हैदराबाद में रिटायर्ड IPS की पत्नी की हत्या का खुलासा, घरेलू सहायिका समेत कथित नेपाली गैंग के 4 सदस्य गिरफ्तार

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हैदराबाद में रिटायर्ड IPS की पत्नी की हत्या का खुलासा, घरेलू सहायिका समेत चार गिरफ्तार

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी की पत्नी तनुजा रंजन की हत्या और घर में लूटपाट के मामले में पुलिस ने पांच महीने से अधिक समय तक चली जांच के बाद चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में मृतका के घर में काम करने वाली घरेलू सहायिका धर्मा तिरुवा उर्फ कल्पना भी शामिल है। पुलिस का आरोप है कि घरेलू सहायिका ने घर की गतिविधियों, कीमती सामान और परिवार की आवाजाही से जुड़ी जानकारी कथित गिरोह के सदस्यों तक पहुंचाई थी। इसी जानकारी के आधार पर लूट की योजना बनाई गई और वारदात को अंजाम दिया गया।

हैदराबाद पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए चारों लोग नेपाल से जुड़े एक कथित अंतरराज्यीय गिरोह के सदस्य हैं। उन्हें 26 अक्टूबर 2026 को नामपल्ली रेलवे स्टेशन के पास पकड़ा गया। इससे पहले पुलिस इस मामले में दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी थी। पुलिस ने बताया कि हत्या और लूट की जांच के दौरान कई राज्यों में छानबीन की गई और भारत-नेपाल सीमा के आसपास भी संदिग्धों की तलाश की गई।

यह मामला रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी रे विनय रंजन की पत्नी तनुजा रंजन की हत्या से जुड़ा है। उनका शव 8 मई 2026 को हैदराबाद के जुबली हिल्स स्थित प्रशासन नगर में उनके आवास पर मिला था। पुलिस के मुताबिक, वारदात 7 और 8 मई की दरमियानी रात हुई थी। महिला के हाथ बंधे हुए थे और उनके मुंह में कपड़ा ठूंसा गया था। घर की अलमारियां और सामान खंगाले गए थे तथा करीब 225 ग्राम सोने के गहनों समेत अन्य कीमती सामान गायब था।

पुलिस का दावा है कि घरेलू सहायिका ने कथित गिरोह को घर में प्रवेश दिलाने में मदद की। वारदात के दौरान तनुजा रंजन की नींद खुल गई, जिसके बाद आरोपियों ने उन्हें काबू कर लिया। पुलिस के अनुसार, दम घुटने से उनकी मौत हो गई। हालांकि, मामले में आरोपियों की भूमिका से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी है और आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।

पांच महीने की जांच के बाद चार और गिरफ्तार

हैदराबाद पुलिस ने इस हत्या और लूट के मामले की जांच के लिए स्थानीय पुलिस, टास्क फोर्स और अन्य जांच इकाइयों की मदद ली। पुलिस के मुताबिक, नेपाल से जुड़े कथित गिरोहों की ओर से संपत्ति संबंधी अपराधों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल यानी SIT ने भी मामले की पड़ताल की।

26 अक्टूबर को पुलिस ने नामपल्ली रेलवे स्टेशन के पास चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनकी पहचान धर्मा तिरुवा उर्फ कल्पना, गणेश बीके, चंद्र बहादुर तामांग और गणेश बहादुर शाही के रूप में की गई है। पुलिस के अनुसार, सभी नेपाल के रहने वाले हैं, हालांकि वे भारत के अलग-अलग शहरों में रहकर काम कर रहे थे।

गिरफ्तार लोगों में धर्मा तिरुवा की उम्र 26 वर्ष बताई गई है। वह मृतका के घर में घरेलू सहायिका के रूप में काम करती थी। गणेश बीके की उम्र 31 वर्ष है और वह मजदूरी करता था। चंद्र बहादुर तामांग 44 वर्ष का है और रसोइये के तौर पर काम करता था। गणेश बहादुर शाही की उम्र 37 वर्ष बताई गई है और वह चौकीदार के रूप में काम कर रहा था।

पुलिस के मुताबिक, इन लोगों की गिरफ्तारी पांच महीने से अधिक समय तक चली जांच के बाद हुई। जांचकर्ताओं ने संदिग्धों की गतिविधियों, संपर्कों और आने-जाने के रास्तों का पता लगाने के लिए तकनीकी साक्ष्यों तथा स्थानीय सूत्रों की मदद ली।

पुलिस ने चारों आरोपियों के पास से 51,130 रुपये नकद और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद करने की जानकारी दी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।

क्या था पूरा मामला?

