अचानक भारतीय बाजार को क्या हुआ? कुछ ही घंटों में बदला माहौल, IT शेयरों की बिकवाली से निवेशकों की दौलत पर असर

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भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को कारोबार की शुरुआत मजबूती के साथ की, लेकिन कुछ ही घंटों में तस्वीर बदल गई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 75,000 के स्तर के पार पहुंच गया था और निफ्टी भी हरे निशान में था। अमेरिका और एशिया के बाजारों से सकारात्मक संकेत मिल रहे थे, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी की उम्मीद थी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी नीचे आई थी। इसके बावजूद दिन आगे बढ़ने के साथ भारतीय बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया। खासतौर पर IT शेयरों में तेज गिरावट ने बाजार की दिशा बदल दी। कारोबार खत्म होने तक सेंसेक्स 329.91 अंक गिरकर 74,529.08 पर और निफ्टी 85.30 अंक टूटकर 23,329 पर बंद हुआ।

सोमवार को बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली थी। सेंसेक्स 564 अंक चढ़ा था, जबकि निफ्टी करीब 68 अंक ऊपर बंद हुआ था। इस तेजी के बाद मंगलवार को शुरुआती बढ़त पर कुछ निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू की। लगातार चार कारोबारी सत्रों की तेजी के बाद बाजार में ऊंचे स्तरों पर बिकवाली बढ़ने की संभावना पहले से बनी हुई थी। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली और कुछ प्रमुख सेक्टरों में कमजोरी ने भी सेंटीमेंट पर असर डाला।

75,000 के पार पहुंचा सेंसेक्स, फिर बदली कहानी

मंगलवार सुबह भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत काफी सकारात्मक रही। सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 74,858.99 के मुकाबले 74,901 के आसपास खुला और शुरुआती कारोबार में करीब 180 अंकों की तेजी के साथ 75,000 का स्तर पार कर गया। निफ्टी ने भी करीब 75 अंकों की शुरुआती बढ़त हासिल की और 23,489 के आसपास पहुंच गया।

शुरुआती तेजी की वजह वैश्विक बाजारों से मिल रहे सकारात्मक संकेत थे। सोमवार को अमेरिकी बाजार बढ़त के साथ बंद हुए थे और एशियाई बाजारों में भी ज्यादातर जगह मजबूती दिखाई दी। इसके साथ ही अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड करीब 4.95 फीसदी तक नीचे आई थी। कच्चे तेल की कीमतों में भी पिछले दिनों की तुलना में नरमी की उम्मीद थी। इन संकेतों ने बाजार को शुरुआती समर्थन दिया।

लेकिन बाजार की यह तेजी ज्यादा देर नहीं टिक सकी। ऊंचे स्तरों पर बिकवाली शुरू हुई और IT समेत कई सेक्टरों में दबाव बढ़ने लगा। दोपहर तक सेंसेक्स दिन के ऊपरी स्तर से करीब 400 अंक नीचे आ गया था। अंत में यह 330 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ।

IT शेयरों ने बाजार पर बनाया दबाव

मंगलवार की गिरावट में IT सेक्टर प्रमुख दबाव वाले क्षेत्रों में रहा। निफ्टी IT इंडेक्स करीब 1.57 फीसदी नीचे बंद हुआ। HCL Technologies, Infosys, Tech Mahindra और TCS जैसे बड़े IT शेयरों में गिरावट देखने को मिली।

रॉयटर्स के मुताबिक IT शेयरों पर मांग और कंपनियों की भविष्य की कमाई को लेकर चिंताओं का असर पड़ा। बाजार में यह चिंता बनी हुई है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षेत्र में बदलती परिस्थितियों का असर भारतीय IT कंपनियों की आय और नए कारोबार पर पड़ सकता है।

HCL Technologies दिन के प्रमुख कमजोर शेयरों में रहा। TCS में भी गिरावट रही। इसके अलावा ऑटो, FMCG, फार्मा, बैंकिंग और कुछ अन्य सेक्टरों में भी दबाव देखने को मिला। इससे गिरावट केवल एक-दो शेयरों तक सीमित नहीं रही और बाजार की व्यापक तस्वीर कमजोर हुई।

चार दिन की तेजी के बाद मुनाफावसूली

बाजार में मंगलवार की कमजोरी का एक कारण मुनाफावसूली भी माना जा रहा है। इससे पहले लगातार चार कारोबारी सत्रों में भारतीय बाजार में सुधार हुआ था। सोमवार को ही सेंसेक्स में 564 अंकों की तेजी आई थी।

