इजरायल PM का नरेंद्र मोदी से फोन, भारत ने गाजा शांति योजना को दिया मजबूत समर्थन

5

इजरायल और गाजा के बीच चल रहे तनावपूर्ण हालात के बीच एक अहम कूटनीतिक बातचीत सामने आई है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बुधवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कर गाजा शांति प्रक्रिया और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर चर्चा की। दोनों नेताओं की यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका ने गाजा को लेकर 20 बिंदुओं वाला एक नया पीस प्लान पेश किया है, जिस पर दुनिया भर की निगाहें टिकी हैं।

बताया जा रहा है कि नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी को इस प्रस्ताव की महत्वपूर्ण बातों से अवगत कराया और इस पर इजरायल के विचार साझा किए। बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में स्थिरता और शांति के लिए वैश्विक स्तर पर मजबूत साझेदारी की आवश्यकता है। इसके जवाब में भारत ने इस पहल को सकारात्मक बताया और स्पष्ट किया कि भारत हर उस प्रयास का समर्थन करता है जो मानवता की रक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और शांति स्थापना की दिशा में उठाया गया हो।

प्रधानमंत्री मोदी ने चर्चा के दौरान यह भी कहा कि भारत हमेशा से समस्याओं का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से करने में विश्वास रखता है। उनका कहना था कि संघर्ष से प्रभावित नागिरकों की सुरक्षा और मानवीय सहायता की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। भारत का यह दृष्टिकोण अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी साफ दिखता रहा है, जहां भारत कई बार मानवीय आधार पर गाजा के नागरिकों के प्रति चिंता जता चुका है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पेश किए गए 20-पॉइंट गाजा पीस प्लान को इस क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। यह योजना संघर्षविराम, मानवीय सहायता की सुचारु आपूर्ति, युद्धग्रस्त क्षेत्रों के पुनर्निर्माण और भविष्य में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए दिशा-निर्देश देती है। यह भी बताया गया है कि इस प्लान में विभिन्न पक्षों को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास किया गया है ताकि आगे की बातचीत सहज हो सके।

इजरायल के प्रधानमंत्री ने फोन पर इस योजना को लेकर भारत से सहयोग की उम्मीद जताई। उनका कहना था कि भारत जैसे प्रभावशाली और तटस्थ देशों का समर्थन इस योजना को मजबूत करता है और दुनिया के अन्य देशों को भी सकारात्मक रुख अपनाने के लिए प्रेरित करता है। गाजा मुद्दे पर भारत की नरम और संतुलित कूटनीति अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अक्सर सराहना पाती है।

भारत ने कई अंतरराष्ट्रीय अवसरों पर यह स्पष्ट किया है कि वह संघर्षों के समाधान के लिए स्थायी और शांतिपूर्ण विकल्पों का समर्थन करता है। मोदी ने बातचीत के दौरान दोहराया कि भारत का प्राथमिक उद्देश्य शांति, स्थिरता और मानवीय सहायता सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत किसी भी प्रकार की हिंसा की निंदा करता है और निर्दोष लोगों को नुकसान पहुंचाना किसी भी पक्ष के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकता।

मोदी और नेतन्याहू के बीच यह वार्ता भारत-इजरायल संबंधों की मजबूती का भी संकेत देती है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों ने रक्षा, साइबर सुरक्षा, कृषि, जल प्रबंधन और तकनीकी सहयोग जैसे क्षेत्रों में अपने रिश्तों को और गहरा किया है। हालांकि, गाजा मुद्दे पर भारत का रुख हमेशा संतुलित रहा है, जहां वह इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को समझता है, वहीं फिलिस्तीनी जनता के अधिकारों और मानवीय आवश्यकताओं को भी उतनी ही गंभीरता से देखता है।

कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बातचीत एक बड़े संदेश का संकेत देती है — भारत वैश्विक शांति प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार है, लेकिन किसी भी पक्षपातपूर्ण नीति से दूर रहते हुए। कई विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि भारत की मध्यमार्गी स्थिति उसे ऐसे मुद्दों पर एक संभावित मध्यस्थ की भूमिका के लिए भी योग्य बनाती है।

गाजा में हालात फिलहाल संवेदनशील बने हुए हैं। मानवीय संकट लगातार गहराता जा रहा है और युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, पानी, दवाइयों और राहत सामग्री की कमी गंभीर चुनौती बन चुकी है। अमेरिकी पीस प्लान का उद्देश्य इसी संकट को कम करना है और एक ऐसे ढांचे की स्थापना करना है जो भविष्य में दीर्घकालिक समाधान की ओर ले जाए।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। कई देशों ने इस प्लान का समर्थन किया है, वहीं कुछ देशों ने इस पर अपनी शंकाएं भी दर्ज कराई हैं। लेकिन भारत का स्पष्ट समर्थन इजरायल और अमेरिका दोनों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

वार्ता के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने इजरायली समकक्ष को भरोसा दिलाया कि भारत हर संभव मानवीय और कूटनीतिक मदद के लिए तैयार रहेगा। मोदी ने यह भी कहा कि भारत ऐसी सभी पहलों को प्रोत्साहित करता है जिनका उद्देश्य तनाव कम करना और नागरिकों की जान बचाना हो।

इस फोन कॉल के बाद यह साफ है कि गाजा में शांति बहाल करने की दिशा में वैश्विक स्तर पर तेज़ी से प्रयास किए जा रहे हैं, और भारत इन प्रयासों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिकी पीस प्लान पर बाकी देशों की क्या प्रतिक्रिया आती है और इस योजना के कौन-कौन से हिस्से धरातल पर लागू हो पाते हैं।

 

Share it :

End