
गंडक के बढ़ते जलस्तर के बीच टूटा पुराना तटबंध
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने के बीच बाढ़ का खतरा और गंभीर हो गया है। पारू प्रखंड के जयमल डुमरी इलाके में गंडक नदी का पुराना तटबंध टूट गया, जिसके बाद नदी का पानी तेजी से आसपास के इलाकों की ओर फैलने लगा।
तटबंध टूटने की जानकारी सामने आते ही स्थानीय लोगों में अफरा-तफरी मच गई। निचले इलाकों में रहने वाले ग्रामीण अपने जरूरी सामान, खाद्य सामग्री और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कोशिश करने लगे। कई परिवारों को पानी बढ़ने की आशंका के बीच ऊंचे स्थानों की ओर जाने की सलाह दी गई है।
जिला प्रशासन ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों और संबंधित विभागों को मौके पर सक्रिय किया है। मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी कुमार गौरव भी घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने और राहत एवं बचाव की तैयारियां बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
पानी तेजी से नए इलाकों की ओर बढ़ा
तटबंध में टूटने के बाद गंडक का पानी आसपास के उन इलाकों में फैलने लगा जहां पहले इस स्तर पर पानी नहीं पहुंचा था। इससे स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई।
इलाके के ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी परेशानी आवागमन और घरों की सुरक्षा को लेकर है। बाढ़ का पानी बढ़ने पर कई ग्रामीण रास्ते प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में प्रशासन की ओर से लोगों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर लोग भी अपने स्तर से बचाव की तैयारी कर रहे हैं। मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना, घरों से जरूरी सामान निकालना और खाद्य सामग्री को ऊंचे स्थान पर रखना ग्रामीणों की प्राथमिकता बन गया है।
हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, गंडक के बढ़े जलस्तर के कारण माधोपुर हजारी से जयमल डुमरी तक करीब 35 किलोमीटर के क्षेत्र में बाढ़ का असर देखा गया है और लगभग एक हजार परिवारों के विस्थापित होने की जानकारी सामने आई है।
रेवा घाट पर खतरे के निशान से ऊपर नदी
मुजफ्फरपुर में गंडक नदी के जलस्तर की स्थिति पहले से ही चिंताजनक बनी हुई थी। बिहार के आधिकारिक बाढ़ निगरानी पोर्टल के अनुसार 30 सितंबर की सुबह 9 बजे रेवा घाट पर गंडक का जलस्तर 55.38 मीटर दर्ज किया गया।
इस स्टेशन पर खतरे का स्तर 54.41 मीटर और उच्चतम बाढ़ स्तर यानी HFL 55.46 मीटर है। यानी जलस्तर खतरे के निशान से लगभग 97 सेंटीमीटर ऊपर था और HFL से महज 8 सेंटीमीटर नीचे था। आधिकारिक रिकॉर्ड में उस समय जलस्तर के बढ़ने की स्थिति दर्ज की गई थी।
यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नदी में लगातार बढ़ता पानी तटबंधों पर दबाव बढ़ा सकता है। ऐसे में कमजोर या पुराने हिस्सों पर कटाव और टूटने का खतरा बढ़ जाता है।
बागमती भी खतरे के ऊपर
मुजफ्फरपुर में सिर्फ गंडक ही चिंता का कारण नहीं है। जिले में बागमती नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया।
सरकारी निगरानी आंकड़ों के अनुसार 30 सितंबर की सुबह बेनीबाद में बागमती का जलस्तर 50.03 मीटर था, जबकि वहां HFL 50.01 मीटर दर्ज है। यानी नदी उच्चतम बाढ़ स्तर से भी थोड़ा ऊपर थी और जलस्तर बढ़ने की स्थिति में था।
इससे जिले के अलग-अलग हिस्सों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। गंडक और बागमती दोनों नदियों के जलस्तर पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।
नेपाल में बारिश से बढ़ा गंडक का दबाव
गंडक नदी के मौजूदा उफान का संबंध उसके जलग्रहण क्षेत्र में हुई भारी बारिश से भी है। नेपाल के तराई क्षेत्र में हुई भारी बारिश के बाद गंडक नदी में पानी का प्रवाह काफी बढ़ा।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, वाल्मीकिनगर गंडक बराज से मंगलवार सुबह करीब 5.43 लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया था। नदी में लंबे समय तक भारी प्रवाह रहने के कारण पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली सहित कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया।
