
फरीदाबाद में पार्किंग विवाद ने लिया खूनी रूप, सिंगापुर से आए परमजीत धनकड़ की हत्या का आरोपी गिरफ्तार
हरियाणा के फरीदाबाद में धनतेरस की रात हुई एक सनसनीखेज हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। सेक्टर-21C में रहने वाले 42 वर्षीय परमजीत धनकड़ की उनके ही पड़ोसी ने कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी थी। परमजीत कुछ दिन पहले ही सिंगापुर से भारत लौटे थे। वह दिवाली अपने परिवार के साथ मनाने और भांजे की शादी में शामिल होने के लिए फरीदाबाद आए थे। लेकिन त्योहार की खुशियों के बीच एक मामूली पार्किंग विवाद ने ऐसा खतरनाक रूप ले लिया कि उनकी जान चली गई।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपनी लाइसेंसी पिस्टल से करीब 15 से 16 राउंड फायर किए। इनमें से कई गोलियां परमजीत को लगीं और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी अपने परिवार के साथ फरार हो गया था। पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमें उसकी तलाश में जुटी थीं। अब मुख्य आरोपी मोहन उर्फ मोनू शर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और वारदात से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना फरीदाबाद के सेक्टर-21C स्थित एक रिहायशी इमारत की है। परमजीत धनकड़ अपने परिवार के साथ इसी इमारत की पहली मंजिल पर रहते थे। उनका परिवार कुछ समय से यहां रह रहा था, जबकि आरोपी मोहन उर्फ मोनू शर्मा उसी इमारत की तीसरी मंजिल पर रहता था। दोनों परिवारों के बीच पहले से ही कुछ बातों को लेकर विवाद चल रहा था।
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि दोनों परिवारों के बीच वाहन पार्किंग को लेकर अक्सर कहासुनी होती थी। इसके अलावा पार्किंग क्षेत्र में एक पालतू कुत्ते के गंदगी करने को लेकर भी विवाद होने की बात सामने आई है। इन छोटी-छोटी बातों को लेकर दोनों परिवारों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा था।
6 नवंबर की रात परमजीत जिम से वापस लौटे थे। इसी दौरान उनकी और मोनू शर्मा की पार्किंग में खड़ी गाड़ी को लेकर बहस हो गई। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर मोनू शर्मा ने अपनी लाइसेंसी पिस्टल निकाल ली और परमजीत पर लगातार गोलियां चला दीं। अचानक हुई इस फायरिंग से आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने करीब 15 से 16 राउंड फायर किए। इनमें से 8 से 9 गोलियां परमजीत को लगीं। गोली लगने के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी वहां से फरार हो गया। बताया गया कि वह अपने परिवार के साथ घर छोड़कर चला गया था।
सिंगापुर से परिवार के साथ दिवाली मनाने आए थे परमजीत
इस घटना को लेकर सबसे दुखद पहलू यह है कि परमजीत धनकड़ कुछ ही दिन पहले विदेश से अपने घर लौटे थे। वह सिंगापुर में एक निजी कंपनी में काम करते थे। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वह पहले टेक महिंद्रा के एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में रीजनल बिजनेस हेड के पद पर भी काम कर चुके थे। उनकी पेशेवर पहचान एक अनुभवी कॉर्पोरेट अधिकारी के रूप में थी।
परमजीत मूल रूप से हरियाणा के हिसार से जुड़े बताए जाते हैं। काम के सिलसिले में वह सिंगापुर में रह रहे थे। 5 नवंबर को वह भारत लौटे थे। उनका उद्देश्य परिवार के साथ दिवाली मनाना और अपने भांजे की शादी में शामिल होना था। परिवार में शादी की तैयारियां चल रही थीं और 24 नवंबर को विवाह समारोह निर्धारित था।
परमजीत की वापसी परिवार के लिए खुशी का मौका थी। घर में त्योहार और शादी दोनों की तैयारियां थीं। लेकिन 6 नवंबर की रात हुई गोलीबारी ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। जिस घर में कुछ दिनों बाद शादी की रौनक होने वाली थी, वहां अचानक मातम छा गया।
