
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) इन दिनों गंभीर परिचालन संकट से गुजर रही है। लगातार पांचवें दिन भी उड़ानों के बड़े पैमाने पर कैंसिल होने का सिलसिला जारी रहा। शनिवार को अकेले 800 से अधिक फ्लाइट्स रद्द कर दी गईं, जिससे हजारों यात्रियों की यात्रा योजनाएं पूरी तरह गड़बड़ा गईं। हालात इतने बिगड़ गए कि केंद्र सरकार को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा और इंडिगो के CEO को कारण बताओ नोटिस जारी कर 24 घंटे के अंदर जवाब मांगा गया है।
संकट थमने का नाम नहीं ले रहा
पिछले पांच दिनों से इंडिगो की उड़ानें लगातार रद्द हो रही हैं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता, चेन्नई, पुणे, अहमदाबाद और जयपुर जैसे बड़े एयरपोर्ट्स पर सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है। शनिवार को हालात और बिगड़े जब सुबह से ही फ्लाइट कैंसिलेशन की लाइन लग गई।
यात्री एयरपोर्ट पर घंटों फंसे रहे। कई यात्रियों को न तो समय पर कोई सूचना मिली, न ही वैकल्पिक उड़ानों की व्यवस्था की गई। हजारों लोग टिकट कैंसिलेशन, री-शेड्यूलिंग और रिफंड को लेकर परेशान होते नजर आए।
सरकार का सख्त रुख, CEO को नोटिस
सिविल एविएशन मंत्रालय ने इंडिगो के CEO को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सरकार ने साफ कहा है कि 24 घंटे के भीतर यह स्पष्ट किया जाए कि इतनी बड़ी संख्या में उड़ानें क्यों रद्द की जा रही हैं और यात्रियों की सुरक्षा व सुविधा को लेकर कंपनी क्या ठोस कदम उठा रही है।
सरकार का कहना है कि एयरलाइन की इस लापरवाही से न केवल यात्रियों को गंभीर परेशानी हो रही है, बल्कि पूरे एविएशन सेक्टर की साख पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
DGCA भी सख्त, जांच तेज
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने भी इंडिगो के खिलाफ जांच तेज कर दी है। DGCA को शक है कि टेक्निकल खामियों, स्टाफ की कमी और शेड्यूलिंग फेलियर के चलते लगातार उड़ानें कैंसिल हो रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक DGCA यह भी जांच कर रहा है कि कहीं एयरलाइन ने जरूरत से ज्यादा फ्लाइट ऑपरेट करने का दबाव तो नहीं बना रखा, जिसकी वजह से सिस्टम चरमरा गया है।
क्यों लगातार रद्द हो रही हैं उड़ानें?
इंडिगो की तरफ से अब तक कोई ठोस वजह औपचारिक रूप से सामने नहीं आई है, लेकिन कई कारणों पर चर्चाएं तेज हैं:
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पायलट और केबिन क्रू की भारी कमी
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एयरक्राफ्ट के मेंटेनेंस में गड़बड़ी
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लगातार बदलते फ्लाइट शेड्यूल
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तकनीकी खामियां
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ओवरबुकिंग और ग्राउंड ऑपरेशन में अव्यवस्था
इन सभी कारणों ने मिलकर पूरे सिस्टम को चरमरा दिया है।
यात्रियों में भारी नाराजगी
लगातार फ्लाइट कैंसिलेशन से यात्रियों में जबरदस्त गुस्सा है। सोशल मीडिया पर इंडिगो के खिलाफ शिकायतों की बाढ़ आ गई है। कई यात्रियों ने आरोप लगाया कि –
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न तो समय पर SMS मिला
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न ही कॉल करके सूचना दी गई
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एयरपोर्ट पहुंचने के बाद फ्लाइट रद्द होने की जानकारी मिली
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रिफंड और री-शेड्यूलिंग में भी भारी देरी हुई
कुछ यात्रियों ने तो यह भी कहा कि उन्हें होटल, खाना या वैकल्पिक फ्लाइट तक की सुविधा नहीं दी गई।
किराए पर भी रोक लगाने की तैयारी
सरकारी सूत्रों के अनुसार, एविएशन मंत्रालय किराए पर अस्थायी कैप लगाने पर भी विचार कर रहा है, क्योंकि फ्लाइट कम होने से टिकट के दाम अचानक आसमान छूने लगे हैं। कई रूट्स पर टिकट सामान्य से दोगुने-तिगुने दाम पर बिक रहे हैं, जिससे आम यात्रियों की जेब पर सीधा असर पड़ा है।
इंडिगो का अब तक का जवाब
इंडिगो की तरफ से सिर्फ इतना कहा गया है कि “तकनीकी कारणों और ऑपरेशनल चुनौतियों” की वजह से उड़ानों पर असर पड़ा है। कंपनी ने यात्रियों से असुविधा के लिए खेद जताया है और रिफंड या री-शेड्यूलिंग की सुविधा देने की बात कही है।
हालांकि, कंपनी का यह बयान यात्रियों के गुस्से को शांत करने में नाकाम रहा है।
एयरपोर्ट्स पर हालात बदतर
दिल्ली एयरपोर्ट, जो देश का सबसे व्यस्त एयरपोर्ट माना जाता है, वहां इंडिगो की बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द होने से हालात सबसे ज्यादा खराब रहे। दिल्ली के अलावा मुंबई और बेंगलुरु एयरपोर्ट पर भी यात्री रातभर इंतजार करते दिखे।
कुछ यात्रियों को अपनी जरूरी मीटिंग्स, मेडिकल अपॉइंटमेंट्स और परिवारिक कार्यक्रम छोड़ने पड़े। बच्चों और बुजुर्गों के साथ सफर कर रहे लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई।
यात्रियों के अधिकारों पर सवाल
इस संकट ने एक बार फिर यात्रियों के अधिकारों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एविएशन नियमों के मुताबिक फ्लाइट रद्द होने पर यात्री को कई तरह की सुविधाएं मिलनी चाहिए –
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पूरा रिफंड
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वैकल्पिक उड़ान
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होटल और भोजन की व्यवस्था
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समय पर सूचना
लेकिन जमीनी हकीकत में अधिकतर यात्रियों को इनमें से कुछ भी नहीं मिला।
विपक्ष ने भी सरकार को घेरा
इस मामले में विपक्ष ने भी सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का कहना है कि जब देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इस तरह से चरमरा जाती है, तो सरकार को पहले ही सख्त कदम उठाने चाहिए थे।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर इंडिगो के CEO के 24 घंटे के भीतर दिए जाने वाले जवाब पर टिकी है। अगर कंपनी का जवाब संतोषजनक नहीं मिलता है, तो सरकार और DGCA की तरफ से –
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भारी जुर्माना
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ऑपरेशनल लाइसेंस पर सख्ती
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कुछ फ्लाइट स्लॉट्स रद्द
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या यात्रियों को मुआवजा देने का आदेश
जैसे बड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
निष्कर्ष
इंडिगो का यह संकट सिर्फ एक एयरलाइन की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे भारतीय एविएशन सिस्टम की कमजोरी को उजागर कर रहा है। लगातार पांच दिन तक 800 से ज्यादा उड़ानों का रद्द होना बताता है कि हालात कितने गंभीर हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार की सख्ती के बाद इंडिगो अपने सिस्टम को कितनी तेजी से पटरी पर लौटाती है।