
उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद अपने इस्तीफे को लेकर पहली बार विस्तार से अपनी बात रखी है। उनके अचानक इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक हलकों तक तरह-तरह के सवाल उठ रहे थे। कोई इसे किसी दबाव से जोड़ रहा था तो कोई उनके भविष्य की योजनाओं को लेकर अनुमान लगा रहा था। अब दिव्या मित्तल ने साफ किया है कि उनके फैसले के पीछे कोई अचानक हुई घटना या दबाव नहीं है। यह पूरी तरह सोच-समझकर लिया गया फैसला है और वह अब अपने परिवार तथा अपनी दूसरी रुचियों को ज्यादा समय देना चाहती हैं।
दिव्या मित्तल ने कहा कि IAS की नौकरी उनके जीवन का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा जरूर रही, लेकिन यह उनकी पूरी जिंदगी नहीं थी। उन्होंने इसे अपने जीवन का एक चैप्टर बताया और कहा कि अब वह आगे बढ़कर जिंदगी के दूसरे पहलुओं को भी जीना चाहती हैं। उनका यह बयान इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि सिविल सर्विस को भारत में सबसे प्रतिष्ठित करियरों में से एक माना जाता है और बहुत से युवा वर्षों तक इसकी तैयारी करते हैं।
दिव्या मित्तल का कहना है कि उनके लिए IAS बनना कभी जीवन की अंतिम मंजिल नहीं था। यह उनके जीवन की एक यात्रा थी, जिससे उन्हें बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला। अब जब उन्हें लगा कि वह इस अध्याय से आगे बढ़ सकती हैं, तो उन्होंने स्वेच्छा से इस्तीफा देने का फैसला किया।
किसी दबाव में नहीं लिया फैसला
इस्तीफे के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की थी कि आखिर दिव्या मित्तल ने अचानक इतना बड़ा फैसला क्यों लिया।
सोशल मीडिया पर कई तरह के अनुमान लगने लगे। कुछ लोगों ने प्रशासनिक दबाव की बात की तो कुछ ने राजनीतिक कारणों से इस्तीफे की अटकलें लगाईं।
दिव्या मित्तल ने इन सभी अटकलों को खारिज करते हुए साफ कहा कि उनके इस्तीफे के पीछे कोई दबाव नहीं है।
उन्होंने इसे अपनी इच्छा और लंबे समय से चली आ रही सोच का परिणाम बताया।
उनका कहना है कि जीवन में कई बार व्यक्ति को यह देखना चाहिए कि वह वास्तव में क्या करना चाहता है और उसके लिए क्या महत्वपूर्ण है।
कोई एक ‘ट्रिगर मोमेंट’ नहीं था
दिव्या मित्तल ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसा कोई एक खास दिन, घटना या परिस्थितिजन्य कारण नहीं था जिसके बाद उन्होंने अचानक IAS छोड़ने का फैसला कर लिया हो।
उनके मुताबिक, यह निर्णय धीरे-धीरे उनके भीतर विकसित हुआ।
उन्होंने अपनी जिंदगी, परिवार और भविष्य को लेकर सोचने के बाद यह फैसला लिया।
यानी यह कहना सही नहीं होगा कि किसी एक विवाद, ट्रांसफर, पोस्टिंग या प्रशासनिक घटना ने उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया।
उन्होंने खुद भी कहा कि कोई विशेष ट्रिगर मोमेंट नहीं था।
‘IAS सिर्फ एक चैप्टर था’
दिव्या मित्तल के इंटरव्यू की सबसे चर्चित बात उनकी वह सोच रही जिसमें उन्होंने IAS सेवा को जीवन का केवल एक अध्याय बताया।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की पहचान सिर्फ उसकी नौकरी या पद से नहीं होनी चाहिए।
उनके लिए IAS की सेवा बेहद महत्वपूर्ण थी, लेकिन वह इसके आगे भी जीवन को देखती हैं।
उनका मानना है कि जीवन बहुत बड़ा है और उसमें अलग-अलग अनुभवों को जीने का अवसर होना चाहिए।
इसी सोच के तहत उन्होंने प्रशासनिक सेवा से बाहर निकलकर नया अध्याय शुरू करने का फैसला किया।
परिवार को देना चाहती हैं ज्यादा समय
दिव्या मित्तल ने अपने फैसले के पीछे परिवार को भी महत्वपूर्ण कारण बताया।
सिविल सर्विस की नौकरी में अधिकारी की जिम्मेदारी बहुत बड़ी होती है।
जिलाधिकारी या दूसरे प्रशासनिक पदों पर काम करते समय दिन और रात का कोई निश्चित समय नहीं होता।
