
नई दिल्ली। स्वयंभू धर्मगुरु नारायण साईं को 2013 के दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने उनकी उम्रकैद की सजा पर रोक लगाने (सजा निलंबित करने) की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। हालांकि, न्यायालय ने मामले के लंबित रहने पर चिंता जताते हुए गुजरात हाईकोर्ट को तीन महीने के भीतर उनकी आपराधिक अपील का निस्तारण करने का प्रयास करने का निर्देश दिया।
यह मामला 2013 में दर्ज दुष्कर्म के उस चर्चित केस से जुड़ा है, जिसमें वर्ष 2019 में सूरत की एक अदालत ने नारायण साईं को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद उन्होंने अपनी सजा और दोषसिद्धि को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अपील लंबित रहने के दौरान उन्होंने सजा पर रोक लगाने और अंतरिम राहत देने की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस स्तर पर सजा निलंबित करने का कोई आधार नहीं बनता। अदालत ने यह भी माना कि अपील लंबे समय से लंबित है, इसलिए न्याय में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। इसी कारण गुजरात हाईकोर्ट को निर्देश दिया गया कि वह यथासंभव तीन महीने के भीतर अपील पर सुनवाई पूरी कर निर्णय दे।
सुनवाई के दौरान नारायण साईं की ओर से दलील दी गई कि उनकी अपील पर शीघ्र सुनवाई नहीं हो पा रही है, इसलिए उन्हें अंतरिम राहत दी जानी चाहिए। दूसरी ओर, राज्य सरकार ने सजा पर रोक लगाने का विरोध करते हुए कहा कि यह एक गंभीर अपराध का मामला है और दोषसिद्धि के बाद राहत देने का कोई उचित आधार नहीं है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सजा निलंबित करने से इनकार कर दिया।
गौरतलब है कि गुजरात हाईकोर्ट ने भी इससे पहले नारायण साईं की सजा पर रोक लगाने की मांग खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि अपील की सुनवाई में तेजी लाने के बजाय राहत मांगना उचित नहीं है। इसी आदेश को चुनौती देते हुए नारायण साईं सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे।
नारायण साईं, स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम के पुत्र हैं। उन्हें 2019 में सूरत की अदालत ने दुष्कर्म, आपराधिक साजिश और अन्य संबंधित धाराओं में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। तब से वह जेल में बंद हैं और उनकी अपील गुजरात हाईकोर्ट में लंबित है।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब मामला दोबारा गुजरात हाईकोर्ट के समक्ष तेजी से आगे बढ़ेगा। यदि अदालत निर्धारित समयसीमा के भीतर सुनवाई पूरी करती है, तो नारायण साईं की दोषसिद्धि और सजा को लेकर अंतिम फैसला जल्द सामने आ सकता है। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार उनकी आजीवन कारावास की सजा यथावत रहेगी और उन्हें कोई अंतरिम राहत नहीं मिलेगी।