तनुजा रंजन हैदराबाद के जुबली हिल्स इलाके के प्रशासन नगर में अपने घर में रहती थीं। उनके पति रे विनय रंजन भारतीय पुलिस सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। 7 और 8 मई की दरमियानी रात घर में कथित तौर पर लूटपाट के दौरान तनुजा की हत्या कर दी गई।

8 मई को उनकी बेटी ने पुलिस को सूचना दी। घर के बेडरूम में तनुजा का शव मिला था। पुलिस के अनुसार, उनके हाथ बंधे हुए थे और मुंह में कपड़ा ठूंसा गया था। घर का सामान बिखरा हुआ था और अलमारियां खुली तथा क्षतिग्रस्त थीं।

प्रारंभिक जांच में करीब 225 ग्राम सोने के गहनों और अन्य कीमती वस्तुओं की चोरी की जानकारी सामने आई। इसके बाद पुलिस ने हत्या और लूट के मामले में केस दर्ज किया। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की गई कि घर में कौन दाखिल हुआ, आरोपियों को घर की जानकारी कैसे मिली और वारदात के बाद वे किस रास्ते से फरार हुए।

पुलिस ने CCTV फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की। साथ ही, घरेलू सहायिका और उसके संपर्कों से जुड़ी जानकारी जुटाई गई। पुलिस का आरोप है कि धर्मा तिरुवा ने गिरोह के सदस्यों को घर में मौजूद कीमती सामान और परिवार की दिनचर्या के बारे में जानकारी दी थी।

घरेलू सहायिका पर क्या है आरोप?

पुलिस की जांच के अनुसार, धर्मा तिरुवा उर्फ कल्पना जून 2025 में एक रिश्तेदार के माध्यम से हैदराबाद आई थी। इसके बाद उसे जुबली हिल्स स्थित तनुजा रंजन के घर में घरेलू सहायिका का काम मिला। पुलिस ने बताया कि उसे हर महीने लगभग 20 हजार रुपये वेतन मिलता था।

जांचकर्ताओं का दावा है कि धर्मा का संपर्क पुणे में रहने वाले नेपाल के एक व्यक्ति से था। आरोप है कि उस व्यक्ति ने उससे उसके नियोक्ता, घर में मौजूद कीमती वस्तुओं और परिवार की गतिविधियों के बारे में बार-बार जानकारी मांगी।

पुलिस के मुताबिक, बाद में कथित तौर पर घर में लूट की योजना बनाई गई और धर्मा को लूट में हिस्सा देने का प्रस्ताव दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि अप्रैल 2026 में धर्मा अपने बीमार पिता से मिलने पुणे गई थी। इसी दौरान उसका संपर्क कथित गिरोह के अन्य सदस्यों से हुआ।

पुलिस का आरोप है कि घरेलू सहायिका ने अपने नियोक्ता की यात्रा और घर खाली होने की जानकारी गिरोह तक पहुंचाई। जांचकर्ताओं के मुताबिक, 4 मई को जब परिवार का एक सदस्य बेंगलुरु के लिए रवाना हुआ, तब धर्मा ने कथित तौर पर गिरोह को इसकी सूचना दी।

इस जानकारी के आधार पर आरोपियों ने हैदराबाद पहुंचने और घर में प्रवेश करने की योजना बनाई। पुलिस का दावा है कि धर्मा ने घर का दरवाजा खोलकर अन्य आरोपियों को अंदर आने में मदद की।

हालांकि, ये आरोप पुलिस की जांच में सामने आए दावों पर आधारित हैं। अदालत में आरोपियों की भूमिका और दोषसिद्धि का निर्धारण उपलब्ध साक्ष्यों तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।

वारदात से पहले की गई थी रेकी

पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्यों ने वारदात को अंजाम देने से पहले घर और आसपास के क्षेत्र की जानकारी जुटाई थी। जांचकर्ताओं का कहना है कि 7 मई की सुबह गणेश बीके और सुजन शाही उर्फ सुरेश शाही ने धर्मा से उसके कार्यस्थल के पास मुलाकात की। इस दौरान घर की स्थिति और उसमें प्रवेश करने के तरीके पर चर्चा की गई।

पुलिस की जांच के अनुसार, गिरोह के सदस्य अलग-अलग जगहों से हैदराबाद पहुंचे थे। कुछ आरोपी महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के कलंबोली में मिले और वहां से किराये की मारुति अर्टिगा कार से पुणे की ओर गए। बाद में अन्य सदस्यों से मुलाकात के बाद वे हैदराबाद पहुंचे।