किसी आपदा, कानून-व्यवस्था की स्थिति या प्रशासनिक समस्या के दौरान अधिकारियों को लगातार काम करना पड़ सकता है।
ऐसे में परिवार के लिए समय निकालना कई बार मुश्किल हो जाता है।
दिव्या मित्तल ने कहा कि अब वह अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिताना चाहती हैं।
अपनी रुचियों पर भी करेंगी काम
परिवार के अलावा दिव्या मित्तल अपनी व्यक्तिगत रुचियों को भी समय देना चाहती हैं।
उन्होंने अभी किसी एक नए करियर या व्यवसाय की स्पष्ट घोषणा नहीं की है।
लेकिन उनका कहना है कि वह जिंदगी में उन चीजों को भी तलाशना चाहती हैं जिनके लिए प्रशासनिक सेवा के दौरान पर्याप्त समय नहीं मिल पाया।
कुछ रिपोर्टों में उनके अकादमिक क्षेत्र और लेखन की ओर बढ़ने की संभावना भी बताई गई है, लेकिन दिव्या मित्तल ने स्वयं अभी किसी निश्चित नए पेशे की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
राजनीति में जाने की अटकलों पर जवाब
दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद यह भी चर्चा शुरू हुई कि क्या वह राजनीति में प्रवेश कर सकती हैं।
उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण इन अटकलों को और हवा मिली।
कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में उनके इस्तीफे को राजनीति से जोड़ने की कोशिश की गई।
हालांकि दिव्या मित्तल ने राजनीति में आने की बात से इनकार किया है।
उनका कहना है कि फिलहाल राजनीति में जाने की उनकी कोई योजना नहीं है।
राहुल गांधी से जोड़कर भी हुई चर्चा
सोशल मीडिया पर कुछ दावों में दिव्या मित्तल के इस्तीफे को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात या आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से जोड़ने की कोशिश की गई।
लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार दिव्या मित्तल ने इस तरह की राजनीतिक अटकलों को खारिज किया है।
उन्होंने साफ किया कि उनका फैसला व्यक्तिगत है और इसका किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल होने की योजना से संबंध नहीं है।
इस वजह से इस्तीफे को किसी राजनीतिक घटनाक्रम से सीधे जोड़ना फिलहाल सही नहीं होगा।
13 साल की IAS यात्रा
दिव्या मित्तल 2013 बैच की IAS अधिकारी हैं।
उन्होंने करीब 13 वर्षों तक भारतीय प्रशासनिक सेवा में काम किया।
इस दौरान उन्हें उत्तर प्रदेश में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं।
वह देवरिया, मिर्जापुर और संत कबीरनगर जैसे जिलों में जिलाधिकारी के पद पर तैनात रहीं।
एक जिलाधिकारी के रूप में उनके कई प्रशासनिक फैसले और कार्य चर्चा में रहे।
विशेष रूप से मिर्जापुर में उनके कार्यकाल के दौरान कुछ ग्रामीण और विकास परियोजनाओं को लेकर उनकी काफी चर्चा हुई।
मिर्जापुर की DM के तौर पर बनी पहचान
दिव्या मित्तल को सबसे ज्यादा लोकप्रियता मिर्जापुर में जिलाधिकारी रहते हुए मिली।
उनकी कार्यशैली और आम लोगों से संवाद के कारण उनकी एक अलग पहचान बनी।
मिर्जापुर के कई दूरदराज क्षेत्रों में उन्होंने बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं पर काम किया।
इन्हीं में से एक कहानी लहुरियादह गांव की है, जिसे उन्होंने अपने इस्तीफे के बाद साझा किए गए भावुक संदेश में भी याद किया।
75 साल बाद गांव पहुंचा पानी
मिर्जापुर का लहुरियादह पहाड़ी क्षेत्र में स्थित एक गांव है।
यहां कई दशकों तक लोगों के सामने पीने के पानी की गंभीर समस्या रही।
आजादी के करीब 75 साल बाद भी गांव के लोगों को नियमित पाइपलाइन से पानी नहीं मिल पा रहा था।
दिव्या मित्तल के जिलाधिकारी रहते हुए यहां पाइपलाइन से पानी पहुंचाने की योजना पर काम किया गया।
