
‘दर्शन करने आए थे, फिर कहां चले गए?’ प्रेमानंद महाराज के राधा केलि कुंज के बाहर लापता परिजनों का हंगामा, सेवादारों से हुई तीखी बहस
उत्तर प्रदेश के वृंदावन स्थित संत प्रेमानंद महाराज के राधा केलि कुंज आश्रम के बाहर शनिवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब अपने लापता परिजनों की तलाश में पहुंचे कई परिवारों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिवारों का आरोप है कि उनके बच्चे या परिजन प्रेमानंद महाराज के दर्शन करने की बात कहकर घर से निकले थे, लेकिन इसके बाद उनका कोई पता नहीं चला। इनमें कासगंज का 16 वर्षीय मयंक, महाराष्ट्र के संभाजीनगर की उज्ज्वला का बेटा और अन्य परिवारों के सदस्य शामिल बताए जा रहे हैं।
परिजनों का कहना है कि वे लंबे समय से अपने अपनों को तलाश रहे हैं और आश्रम पहुंचकर जानकारी लेने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच आश्रम के बाहर उनकी सेवादारों और वहां मौजूद कुछ लोगों से तीखी बहस हो गई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कुछ लोगों ने परिजनों और पत्रकारों के साथ अभद्रता भी की। दूसरी ओर, आश्रम से जुड़े लोगों ने आरोपों को साजिश बताते हुए कहा कि आश्रम की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। इस पूरे मामले में पुलिस की जांच और लापता लोगों की वास्तविक स्थिति सबसे अहम है।
आश्रम के बाहर क्यों पहुंचे परिवार?
वृंदावन के राधा केलि कुंज आश्रम में प्रेमानंद महाराज के दर्शन और प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। लेकिन शनिवार को यहां पहुंचे परिवारों का उद्देश्य दर्शन करना नहीं, बल्कि अपने लापता परिजनों के बारे में जानकारी हासिल करना था।
परिवारों का दावा है कि उनके सदस्य घर से यह कहकर निकले थे कि वे प्रेमानंद महाराज के दर्शन करने या आश्रम जाने वाले हैं। इसके बाद वे वापस नहीं लौटे और उनसे संपर्क भी नहीं हो पाया। परिजनों ने आश्रम के बाहर पहुंचकर सवाल उठाया कि जब उनके अपने दर्शन के लिए आए थे, तो फिर वे कहां चले गए?
रिपोर्टों में परिवारों की संख्या को लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में तीन परिवारों का जिक्र है, जबकि अन्य में चार परिवारों के आश्रम पहुंचने की बात कही गई है। परिवारों की शिकायतों और लापता लोगों के मामलों की अलग-अलग जांच की जा रही है।
कासगंज का 16 वर्षीय मयंक अगस्त से लापता
आश्रम के बाहर पहुंचे परिवारों में कासगंज जिले की आवास विकास कॉलोनी के रहने वाले मयंक का परिवार भी शामिल था। रिपोर्टों के मुताबिक, 16 वर्षीय मयंक 7 अगस्त को घर से प्रेमानंद महाराज के दर्शन करने की बात कहकर निकला था। इसके बाद वह घर वापस नहीं लौटा।
परिजनों ने उसकी तलाश की और संबंधित स्तर पर जानकारी जुटाने की कोशिश की। जब उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली, तो वे वृंदावन स्थित राधा केलि कुंज आश्रम पहुंचे। परिवार का आरोप है कि मयंक के बारे में उन्हें संतोषजनक जानकारी नहीं मिल रही है।
परिजनों की चिंता इस वजह से भी बढ़ गई है कि आश्रम से जुड़े एक साधक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर सामने आने के बाद उन्होंने अपने लापता परिजन को लेकर फिर से जानकारी जुटाने की कोशिश तेज कर दी। हालांकि, मयंक के लापता होने और आश्रम में उसकी मौजूदगी के बीच कोई पुष्ट संबंध सामने नहीं आया है। इस संबंध में जांच और आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
महाराष्ट्र की उज्ज्वला भी बेटे की तलाश में पहुंचीं