7 मई की शाम कथित गिरोह के सदस्य महात्मा गांधी बस स्टेशन यानी MGBS के आसपास रविंद्र बार के पास इकट्ठा हुए। पुलिस का दावा है कि वहां से उन्होंने अपनी योजना के अनुसार दो समूह बनाए।

एक समूह को घर में प्रवेश कर लूट की वारदात को अंजाम देने की जिम्मेदारी दी गई, जबकि दूसरा समूह नामपल्ली रेलवे स्टेशन के आसपास निगरानी रखने के लिए तैनात किया गया। पुलिस के मुताबिक, इस योजना का उद्देश्य वारदात के दौरान बाहरी गतिविधियों पर नजर रखना और बाद में फरार होने में मदद करना था।

जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपियों ने वारदात से पहले घर और उसके आसपास की परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि योजना बनाने में किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी और सभी आरोपी एक-दूसरे के संपर्क में कैसे आए।

7 और 8 मई की दरमियानी रात क्या हुआ?

पुलिस के घटनाक्रम के मुताबिक, 7 और 8 मई की दरमियानी रात कथित गिरोह के सदस्य घर में दाखिल हुए। आरोप है कि धर्मा ने दरवाजा खोलकर उन्हें अंदर आने दिया। इसके बाद आरोपियों ने घर में रखे कीमती सामान की तलाश शुरू की।

पुलिस के अनुसार, इसी दौरान तनुजा रंजन की नींद खुल गई। आरोपियों ने उन्हें काबू किया और उनके हाथ बांध दिए। उनके मुंह में कपड़ा ठूंसने का भी आरोप है। पुलिस का कहना है कि इस दौरान दम घुटने से तनुजा की मौत हो गई।

इसके बाद आरोपियों ने घर की अलमारियां और अन्य स्थान खंगाले। पुलिस के अनुसार, वे लगभग 225 ग्राम सोने के गहने और दूसरी कीमती वस्तुएं लेकर घर के पिछले दरवाजे से निकल गए।

इस घटना ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और घरेलू कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़े सत्यापन पर सवाल खड़े किए। हालांकि, किसी भी घरेलू कर्मचारी को केवल उसके मूल स्थान या पहचान के आधार पर संदिग्ध मानना उचित नहीं है। जांच का केंद्र मामले से जुड़े विशिष्ट साक्ष्य, संपर्क और कथित गतिविधियां होनी चाहिए।

पुलिस के मुताबिक, घर से निकलने के बाद आरोपी नामपल्ली रेलवे स्टेशन के पास अपने अन्य साथियों से मिले और फिर काजीपेट की ओर रवाना हुए।

लूटे गए सामान को बांटने और फरार होने का आरोप

पुलिस की जांच में सामने आया कि वारदात के बाद कथित गिरोह के सदस्य अलग-अलग दिशाओं में भागने की योजना के तहत आगे बढ़े। जांचकर्ताओं के मुताबिक, वे काजीपेट से एक सुनसान पहाड़ी इलाके की ओर गए, जहां चोरी की संपत्ति को नौ बराबर हिस्सों में बांटने का दावा किया गया है।

इसके बाद गिरोह के सदस्य छोटे समूहों में बंट गए। पुलिस का आरोप है कि कुछ लोग नेपाल की ओर चले गए और चोरी की वस्तुओं को अलग-अलग स्थानों पर ठिकाने लगाने की कोशिश की।

ऐसी परिस्थितियों में पुलिस के लिए आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाना कठिन हो सकता है, खासकर जब वे अलग-अलग शहरों और राज्यों में यात्रा कर रहे हों। जांचकर्ताओं ने बताया कि इस मामले में भी संदिग्धों के संभावित ठिकानों, यात्रा मार्गों और संपर्कों की जानकारी जुटाने में लंबा समय लगा।

पुलिस ने CCTV फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की मदद से संदिग्धों की गतिविधियों का विश्लेषण किया। स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी का उपयोग भी आरोपियों के संभावित ठिकानों का पता लगाने के लिए किया गया।

हालांकि, लूटे गए सामान की पूरी बरामदगी के बारे में अभी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। पुलिस ने चार नए आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ नकदी और अन्य सामग्री जब्त करने की जानकारी दी है, जबकि पहले गिरफ्तार किए गए दो लोगों से चोरी की संपत्ति का कुछ हिस्सा बरामद किया गया था।

मई में भी हुई थी दो आरोपियों की गिरफ्तारी

इस मामले में 26 अक्टूबर को गिरफ्तार किए गए चार लोगों से पहले पुलिस ने 22 मई को दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें सुनील बहादुर औजी उर्फ सुनील परियार और दिलीप बहादुर मिजार उर्फ सोनार शामिल थे।

