
तेजस फाइटर जेट में एयर चीफ एपी सिंह की आखिरी लड़ाकू उड़ान, ‘तरंग शक्ति 2026’ में दिखी स्वदेशी विमान की ताकत
भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अपने सैन्य करियर के एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस में उड़ान भरकर देश के रक्षा क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींचा। 11 अक्टूबर 2026 को उन्होंने राजस्थान के जोधपुर एयरबेस से हल्के लड़ाकू विमान LCA तेजस Mk-1 में सोलो सॉर्टी की। यह उनकी सेवानिवृत्ति से पहले आखिरी लड़ाकू विमान उड़ान बताई गई है। एयर चीफ मार्शल सिंह 31 अक्टूबर 2026 को अपने पद से सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
यह उड़ान बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास ‘तरंग शक्ति 2026’ के दौरान हुई। इस अभ्यास में भारत के साथ कई मित्र देशों की वायुसेनाएं शामिल हुईं और अलग-अलग देशों के लड़ाकू विमानों तथा हवाई अभियानों से जुड़ी क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया। ऐसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय अभ्यास के दौरान वायुसेना प्रमुख का स्वदेशी तेजस में उड़ान भरना भारतीय एयरोस्पेस कार्यक्रम, लड़ाकू विमान संचालन और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में चल रहे प्रयासों के संदर्भ में अहम माना जा रहा है।
एपी सिंह की इस उड़ान ने तेजस के Mk-1 संस्करण के साथ-साथ इसके उन्नत संस्करण Mk-1A को लेकर भी चर्चा बढ़ाई। भारत अपने स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है, ताकि वायुसेना की परिचालन जरूरतों को पूरा करने के लिए घरेलू स्तर पर विकसित विमानों की भूमिका बढ़ाई जा सके।
जोधपुर एयरबेस से भरी तेजस में सोलो सॉर्टी
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने रविवार, 11 अक्टूबर को जोधपुर एयरबेस से तेजस Mk-1 में सोलो सॉर्टी की। सैन्य विमानन में सॉर्टी का अर्थ किसी निर्धारित उद्देश्य के लिए की गई उड़ान से होता है। सोलो सॉर्टी में पायलट विमान को अकेले उड़ाता है।
इस उड़ान की खासियत यह थी कि इसे वायुसेना प्रमुख ने अपने पद से सेवानिवृत्त होने से कुछ सप्ताह पहले अंजाम दिया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, यह उनके करियर की आखिरी लड़ाकू विमान उड़ान थी। हालांकि, इसे उनकी आखिरी विमान उड़ान कहना सही नहीं होगा, क्योंकि लड़ाकू विमान की उड़ान और किसी भी प्रकार की अंतिम उड़ान अलग-अलग बातें हैं।
वायुसेना प्रमुख का तेजस में उड़ान भरना केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में नहीं देखा गया। यह भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम को लेकर वायुसेना के नेतृत्व की भागीदारी को भी दर्शाता है। तेजस को भारत में विकसित हल्के लड़ाकू विमान के रूप में जाना जाता है और इसे वायुसेना की परिचालन क्षमता में शामिल करने के लिए लंबे समय से काम किया जा रहा है।
तेजस Mk-1 भारतीय हल्के लड़ाकू विमान कार्यक्रम का शुरुआती परिचालन संस्करण है। इसके बाद विकसित किए जा रहे Mk-1A संस्करण में कई उन्नत प्रणालियों और क्षमताओं को शामिल करने की योजना है। दोनों संस्करणों को एक ही विमान कार्यक्रम के हिस्से के रूप में देखा जाता है, लेकिन उनकी तकनीकी विशेषताओं और परिचालन क्षमताओं में अंतर है।
क्या है तरंग शक्ति 2026 अभ्यास?