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से आईं उज्ज्वला ताकपिरे भी अपने बेटे ओम परमेश्वरी ताकपिरे की तलाश में आश्रम पहुंचीं। रिपोर्टों के अनुसार, उनका 20 वर्षीय बेटा लापता है। परिवार का कहना है कि बेटे के बारे में जानकारी जुटाने के लिए वे कई बार प्रयास कर चुके हैं।
परिजनों का आरोप है कि आश्रम में पूछताछ के बावजूद उन्हें ऐसी जानकारी नहीं मिल पाई जिससे वे अपने बेटे तक पहुंच सकें। इसी वजह से परिवार आश्रम के बाहर प्रदर्शन करने लगा। उनका कहना था कि जब तक उन्हें अपने बेटे के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती, उनकी चिंता दूर नहीं होगी।
इस मामले में भी यह जरूरी है कि परिवार के आरोपों और जांच में सामने आने वाले तथ्यों को अलग-अलग रखा जाए। किसी व्यक्ति का आश्रम में दर्शन या दीक्षा के लिए आना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह वहीं रह रहा है। उसकी वास्तविक स्थिति का पता पुलिस जांच, रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों से ही चल सकता है।
हाथरस के अनुज चौधरी का मामला भी चर्चा में
इसी विवाद से जुड़ा एक अन्य मामला हाथरस जिले के सादाबाद क्षेत्र के बारामाई खेड़ा गांव का है। यहां के रहने वाले राजवीर सिंह का 16 वर्षीय बेटा अनुज चौधरी करीब तीन महीने से लापता बताया जा रहा है। परिवार के मुताबिक, अनुज ने 26 जून को वृंदावन में प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली थी। इसके बाद वह घर लौटा, लेकिन 3 जुलाई को फिर आश्रम जाने की बात कहकर निकला और वापस नहीं आया।
अनुज के पिता राजवीर सिंह का आरोप है कि परिवार को बेटे के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही थी। इसी कारण वे ग्रामीणों और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ आश्रम पहुंचे और बेटे को वापस भेजने की मांग की। परिवार का कहना था कि जब तक अनुज का पता नहीं चलता, वे वहां से नहीं जाएंगे।
इस मामले में पुलिस ने परिवार से बातचीत की और आश्रम प्रबंधन से भी जानकारी ली। पुलिस अधिकारी के अनुसार, अनुज के दीक्षा लेने की पुष्टि हुई है, लेकिन आश्रम प्रबंधन ने उसके वहां ठहरने की बात से इनकार किया है। पुलिस ने यह भी कहा कि हाथरस के सादाबाद थाने में इस संबंध में मामला दर्ज है और आश्रम के दीक्षा रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक, आश्रम की ओर से यह भी बताया गया कि अनुज की तस्वीर सेवादारों के समूहों में साझा की गई थी और उसे तलाशने में मदद की गई। हालांकि, परिवार अभी भी बेटे की सुरक्षित वापसी और उसके ठिकाने को लेकर जवाब चाहता है।
आश्रम के सेवादारों ने क्या कहा?
परिवारों के प्रदर्शन के बीच आश्रम से जुड़े कुछ सेवादारों ने आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना था कि प्रेमानंद महाराज और आश्रम की छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए सुनियोजित तरीके से विवाद खड़ा किया जा रहा है।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, परिजनों और पत्रकारों के सवालों के दौरान आश्रम प्रबंधन का कोई जिम्मेदार प्रतिनिधि विस्तृत आधिकारिक बयान देने से बचता दिखाई दिया। इस दौरान कुछ सेवादारों और प्रदर्शन कर रहे लोगों के बीच बहस बढ़ गई। स्थानीय स्तर पर मौजूद कुछ लोगों के भी विवाद में शामिल होने की खबरें सामने आईं।
एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, कुछ लोगों ने परिजनों और मीडिया कर्मियों के साथ अभद्रता की। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालने की कोशिश की। हालांकि, घटना के हर पहलू और कथित अभद्रता में शामिल लोगों की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर क्या किया?