पुलिस के अनुसार, सुनील को इस मामले में प्रमुख संदिग्धों में शामिल बताया गया है, जबकि दिलीप पर चोरी का सामान प्राप्त करने का आरोप है। पुलिस ने इन दोनों के पास से लगभग 26 ग्राम चोरी की संपत्ति बरामद करने की जानकारी दी थी।

इसके बाद भी जांच जारी रही, क्योंकि वारदात में शामिल अन्य लोगों की पहचान और उनके ठिकानों का पता लगाना बाकी था। पुलिस ने कई राज्यों में जांच अभियान चलाया और कथित गिरोह के नेटवर्क को समझने का प्रयास किया।

पुलिस का कहना है कि इस मामले की जांच में पांच महीने से अधिक समय लगा। इस दौरान बेंगलुरु, मुंबई, पुणे, सूरत, पटना, दिल्ली, लखनऊ और उत्तराखंड सहित कई जगहों पर तलाश की गई। जांच दलों ने भारत-नेपाल सीमा के आसपास भी जानकारी जुटाई।

अब चार और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस फरार बताए जा रहे दो लोगों को पकड़ने और चोरी की बाकी संपत्ति का पता लगाने में जुटी है।

कई राज्यों में फैली जांच

हैदराबाद पुलिस के अनुसार, जांच केवल शहर तक सीमित नहीं रही। आरोपियों के संभावित संपर्कों और यात्रा मार्गों का पता लगाने के लिए कई राज्यों में टीमों को भेजा गया। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के साथ स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी का इस्तेमाल किया।

बेंगलुरु, मुंबई, पुणे, सूरत, पटना, दिल्ली, लखनऊ और उत्तराखंड में की गई छानबीन के दौरान संदिग्धों के संभावित ठिकानों, रोजगार और संपर्कों की जानकारी जुटाई गई। भारत-नेपाल सीमा के आसपास भी पुलिस टीमों ने पूछताछ और जांच की।

पुलिस ने बताया कि कथित गिरोह के सदस्य अलग-अलग पेशों में काम कर रहे थे। इनमें घरेलू सहायिका, मजदूर, रसोइया और चौकीदार के तौर पर काम करने वाले लोग शामिल थे। जांचकर्ताओं का दावा है कि इस नेटवर्क ने कथित तौर पर घरों तक पहुंच बनाने और संपत्ति संबंधी अपराध करने के लिए अलग-अलग लोगों की भूमिकाओं का इस्तेमाल किया।

हालांकि, किसी व्यक्ति के पेशे या राष्ट्रीयता के आधार पर अपराध में शामिल होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। प्रत्येक आरोपी की भूमिका का निर्धारण संबंधित मामले के साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होना चाहिए।

बेंगलुरु और दिल्ली में भी अपराध की योजना का दावा

पुलिस ने यह भी दावा किया है कि कथित गिरोह के सदस्य बेंगलुरु और दिल्ली में भी इसी तरह की वारदातों की तैयारी कर रहे थे। जांचकर्ताओं के अनुसार, घरेलू कर्मचारियों के माध्यम से घरों की जानकारी हासिल करने और बाद में संपत्ति चोरी करने की योजना पर विचार किया जा रहा था।

पुलिस ने कुछ आरोपियों को अन्य शहरों में दर्ज संपत्ति संबंधी मामलों से भी जोड़ा है। जांच में चंद्र बहादुर तामांग का संबंध जयपुर और दिल्ली में दर्ज मामलों से जोड़े जाने की बात सामने आई है, जबकि गणेश बहादुर शाही के खिलाफ बेंगलुरु में संपत्ति संबंधी अपराध का मामला दर्ज होने की जानकारी दी गई है।

इसके अतिरिक्त, पुलिस ने कथित तौर पर अन्य फरार नेपाली नागरिकों के खिलाफ जारी पांच लंबित गैर-जमानती वारंट भी तामील किए। एक अन्य व्यक्ति जीवन चंद उर्फ जीबन को भी पकड़े जाने की जानकारी दी गई। पुलिस के मुताबिक, वह तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात में दर्ज आठ मामलों में कथित तौर पर शामिल रहा है।

इन सभी मामलों में संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का निर्धारण अलग-अलग जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए। किसी दूसरे मामले में आरोपित होना इस हत्या के मामले में दोषी होने का स्वतः प्रमाण नहीं है।

पुलिस ने नागरिकों से क्या अपील की?