इस परियोजना के बाद गांव के करीब 125 घरों तक पानी पहुंचा।
यह उनके प्रशासनिक कार्यकाल की सबसे चर्चित उपलब्धियों में से एक बनी।
वृद्ध महिला का आशीर्वाद आज भी याद
दिव्या मित्तल ने इस्तीफे की घोषणा करते समय मिर्जापुर के इसी गांव की एक वृद्ध महिला को याद किया।
पानी पहुंचने के बाद उस महिला ने उनके सिर पर हाथ रखकर उन्हें आशीर्वाद दिया था।
दिव्या मित्तल ने इस पल को अपनी प्रशासनिक यात्रा के सबसे भावुक अनुभवों में से एक बताया।
उनका कहना था कि उस महिला की आंखों की खुशी और आशीर्वाद उन्हें हमेशा याद रहेगा।
यह घटना उनकी उस सोच से भी जुड़ती है जिसमें उन्होंने कहा कि सरकारी फाइल के पीछे हमेशा कोई इंसान होता है।
‘हर फाइल के पीछे एक इंसान’
दिव्या मित्तल ने अपने इस्तीफे के संदेश में प्रशासनिक सेवा से मिली सबसे महत्वपूर्ण सीखों में से एक का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि किसी भी सरकारी फाइल को केवल एक कागज की तरह नहीं देखना चाहिए।
उस फाइल के पीछे किसी व्यक्ति की समस्या, उम्मीद या जीवन जुड़ा हो सकता है।
यही सोच उनके प्रशासनिक अनुभव का महत्वपूर्ण हिस्सा रही।
उनका कहना था कि सरकार और प्रशासन में काम करते हुए उन्होंने जनता से जितना सीखा, शायद उतना वह उन्हें दे नहीं पाईं।
पद से ज्यादा लोगों का भरोसा
दिव्या मित्तल ने अपने 13 साल के अनुभव को याद करते हुए यह भी कहा कि वास्तविक ताकत किसी पद या कुर्सी में नहीं होती।
उनके अनुसार, असली शक्ति लोगों का विश्वास और काम करने की नीयत है।
उन्होंने लिखा कि सेवा के दौरान उन्हें यह समझ आया कि सही चीज के लिए खड़े होना कोई विकल्प नहीं बल्कि जिम्मेदारी है।
उनके इस संदेश को सोशल मीडिया पर काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
पद खत्म हो सकता है, सपना नहीं
इस्तीफे की घोषणा करते हुए दिव्या मित्तल ने एक भावुक संदेश लिखा।
उनका कहना था कि पद खत्म हो सकता है, लेकिन लोगों के लिए कुछ करने का सपना खत्म नहीं होता।
उन्होंने संकेत दिया कि प्रशासनिक पद छोड़ने के बावजूद वह समाज से पूरी तरह अलग नहीं होंगी।
उनका कहना था कि अब वह उस सपने को दूसरे तरीके से आगे बढ़ाना चाहती हैं जो लोगों के बीच काम करते हुए उनके भीतर पैदा हुआ।
लंदन की नौकरी छोड़कर बनी थीं IAS
दिव्या मित्तल की करियर यात्रा शुरू से ही सामान्य नहीं रही।
IAS में आने से पहले वह विदेश में कॉर्पोरेट सेक्टर में काम कर रही थीं।
उन्होंने लंदन की एक अच्छी नौकरी छोड़कर भारत लौटने और सिविल सेवा की तैयारी करने का फैसला किया था।
यह निर्णय उस समय भी बड़ा करियर बदलाव माना गया था।
अब करीब 13 साल बाद उन्होंने एक बार फिर जीवन में बड़ा करियर परिवर्तन किया है।
IIT दिल्ली से की पढ़ाई
दिव्या मित्तल की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी काफी मजबूत रही है।
उन्होंने IIT दिल्ली से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।
इसके बाद उन्होंने IIM बेंगलुरु से मैनेजमेंट की पढ़ाई की।
IIT और IIM जैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ाई के बाद उनके पास कॉर्पोरेट क्षेत्र में मजबूत करियर विकल्प मौजूद थे।
लेकिन उन्होंने सिविल सेवा को चुना।
IIM बेंगलुरु के बाद लंदन
IIM बेंगलुरु से पढ़ाई पूरी करने के बाद दिव्या मित्तल को कॉर्पोरेट सेक्टर में अवसर मिला।
वह लंदन में काम करने लगीं।
लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने वह नौकरी छोड़ने और भारत लौटकर UPSC की तैयारी करने का फैसला किया।
यह निर्णय उस समय आसान नहीं रहा होगा क्योंकि विदेश में स्थापित करियर छोड़कर सिविल सेवा की तैयारी करना अनिश्चितता से भरा कदम था।
दूसरे प्रयास में मिली सफलता