‘तरंग शक्ति 2026’ भारतीय वायुसेना द्वारा आयोजित बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास का दूसरा संस्करण है। इसका आयोजन 26 सितंबर से 12 अक्टूबर 2026 तक राजस्थान के जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन और आसपास के क्षेत्रों में किया गया।
इस अभ्यास का उद्देश्य भारत और भाग लेने वाले देशों की वायुसेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाना, संयुक्त अभियानों की योजना और संचालन का अनुभव साझा करना तथा अलग-अलग सैन्य प्रक्रियाओं के बीच तालमेल बेहतर बनाना था।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अभ्यास में सात मित्र देशों की वायुसेनाओं ने भाग लिया। इनमें ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, फ्रांस, जर्मनी, श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका शामिल थे। इसके अलावा 32 देशों ने पर्यवेक्षक के रूप में हिस्सा लिया।
अभ्यास की थीम ‘पावर इन पार्टनरशिप’ यानी साझेदारी में शक्ति रखी गई। इस थीम का उद्देश्य यह रेखांकित करना था कि आधुनिक हवाई अभियानों में केवल विमान और हथियार ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग देशों के बीच संचार, संयुक्त योजना, प्रक्रियाओं की समझ और परिचालन तालमेल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बहुराष्ट्रीय अभ्यासों में भाग लेने वाले देशों के पायलट और सैन्य विशेषज्ञ एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को समझते हैं। संयुक्त मिशनों के दौरान वे अलग-अलग परिस्थितियों में निर्णय लेने, संचार बनाए रखने और अपने विमानों की क्षमताओं के अनुरूप कार्य करने का अभ्यास करते हैं।
तरंग शक्ति जैसे अभ्यास भारत को अपनी वायुसेना की परिचालन तैयारियों का आकलन करने और मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग मजबूत करने का अवसर देते हैं। यह अभ्यास भारतीय वायुसेना के लिए अपने स्वदेशी विमानों और अन्य रक्षा प्रणालियों की क्षमताओं को अंतरराष्ट्रीय सैन्य समुदाय के सामने प्रस्तुत करने का मंच भी है।
तेजस Mk-1 और Mk-1A में क्या अंतर है?
तेजस भारत का स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान कार्यक्रम है। इसका विकास भारतीय वायुसेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है। तेजस को पुराने लड़ाकू विमानों के स्थान पर आधुनिक विमान शामिल करने की व्यापक योजना के हिस्से के रूप में देखा जाता है।
तेजस Mk-1 इस कार्यक्रम का शुरुआती संस्करण है। इसका उपयोग भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता में किया जा रहा है। यह विमान आधुनिक लड़ाकू विमानन के लिए आवश्यक उड़ान नियंत्रण, सेंसर, हथियार प्रणाली और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं से लैस है।
दूसरी ओर, तेजस Mk-1A को Mk-1 के उन्नत संस्करण के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसमें एवियोनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों, रखरखाव और परिचालन क्षमता से जुड़े सुधार शामिल किए जाने हैं। इसका उद्देश्य विमान को आधुनिक हवाई युद्ध की जरूरतों के अनुरूप अधिक सक्षम बनाना है।
हालांकि, Mk-1A की डिलीवरी और कार्यक्रम की समयसीमा को लेकर देरी चर्चा का विषय रही है। नए विमानों को वायुसेना में शामिल करने के लिए विमान निर्माता, रक्षा प्रतिष्ठानों और संबंधित एजेंसियों को परीक्षण, उत्पादन तथा गुणवत्ता संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करना होता है।
एपी सिंह की उड़ान Mk-1 संस्करण में हुई थी। इसलिए उनकी इस उड़ान को Mk-1A के परिचालन में पूरी तरह शामिल हो जाने का प्रमाण नहीं समझना चाहिए। यह दोनों संस्करणों की प्रगति और भारतीय लड़ाकू विमान कार्यक्रम के महत्व को सामने लाने वाला अवसर जरूर था।
स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम के लिए क्यों अहम है यह उड़ान?
भारत लंबे समय से रक्षा उत्पादन में घरेलू क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। लड़ाकू विमान विकसित करना एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें डिजाइन, एयरोडायनामिक्स, इंजन, रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, हथियारों का एकीकरण और उड़ान सुरक्षा जैसी अनेक चुनौतियां शामिल होती हैं।
