
नई दिल्ली। सोमवार को एशिया के कई प्रमुख शेयर बाजारों में आई तेज गिरावट के बाद मंगलवार को वैश्विक निवेशकों को कुछ राहत मिलती दिखाई दी। जापान, दक्षिण कोरिया और एशिया के अन्य प्रमुख बाजारों में शुरुआती कारोबार के दौरान तेजी दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे लौट रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता अभी भी बाजारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
सोमवार को जापान, दक्षिण कोरिया, पाकिस्तान और भारत सहित कई देशों के शेयर बाजारों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला था। इसकी प्रमुख वजह अमेरिका-ईरान तनाव, तेल कीमतों में तेजी, वैश्विक जोखिमों को लेकर बढ़ी चिंता और निवेशकों द्वारा सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करना माना गया। इन कारणों से एशियाई बाजारों के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार भी दबाव में रहे और प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई।
मंगलवार को तस्वीर कुछ बदली हुई नजर आई। जापान का प्रमुख निक्केई 225 शुरुआती कारोबार में मजबूती के साथ खुला और इसमें एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। निवेशकों ने हालिया गिरावट के बाद चुनिंदा शेयरों में खरीदारी की, जबकि तकनीकी कंपनियों के आने वाले तिमाही नतीजों को लेकर भी सकारात्मक उम्मीदें दिखाई दीं। विश्लेषकों का कहना है कि पिछले सप्ताह आई भारी गिरावट के बाद निवेशकों ने इसे खरीदारी के अवसर के रूप में देखा, जिससे बाजार में रिकवरी देखने को मिली।
दक्षिण कोरिया के कोस्पी सूचकांक में भी मजबूत उछाल देखने को मिला। बाजार में तकनीकी और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ने से निवेशकों का भरोसा लौटा। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि एआई (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में अस्थिरता अभी भी बनी हुई है और निवेशकों को आगे भी सतर्क रहने की आवश्यकता होगी। हाल ही में कई वैश्विक वित्तीय संस्थानों ने दक्षिण कोरिया के बाजार को लेकर अपने निवेश दृष्टिकोण में बदलाव भी किया है।
एशियाई बाजारों में सुधार की एक बड़ी वजह मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीद भी रही। निवेशकों को संकेत मिले कि युद्धविराम और कूटनीतिक बातचीत की संभावना बन सकती है, जिससे तेल आपूर्ति को लेकर तत्काल चिंता कुछ कम हुई। इसका सकारात्मक असर एशियाई शेयर बाजारों पर देखने को मिला। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है और किसी भी नई सैन्य कार्रवाई का असर बाजारों पर तुरंत पड़ सकता है।
भारतीय शेयर बाजार की बात करें तो सोमवार को सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में बंद हुए थे। बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और कुछ बड़े शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। इसके पीछे वैश्विक संकेतों के अलावा कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, रुपये पर दबाव और कुछ कंपनियों के अपेक्षा से कमजोर तिमाही नतीजे भी प्रमुख कारण रहे। निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हुए मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर तनाव और नहीं बढ़ता तथा कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं, तो भारतीय बाजार में भी धीरे-धीरे स्थिरता लौट सकती है। इसके साथ ही कंपनियों के तिमाही नतीजे, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियां और वैश्विक केंद्रीय बैंकों की नीतियां आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
पाकिस्तान के शेयर बाजार में भी सोमवार को कमजोरी का माहौल देखा गया था। हालांकि मंगलवार को निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर बनी रही। विशेषज्ञों का कहना है कि एशिया के अधिकांश बाजार फिलहाल वैश्विक जोखिमों के प्रभाव में कारोबार कर रहे हैं, इसलिए किसी एक देश की बजाय पूरी क्षेत्रीय स्थिति निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर रही है।
आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, हाल के दिनों में वैश्विक शेयर बाजारों में बढ़ी अस्थिरता का मुख्य कारण केवल भू-राजनीतिक तनाव नहीं है। इसके साथ-साथ ऊंची ब्याज दरें, महंगाई, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव, तकनीकी शेयरों में भारी मूल्यांकन और वैश्विक आर्थिक वृद्धि को लेकर अनिश्चितता भी बाजारों पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में निवेशकों को दीर्घकालिक निवेश रणनीति अपनाने और अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय संतुलित दृष्टिकोण रखने की सलाह दी जा रही है।
फिलहाल मंगलवार के शुरुआती संकेत यह बताते हैं कि सोमवार की बड़ी गिरावट के बाद एशियाई बाजारों में राहत की लहर लौटती दिख रही है। फिर भी बाजार की आगे की दिशा काफी हद तक मध्य पूर्व के घटनाक्रम, तेल कीमतों, वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और प्रमुख कंपनियों के तिमाही परिणामों पर निर्भर करेगी। ऐसे में निवेशकों की नजर आने वाले कारोबारी सत्रों पर बनी रहेगी, जहां यह स्पष्ट होगा कि यह तेजी केवल तकनीकी रिकवरी है या फिर बाजार में स्थायी सुधार की शुरुआत।