दिव्या मित्तल ने UPSC सिविल सर्विस परीक्षा में दूसरे प्रयास में सफलता हासिल की।
इसके बाद उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा में उत्तर प्रदेश कैडर मिला।
2013 बैच की अधिकारी के रूप में उनकी प्रशासनिक यात्रा शुरू हुई।
समय के साथ उन्होंने अलग-अलग विभागों और जिलों में जिम्मेदारी संभाली।
तीन जिलों में रहीं DM
दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश के तीन जिलों में जिलाधिकारी के रूप में काम किया।
उन्होंने देवरिया, मिर्जापुर और संत कबीरनगर में DM की जिम्मेदारी संभाली।
जिलाधिकारी का पद जिला प्रशासन का सबसे महत्वपूर्ण पद माना जाता है।
कानून-व्यवस्था, विकास कार्य, राजस्व, चुनाव, आपदा प्रबंधन और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन जैसी कई जिम्मेदारियां DM के पास होती हैं।
देवरिया में भी रही चर्चा
देवरिया में जिलाधिकारी के रूप में दिव्या मित्तल की कार्यशैली चर्चा में रही।
जनता की शिकायतों को सुनने और समस्याओं के समाधान को लेकर उनके कई फैसले सामने आए।
उनके समर्थक उन्हें एक सक्रिय और जमीन पर काम करने वाली अधिकारी के रूप में देखते रहे।
हालांकि किसी भी अधिकारी की तरह उनके प्रशासनिक फैसलों को लेकर अलग-अलग मत भी रहे।
संत कबीरनगर में भी संभाली जिम्मेदारी
दिव्या मित्तल ने संत कबीरनगर में भी जिलाधिकारी के पद पर काम किया।
यहां भी उन्हें जिले की प्रशासनिक और विकास संबंधी जिम्मेदारियां संभालनी पड़ीं।
अलग-अलग जिलों में काम करने से उन्हें ग्रामीण और शहरी प्रशासन दोनों के अनुभव मिले।
इस्तीफे के समय किस पद पर थीं?
इस्तीफे के समय दिव्या मित्तल उत्तर प्रदेश सरकार में राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात थीं।
30 अगस्त 2026 को उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने की जानकारी सार्वजनिक की।
इसके बाद प्रशासनिक और सोशल मीडिया हलकों में उनके फैसले की व्यापक चर्चा शुरू हो गई।
स्वैच्छिक इस्तीफा
दिव्या मित्तल ने स्पष्ट किया कि उन्होंने IAS से स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है।
उनकी सोशल मीडिया पोस्ट में भी इस बात का उल्लेख था कि उन्होंने अपनी 13 साल की यात्रा को अपनी इच्छा से विराम दिया है।
उन्होंने इसे कड़वाहट या निराशा के बजाय कृतज्ञता के भाव के साथ पेश किया।
इस्तीफे के बाद भावुक पोस्ट
इस्तीफे की घोषणा करते हुए दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया पर लंबा संदेश लिखा।
इसमें उन्होंने अपनी प्रशासनिक यात्रा के दौरान मिले लोगों और अनुभवों को याद किया।
उन्होंने बताया कि कैसे सामान्य लोगों की छोटी-छोटी उम्मीदें सरकारी अधिकारी के काम को वास्तविक अर्थ देती हैं।
उनका संदेश किसी शिकायत या विवाद से ज्यादा जीवन और अनुभवों पर आधारित था।
‘मैंने लोगों से ज्यादा सीखा’
दिव्या मित्तल ने अपने संदेश में स्वीकार किया कि उन्हें लगता था कि वह लोगों के लिए काम करने निकली हैं।
लेकिन समय के साथ उन्हें महसूस हुआ कि जनता और अलग-अलग परिस्थितियों ने उन्हें कहीं ज्यादा सिखाया।
ग्रामीण क्षेत्रों में काम करते हुए उन्होंने लोगों की चुनौतियों और जीवन को करीब से देखा।
उनके अनुसार, यही अनुभव IAS की नौकरी का सबसे मूल्यवान हिस्सा रहा।
पद छोड़ना सेवा छोड़ना नहीं?
दिव्या मित्तल के संदेश से यह संकेत मिलता है कि वह पद छोड़ने को समाज से दूरी बनाने के रूप में नहीं देखतीं।
उनका कहना है कि किसी पद के बिना भी लोगों के लिए काम किया जा सकता है।
इसलिए उनका अगला कदम किस क्षेत्र में होगा, इसे लेकर काफी उत्सुकता है।
हालांकि उन्होंने अभी किसी औपचारिक परियोजना या नए संगठन की घोषणा नहीं की है।
अकादमिक क्षेत्र की ओर जा सकती हैं?