परमजीत अपनी पत्नी, बेटे और बेटी के साथ रहते थे। उनकी मौत से परिवार ने अपना एक अहम सदस्य खो दिया। इस घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि आखिर पड़ोसियों के बीच पार्किंग जैसी रोजमर्रा की समस्या किस तरह हिंसक टकराव में बदल सकती है।
पार्किंग की जगह को लेकर शुरू हुआ था विवाद
पुलिस की शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस घटना की तत्काल वजह वाहन पार्किंग को लेकर हुआ विवाद था। बताया गया कि परमजीत के परिवार की गाड़ी के लिए एक निर्धारित पार्किंग स्थान था। आरोप है कि आरोपी की गाड़ी उस जगह पर खड़ी थी। शुक्रवार रात जब परमजीत जिम से लौटे तो उन्होंने अपनी निर्धारित जगह पर वाहन खड़ा करने को लेकर पड़ोसी से बात की।
इसी बात पर दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। शुरुआती कहासुनी जल्द ही गंभीर विवाद में बदल गई। आरोप है कि मोनू शर्मा ने गुस्से में आकर पिस्टल निकाल ली और परमजीत पर फायरिंग कर दी।
हालांकि, पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या घटना के पीछे सिर्फ उसी रात का पार्किंग विवाद था या फिर पहले से चल रही दुश्मनी ने भी इसमें भूमिका निभाई। दोनों परिवारों के बीच पहले भी कई बार विवाद होने की जानकारी सामने आई है। इसलिए जांच अधिकारी घटनाक्रम की पिछली कड़ियों को भी जोड़ने में जुटे हैं।
पालतू कुत्ते को लेकर भी होती थी कहासुनी
इस मामले में पार्किंग के साथ-साथ एक पालतू कुत्ते को लेकर हुए विवाद की बात भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, दोनों परिवारों के बीच इस बात पर भी तनाव था कि आरोपी के परिवार का कुत्ता पार्किंग क्षेत्र में गंदगी कर देता था। परमजीत के परिवार को इस पर आपत्ति थी।
रिहायशी इमारतों में साझा पार्किंग और कॉमन एरिया को लेकर अक्सर परिवारों के बीच मतभेद पैदा हो जाते हैं। इस मामले में भी पार्किंग की व्यवस्था और कुत्ते से जुड़ी शिकायतों ने दोनों परिवारों के बीच तनाव बढ़ाया हो सकता है। हालांकि, पुलिस अभी यह स्थापित कर रही है कि इन विवादों का हत्या की रात हुई घटना से कितना सीधा संबंध था।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या पहले हुई कहासुनी के बाद दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता हुआ था या तनाव लगातार बना हुआ था। पुलिस की कोशिश है कि घटना के पीछे की पूरी वजह स्पष्ट हो और यह पता लगाया जा सके कि वारदात अचानक हुई या इसके पहले कोई योजना बनाई गई थी।
हत्या से पहले पुलिस चौकी तक पहुंचा था विवाद
इस मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, गोलीबारी से कुछ घंटे पहले परमजीत शिकायत लेकर पुलिस चौकी पहुंचे थे। बताया गया कि उनके बेटे और आरोपी के बीच पार्किंग क्षेत्र के गेट को लेकर कहासुनी हुई थी। परमजीत के बेटे ने कथित तौर पर आरोपी से गेट ठीक कराने की बात कही थी।
इसी बातचीत के दौरान आरोपी ने कथित रूप से परमजीत के बेटे के साथ अभद्र व्यवहार किया। इसके बाद परमजीत ने पुलिस चौकी पहुंचकर शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने दोनों पक्षों को चौकी बुलाया था।
आरोप है कि वहां आरोपी ने परमजीत को धमकी दी थी कि वह उन्हें रात तक जिंदा नहीं छोड़ेगा। यह धमकी कथित तौर पर पुलिस चौकी में दी गई थी। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि और उससे जुड़े सभी तथ्यों की जांच जरूरी है।
बताया गया है कि उस समय दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने की कोशिश की गई थी। लेकिन कुछ ही घंटे बाद परमजीत की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यदि पुलिस चौकी में धमकी दिए जाने की बात जांच में सही साबित होती है, तो यह घटना पुलिस के सामने आए खतरे और उसके बाद की कार्रवाई को लेकर भी कई सवाल खड़े कर सकती है।
