ड्रोन, डिफेंस और AI एजुकेशन तक साझेदारी: 27 घंटे में भारत-इजरायल के 27 अहम समझौते

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया दौरे के दौरान भारत और इजरायल के बीच रिकॉर्ड समय में 27 महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनी। महज 27 घंटों के भीतर हुए इन करारों ने दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।

यह समझौते रक्षा, तकनीक, कृषि, साइबर सुरक्षा, ड्रोन टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित शिक्षा जैसे विविध क्षेत्रों को कवर करते हैं।


रक्षा और ड्रोन टेक्नोलॉजी पर जोर

भारत-इजरायल संबंधों की सबसे मजबूत कड़ी रक्षा सहयोग रही है। नए समझौतों के तहत:

  • अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक का संयुक्त विकास

  • सीमा सुरक्षा और निगरानी सिस्टम में सहयोग

  • एंटी-ड्रोन और मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर साझेदारी

इससे भारत की रक्षा क्षमताओं को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।


AI और शिक्षा में नई पहल

दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित शिक्षा मॉडल पर भी सहमति जताई।

  • संयुक्त रिसर्च सेंटर की स्थापना

  • स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा

  • डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म पर सहयोग

इजरायल को स्टार्टअप नेशन माना जाता है, ऐसे में यह सहयोग भारतीय युवाओं और टेक कंपनियों के लिए फायदेमंद हो सकता है।


कृषि और जल प्रबंधन

इजरायल की उन्नत जल प्रबंधन तकनीक और ड्रिप इरिगेशन मॉडल पहले से भारत में सफल रहे हैं। अब:

  • स्मार्ट फार्मिंग टेक्नोलॉजी

  • जल संरक्षण प्रोजेक्ट

  • रेगिस्तानी क्षेत्रों में खेती के मॉडल

पर नई पहल की जाएगी।


साइबर सुरक्षा और इनोवेशन

साइबर खतरों से निपटने के लिए संयुक्त प्रशिक्षण और टेक्नोलॉजी शेयरिंग पर सहमति बनी है। दोनों देश मिलकर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित बनाने की दिशा में काम करेंगे।


आर्थिक और निवेश सहयोग

  • स्टार्टअप फंडिंग

  • टेक इन्वेस्टमेंट

  • औद्योगिक साझेदारी

इन समझौतों से व्यापारिक रिश्तों को भी नई गति मिलने की संभावना है।


क्यों खास है यह दौरा?

इतने कम समय में इतने व्यापक समझौते होना इस बात का संकेत है कि दोनों देश दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह साझेदारी केवल रक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि तकनीक, शिक्षा और नवाचार तक फैल चुकी है।


निष्कर्ष

भारत और इजरायल के बीच हुए 27 समझौते दोनों देशों के रिश्तों को बहुआयामी और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम हैं। ड्रोन से लेकर AI आधारित पढ़ाई तक, यह साझेदारी आने वाले वर्षों में तकनीकी और रणनीतिक क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर सकती है।

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