कुछ सूत्रों और रिपोर्टों में दावा किया गया है कि दिव्या मित्तल भविष्य में अकादमिक और लेखन से जुड़ा काम कर सकती हैं।
उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए यह संभावना असामान्य नहीं लगती।
लेकिन जब तक वह खुद अपनी अगली योजना की औपचारिक घोषणा नहीं करतीं, इसे निश्चित नहीं माना जाना चाहिए।
लेखन में भी रुचि
दिव्या मित्तल सोशल मीडिया पर लंबे समय से प्रशासन, प्रेरणा, शिक्षा और जीवन से जुड़े विचार साझा करती रही हैं।
उनके कई पोस्ट UPSC उम्मीदवारों और युवाओं के बीच लोकप्रिय रहे हैं।
ऐसे में भविष्य में लेखन या शिक्षण उनके लिए एक संभावित क्षेत्र हो सकता है।
UPSC उम्मीदवारों के बीच लोकप्रिय
दिव्या मित्तल का नाम UPSC की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय रहा है।
उन्होंने समय-समय पर पढ़ाई, अनुशासन, फोकस और परीक्षा की तैयारी को लेकर टिप्स साझा किए हैं।
उनके सोशल मीडिया पोस्ट अक्सर वायरल होते रहे हैं।
उनकी खुद की IIT, IIM और UPSC की यात्रा भी युवाओं के लिए प्रेरक उदाहरण के रूप में देखी जाती रही है।
क्या प्रतिष्ठित नौकरी छोड़ना गलत है?
दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर यह सवाल भी उठा कि आखिर कोई व्यक्ति इतनी प्रतिष्ठित नौकरी क्यों छोड़ता है।
उनका जवाब इसी सोच को चुनौती देता है।
उनके मुताबिक, नौकरी कितनी भी प्रतिष्ठित क्यों न हो, वह जीवन का केवल एक हिस्सा है।
अगर व्यक्ति को लगता है कि उसकी प्राथमिकताएं बदल चुकी हैं, तो उसे अपने जीवन का अगला कदम चुनने का अधिकार होना चाहिए।
करियर को जीवन की पूरी पहचान न बनाएं
उनके बयान का एक व्यापक संदेश यह भी है कि करियर को जीवन की पूरी पहचान नहीं बनाना चाहिए।
भारत में UPSC और IAS को लेकर बहुत बड़ा सामाजिक आकर्षण है।
बहुत से युवा इसे सफलता की अंतिम मंजिल मानते हैं।
दिव्या मित्तल की सोच इससे अलग है।
उनके अनुसार, IAS उनके लिए उपलब्धि थी, लेकिन जीवन की एकमात्र उपलब्धि नहीं।
परिवार और करियर के बीच संतुलन
उच्च स्तर की सरकारी नौकरी में काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता।
जिलाधिकारी जैसी जिम्मेदारी में कभी भी आपात स्थिति पैदा हो सकती है।
चुनाव, आपदा, कानून-व्यवस्था और सरकारी कार्यक्रमों के कारण अधिकारियों को लंबे समय तक काम करना पड़ता है।
दिव्या मित्तल ने अब परिवार को अधिक समय देने की इच्छा जताकर इसी व्यक्तिगत संतुलन को प्राथमिकता दी है।
पति भी छोड़ चुके हैं सिविल सर्विस
दिव्या मित्तल के पति गगनदीप सिंह भी पहले सिविल सर्विस से जुड़े थे।
उन्होंने 2022 में सरकारी सेवा से इस्तीफा दिया था।
इसके बाद उन्होंने निजी क्षेत्र में अपना करियर शुरू किया और वर्तमान में ट्रेडिंग से जुड़े काम में होने की जानकारी सामने आई है।
दोनों के करियर में बड़े बदलाव को लेकर भी सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है।
पति के इस्तीफे से जुड़ा नहीं मौजूदा फैसला
हालांकि उनके पति पहले ही सरकारी सेवा छोड़ चुके हैं, लेकिन दिव्या मित्तल ने अपने इस्तीफे को किसी एक पारिवारिक या व्यावसायिक योजना से नहीं जोड़ा है।
उन्होंने सिर्फ इतना कहा है कि अब वह परिवार और अपनी रुचियों को ज्यादा समय देना चाहती हैं।
