बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट पर Meta ने मानी चूक, मार्क जकरबर्ग ने मांगी माफी; भारत सरकार ने भी जताई सख्त नाराजगी

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नई दिल्ली। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Facebook और Instagram की मूल कंपनी Meta के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट (Child Sexual Abuse Material-CSAM), डीपफेक सामग्री और कंटेंट मॉडरेशन में हुई चूकों को लेकर भारत सरकार से माफी मांगी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब भारत में Meta के कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम और प्लेटफॉर्म सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, Meta के वरिष्ठ अधिकारियों ने हाल ही में भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान कंपनी की ओर से स्वीकार किया गया कि प्लेटफॉर्म पर CSAM, डीपफेक और कुछ अन्य हानिकारक सामग्री को रोकने में परिचालन संबंधी कमियां रही हैं। बैठक के दौरान मार्क जकरबर्ग की ओर से इन चूकों पर खेद व्यक्त किया गया और भविष्य में ऐसे मामलों पर अधिक प्रभावी कार्रवाई का भरोसा दिया गया।

मामला केवल बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट तक सीमित नहीं है। हाल के दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक फेसबुक पोस्ट को तकनीकी त्रुटि के कारण अस्थायी रूप से प्रतिबंधित किए जाने के बाद भी Meta को भारत सरकार के समक्ष जवाब देना पड़ा था। इस घटना के बाद कंपनी के अधिकारियों को तलब किया गया और कंटेंट मॉडरेशन प्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। बाद में Meta ने इस तकनीकी गलती के लिए भी औपचारिक रूप से माफी मांगी।

रिपोर्टों के अनुसार, संसदीय समिति ने भी Meta से जवाब मांगा था और कंपनी को कंटेंट मॉडरेशन में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की सलाह दी थी। सरकार ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भारतीय कानूनों का पूरी तरह पालन करना होगा और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

Meta ने अपने पक्ष में कहा है कि कंपनी की CSAM के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है। कंपनी के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम और मानव मॉडरेटर की मदद से ऐसे कंटेंट की पहचान कर उसे हटाया जाता है। Meta का दावा है कि वह लगातार अपने सुरक्षा तंत्र को मजबूत कर रही है और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए नए तकनीकी उपाय लागू किए जा रहे हैं।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया के सबसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स में शामिल Meta के सामने चुनौती लगातार बढ़ रही है। AI आधारित डीपफेक, फर्जी अकाउंट, आपत्तिजनक सामग्री और बच्चों से जुड़े अपराधों को रोकना तकनीकी और कानूनी दोनों स्तरों पर बड़ी चुनौती बन चुका है। इसी कारण कई देशों की सरकारें सोशल मीडिया कंपनियों पर अधिक जवाबदेही तय करने के लिए सख्त नियम लागू कर रही हैं।

भारत सरकार ने हाल के वर्षों में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए नियमों को और सख्त बनाया है। नए प्रावधानों के तहत, सक्षम प्राधिकरण की ओर से नोटिस मिलने पर सोशल मीडिया कंपनियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अवैध या आपत्तिजनक सामग्री हटानी होती है। सरकार का कहना है कि यदि कोई प्लेटफॉर्म इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि Meta की यह सार्वजनिक माफी केवल एक औपचारिक कदम नहीं है, बल्कि यह संकेत भी है कि कंपनी भारत जैसे बड़े डिजिटल बाजार में नियामकीय अपेक्षाओं के अनुरूप अपनी नीतियों और कंटेंट मॉडरेशन व्यवस्था को और मजबूत करना चाहती है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि Meta अपने वादों को किस हद तक व्यवहार में लागू कर पाती है और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए कौन-कौन से नए कदम उठाती है।

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