
85 करोड़ मनी लॉन्ड्रिंग केस: लोढ़ा डेवलपर्स के पूर्व निदेशक राजेंद्र लोढ़ा गिरफ्तार, ED की बड़ी कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित 85 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राजेंद्र लोढ़ा को गिरफ्तार किया है। वे Lodha Developers (पूर्व नाम: मैक्रोटेक डेवलपर्स) के पूर्व निदेशक रह चुके हैं। कार्रवाई महाराष्ट्र में कथित भूमि सौदे से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के सिलसिले में की गई है।
क्या है मामला?
जांच एजेंसियों के मुताबिक, ठाणे क्षेत्र में एक भूमि सौदे से जुड़े लेन-देन में अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के आरोप हैं। आरोप है कि कथित अवैध धन को वैध दिखाने के लिए जटिल वित्तीय लेयरिंग की गई।
ED ने इस मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की थी।
ED की कार्रवाई कैसे आगे बढ़ी?
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संबंधित दस्तावेजों और बैंक खातों की जांच
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संदिग्ध लेन-देन की फॉरेंसिक ऑडिट
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कथित लाभार्थियों और सहयोगियों से पूछताछ
इन चरणों के बाद ED ने राजेंद्र लोढ़ा को हिरासत में लेकर आगे की पूछताछ शुरू की।
कंपनी का पक्ष
मामले पर कंपनी की ओर से आधिकारिक बयान की प्रतीक्षा है। आमतौर पर ऐसे मामलों में कंपनियां जांच में सहयोग का आश्वासन देती हैं और आरोपों को तथ्यों के आधार पर स्पष्ट करने की बात कहती हैं।
फिलहाल यह जांच का विषय है और अंतिम निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
कानूनी पहलू
PMLA के तहत दोष सिद्ध होने पर कठोर दंड का प्रावधान है। हालांकि आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि रियल एस्टेट सेक्टर में बड़े लेन-देन की पारदर्शिता और अनुपालन (compliance) बेहद अहम है।
आगे क्या?
ED आरोपी को कोर्ट में पेश कर रिमांड की मांग कर सकती है। जांच के दायरे में अन्य संबंधित व्यक्ति और संस्थाएं भी आ सकती हैं।
जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि कथित राशि का अंतिम लाभार्थी कौन था और धन का प्रवाह किन-किन खातों से होकर गुजरा।
निष्कर्ष
85 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राजेंद्र लोढ़ा की गिरफ्तारी ने रियल एस्टेट सेक्टर में हलचल पैदा कर दी है। जांच जारी है और सच्चाई न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।