इसलिए यह मान लेना कि दोनों किसी निश्चित संयुक्त कारोबार या प्रोजेक्ट में जा रहे हैं, फिलहाल अनुमान ही होगा।
IAS छोड़ना आसान फैसला नहीं
किसी व्यक्ति के लिए 13 साल की सेवा के बाद IAS जैसी नौकरी छोड़ना निश्चित रूप से बड़ा निर्णय है।
इस दौरान अधिकारी न केवल एक करियर बल्कि पूरी प्रशासनिक पहचान विकसित कर चुका होता है।
सरकारी सुविधाएं, स्थिरता और सामाजिक प्रतिष्ठा भी इस पद से जुड़ी होती हैं।
इन सबको छोड़कर नया रास्ता चुनना मानसिक रूप से भी बड़ा बदलाव हो सकता है।
दिव्या ने इसे अंत नहीं माना
दिव्या मित्तल ने अपने फैसले को किसी अंत के रूप में पेश नहीं किया।
उनका कहना है कि जिंदगी आगे चलती है और एक अध्याय खत्म होने के बाद दूसरा शुरू होता है।
इसी वजह से उन्होंने कहा कि IAS उनकी पूरी जिंदगी नहीं बल्कि केवल एक चैप्टर था।
लोगों की प्रतिक्रियाएं
उनके इस्तीफे की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में प्रतिक्रियाएं आईं।
कई लोगों ने उनके फैसले का सम्मान किया।
कुछ ने उन्हें प्रशासनिक सेवा में किए गए काम के लिए धन्यवाद दिया।
वहीं कुछ लोगों ने भविष्य में उनकी भूमिका को लेकर सवाल पूछे।
UPSC उम्मीदवारों के बीच भी इस फैसले को लेकर काफी चर्चा हुई।
इस्तीफे पर सवाल क्यों इतने ज्यादा?
IAS जैसी सेवा में बहुत कम अधिकारी स्वेच्छा से इस्तीफा देते हैं।
इसी वजह से जब कोई चर्चित अधिकारी ऐसा करता है तो स्वाभाविक रूप से लोगों की उत्सुकता बढ़ जाती है।
दिव्या मित्तल की लोकप्रियता और उनका प्रशासनिक रिकॉर्ड इस चर्चा को और बड़ा बनाता है।
क्या सिस्टम से निराश थीं?
इस्तीफे के बाद यह सवाल भी उठा कि क्या दिव्या मित्तल प्रशासनिक व्यवस्था से निराश थीं।
लेकिन उनके सार्वजनिक बयान में ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं है।
इसके उलट उन्होंने अपनी 13 साल की यात्रा को कृतज्ञता और सीख से भरा अनुभव बताया है।
उन्होंने सिस्टम को लेकर कोई बड़ा आरोप नहीं लगाया।
इसलिए उनके फैसले को सिस्टम से निराशा के रूप में पेश करना उपलब्ध तथ्यों से मेल नहीं खाता।
क्या किसी ट्रांसफर से नाराज थीं?
सिविल सेवा में अधिकारियों के ट्रांसफर आम बात हैं।
कई बार चर्चित अधिकारियों के तबादले के बाद राजनीतिक या प्रशासनिक बहस शुरू हो जाती है।
दिव्या मित्तल के मामले में भी कुछ लोगों ने इस्तीफे को पोस्टिंग या ट्रांसफर से जोड़ने की कोशिश की।
लेकिन उन्होंने खुद साफ किया कि किसी एक घटना ने उनके फैसले को जन्म नहीं दिया।
जीवन की प्राथमिकताएं बदल सकती हैं
दिव्या मित्तल का कहना है कि जिंदगी में प्राथमिकताएं समय के साथ बदल सकती हैं।
जो लक्ष्य किसी व्यक्ति के लिए 20 या 25 साल की उम्र में सबसे महत्वपूर्ण होता है, वही लक्ष्य बाद में उतना महत्वपूर्ण रहे यह जरूरी नहीं।
यही सोच उनके इस्तीफे के पीछे दिखाई देती है।
सफलता की परिभाषा पर सवाल
उनके फैसले ने सफलता की परिभाषा को लेकर भी चर्चा शुरू कर दी है।
भारत में एक प्रतिष्ठित सरकारी नौकरी को अक्सर स्थायी सफलता माना जाता है।
लेकिन दिव्या मित्तल का फैसला यह दिखाता है कि सफलता व्यक्तिगत अनुभव और संतुष्टि से भी जुड़ी हो सकती है।
युवाओं के लिए क्या संदेश?