इस मामले के बाद हैदराबाद पुलिस ने लोगों से घरेलू सहायकों, रसोइयों, चौकीदारों और केयरटेकर को काम पर रखने से पहले उनकी पहचान तथा पते की पुष्टि करने की अपील की है। पुलिस ने रोजगार और निवास से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करने तथा जहां आवश्यक हो, वहां पुलिस सत्यापन कराने की सलाह दी है।

पुलिस के मुताबिक, कर्मचारियों के पुराने नियोक्ताओं या मकान मालिकों से संपर्क करके उनके रोजगार संबंधी विवरण की पुष्टि की जा सकती है। अपार्टमेंट और गेटेड कम्युनिटी में रहने वाले लोगों को आगंतुकों के प्रवेश का रिकॉर्ड रखने और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने की सलाह भी दी गई है।

इसके अलावा, पुलिस ने लोगों से घर में रखे सोने के गहनों, नकदी, लॉकर की चाबियों और यात्रा की योजनाओं जैसी संवेदनशील जानकारी अनावश्यक रूप से साझा नहीं करने को कहा है। CCTV कैमरों की निगरानी और प्रवेश नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।

पुलिस ने किसी संदिग्ध गतिविधि की सूचना देने के लिए आपातकालीन नंबर 112 और हैदराबाद सिटी पुलिस के WhatsApp हेल्पलाइन नंबर 94906 16555 का उपयोग करने की जानकारी दी है।

इन सावधानियों का उद्देश्य संभावित जोखिमों को कम करना है। हालांकि, सत्यापन और सुरक्षा उपायों को सभी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू किया जाना चाहिए, न कि किसी विशेष राष्ट्रीयता या समुदाय को संदेह की नजर से देखने के आधार पर।

आगे की जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?

चार नए आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी पुलिस के सामने कई सवाल हैं। सबसे पहले, फरार बताए जा रहे दो आरोपियों का पता लगाना और उनकी भूमिका स्पष्ट करना जरूरी है। इसके साथ ही यह पता लगाना होगा कि घर से लूटे गए सभी गहने और दूसरी वस्तुएं कहां हैं।

जांच में यह भी स्पष्ट करना होगा कि कथित गिरोह ने वारदात की योजना कब बनाई, घरेलू सहायिका के संपर्क में कौन-कौन था और घर की जानकारी किन माध्यमों से साझा की गई। पुलिस पहले ही CCTV फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की बात कह चुकी है।

इसके अतिरिक्त, जांचकर्ताओं को यह भी देखना होगा कि क्या कथित गिरोह के सदस्यों का दूसरे संपत्ति संबंधी अपराधों से कोई संबंध है। यदि ऐसे मामले सामने आते हैं, तो उनमें प्रत्येक आरोपी की भूमिका के लिए अलग-अलग साक्ष्य जुटाना आवश्यक होगा।

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। आगे की कानूनी प्रक्रिया जांच के निष्कर्षों, बरामदगी और अदालत में प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।

निष्कर्ष: पांच महीने की जांच के बाद सामने आया कथित गिरोह का नेटवर्क

हैदराबाद में रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी रे विनय रंजन की पत्नी तनुजा रंजन की हत्या और लूट के मामले में पुलिस ने पांच महीने से अधिक समय तक जांच करने के बाद चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें मृतका के घर में काम करने वाली घरेलू सहायिका धर्मा तिरुवा उर्फ कल्पना भी शामिल है।

पुलिस का आरोप है कि घरेलू सहायिका ने घर की गतिविधियों और कीमती सामान की जानकारी कथित गिरोह के सदस्यों तक पहुंचाई और वारदात के दौरान उन्हें घर में प्रवेश दिलाने में मदद की। पुलिस के अनुसार, 7 और 8 मई की दरमियानी रात घर में लूटपाट के दौरान तनुजा रंजन की दम घुटने से मौत हुई। घर से करीब 225 ग्राम सोने के गहने और अन्य कीमती वस्तुएं गायब थीं।

इस मामले में पुलिस पहले ही दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी थी। 26 अक्टूबर को चार और गिरफ्तारियां हुईं। पुलिस ने कई राज्यों में जांच अभियान चलाने, तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण करने और भारत-नेपाल सीमा के आसपास जानकारी जुटाने की बात कही है। अभी दो आरोपी फरार बताए जा रहे हैं और चोरी की बाकी संपत्ति का पता लगाने के प्रयास जारी हैं।

पुलिस ने नागरिकों से घरेलू कर्मचारियों की पहचान और रोजगार संबंधी विवरण की पुष्टि करने तथा घर की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने की अपील की है। वहीं, मामले में आरोपियों की अंतिम जिम्मेदारी और दोषसिद्धि का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।

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