रिपोर्ट के अनुसार, अत्यधिक पानी के दबाव के कारण गंडक के कई तटबंधों में सीपेज, पाइपिंग और ओवरटॉपिंग की स्थिति बनी। कई जगहों पर तत्काल मरम्मत कर स्थिति संभालने की कोशिश की गई, लेकिन कुछ स्थानों पर तटबंध में टूट भी हुई।
पहले से बढ़ रही थी बाढ़ की आशंका
मुजफ्फरपुर में ताजा स्थिति अचानक पैदा नहीं हुई। पिछले कुछ दिनों से गंडक का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था।
28 सितंबर की रिपोर्टों के अनुसार, साहेबगंज प्रखंड की कई पंचायतों में गंडक का पानी पहुंच चुका था। कई निचले इलाकों में घरों के दरवाजे तक पानी पहुंचने की जानकारी सामने आई थी। कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों पर पानी आने के कारण आवागमन भी प्रभावित हुआ था।
प्रशासन ने पहले ही तटबंधों की निगरानी बढ़ा दी थी। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को भी अलर्ट रखने की जानकारी दी गई थी।
लेकिन जयमल डुमरी में तटबंध टूटने के बाद स्थिति का दायरा बढ़ गया और पानी तेजी से नए इलाकों की तरफ फैलने लगा।
मौके पर पहुंचे जिलाधिकारी
तटबंध टूटने की सूचना मिलते ही मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी कुमार गौरव मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति का निरीक्षण किया और अधिकारियों को पूरी तरह अलर्ट रहने के निर्देश दिए।
प्रशासन की कोशिश है कि पानी के बहाव को नियंत्रित किया जाए और तटबंध के टूटे हिस्से को जल्द से जल्द मजबूत किया जाए। इसके लिए जल संसाधन विभाग की टीम मौके पर काम कर रही है।
अधिकारियों और इंजीनियरों की टीम कटाव रोकने के लिए बालू की बोरियों और अन्य सामग्री का इस्तेमाल कर रही है। तटबंध को मजबूत करने के साथ-साथ आसपास के इलाकों में पानी के फैलाव पर भी नजर रखी जा रही है।
ग्रामीणों ने शुरू की खुद की तैयारी
तटबंध टूटने के बाद स्थानीय ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी चिंता अपने परिवार और मवेशियों को सुरक्षित रखने की है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोग अपने घरों से जरूरी सामान निकालकर ऊंचे स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं। जिन परिवारों के घर निचले इलाकों में हैं, वे पानी और बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थान पर जाने की तैयारी कर रहे हैं।
मवेशियों को लेकर भी ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। बाढ़ के दौरान पशुओं के लिए चारा और सुरक्षित जगह की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन जाता है।
कुछ इलाकों में नाव ही आवागमन का प्रमुख साधन बन गई है। चक्की सोहागपुर पंचायत में भी बाढ़ के कारण सड़क संपर्क प्रभावित होने और लगभग 6,500 लोगों के प्रभावित होने की स्थानीय रिपोर्ट सामने आई है। वहां लोगों के लिए नाव के जरिए आवागमन की स्थिति बताई गई है।
कई इलाकों में सड़क संपर्क प्रभावित
गंडक का पानी बढ़ने के साथ मुजफ्फरपुर के ग्रामीण इलाकों में सड़क संपर्क प्रभावित होने लगा है। निचले हिस्सों में पानी भरने से कई रास्तों पर आवागमन मुश्किल हो गया है।
बाढ़ के दौरान सड़क संपर्क टूटना राहत एवं बचाव कार्य के लिए भी चुनौती बन सकता है। इसलिए प्रशासन के सामने एक साथ कई मोर्चे हैं। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना, नावों की व्यवस्था करना, भोजन और पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करना जरूरी हो जाता है।
जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
तटबंध को बचाने के लिए युद्धस्तर पर काम
पुराने तटबंध के टूटने के बाद सबसे जरूरी काम पानी के फैलाव को नियंत्रित करना और टूटे हिस्से को मजबूत करना है।
