मणिपुर में हजारों लोगों का शक्ति प्रदर्शन, केंद्र को अल्टीमेटम; NRC वापस लेने और असम राइफल्स हटाने की मांग

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मणिपुर में हजारों लोगों का शक्ति प्रदर्शन, केंद्र को अल्टीमेटम; NRC वापस लेने और असम राइफल्स हटाने की मांग

मणिपुर में लंबे समय से जारी हिंसा, असुरक्षा और विस्थापन के बीच शनिवार, 31 अक्टूबर को हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर केंद्र और राज्य सरकार के सामने अपनी मांगें रखीं। इंफाल सहित कई इलाकों में आयोजित रैलियों में मैतेई, नागा, मैतेई पांगल और अन्य आदिवासी समुदायों के लोगों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने राज्य में शांति बहाली, विस्थापित परिवारों की सुरक्षित वापसी, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी NRC को लागू करने और असम राइफल्स को हटाने की मांग की।

रैली का आयोजन Coordinating Committee on Manipur Integrity (COCOMI) और कई नागा तथा अन्य नागरिक संगठनों ने मिलकर किया। आयोजकों ने इसे राज्य के पहाड़ी और घाटी क्षेत्रों के समुदायों की साझा आवाज बताया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से लंबे समय से जारी संकट पर ठोस और समयबद्ध कार्रवाई करने की अपील की। कुछ संगठनों ने इसे सरकार के लिए अंतिम चेतावनी बताते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे अपने भविष्य को लेकर आगे का निर्णय लेने के लिए मजबूर होंगे।

इंफाल से कई जिलों तक प्रदर्शन

इंफाल में बड़ी संख्या में लोग तिड्डिम ग्राउंड, क्वाकेतल से एकत्र हुए और जुलूस के रूप में विभिन्न मार्गों से होते हुए थाऊ ग्राउंड पहुंचे। वहां एक सार्वजनिक सभा आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने राज्य की सुरक्षा स्थिति, विस्थापन और राजनीतिक समाधान से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी।

रैली में शामिल लोगों ने “SoO समझौता खत्म करो”, “प्रॉक्सी वॉर बंद करो” और “मणिपुर में शांति चाहिए” जैसे नारे लगाए। आयोजकों के अनुसार, प्रदर्शन का उद्देश्य किसी समुदाय के खिलाफ अभियान चलाना नहीं, बल्कि राज्य में हिंसा रोकने, लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सरकार से जवाबदेही मांगना था।

इंफाल के अलावा सेनापति, चंदेल और अन्य पहाड़ी जिलों में भी सभाएं तथा शांतिपूर्ण विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए। नागा संगठनों ने अपने क्षेत्रों में प्रदर्शन कर मुख्य रैली की मांगों के प्रति समर्थन जताया। इस तरह आंदोलन ने घाटी और पहाड़ी क्षेत्रों में अलग-अलग स्थानों पर एक व्यापक रूप लिया।

COCOMI और नागा संगठनों की संयुक्त पहल

इस प्रदर्शन में COCOMI के साथ United Naga Council (UNC), Joint Tribes Council Manipur, Foothills Naga Coordination Committee, Naga Peoples’ Union, Naga Humanitarian Aid Committee Manipur, Manipur Naga Youth Organisation और All Naga Students’ Association Manipur सहित कई संगठनों ने भाग लिया।

इन संगठनों की संयुक्त भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मणिपुर में जातीय तनाव और हिंसा के बीच अलग-अलग समुदायों के बीच संवाद और साझा मांगों को लेकर राजनीतिक तथा सामाजिक स्तर पर कई चुनौतियां रही हैं। आयोजकों ने कहा कि राज्य के विभिन्न समुदायों की सुरक्षा, पहचान, जमीन और भविष्य से जुड़े सवालों पर सामूहिक आवाज उठाना जरूरी है।

रैली के दौरान वक्ताओं ने कहा कि मणिपुर में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए केवल सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। विस्थापित परिवारों की वापसी, संपत्तियों की बहाली, आजीविका के अवसर, न्याय और सभी समुदायों के लिए समान सुरक्षा भी जरूरी है।

SoO समझौता खत्म करने की मांग

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में Kuki उग्रवादी समूहों के साथ हुए Suspension of Operations यानी SoO समझौते को तत्काल समाप्त करना शामिल था। SoO व्यवस्था के तहत कुछ सशस्त्र समूहों के साथ संघर्षविराम और निर्धारित नियमों के अंतर्गत गतिविधियों को लेकर समझौता किया गया था।

रैली के आयोजकों ने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था का दुरुपयोग हो रहा है और इससे राज्य में सुरक्षा संबंधी चिंताएं बनी हुई हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से समझौते को आगे न बढ़ाने, निर्धारित शिविरों को बंद करने और समझौते के तहत रखे गए हथियारों का सत्यापन करने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि SoO के नियमों के कथित उल्लंघन की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी समूह या व्यक्ति के खिलाफ प्रमाण मिलते हैं, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। इन आरोपों और मांगों को आयोजकों के दावों के रूप में देखा जाना चाहिए; संबंधित मामलों की पुष्टि जांच और आधिकारिक प्रक्रिया के आधार पर ही हो सकती है।