हालांकि उनका इस्तीफा किसी युवा को IAS की तैयारी से हतोत्साहित करने वाला संदेश नहीं है।
उन्होंने खुद 13 साल तक इस सेवा को बेहद महत्वपूर्ण अनुभव माना।
लेकिन उनकी कहानी यह जरूर बताती है कि किसी भी नौकरी को जीवन की अंतिम पहचान नहीं मानना चाहिए।
व्यक्ति की प्राथमिकताएं और सपने बदल सकते हैं।
सिविल सर्विस से मिली सीख
दिव्या मित्तल ने अपनी प्रशासनिक यात्रा से कई सीखों का उल्लेख किया।
उनमें सबसे महत्वपूर्ण रहा लोगों की समस्याओं को कागजी प्रक्रिया से आगे जाकर समझना।
उनका कहना था कि फाइल में दिखाई देने वाली एक छोटी सी समस्या किसी परिवार के लिए बहुत बड़ी हो सकती है।
प्रशासन में संवेदनशीलता
उनकी यह सोच प्रशासनिक सेवा में संवेदनशीलता के महत्व को रेखांकित करती है।
किसी सरकारी निर्णय के पीछे वास्तविक लोगों की जिंदगी होती है।
इसलिए अधिकारी के लिए नियमों के साथ मानवीय दृष्टिकोण रखना भी जरूरी है।
लहुरियादह की कहानी इसका उदाहरण
मिर्जापुर के लहुरियादह गांव में पानी पहुंचाने की कहानी इसी सोच का उदाहरण बनी।
125 घरों में पाइप से पानी पहुंचना आंकड़ों में छोटी उपलब्धि लग सकती है।
लेकिन उन ग्रामीणों के लिए यह दशकों पुरानी समस्या का समाधान था।
एक वृद्ध महिला का आशीर्वाद दिव्या मित्तल के लिए इसी वजह से इतना महत्वपूर्ण बना।
‘पद छूट गया, सपना नहीं’
उनके इस्तीफे का सार शायद इसी भावना में दिखाई देता है।
उन्होंने सरकारी पद छोड़ा है लेकिन समाज के लिए कुछ करने की इच्छा छोड़ने की बात नहीं कही।
अब यह देखना होगा कि वह अपने अगले अध्याय में इस सोच को किस रूप में आगे बढ़ाती हैं।
अगला कदम क्या होगा?
फिलहाल दिव्या मित्तल ने अपनी भविष्य की योजना का पूरा खुलासा नहीं किया है।
वह कुछ समय परिवार और व्यक्तिगत रुचियों को देना चाहती हैं।
इसके बाद अकादमिक, लेखन, सामाजिक क्षेत्र या कोई दूसरा रास्ता चुन सकती हैं।
लेकिन अभी इन संभावनाओं को अनुमान के रूप में ही देखना उचित है।
निष्कर्ष
2013 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने 13 साल की सेवा के बाद भारतीय प्रशासनिक सेवा से स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है। 30 अगस्त 2026 को उनके फैसले की जानकारी सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की अटकलें शुरू हो गई थीं। अब दिव्या मित्तल ने इंटरव्यू में अपने फैसले को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है।
उन्होंने साफ कहा है कि यह फैसला किसी दबाव, विवाद या अचानक पैदा हुई परिस्थिति का परिणाम नहीं है। इसके पीछे कोई एक ‘ट्रिगर मोमेंट’ भी नहीं था। उन्होंने लंबे समय तक अपने जीवन और भविष्य के बारे में सोचने के बाद यह निर्णय लिया।
दिव्या मित्तल ने IAS को अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण लेकिन सीमित अध्याय बताया। उनका कहना है कि यह नौकरी उनके जीवन का एक चैप्टर थी, पूरी जिंदगी नहीं। अब वह परिवार और अपनी रुचियों को अधिक समय देना चाहती हैं।
राजनीति में जाने से जुड़ी अटकलों पर भी उन्होंने फिलहाल विराम लगा दिया है। उपलब्ध बातचीत में उन्होंने राजनीति में प्रवेश की किसी योजना से इनकार किया है। इसलिए उनके इस्तीफे को आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव या किसी राजनीतिक पार्टी से जोड़ना फिलहाल तथ्यों पर आधारित नहीं है।
उनका 13 साल का प्रशासनिक सफर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से भरा रहा। वह उत्तर प्रदेश के देवरिया, मिर्जापुर और संत कबीरनगर जिलों में जिलाधिकारी रहीं। इन जिलों में काम करते हुए उन्होंने कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ विकास योजनाओं पर भी काम किया।