आरोपी मोनू शर्मा गिरफ्तार, पुलिस कर रही पूछताछ
वारदात के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। घटनास्थल पर स्थानीय पुलिस के साथ क्राइम ब्रांच और फॉरेंसिक साइंस लैब की टीमें पहुंचीं। मौके से खाली कारतूस बरामद किए गए। पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ की और घटना से संबंधित जानकारी जुटाई।
शुरुआत में आरोपी मोहन उर्फ मोनू शर्मा अपने परिवार के साथ फरार हो गया था। पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। अब उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, आरोपी को बल्लभगढ़ के डीएलएफ चौक के पास से पकड़ा गया।
सूरजकुंड थाना पुलिस के अधिकारियों ने आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है ताकि वारदात के समय की परिस्थितियों, हथियार के इस्तेमाल और घटना से पहले हुए विवादों की जानकारी जुटाई जा सके।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपी घटना के बाद कहां गया था और फरारी के दौरान किन लोगों ने उसकी मदद की। इसके अलावा हथियार और फायरिंग से जुड़े साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
शिकायत में परिवार के अन्य सदस्यों के नाम भी शामिल
मृतक परमजीत के बेटे शौर्य की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। शिकायत में मुख्य आरोपी मोनू शर्मा के अलावा उसके परिवार के कुछ अन्य सदस्यों के नाम भी शामिल बताए गए हैं। इनमें उसकी पत्नी, बेटा, बेटी और भाई के नाम सामने आए हैं।
हालांकि, किसी व्यक्ति का शिकायत में नाम दर्ज होना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। मामले में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका और उसके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों की जांच पुलिस की जिम्मेदारी है। फिलहाल मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है और पुलिस उससे पूछताछ कर रही है।
जांच के दौरान पुलिस यह स्पष्ट करने की कोशिश करेगी कि गोलीबारी में केवल मुख्य आरोपी शामिल था या घटना से पहले और बाद में किसी अन्य व्यक्ति की भी कोई भूमिका रही। शिकायत में लगाए गए आरोपों और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
लाइसेंसी पिस्टल से हुई थी फायरिंग
इस हत्याकांड में इस्तेमाल हथियार को लेकर भी जांच महत्वपूर्ण है। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपी ने अपनी लाइसेंसी पिस्टल से फायरिंग की थी। पुलिस के अनुसार, करीब 15 से 16 राउंड गोलियां चलाई गईं। इनमें से कई गोलियां परमजीत को लगीं।
लाइसेंसी हथियार रखने का मतलब यह नहीं है कि उसका इस्तेमाल किसी भी परिस्थिति में किया जा सकता है। हथियार का उपयोग कानून के दायरे में ही होना चाहिए। पुलिस अब यह भी जांच करेगी कि घटना में इस्तेमाल पिस्टल का लाइसेंस किसके नाम पर था, हथियार का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया गया और उससे जुड़े नियमों का पालन हुआ या नहीं।
फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से कारतूस के खोल और अन्य जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं। इन साक्ष्यों की जांच से फायरिंग की संख्या, हथियार और घटनाक्रम को समझने में मदद मिल सकती है।
कॉर्पोरेट दुनिया से जुड़े थे परमजीत धनकड़
परमजीत धनकड़ की पहचान सिर्फ इस हत्या के पीड़ित के तौर पर नहीं थी। वह कॉर्पोरेट क्षेत्र में भी काम कर चुके थे। मीडिया रिपोर्टों में उनके पूर्व पद का उल्लेख टेक महिंद्रा के एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के रीजनल बिजनेस हेड के रूप में किया गया है। बताया गया है कि वह सिंगापुर में एक निजी कंपनी में वरिष्ठ पद पर कार्यरत थे।