जब बाजार कुछ सत्रों में तेजी से ऊपर जाता है, तो कुछ निवेशक अपने पहले से मौजूद मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए शेयर बेचते हैं। मंगलवार को शुरुआती तेजी के बाद यही प्रक्रिया देखने को मिली। ऊंचे स्तरों पर बिकवाली बढ़ने के कारण सुबह की तेजी धीरे-धीरे खत्म हो गई।

हालांकि इसे पूरे बाजार से निवेशकों की सामूहिक निकासी के रूप में देखना उचित नहीं होगा। घरेलू संस्थागत निवेशक मंगलवार से पहले भी बाजार में खरीदारी करते रहे थे। 21 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 576.20 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की थी, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 2,797.27 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी।

FII की बिकवाली भी चिंता का कारण

विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs की गतिविधियां भारतीय बाजार के लिए लगातार महत्वपूर्ण संकेत बनी हुई हैं। 21 सितंबर को FIIs ने भारतीय शेयरों में 576.20 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की। इससे पहले भी कई कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों की तरफ से बिकवाली का दबाव रहा है।

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से बाजार की धारणा पर दबाव पड़ सकता है, खासकर तब जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी हो। हालांकि दूसरी तरफ घरेलू संस्थागत निवेशक खरीदारी कर रहे हैं। इस वजह से बाजार में विदेशी और घरेलू निवेशकों के रुझान के बीच अंतर भी दिखाई दे रहा है।

इसका अर्थ यह है कि बाजार में पूरी तरह एकतरफा बिकवाली नहीं है। घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार में कुछ सहारा दे रही है, लेकिन विदेशी फंडों की निकासी और सेक्टर आधारित बिकवाली के कारण उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

ग्लोबल संकेत अच्छे थे, फिर भी बाजार क्यों फिसला?

मंगलवार की सबसे दिलचस्प बात यही रही कि बाजार की शुरुआत सकारात्मक वैश्विक संकेतों के बावजूद हुई और बाद में गिरावट में बदल गई।

अमेरिकी बाजार सोमवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे। एशिया के कुछ प्रमुख बाजार भी मजबूत रहे। अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में गिरावट भी जोखिम वाली परिसंपत्तियों के लिए सकारात्मक मानी जाती है। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक बातचीत की उम्मीद के कारण तेल बाजार में भी कुछ नरमी आई थी।

लेकिन भारतीय बाजार के लिए घरेलू स्तर पर मौजूद दबाव अधिक प्रभावी साबित हुए। IT शेयरों की बिकवाली, ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली और विदेशी निवेशकों की बिक्री ने शुरुआती सकारात्मक संकेतों को पीछे छोड़ दिया।

कच्चे तेल की कीमतों पर भी नजर

कच्चे तेल की कीमतें इस समय भारतीय बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई हैं। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि से देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर असर पड़ सकता है।

मंगलवार की शुरुआत में तेल की कीमतों में नरमी ने बाजार को कुछ राहत दी थी। लेकिन बाद में Brent crude करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा। Financial Express के मुताबिक कारोबार के दौरान Brent crude 100.98 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी परिस्थितियां भी तेल बाजार के लिए महत्वपूर्ण हैं। अगर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है तो तेल की कीमतों में दोबारा तेजी आ सकती है। इसके विपरीत बातचीत या तनाव कम होने के संकेत तेल की कीमतों पर दबाव डाल सकते हैं।

14 में से 16 सेक्टर लाल निशान में

मंगलवार को बाजार की कमजोरी व्यापक रही। रॉयटर्स के अनुसार प्रमुख 16 सेक्टर इंडेक्स में से 14 गिरावट के साथ बंद हुए। IT इंडेक्स में करीब 0.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। छोटे और मझोले शेयरों के इंडेक्स में भी मामूली कमजोरी रही।

इसका मतलब यह है कि गिरावट केवल सेंसेक्स या निफ्टी में शामिल कुछ चुनिंदा कंपनियों तक सीमित नहीं थी। बाजार के अलग-अलग हिस्सों में बिकवाली दिखाई दी।

हालांकि कुछ शेयरों ने इसके उलट प्रदर्शन किया। Coal India करीब 3.2 फीसदी चढ़ा। Eternal और InterGlobe Aviation भी बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे। Titan में भी मजबूती दिखाई दी।

सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में क्या हुआ?