तेजस कार्यक्रम इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है। इसका उद्देश्य देश में विमान डिजाइन, निर्माण, परीक्षण और रखरखाव से जुड़ी विशेषज्ञता विकसित करना है। स्वदेशी विमान कार्यक्रम से घरेलू उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और रक्षा उत्पादन से जुड़े संगठनों को भी काम करने का अवसर मिलता है।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की तेजस में उड़ान को इस संदर्भ में देखा जा सकता है कि वायुसेना नेतृत्व स्वदेशी विमान कार्यक्रमों से सीधे जुड़ा हुआ है। किसी विमान को उड़ाना उसके वास्तविक परिचालन उपयोग, पायलट प्रशिक्षण और तकनीकी मूल्यांकन से जुड़ा महत्वपूर्ण अनुभव होता है।
हालांकि, किसी वरिष्ठ अधिकारी की एक उड़ान अपने आप में विमान की सभी तकनीकी क्षमताओं या उसकी दीर्घकालिक परिचालन सफलता का प्रमाण नहीं होती। किसी लड़ाकू विमान की प्रभावशीलता का मूल्यांकन प्रशिक्षण, मिशन प्रदर्शन, रखरखाव, उपलब्धता, हथियार प्रणाली, सुरक्षा और अन्य कारकों के आधार पर किया जाता है।
तेजस की वास्तविक भूमिका इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने विमान समय पर उपलब्ध होते हैं, उन्हें किस तरह प्रशिक्षित पायलटों और रखरखाव व्यवस्था के साथ संचालित किया जाता है और वे वायुसेना की व्यापक रणनीति में किस तरह शामिल होते हैं।
एपी सिंह का करियर और सेवानिवृत्ति
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह भारतीय वायुसेना के प्रमुख हैं। वह 31 अक्टूबर 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उनकी तेजस उड़ान को उनके लंबे सैन्य करियर के अंतिम चरण का एक महत्वपूर्ण क्षण माना जा रहा है।
वायुसेना प्रमुख की जिम्मेदारी केवल विमान उड़ाने तक सीमित नहीं होती। उन्हें परिचालन तैयारियों, प्रशिक्षण, मानव संसाधन, रक्षा खरीद, तकनीकी आधुनिकीकरण और भविष्य की रणनीतिक जरूरतों जैसे व्यापक विषयों पर नेतृत्व देना होता है।
वायुसेना को आधुनिक बनाने की प्रक्रिया में स्वदेशी विमान कार्यक्रमों के साथ-साथ विदेशी प्लेटफॉर्म, हथियार प्रणाली, रडार, परिवहन विमान, हेलीकॉप्टर और हवाई ईंधन भरने की क्षमताएं भी महत्वपूर्ण होती हैं। इसलिए वायुसेना प्रमुख के स्तर पर निर्णय लेते समय कई परिचालन और तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखना पड़ता है।
तेजस में उड़ान भरना उनके लिए एक व्यक्तिगत रूप से उल्लेखनीय क्षण था, क्योंकि यह भारत में विकसित लड़ाकू विमान से जुड़ा हुआ था। इससे स्वदेशी रक्षा उत्पादन को लेकर चल रही चर्चा को भी नया संदर्भ मिला।
सेवानिवृत्ति से पहले इस तरह की उड़ान वायुसेना के पेशेवर जीवन और विमानन अनुभव के महत्व को रेखांकित करती है। लेकिन उनकी सेवा का आकलन केवल इस उड़ान से नहीं, बल्कि उनके पूरे कार्यकाल, निर्णयों और वायुसेना की परिचालन तैयारियों में योगदान के आधार पर किया जाना चाहिए।
तरंग शक्ति में विदेशी विमानों की मौजूदगी
तरंग शक्ति 2026 में विभिन्न देशों के लड़ाकू और सहायक विमानों ने भाग लिया। अभ्यास में शामिल विदेशी प्लेटफॉर्मों में फ्रांस के राफेल, अमेरिका के F-16 और F-35, एयरलिफ्ट विमान तथा हवा में ईंधन भरने वाले विमान जैसे प्लेटफॉर्मों का उल्लेख किया गया।
ऐसे विमानों की भागीदारी से अलग-अलग देशों को अपनी परिचालन प्रक्रियाओं और तकनीकी क्षमताओं को समझने का अवसर मिलता है। लड़ाकू विमान, परिवहन विमान, निगरानी प्रणाली और हवा में ईंधन भरने वाले विमान संयुक्त अभियानों में अलग-अलग भूमिकाएं निभाते हैं।
बहुराष्ट्रीय अभ्यास का एक उद्देश्य यह भी होता है कि अलग-अलग देशों के विमान और सैन्य दल एक साझा अभियान के दौरान एक-दूसरे के साथ तालमेल बना सकें। इसके लिए संचार प्रक्रियाओं, मिशन योजना, उड़ान सुरक्षा और परिचालन नियमों की समझ आवश्यक होती है।
अभ्यास के दौरान भारतीय वायुसेना के स्वदेशी विमानों, जिनमें तेजस भी शामिल है, को विदेशी प्लेटफॉर्मों के साथ एक ही व्यापक परिचालन वातावरण में काम करने का अवसर मिला। यह अनुभव वायुसेना को अलग-अलग तकनीकी और रणनीतिक दृष्टिकोणों से सीखने में मदद कर सकता है।
हालांकि, किसी संयुक्त अभ्यास में भाग लेने मात्र से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि एक विमान दूसरे से बेहतर है। विमान की क्षमता उसके मिशन, हथियार, सेंसर, प्रशिक्षण, रखरखाव और उपयोग की परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
अमेरिका के F-35 विमान को लेकर भी चर्चा
