
दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के बाहर हुए हालिया धमाके ने पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। ऐसा माना जा रहा था कि इस घटना के बाद सरकार और सुरक्षा एजेंसियां अत्यधिक सतर्क हो जाएँगी और उन सभी रसायनों की निगरानी और नियंत्रण सख्त किया जाएगा जिनका इस्तेमाल विस्फोटक तैयार करने में किया जा सकता है। परन्तु आजतक द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन ‘ऑपरेशन कुंभकर्ण’ में सामने आई सच्चाई ने यह साबित कर दिया कि जमीनी स्तर पर स्थिति बिल्कुल उलट है।
इस ऑपरेशन में खुलासा हुआ कि जहां एक ओर देश की राजधानी में धमाके का खतरा मंडरा रहा है, वहीं दूसरी ओर कई राज्यों में अमोनियम नाइट्रेट और NPK जैसे खतरनाक रसायनों को बिना किसी पहचान पत्र, बिना लाइसेंस और बिना किसी निरीक्षण के खुलेआम बेचा जा रहा है। यह वही रसायन हैं जिनका उपयोग विस्फोटक बनाने में किया जाता रहा है और जिन्हें उच्च जोखिम वाली सामग्री माना जाता है।
घटना के बाद भी दुकानों में जारी है ‘आसान खरीदारी’
धमाके के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि प्रशासन इन रसायनों की खुदरा बिक्री पर निगरानी बढ़ाएगा। लेकिन ऑपरेशन कुंभकर्ण के दौरान रिपोर्टरों ने पाया कि उर्वरक दुकानों और थोक बाजारों में इन रसायनों की बिक्री उतनी ही सहज है जितनी सामान्य खाद की।
स्टिंग टीम जब दुकानदारों के पास पहुँची, तो अधिकांश दुकानें बिना किसी औपचारिक पूछताछ के मिनटों में अमोनियम नाइट्रेट दे रही थीं। दुकानदारों ने न तो खरीदार से उसका आधार कार्ड माँगा, न फार्मिंग का प्रमाण, और न ही यह पूछा कि रसायन किस उपयोग के लिए खरीदा जा रहा है। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि यही रसायन गलत हाथों में बड़ी तबाही मचा सकते हैं।
दुकानदारों का जवाब — “ये तो रोज की बात है”
अधिकांश दुकानदारों ने कैमरे में कैद होकर स्वीकार किया कि—
-
“किसी भी किसान को पहचान पत्र की ज़रूरत नहीं”
-
“सैकड़ों बोरी NPK रोज़ बिकती है”
-
“कोई पूछताछ नहीं होती”
ऑपरेशन की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि दुकानदारों को यह भी जानकारी थी कि देश में हाल ही में धमाका हुआ है। फिर भी वे रसायन की बिक्री को लेकर बिल्कुल बेफिक्र दिखे।
इससे स्पष्ट होता है कि चाहे सुरक्षा एजेंसियों ने गाइडलाइन जारी की हों, लेकिन कई राज्यों में इनका पालन बिल्कुल नहीं किया जा रहा।
अमोनियम नाइट्रेट और NPK क्यों खतरनाक?
अमोनियम नाइट्रेट और NPK खाद का उपयोग ज़्यादातर किसान खेती के लिए करते हैं। लेकिन सुरक्षा एजेंसियों की नज़र में यह सामग्री दो स्थितियों में खतरनाक होती है—
-
जब इसका अत्यधिक मात्रा में भंडारण हो
-
जब इसे विस्फोटक सामग्री के साथ मिलाया जाए
1993 मुंबई ब्लास्ट से लेकर कई आतंकी घटनाओं में यह रसायन उपयोग हो चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इसे ईंधन, डेटोनेटर या विशेष मिश्रण के साथ संयोजित किया जाए, तो यह एक शक्तिशाली विस्फोटक बन सकता है।
आजतक के स्टिंग में क्या-क्या सामने आया?