असम राइफल्स को हटाने की मांग

रैली में असम राइफल्स की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि असम राइफल्स को मणिपुर के सीमावर्ती और संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों से हटाया जाए तथा उसकी जगह एक निष्पक्ष, पेशेवर और जवाबदेह सुरक्षा बल तैनात किया जाए।

आयोजकों का आरोप था कि मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कुछ समुदायों में भरोसे की कमी है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा की जिम्मेदारी ऐसे बल को दी जानी चाहिए, जिसकी कार्यप्रणाली पर सभी समुदायों का विश्वास हो और जो निष्पक्ष तरीके से कानून लागू करे।

प्रदर्शनकारियों ने सीमा प्रबंधन को मजबूत करने की भी मांग की। उनके अनुसार, सीमा पार से अवैध आवाजाही, हथियारों की तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों को रोकने के लिए प्रभावी निगरानी और जवाबदेह सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है।

NRC को 1951 आधार वर्ष से लागू करने की मांग

रैली में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी National Register of Citizens (NRC) को मणिपुर में लागू करने की मांग भी उठाई गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि NRC की प्रक्रिया में 1951 को आधार वर्ष बनाया जाना चाहिए और इसे पारदर्शी, कानूनी तथा सत्यापन योग्य तरीके से पूरा किया जाना चाहिए।

आयोजकों का तर्क था कि राज्य की मूल आबादी, जनसांख्यिकीय स्थिति और स्थानीय समुदायों की पहचान से जुड़े सवालों पर स्पष्ट नीति होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि जनगणना से पहले NRC से संबंधित प्रक्रिया पर सरकार स्पष्ट निर्णय ले।

NRC का मुद्दा पूर्वोत्तर भारत में लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय रहा है। इसे लेकर अलग-अलग समुदायों और संगठनों के विचार भिन्न हो सकते हैं। इसलिए इस मांग पर आगे बढ़ने के लिए कानूनी प्रक्रिया, नागरिक अधिकारों और प्रशासनिक सत्यापन को ध्यान में रखना आवश्यक होगा।

विस्थापित परिवारों की सुरक्षित वापसी

मणिपुर में 3 मई 2023 से शुरू हुई जातीय हिंसा के बाद हजारों लोग अपने घरों से विस्थापित हुए। रैली में शामिल संगठनों ने मांग की कि सभी आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों यानी IDPs को सुरक्षित, सम्मानजनक और स्थायी तरीके से उनके घरों में वापस बसाया जाए।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि केवल राहत शिविरों में सहायता देना पर्याप्त नहीं है। विस्थापित परिवारों को सुरक्षा, अपने घरों और संपत्तियों की बहाली, आजीविका के अवसर, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

वक्ताओं ने यह भी कहा कि वापसी की प्रक्रिया समयबद्ध होनी चाहिए और संबंधित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना उन्हें अपने मूल क्षेत्रों में लौटने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, स्थायी शांति के लिए विस्थापन की समस्या का समाधान अत्यंत आवश्यक है।

राज्य सरकार पर भी उठे सवाल

रैली में केवल केंद्र सरकार ही नहीं, बल्कि मणिपुर की राज्य सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए। कुछ प्रदर्शनकारी संगठनों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार लंबे समय से जारी हिंसा और लोगों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का प्रभावी समाधान नहीं कर पाई है।

प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार से जवाबदेही तय करने और लोगों की जान-माल की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। कुछ प्रस्तावों में उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग भी शामिल बताई गई। आयोजकों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तो राज्य सरकार को इस्तीफा देना चाहिए।

ये मांगें प्रदर्शनकारी संगठनों के राजनीतिक और प्रशासनिक रुख को दर्शाती हैं। राज्य सरकार और संबंधित नेताओं की प्रतिक्रिया तथा इन मांगों पर आगे होने वाली कार्रवाई इस विवाद के अगले चरण को तय कर सकती है।

प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था

इंफाल में बड़ी रैली को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई। अधिकारियों ने कुछ प्रमुख मार्गों पर बैरिकेड लगाए और यातायात को नियंत्रित किया। मुख्यमंत्री आवास और राजभवन की ओर जाने वाले रास्तों पर भी एहतियाती इंतजाम किए गए।

कुछ स्थानों पर वाहनों की जांच और यातायात डायवर्जन किया गया। रैली के दौरान कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान और शैक्षणिक संस्थान बंद रहे, जबकि सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर भी असर पड़ा। प्रशासन ने भीड़ और संवेदनशील इलाकों को देखते हुए सुरक्षा उपाय अपनाए।