मिर्जापुर में उनकी पोस्टिंग के दौरान लहुरियादह गांव में पाइप से पानी पहुंचाने की परियोजना सबसे ज्यादा चर्चित रही। कई दशकों से पानी की समस्या झेल रहे इस पहाड़ी गांव के करीब 125 घरों में पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाया गया। दिव्या मित्तल ने इस्तीफे की घोषणा के दौरान इस गांव की एक वृद्ध महिला को याद किया जिसने पानी मिलने के बाद उनके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया था।
उनके लिए यह घटना किसी सरकारी परियोजना की उपलब्धि से ज्यादा थी। यह इस बात का उदाहरण थी कि प्रशासनिक फैसलों का आम लोगों की जिंदगी पर कितना सीधा असर पड़ सकता है।
उन्होंने अपने संदेश में यही बात कही कि हर सरकारी फाइल के पीछे एक इंसान होता है। किसी अधिकारी के लिए फाइल केवल कागज हो सकती है, लेकिन उसके पीछे किसी व्यक्ति की जिंदगी, समस्या या उम्मीद हो सकती है।
दिव्या मित्तल की खुद की करियर यात्रा भी कई बड़े फैसलों से भरी रही है। उन्होंने IIT दिल्ली और IIM बेंगलुरु जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ाई की। इसके बाद लंदन में कॉर्पोरेट नौकरी की, लेकिन उसे छोड़कर भारत लौट आईं और UPSC सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी शुरू की। दूसरे प्रयास में सफल होने के बाद उन्होंने 2013 में IAS जॉइन किया।
यानी 13 साल पहले भी उन्होंने एक स्थापित करियर छोड़कर नया रास्ता चुना था और अब एक बार फिर वही कर रही हैं।
उनके पति गगनदीप सिंह ने भी 2022 में सिविल सर्विस से इस्तीफा दिया था और बाद में निजी क्षेत्र में अपना करियर शुरू किया। इस कारण दिव्या मित्तल के इस्तीफे को लेकर परिवार की भविष्य की योजनाओं पर भी अटकलें लग रही हैं। लेकिन दिव्या ने फिलहाल किसी संयुक्त व्यवसाय या दूसरे निश्चित करियर विकल्प की घोषणा नहीं की है।
कुछ रिपोर्टों में उनके अकादमिक और लेखन की ओर जाने की संभावना बताई गई है। हालांकि जब तक वह खुद इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं करतीं, इसे उनकी तय योजना नहीं माना जाना चाहिए।
दिव्या मित्तल का यह फैसला उन हजारों युवाओं के लिए भी दिलचस्प उदाहरण है जो IAS को जीवन की अंतिम सफलता मानते हैं। उनका संदेश यह नहीं है कि सिविल सेवा महत्वपूर्ण नहीं है। उन्होंने खुद इसे अपनी जिंदगी की अविस्मरणीय यात्रा बताया है। लेकिन वह यह जरूर कह रही हैं कि किसी व्यक्ति का जीवन उसकी नौकरी से बड़ा होता है।
उनके अनुसार, पद और प्रतिष्ठा हमेशा के लिए नहीं रहते। लोगों के बीच काम करने से मिले अनुभव और सीख ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
इसी कारण उन्होंने इस्तीफे को किसी हार या निराशा की तरह पेश नहीं किया। उनके संदेश में कहीं भी व्यवस्था को लेकर कटुता दिखाई नहीं देती। इसके बजाय उन्होंने अपने अनुभवों, सहकर्मियों और आम लोगों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
यही बात उनके इस्तीफे को सामान्य करियर बदलाव से अलग बनाती है।
एक तरफ उन्होंने लंदन की नौकरी छोड़कर IAS बनने का फैसला किया था। दूसरी तरफ अब IAS जैसी प्रतिष्ठित सेवा छोड़कर अपने जीवन के अगले अध्याय की ओर बढ़ने का निर्णय लिया है।
इन दोनों फैसलों में एक समान बात दिखाई देती है—उन्होंने स्थापित रास्ते पर केवल इसलिए बने रहने का फैसला नहीं किया क्योंकि वह सुरक्षित या प्रतिष्ठित था।
उनके अनुसार, जिंदगी में यह पूछना जरूरी है कि अगला अध्याय क्या होना चाहिए।
फिलहाल दिव्या मित्तल का कहना है कि उनकी प्राथमिकता परिवार और व्यक्तिगत रुचियां हैं। आगे वह किस क्षेत्र में सक्रिय होंगी, इसे लेकर आने वाले समय में तस्वीर स्पष्ट होगी।
लेकिन उनके इंटरव्यू ने कम से कम एक बड़ी अटकल को खत्म कर दिया है—IAS छोड़ने का फैसला किसी दबाव या अचानक हुई घटना के कारण नहीं था।
यह एक स्वैच्छिक, व्यक्तिगत और सोच-समझकर लिया गया निर्णय था।
13 साल की प्रशासनिक सेवा समाप्त हो गई है, लेकिन दिव्या मित्तल खुद इसे अपनी यात्रा का अंत नहीं मानतीं।
उनके लिए IAS का चैप्टर पूरा हुआ है। जिंदगी की किताब अभी बाकी है।