सेंसेक्स में Bajaj Finserv करीब 1.62 फीसदी गिरा। Trent में लगभग 1.47 फीसदी और Bajaj Finance में करीब 1.46 फीसदी की कमजोरी रही। Sun Pharma और TCS भी गिरावट वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे।

दूसरी तरफ Eternal में करीब 1.94 फीसदी की तेजी आई। InterGlobe Aviation करीब 1.58 फीसदी और Titan Company लगभग 0.72 फीसदी ऊपर रहा।

इससे पता चलता है कि पूरे बाजार में एक जैसी दिशा नहीं थी। कुछ कंपनियों में खरीदारी बनी रही, लेकिन प्रमुख इंडेक्स में शामिल कई बड़े शेयरों में गिरावट ने बाजार को नीचे खींच दिया।

क्लोजिंग के समय फिर बढ़ी अस्थिरता

मंगलवार का कारोबार केवल सामान्य बिकवाली के कारण चर्चा में नहीं रहा। बाजार बंद होने के समय Closing Auction Session यानी CAS के दौरान भी उतार-चढ़ाव देखा गया। यह दिन NSE के साप्ताहिक derivatives expiry से भी जुड़ा था।

Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार closing auction session के दौरान निफ्टी में अचानक करीब 1 फीसदी की तेज चाल देखने को मिली और यह 23,150 के स्तर से नीचे चला गया। इससे बाजार में अल्प अवधि की अस्थिरता पर भी चर्चा हुई।

बाजार नियामक द्वारा derivatives settlement व्यवस्था में बदलाव के प्रस्तावों को भी इस संदर्भ में देखा जा रहा है। कुछ बाजार प्रतिभागियों का मानना है कि प्रस्तावित बदलाव expiry-day volatility को कम कर सकते हैं, जबकि उनके क्रियान्वयन और बाजार की तैयारी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

निवेशकों की कुल संपत्ति पर कितना असर?

बाजार में गिरावट के साथ BSE पर सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में भी कमी आई। हालांकि ‘निवेशकों के 2 लाख करोड़ रुपये स्वाहा’ जैसी राशि को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह सीधे निवेशकों के बैंक खातों से निकली नकदी नहीं होती। बाजार पूंजीकरण शेयरों की कीमतों के आधार पर कंपनियों के कुल मूल्य का अनुमान है।

सोमवार को बाजार में तेजी के दौरान कुल BSE market capitalisation करीब 2 लाख करोड़ रुपये बढ़कर लगभग 482 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंचा था। मंगलवार की गिरावट में इसका एक हिस्सा वापस कम हुआ।

इसलिए बाजार पूंजीकरण में कमी का अर्थ यह नहीं है कि हर निवेशक ने उसी अनुपात में वास्तविक नुकसान दर्ज किया है। वास्तविक नुकसान या लाभ किसी निवेशक के पोर्टफोलियो, खरीद मूल्य और उस दिन शेयर की कीमत में बदलाव पर निर्भर करता है।

बाजार के सामने अभी कौन-कौन से संकेत?

भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाले कारोबारी सत्रों में कई संकेत महत्वपूर्ण रहेंगे। इनमें कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिका-ईरान संबंध, विदेशी निवेशकों का रुख, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, IT कंपनियों की आय और वैश्विक बाजारों की दिशा प्रमुख हैं।

इसके अलावा अमेरिका और चीन के बीच प्रस्तावित बातचीत तथा वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। हाल के दिनों में तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव में बदलाव का असर भारतीय बाजार पर साफ दिखाई दिया है।

घरेलू स्तर पर कंपनियों के तिमाही नतीजों और आर्थिक आंकड़ों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में हालिया सुधार के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आगे खरीदारी कितनी टिकाऊ रहती है।

अचानक गिरावट को कैसे समझें?

मंगलवार की गिरावट को किसी एक वजह से समझना मुश्किल है। बाजार की चाल कई कारकों के संयुक्त प्रभाव से बनी। सुबह सकारात्मक वैश्विक संकेतों और तेल की नरमी ने बाजार को ऊपर उठाया, लेकिन बाद में ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली शुरू हुई। IT शेयरों में दबाव बढ़ा और विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली ने सेंटीमेंट को प्रभावित किया। कई अन्य सेक्टरों में भी कमजोरी रही।

अंततः सेंसेक्स 74,529.08 और निफ्टी 23,329 पर बंद हुए। दोनों प्रमुख सूचकांकों ने अपनी लगातार चार सत्रों की तेजी का सिलसिला तोड़ दिया।

यानी मंगलवार का बाजार किसी एक बड़े झटके की वजह से अचानक नहीं टूटा, बल्कि कई दबाव एक साथ काम करते दिखाई दिए। शुरुआती तेजी के बाद मुनाफावसूली, IT शेयरों में बिकवाली, विदेशी फंडों की निकासी और सेक्टर आधारित दबाव ने बाजार की दिशा बदल दी। आगे बाजार की चाल के लिए तेल की कीमतें, वैश्विक भू-राजनीति, विदेशी निवेश और कंपनियों के प्रदर्शन से जुड़े संकेत महत्वपूर्ण बने रहेंगे।

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