन पूनावाला की सार्वजनिक प्रतिक्रिया के बाद E20 पेट्रोल पर बहस और तेज हो गई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दोनों पक्षों के बीच प्रस्तावित सार्वजनिक बैठक होती है और क्या कथित प्रभावित वाहन मालिकों के मामलों की तकनीकी जांच कराई जाती है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर हरित ईंधन नीति, उपभोक्ता हितों और वैज्ञानिक परीक्षणों के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है।