देश को मिलेगा नया चीफ जस्टिस! सूर्यकांत के शपथ समारोह में दुनिया के 6 देशों के शीर्ष जज होंगे गवाह

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भारत की न्यायपालिका के इतिहास में आने वाला सोमवार खास महत्व रखने वाला है, क्योंकि इसी दिन देश को अपना 53वां चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) मिलने जा रहा है। जस्टिस सूर्यकांत इस प्रतिष्ठित पद की शपथ लेने वाले हैं और उनका शपथ ग्रहण समारोह कई मायनों में बेहद विशेष रहेगा। कारण यह है कि इस समारोह में देश-विदेश की कई प्रमुख न्यायिक हस्तियाँ शामिल होने जा रही हैं। खास बात यह है कि दुनिया के 6 अलग-अलग देशों के शीर्ष जज इस अवसर के साक्षी बनेंगे, जिससे यह आयोजन वैश्विक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।

जस्टिस सूर्यकांत भारतीय न्यायपालिका के उन चुनिंदा जजों में से हैं जिनका अनुभव, समझ, संवेदनशीलता और कानून की गहराई पर पकड़ हमेशा से ही चर्चित रही है। वर्षों की न्यायिक सेवा, सैकड़ों महत्वपूर्ण फैसलों और न्याय को आम नागरिक के करीब लाने वाली उनकी सोच ने उन्हें इस सर्वोच्च पद के योग्य बनाया है। सुप्रीम कोर्ट में उनके कई ऐतिहासिक निर्णयों और उनकी दूरदर्शी न्यायिक दृष्टि ने उन्हें अलग पहचान दी है।

शपथ ग्रहण समारोह नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित होगा, जहां राष्ट्रपति जस्टिस सूर्यकांत को विधिवत शपथ दिलाएँगी। इस समारोह में भारत सरकार के वरिष्ठ मंत्री, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जज, संवैधानिक पदाधिकारी, विशिष्ट अतिथि और न्यायपालिका से जुड़े सैकड़ों लोग उपस्थित रहेंगे। लेकिन इस बार समारोह की सबसे खास बात अंतरराष्ट्रीय न्यायिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी है।

दुनिया के 6 देशों से आने वाले शीर्ष न्यायाधीश इस आयोजन में भाग लेने के लिए भारत पहुंच रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से दक्षिण एशिया, यूरोप, अफ्रीका और एशियाई देशों की सर्वोच्च न्यायालयों के प्रमुख जज शामिल होंगे। यह भारत की न्यायिक प्रतिष्ठा, उसकी वैधता और वैश्विक मंच पर उसकी बढ़ती स्वीकार्यता का प्रत्यक्ष संकेत माना जा रहा है।

कई कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी देश के CJI के शपथ ग्रहण समारोह में अंतरराष्ट्रीय न्यायिक प्रतिनिधियों की इतनी बड़ी संख्या का आना दुर्लभ है। इससे न केवल भारतीय न्यायपालिका की मजबूती का संदेश जाता है, बल्कि यह भारत के वैश्विक संबंधों, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और न्यायिक नेटवर्किंग का विस्तार भी दर्शाता है।

जस्टिस सूर्यकांत के कार्यकाल से न्यायपालिका में नए सुधारों और पारदर्शिता की उम्मीद की जा रही है। वह तकनीक के दौर में न्याय को और ज्यादा आसान बनाने के पक्षधर हैं। उन्होंने समय-समय पर कहा है कि न्याय प्रक्रिया में डिजिटल सिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन का इस्तेमाल न्याय प्रणाली को गति दे सकता है।

उनकी सोच एक ऐसे न्याय व्यवस्था की ओर इशारा करती है जहां केसों के लंबित होने की समस्या कम हो, अदालतें अधिक आधुनिक बनें और आम नागरिकों की न्याय तक पहुंच सरल हो। उनके नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट नई दिशा ले सकता है—यह उम्मीद कानूनी विशेषज्ञों से लेकर देश के आम नागरिकों तक सबमें समान रूप से दिखाई देती है।

समारोह से पहले ही अंतरराष्ट्रीय जजों के भारत आने का सिलसिला शुरू हो गया है। कई विदेशी अदालतों ने भी इस समारोह में अपने शीर्ष न्यायाधीशों की मौजूदगी को भारत के साथ मजबूत न्यायिक संबंधों का प्रतीक बताया है। इससे भारत के न्यायिक मॉडल, संविधान और लोकतंत्र के प्रति दुनिया की बढ़ती रुचि का भी संकेत मिलता है।

समारोह में कई सांस्कृतिक तत्व भी शामिल किए जाएंगे ताकि भारत की विविधता का प्रदर्शन दुनिया के समक्ष हो सके। विदेशी मेहमानों को भारत के न्यायिक ढांचे, सुप्रीम कोर्ट के कामकाज और संविधान की शक्तियों के बारे में विस्तृत जानकारी भी दी जाएगी।

जस्टिस सूर्यकांत की नियुक्ति ऐसे समय में हो रही है जब न्यायपालिका कई आधुनिक चुनौतियों से जूझ रही है—जैसे लंबित मामलों की बढ़ती संख्या, कोर्ट मेंतकनीकी सुधार की आवश्यकता, और न्याय को समय पर उपलब्ध कराने का दबाव। उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे इन समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि जस्टिस सूर्यकांत का प्रशासनिक कौशल उन्हें इस भूमिका के लिए और भी उपयुक्त बनाता है। हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक उनके निर्णयों में हमेशा न्याय की व्यापकता और संवैधानिक मूल्यों की झलक देखने को मिली है।

इसी बीच, यह आयोजन भारत के वैश्विक न्यायिक सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाएगा। आने वाले वर्षों में भारत और विभिन्न देशों की अदालतों के बीच सहयोग, अनुभव साझा करने, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और कानूनी शोध को बढ़ावा मिलने की संभावना है। यह भी माना जा रहा है कि भारत आने वाले समय में वैश्विक न्यायिक सम्मेलनों का केंद्र बन सकता है।

कुल मिलाकर, यह शपथ ग्रहण समारोह केवल परंपरा निभाने का अवसर नहीं, बल्कि न्यायपालिका की नई दिशा, नए प्रयास और भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई देने वाला क्षण साबित होगा। देश को जल्द ही एक नया चीफ जस्टिस मिलने वाला है, और दुनिया इसकी गवाह बनेगी—यह अपने आप में बेहद प्रतिष्ठित और गर्व का विषय है।

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