1. हर दुकान पर बिना रोक-टोक बिक्री
रिपोर्टरों ने कई Kasbā की दुकानों पर जाकर खरीदारी की और हर जगह रसायन आसानी से उपलब्ध मिला।
2. कोई रजिस्टर नहीं रखा जाता
कई दुकानदारों ने बताया कि बिक्री का कोई रजिस्टर या रिकॉर्ड नहीं रखा जाता। इससे यह पता लगाना लगभग असंभव हो जाता है कि कौन और कितनी मात्रा में रसायन खरीद रहा है।
3. बड़ी मात्रा में भी बिक्री में कोई समस्या नहीं
जांच टीम ने जब बड़ी मात्रा में उर्वरक खरीदने की इच्छा जताई, तो दुकानदारों ने तुरंत बोरी भर देना स्वीकार कर लिया।
सुरक्षा एजेंसियों के दावों पर उठे सवाल
धमाके के बाद दिल्ली पुलिस, NIA, और केंद्रीय एजेंसियों ने दावा किया था कि बाजारों और संवेदनशील रसायनों की बिक्री पर निगरानी बढ़ा दी गई है। लेकिन इस ऑपरेशन ने इन दावों की सच्चाई को बेनकाब कर दिया।
अगर इतनी सहजता से इन रसायनों की खरीद संभव है, तो कोई भी असामाजिक तत्व सुरक्षित रूप से अपना स्टॉक तैयार कर सकता है और सुरक्षा एजेंसियों को कुछ पता भी नहीं चलेगा।
क्या हैं सरकार के नियम?
सरकार ने सुरक्षा निर्देश जारी किए हैं, जिनके अनुसार—
-
अमोनियम नाइट्रेट की बिक्री लाइसेंस प्राप्त दुकानों से ही होनी चाहिए।
-
खरीदार का पहचान पत्र और उद्देश्य दर्ज किया जाना चाहिए।
-
बड़े भंडारण की सूचना स्थानीय प्रशासन को देनी आवश्यक है।
लेकिन ऑपरेशन कुंभकर्ण ने स्पष्ट कर दिया कि इनमें से कुछ भी जमीन पर लागू नहीं है।
विशेषज्ञों की चेतावनी — “यदि निगरानी नहीं बढ़ी, खतरा और बढ़ेगा”
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि खतरा अभी भी टला नहीं है। यदि बेखौफ बिक्री जारी रही, तो असामाजिक समूह आसानी से दोबारा इस रसायन का दुरुपयोग कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार—
-
इन उर्वरकों पर सख्त निगरानी न होने से आतंकी घटनाओं की संभावना बढ़ती है
-
बड़े शहरों के आसपास इनके डंप बनना अत्यंत खतरनाक होता है
-
दुकानदारों और डीलरों पर सुदृढ़ नियम लागू करना समय की जरूरत है
निष्कर्ष — ऑपरेशन ने दिखा दी सिस्टम की असलियत
यह स्टिंग ऑपरेशन सिर्फ एक पत्रकारिता जांच नहीं है, बल्कि उस ढीली सुरक्षा व्यवस्था का आईना है, जो देश की सुरक्षा को खतरे में डाल रही है।
यह स्पष्ट संकेत है कि दिल्ली धमाके जैसी घटनाओं के बावजूद प्रशासन और बाजार व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ है। ऐसे में आवश्यकता है—
-
नियमों को सख्ती से लागू करने की
-
उर्वरक दुकानों की नियमित जांच की
-
पहचान पत्र आधारित बिक्री अनिवार्य करने की
-
बड़े भंडारण पर निगरानी बढ़ाने की
जब तक नियम सिर्फ कागजों पर रहेंगे और जमीनी स्तर पर लागू नहीं होंगे, तब तक देश इन रसायनों के गलत उपयोग से होने वाले खतरों से सुरक्षित नहीं रह सकता।