पुष्कर मेला 2025: ऊंटों की जगह बढ़े घोड़े, सदियों पुराना मेला बदल रहा अपना स्वरूप

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राजस्थान के विश्व प्रसिद्ध पुष्कर पशु मेले में इस बार कम हुए ऊंट, घोड़ों का रहा जलवा

राजस्थान के अजमेर जिले में आयोजित होने वाला विश्व प्रसिद्ध पुष्कर पशु मेला 2025 इस बार अपने बदलते स्वरूप को लेकर चर्चा में है। सदियों पुराने इस मेले में जहां कभी ऊंटों की संख्या हजारों में होती थी, वहीं इस बार ऊंटों की संख्या में स्पष्ट गिरावट दर्ज की गई है। दूसरी ओर, घोड़ों की बिक्री और प्रदर्शनी में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है।


🔹 ऊंटों की घटती संख्या बनी चिंता का विषय

मेले में पहुंचे पशुपालकों और व्यापारियों ने बताया कि इस बार ऊंटों की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में लगभग आधी रह गई है। कई पारंपरिक ऊंट व्यापारी अब मेला छोड़ चुके हैं।
राजस्थान के नागौर और बीकानेर जैसे इलाकों से ऊंट लेकर आने वाले व्यापारी बताते हैं कि ऊंट पालन अब महंगा और कठिन हो गया है। सरकार की नीतियों और ऊंट व्यापार पर लगी पाबंदियों के कारण यह पेशा धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।

“पहले सैकड़ों ऊंट लेकर आते थे, अब बस कुछ ही रह गए हैं। अब मुनाफा नहीं, नुकसान ज्यादा है,”
एक पशुपालक ने कहा।


🔹 घोड़ों ने संभाली मेले की शान

जहां ऊंटों की संख्या घटी है, वहीं इस साल घोड़ों की भागीदारी में जबरदस्त इजाफा हुआ है। विशेष रूप से मरवाड़ी, काठीवाड़ी और सिंधी नस्ल के घोड़े इस बार मेले का मुख्य आकर्षण बने हुए हैं।
घोड़ा प्रजनकों और रेस आयोजकों ने बताया कि इन नस्लों की मांग देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक बढ़ रही है। मेले में घोड़ा सौंदर्य प्रतियोगिता और घुड़सवारी शो ने बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित किया।

“अब पुष्कर मेला ऊंटों से ज्यादा घोड़ों का उत्सव बन गया है,”
एक स्थानीय व्यापारी ने मुस्कराते हुए कहा।


🔹 पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र

मेले में इस बार ऊंटों की कमी के बावजूद, पर्यटकों की भीड़ में कोई कमी नहीं दिखी। देश-विदेश से आए पर्यटक यहां राजस्थानी लोकनृत्य, संगीत, हस्तशिल्प बाजार और धार्मिक अनुष्ठानों का आनंद ले रहे हैं।
सरकार और पर्यटन विभाग ने इस बार मेले को और आकर्षक बनाने के लिए 3D लेजर शो, सांस्कृतिक परेड और डेजर्ट सफारी जैसी नई गतिविधियां जोड़ी हैं।


🔹 सरकार ने दी राहत की उम्मीद

राजस्थान पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि ऊंटों की घटती संख्या राज्य के पारंपरिक पशुधन संतुलन के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि ऊंट संरक्षण के लिए नई सब्सिडी योजनाएं और चिकित्सा कैंप लगाए जा रहे हैं।

“हम ऊंट पालन को प्रोत्साहन देने के लिए किसानों और व्यापारियों को वित्तीय सहायता देने की योजना पर काम कर रहे हैं,”
अजमेर प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा।


🔹 आस्था और परंपरा का संगम बना पुष्कर

पुष्कर मेला न केवल व्यापार का मंच है, बल्कि यह धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का प्रतीक भी है। कार्तिक पूर्णिमा पर पुष्कर सरोवर में स्नान और ब्रह्मा मंदिर में पूजा-अर्चना करने के लिए लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचे। इस वर्ष भी मेले ने पर्यटन और आध्यात्मिकता का संगम प्रस्तुत किया।


🔹 नया युग, नई दिशा

बदलते समय के साथ पुष्कर मेला भी अब पारंपरिक ऊंट व्यापार से आधुनिक प्रदर्शनियों और पर्यटन केंद्रित आयोजन की ओर बढ़ रहा है। यह मेला आज भी राजस्थान की लोकसंस्कृति, शिल्पकला और पशुपालन परंपरा का जीवंत प्रतीक बना हुआ है।

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