अधिकारियों ने तटबंध की मरम्मत के लिए इंजीनियरिंग टीमों को लगाया है। कटाव रोकने के लिए बालू की बोरियां और दूसरी सामग्री इस्तेमाल की जा रही है। लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच यह काम चुनौतीपूर्ण है क्योंकि तेज बहाव से मरम्मत कार्य प्रभावित हो सकता है।
प्रशासन का प्रयास है कि पानी का दबाव कम होते ही क्षतिग्रस्त हिस्से को स्थायी रूप से मजबूत किया जा सके।
35 किलोमीटर तक गंडक का असर
मुजफ्फरपुर में गंडक के बढ़ते प्रभाव का दायरा काफी बड़ा बताया जा रहा है। माधोपुर हजारी से जयमल डुमरी तक करीब 35 किलोमीटर के क्षेत्र में नदी के बढ़े जलस्तर और बाढ़ का असर सामने आया है।
स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरे क्षेत्र में करीब एक हजार परिवार प्रभावित या विस्थापित हुए हैं। बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए सामुदायिक रसोई और अन्य राहत सामग्री उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।
ऐसी स्थिति में राहत शिविरों और सामुदायिक रसोई की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है, खासकर तब जब लोग अपने घरों से बाहर रहने को मजबूर हों।
प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने को कहा
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। लोगों से कहा जा रहा है कि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में जोखिम न लें और सुरक्षित स्थानों की ओर चले जाएं।
ग्रामीण क्षेत्रों में अफवाहों से बचना और प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना भी जरूरी है। बाढ़ के दौरान नदी और तेज बहाव वाले पानी के पास जाना खतरनाक हो सकता है।
विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों को बाढ़ के पानी से दूर रखने की जरूरत है। बिजली के खंभों और खुले बिजली तारों के आसपास भी सावधानी बरतना जरूरी है।
आगे भी निगरानी जरूरी
गंडक का जलस्तर अभी भी प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चिंता है। आधिकारिक आंकड़ों में रेवा घाट पर जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर और बढ़ती स्थिति में दर्ज किया गया था। वहीं बागमती भी अपने उच्च स्तर पर बनी हुई थी।
इसलिए सिर्फ टूटे हुए तटबंध की मरम्मत करना पर्याप्त नहीं होगा। आसपास के अन्य तटबंधों और कमजोर स्थानों की लगातार निगरानी करनी होगी ताकि नए स्थानों पर कटाव या टूटने की स्थिति पैदा न हो।
मुजफ्फरपुर में गंडक के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर यह दिखाया है कि नेपाल और उत्तर बिहार के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश का असर नदी किनारे बसे इलाकों तक तेजी से पहुंच सकता है।
राहत और बचाव पर टिकी नजर
फिलहाल मुजफ्फरपुर में प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें तटबंध को मजबूत करने और पानी के फैलाव को नियंत्रित करने में जुटी हैं। ग्रामीण भी अपने स्तर पर परिवार और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
जयमल डुमरी में पुराना तटबंध टूटने के बाद पैदा हुई स्थिति के बीच सबसे बड़ी प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा है। प्रशासन के सामने चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि बढ़ता पानी और अधिक आबादी वाले इलाकों तक न पहुंचे और प्रभावित परिवारों को समय पर राहत मिल सके।
गंडक का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है और आधिकारिक निगरानी में बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। ऐसे में आने वाले घंटों में नदी के जलस्तर और तटबंधों की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा।
मुजफ्फरपुर के जयमल डुमरी में तटबंध टूटने से शुरू हुई परेशानी अब केवल एक गांव तक सीमित नहीं रह गई है। आसपास के कई इलाकों में पानी फैलने और लोगों के प्रभावित होने की खबरें सामने आ रही हैं। प्रशासन की कार्रवाई और नदी के जलस्तर में आने वाला बदलाव ही तय करेगा कि आने वाले समय में स्थिति कितनी गंभीर होती है।
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