प्रदर्शन आयोजकों ने रैली को शांतिपूर्ण बताया और कहा कि उनका उद्देश्य अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार तक पहुंचाना है। हालांकि, राज्य में पहले से तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

‘प्रॉक्सी वॉर’ के आरोप और राजनीतिक विवाद

रैली में आयोजकों ने केंद्र सरकार पर मणिपुर में कथित “प्रॉक्सी वॉर” चलाने का आरोप लगाया। उनका दावा था कि कुछ सशस्त्र समूहों का इस्तेमाल स्थानीय समुदायों के खिलाफ किया जा रहा है। इन आरोपों के आधार पर उन्होंने SoO व्यवस्था समाप्त करने और सुरक्षा नीति में बदलाव की मांग की।

यह आरोप राजनीतिक रूप से संवेदनशील है और इसे आयोजकों के दावे के रूप में ही समझा जाना चाहिए। किसी भी सशस्त्र समूह, सरकारी एजेंसी या राजनीतिक पक्ष की भूमिका के बारे में निष्कर्ष निकालने के लिए स्वतंत्र जांच, प्रमाण और आधिकारिक जानकारी आवश्यक है।

मणिपुर में जारी संकट के दौरान अलग-अलग समुदायों और संगठनों ने सुरक्षा, न्याय और जवाबदेही को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। इन परस्पर विरोधी दावों के बीच शांति बहाली के लिए निष्पक्ष जांच और सभी समुदायों के साथ संवाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

समुदायों की एकजुटता का संदेश

रैली में मैतेई, नागा, मैतेई पांगल और अन्य स्थानीय समुदायों की भागीदारी को आयोजकों ने साझा चिंताओं के आधार पर एकजुटता का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि राज्य के पहाड़ी और घाटी क्षेत्रों के लोगों को सुरक्षा, सम्मान और स्थायी शांति की आवश्यकता है।

हालांकि, मणिपुर की स्थिति जटिल है और विभिन्न समुदायों की चिंताएं, राजनीतिक मांगें तथा सुरक्षा संबंधी अनुभव एक-दूसरे से अलग भी हो सकते हैं। इसलिए किसी एक रैली को पूरे राज्य के सभी समुदायों की समान राय का प्रतिनिधित्व मानना उचित नहीं होगा।

फिर भी, विभिन्न संगठनों का एक मंच पर आना इस बात को दर्शाता है कि राज्य में शांति, विस्थापन और प्रशासनिक जवाबदेही के सवाल व्यापक सार्वजनिक चर्चा का विषय बने हुए हैं।

केंद्र सरकार के सामने छह प्रमुख मांगें

रैली में पारित प्रस्तावों और आयोजकों के बयानों के अनुसार, प्रदर्शन की मुख्य मांगें इस प्रकार रहीं:

  1. मणिपुर में जारी हिंसा और कथित प्रॉक्सी वॉर को तत्काल समाप्त किया जाए।
  2. Kuki सशस्त्र समूहों के साथ SoO समझौते को समाप्त किया जाए और निर्धारित शिविरों तथा हथियारों का सत्यापन किया जाए।
  3. असम राइफल्स को सीमावर्ती और संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों से हटाकर निष्पक्ष तथा जवाबदेह सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए।
  4. 1951 को आधार वर्ष बनाकर NRC को कानूनी, पारदर्शी और सत्यापन योग्य प्रक्रिया के तहत लागू किया जाए।
  5. सभी आंतरिक रूप से विस्थापित परिवारों की सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी सुनिश्चित की जाए तथा उनकी संपत्तियों और आजीविका को बहाल किया जाए।
  6. राज्य सरकार की जवाबदेही तय की जाए और मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई की जाए।

आयोजकों ने केंद्र और राज्य सरकारों से इन मांगों पर स्पष्ट प्रतिक्रिया देने तथा कार्रवाई की समयसीमा तय करने की अपील की।

आगे क्या?

मणिपुर में हजारों लोगों का सड़कों पर उतरना राज्य के लंबे समय से जारी संकट की गंभीरता को फिर सामने लाता है। रैली ने केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाया है कि वह SoO समझौते, असम राइफल्स की तैनाती, NRC और विस्थापित परिवारों की वापसी जैसे मुद्दों पर अपना रुख स्पष्ट करे।

आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि केंद्र और राज्य सरकार प्रदर्शनकारी संगठनों की मांगों पर किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं, सुरक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव किए जाते हैं और विस्थापित परिवारों की वापसी के लिए कितनी प्रभावी योजना लागू होती है।

मणिपुर में स्थायी शांति के लिए सुरक्षा, न्याय, पुनर्वास और समुदायों के बीच विश्वास बहाली को एक साथ आगे बढ़ाना आवश्यक होगा। साथ ही, विभिन्न समुदायों की चिंताओं को सुनने, हिंसा के आरोपों की निष्पक्ष जांच करने और कानून के तहत जवाबदेही सुनिश्चित करने से ही सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में ठोस प्रगति संभव हो सकती है।

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