आश्रम के बाहर प्रदर्शन और हंगामे की सूचना मिलने पर वृंदावन पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने परिवारों से बातचीत की और लापता लोगों के बारे में जानकारी जुटाई। अनुज चौधरी के मामले में पुलिस अधिकारियों ने आश्रम के भीतर जाकर भी जानकारी ली।
पुलिस का कहना है कि लापता व्यक्ति की तलाश में संबंधित थाने में दर्ज शिकायत और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। आश्रम में दीक्षा लेने वाले लोगों के रिकॉर्ड भी देखे जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि संबंधित व्यक्ति वहां आया था या नहीं और उसके बाद उसकी गतिविधियों के बारे में क्या जानकारी उपलब्ध है।
ऐसे मामलों में केवल परिवार के आरोप या आश्रम की ओर से दिया गया बयान अंतिम निष्कर्ष नहीं हो सकता। पुलिस को लापता व्यक्ति की उम्र, घर से निकलने की तारीख, फोन रिकॉर्ड, यात्रा संबंधी जानकारी, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच करनी होगी। यदि कोई व्यक्ति नाबालिग है, तो उसकी सुरक्षा और शीघ्र तलाश विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है।
साधक की मौत के बाद बढ़ी परिवारों की चिंता
राधा केलि कुंज आश्रम से जुड़े एक साधक की 25 सितंबर को हुई संदिग्ध मौत के बाद आश्रम को लेकर चर्चा तेज हुई है। इसी घटना के बाद कुछ परिवारों ने अपने लापता परिजनों की तलाश में आश्रम पहुंचने का फैसला किया।
परिवारों का कहना है कि पहले से ही वे अपने बच्चों या परिजनों को लेकर परेशान थे, लेकिन हालिया घटना के बाद उनकी चिंता और बढ़ गई। हालांकि, साधक की मौत और अन्य लोगों के लापता होने के मामलों के बीच किसी सीधे संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। दोनों घटनाओं की जांच अलग-अलग तथ्यों के आधार पर की जानी चाहिए।
किसी आश्रम या धार्मिक संस्था से जुड़े व्यक्ति की मौत अथवा किसी श्रद्धालु के लापता होने की खबर सामने आने पर सवाल उठना स्वाभाविक है। लेकिन जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। जरूरी है कि परिवारों को जानकारी मिले और पुलिस हर शिकायत की गंभीरता से जांच करे।
विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल: लापता लोग कहां हैं?
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि लापता बताए जा रहे लोग कहां हैं और वे सुरक्षित हैं या नहीं। परिवारों के लिए सबसे बड़ी चिंता अपने बच्चों और परिजनों की वापसी है। दूसरी ओर, आश्रम से जुड़े लोग आरोपों को साजिश बता रहे हैं और अपनी ओर से मदद करने का दावा कर रहे हैं।
अब पुलिस के सामने चुनौती है कि वह प्रत्येक शिकायत को अलग-अलग देखे, संबंधित रिकॉर्ड की जांच करे और लापता लोगों का पता लगाए। यदि किसी व्यक्ति ने अपनी इच्छा से घर छोड़ा है, तो भी परिवार और पुलिस को उसकी सुरक्षा और स्थिति की पुष्टि करना जरूरी है। वहीं, यदि किसी नाबालिग के लापता होने का मामला है, तो उसकी तलाश में तेजी लाना प्राथमिकता होनी चाहिए।
फिलहाल आश्रम के बाहर हुए हंगामे ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। परिवारों की मांग है कि उन्हें अपने लापता परिजनों के बारे में स्पष्ट जवाब मिले। आश्रम से जुड़े लोगों ने आरोपों को खारिज किया है, जबकि पुलिस रिकॉर्ड और शिकायतों की जांच कर रही है। आने वाले समय में जांच से ही स्पष्ट होगा कि लापता लोगों के आश्रम आने, दीक्षा लेने और उसके बाद संपर्क टूटने की घटनाओं के पीछे क्या परिस्थितियां थीं।