उनका पेशेवर जीवन विदेश में बीत रहा था, लेकिन परिवार और निजी रिश्तों के कारण वह भारत आते-जाते थे। इस बार उनकी यात्रा दिवाली और भांजे की शादी के लिए थी। परिवार को उम्मीद थी कि वह त्योहार और विवाह समारोह में उनके साथ समय बिताएंगे।
लेकिन एक पड़ोसी के साथ हुआ विवाद उनकी जिंदगी का आखिरी घटनाक्रम बन गया। इस घटना ने परिवार के सामने ऐसा संकट खड़ा कर दिया है जिसकी भरपाई संभव नहीं है।
रिहायशी इलाकों में छोटे विवादों का हिंसक होना चिंता का विषय
फरीदाबाद की यह घटना एक बार फिर बताती है कि पड़ोसियों के बीच होने वाले छोटे विवाद किस तरह गंभीर रूप ले सकते हैं। पार्किंग, साझा जगह, पालतू जानवर, रास्ते और सोसायटी के नियमों को लेकर कई रिहायशी इमारतों में मतभेद होते हैं। आमतौर पर ऐसे मामलों का समाधान बातचीत, सोसायटी प्रबंधन या कानूनी शिकायत के जरिए किया जा सकता है।
लेकिन जब विवाद में धमकी, हथियार और हिंसा शामिल हो जाते हैं, तो स्थिति बेहद खतरनाक हो जाती है। इस मामले में भी पार्किंग को लेकर शुरू हुई कहासुनी का अंत गोलीबारी और हत्या के रूप में हुआ।
यह जरूरी है कि ऐसे विवादों को समय रहते गंभीरता से लिया जाए। यदि किसी व्यक्ति को जान से मारने की धमकी मिलती है, तो शिकायत और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर उचित कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, लाइसेंसी हथियारों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी नियमों का सख्ती से पालन जरूरी है।
पुलिस के सामने अब किन सवालों के जवाब तलाशने की चुनौती?
मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद भी जांच के कई पहलू बाकी हैं। पुलिस को यह पता लगाना है कि गोलीबारी से पहले दोनों परिवारों के बीच वास्तव में क्या हुआ था। क्या विवाद केवल पार्किंग को लेकर था या पालतू कुत्ते और पहले की कहासुनियों ने भी तनाव बढ़ाया था?
इसके अलावा पुलिस चौकी में कथित धमकी दिए जाने की बात की भी जांच की जानी है। यदि आरोपी ने सचमुच पुलिस अधिकारियों के सामने ऐसी धमकी दी थी, तो उस समय क्या कार्रवाई की गई और दोनों पक्षों के बीच समझौते की प्रक्रिया कैसे हुई, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
जांच एजेंसियों को घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, शिकायत और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड का मिलान करना होगा। आरोपी से पूछताछ के दौरान यह भी स्पष्ट हो सकता है कि उसने फायरिंग क्यों की और घटना के बाद फरार होने का फैसला कैसे लिया।
फिलहाल पुलिस मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर उससे पूछताछ कर रही है। आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो पाएगी।
त्योहार की खुशियां मातम में बदलीं
परमजीत धनकड़ अपने परिवार के साथ दिवाली मनाने भारत आए थे। घर में त्योहार की तैयारी थी और कुछ ही दिनों बाद भांजे की शादी होनी थी। परिवार के लिए यह समय खुशियों और साथ बिताए जाने वाले पलों का था। लेकिन धनतेरस की रात हुई गोलीबारी ने सब कुछ बदल दिया।
एक तरफ परिवार अपने प्रियजन को खोने के दुख से गुजर रहा है, दूसरी तरफ पुलिस हत्या के कारणों और घटनाक्रम की जांच कर रही है। मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी से जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी, लेकिन परिवार के लिए यह घटना जीवन भर का दर्द बन गई है।
फरीदाबाद का यह मामला केवल एक हत्या की जांच तक सीमित नहीं है। यह इस बात की भी याद दिलाता है कि मामूली विवादों को हिंसा में बदलने से रोकना कितना जरूरी है। फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता मामले के सभी तथ्यों को सामने लाना, साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय करना और कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई करना है।