तरंग शक्ति 2026 के दौरान अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमान भी चर्चा में रहे। यह पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है, जिसे कम रडार दृश्यता और उन्नत सेंसर क्षमताओं के लिए जाना जाता है। अभ्यास में उसकी मौजूदगी ने भारतीय और अमेरिकी वायुसेनाओं के बीच तकनीकी सहयोग तथा रक्षा खरीद से जुड़े सवालों को भी चर्चा में ला दिया।
अभ्यास के समापन के आसपास एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अमेरिकी वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की कि अमेरिकी अधिकारी भारतीय पक्ष को F-35 के पास जाने भी नहीं देते, जबकि उसके भारत को बेचे जाने की चर्चा होती है।
इस टिप्पणी के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका की ओर से भारत को F-35 बेचने का कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं मिला है। इसलिए उनकी बात को किसी खरीद समझौते या औपचारिक प्रस्ताव की पुष्टि के रूप में नहीं समझना चाहिए।
F-35 को लेकर चर्चा यह दिखाती है कि आधुनिक रक्षा सहयोग में केवल विमान की तकनीकी क्षमता ही नहीं, बल्कि संवेदनशील तकनीक तक पहुंच, निर्यात की शर्तें, रणनीतिक साझेदारी और दीर्घकालिक रखरखाव भी महत्वपूर्ण होते हैं।
भारत के लिए स्वदेशी विमान कार्यक्रम और विदेशी रक्षा साझेदारियों के बीच संतुलन बनाना एक महत्वपूर्ण नीति विषय है। घरेलू क्षमता विकसित करने के साथ-साथ विदेशी देशों से तकनीक, प्रशिक्षण और सहयोग प्राप्त करना भी रक्षा आधुनिकीकरण का हिस्सा हो सकता है।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का व्यापक महत्व
भारत की रक्षा नीति में आत्मनिर्भरता को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इसका अर्थ यह है कि देश महत्वपूर्ण रक्षा प्रणालियों के डिजाइन, निर्माण, रखरखाव और उन्नयन में घरेलू क्षमता विकसित करे, ताकि जरूरत पड़ने पर वह बाहरी आपूर्ति पर पूरी तरह निर्भर न रहे।
तेजस जैसे स्वदेशी कार्यक्रम इस दिशा में अहम हैं। लड़ाकू विमान के निर्माण में बड़ी संख्या में उद्योग, आपूर्तिकर्ता, इंजीनियर, वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल होते हैं। इससे देश में विमानन से जुड़ी विशेषज्ञता और औद्योगिक क्षमता विकसित हो सकती है।
हालांकि, आत्मनिर्भरता का अर्थ यह नहीं है कि हर तकनीक को तुरंत घरेलू स्तर पर विकसित कर लिया जाएगा। आधुनिक लड़ाकू विमानों में इंजन, उन्नत सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों और विशेष सामग्रियों से जुड़ी चुनौतियां होती हैं। इन क्षेत्रों में प्रगति के लिए लंबे समय तक अनुसंधान, परीक्षण और निवेश की आवश्यकता होती है।
रक्षा उत्पादन की सफलता का मूल्यांकन केवल किसी परियोजना की घोषणा या प्रदर्शन से नहीं, बल्कि उत्पादन की निरंतरता, समय पर डिलीवरी, गुणवत्ता, लागत और वास्तविक परिचालन उपलब्धता से किया जाता है।
तरंग शक्ति जैसे अभ्यास भारतीय वायुसेना को यह अवसर देते हैं कि वह अपने प्लेटफॉर्म और प्रक्रियाओं का मूल्यांकन करे तथा अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से सीख सके। इसके साथ ही स्वदेशी विमान कार्यक्रमों की चुनौतियों को दूर करना भी उतना ही महत्वपूर्ण बना रहता है।
निष्कर्ष
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने 11 अक्टूबर 2026 को जोधपुर एयरबेस से स्वदेशी तेजस Mk-1 लड़ाकू विमान में सोलो सॉर्टी की। यह उनकी 31 अक्टूबर को होने वाली सेवानिवृत्ति से पहले आखिरी लड़ाकू विमान उड़ान बताई गई है। यह उड़ान बहुराष्ट्रीय अभ्यास तरंग शक्ति 2026 के दौरान हुई, जिसमें सात मित्र देशों ने भाग लिया और 32 देशों ने पर्यवेक्षक के रूप में हिस्सा लिया।
इस घटना ने भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम, तेजस Mk-1A की प्रगति और वायुसेना के आधुनिकीकरण पर ध्यान आकर्षित किया। अभ्यास ने अलग-अलग देशों की वायुसेनाओं को संयुक्त अभियानों, परिचालन प्रक्रियाओं और तकनीकी अनुभव साझा करने का अवसर भी दिया।
एपी सिंह की उड़ान प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन तेजस कार्यक्रम की दीर्घकालिक सफलता उत्पादन, समय पर डिलीवरी, तकनीकी विश्वसनीयता और वायुसेना की परिचालन जरूरतों को पूरा करने की क्षमता पर निर्भर करेगी। भारत के लिए स्वदेशी रक्षा तकनीक विकसित करना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना, दोनों ही भविष्य की वायु शक्ति के महत्वपूर्ण हिस्से बने रहेंगे।