टिश्यू से लेकर टॉवल तक की जांच, खाना भी पहले टेस्ट… विदेश में पुतिन का हर Touch रहता है सिक्योर

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा इस समय दुनियाभर की निगाहों में है। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए पुतिन 11 सितंबर को दिल्ली पहुंचने वाले हैं, जबकि सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होगा। उनकी यात्रा से पहले राजधानी में सुरक्षा का अभूतपूर्व इंतजाम किया जा रहा है। दिल्ली में हजारों सुरक्षाकर्मियों की तैनाती, होटलों की कई स्तरों पर जांच और विदेशी सुरक्षा टीमों की मौजूदगी के बीच पुतिन की अपनी सुरक्षा व्यवस्था भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

पुतिन की सुरक्षा केवल उनके आसपास तैनात हथियारबंद कमांडो तक सीमित नहीं बताई जाती। वर्षों से सार्वजनिक रिपोर्टों में उनकी विदेश यात्राओं के दौरान बेहद सख्त प्रोटोकॉल का जिक्र होता रहा है। इसमें उनके खाने की जांच, निजी रसोइयों और पानी की व्यवस्था से लेकर उनके इस्तेमाल की गई कुछ वस्तुओं और जैविक नमूनों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की बातें शामिल हैं।

इनमें सबसे ज्यादा चर्चा मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब और कथित ‘पूप सूटकेस’ की होती है। कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में दावा किया गया है कि पुतिन के विदेशी दौरों के दौरान उनकी टीम उनके स्वास्थ्य से संबंधित जैविक जानकारी दूसरे देशों के हाथ न लगने देने के लिए इस्तेमाल की गई चीजों और अपशिष्ट पदार्थों को नियंत्रित करती है। हालांकि इन सभी सुरक्षा प्रक्रियाओं की आधिकारिक विस्तृत पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

पुतिन की सुरक्षा इतनी सख्त क्यों है?

रूस के राष्ट्रपति दुनिया के सबसे हाई-प्रोफाइल नेताओं में शामिल हैं। राष्ट्रपति पद के साथ-साथ रूस की विदेश नीति, रक्षा और वैश्विक रणनीतिक मामलों में उनकी केंद्रीय भूमिका को देखते हुए उनकी सुरक्षा व्यवस्था बेहद संवेदनशील मानी जाती है।

किसी भी राष्ट्राध्यक्ष की सुरक्षा में सामान्य रूप से हथियारबंद सुरक्षा अधिकारी, खुफिया एजेंसियां, स्थानीय पुलिस, मेडिकल टीम और यात्रा से पहले की सुरक्षा जांच शामिल होती है। लेकिन पुतिन की विदेश यात्राओं से जुड़े सार्वजनिक विवरण बताते हैं कि रूसी सुरक्षा एजेंसियां खाने-पीने और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी की सुरक्षा पर भी विशेष जोर देती हैं।

इसका एक कारण यह बताया जाता है कि किसी नेता के स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी राजनीतिक और रणनीतिक महत्व रख सकती है। इसलिए भोजन में जहर या किसी जैविक खतरे से बचाव के साथ-साथ यह भी महत्वपूर्ण माना जाता है कि उनके स्वास्थ्य से जुड़े नमूने किसी बाहरी एजेंसी के हाथ न लगें।

मोबाइल फूड लैब हमेशा रहती है चर्चा में

पुतिन की विदेश यात्राओं से जुड़ी सबसे चर्चित सुरक्षा व्यवस्थाओं में मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब का नाम आता है।

सार्वजनिक रिपोर्टों के मुताबिक, उनके साथ यात्रा करने वाली विशेष टीम उनके लिए परोसे जाने वाले भोजन और पेय पदार्थों की जांच करती है। इसका उद्देश्य किसी संभावित जहरीले या हानिकारक पदार्थ की मौजूदगी का पता लगाना बताया जाता है।

रिपोर्टों के अनुसार पुतिन के निजी शेफ भी यात्रा के दौरान उनके साथ रहते हैं। स्थानीय कार्यक्रमों या भोज में उपलब्ध भोजन को सीधे स्वीकार करने के बजाय उनकी टीम अपने नियंत्रण वाली भोजन व्यवस्था को प्राथमिकता देती है।

ऐसी व्यवस्था का मतलब यह है कि राष्ट्रपति तक खाना पहुंचने से पहले कई स्तरों पर उसकी जांच हो सकती है।

हालांकि इस तरह की सुरक्षा व्यवस्था का पूरा तकनीकी विवरण सार्वजनिक नहीं किया जाता। यह स्वाभाविक भी है, क्योंकि सुरक्षा एजेंसियां अपनी वास्तविक जांच प्रक्रिया और उपकरणों की क्षमता सार्वजनिक नहीं करना चाहेंगी।

खाना और पानी भी विशेष निगरानी में

पुतिन की विदेश यात्राओं के दौरान भोजन के साथ पानी को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने की रिपोर्टें सामने आती रही हैं।

कुछ रिपोर्टों के अनुसार रूस से उनके लिए विशेष खाद्य सामग्री और बोतलबंद पानी भी ले जाया जाता है। इससे भोजन की गुणवत्ता और स्रोत पर रूसी सुरक्षा टीम का नियंत्रण बना रहता है।

विदेश यात्रा के दौरान स्थानीय भोजन में बदलाव, पानी के स्रोत या भोजन तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े संभावित जोखिमों को कम करने के लिए यह तरीका अपनाया जा सकता है।

इसके पीछे सिर्फ जहर का खतरा नहीं माना जाता। अचानक खान-पान बदलने से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर से बचना भी किसी राष्ट्राध्यक्ष की यात्रा के दौरान महत्वपूर्ण हो सकता है।

टिश्यू और इस्तेमाल की चीजों पर भी नजर?

पुतिन की सुरक्षा को लेकर सार्वजनिक रिपोर्टों में इससे भी ज्यादा असामान्य दावे सामने आए हैं। इनमें उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए टिश्यू, गिलास और दूसरी वस्तुओं को नियंत्रित करने की बात कही गई है।

ऐसी रिपोर्टों के मुताबिक सुरक्षा टीम यह सुनिश्चित करने की कोशिश करती है कि राष्ट्रपति के इस्तेमाल की कोई ऐसी वस्तु विदेश में न रह जाए जिससे उनके स्वास्थ्य या जैविक स्थिति के बारे में जानकारी निकाली जा सके।

किसी व्यक्ति के शरीर से जुड़े जैविक नमूने से मेडिकल और जेनेटिक जानकारी हासिल करने की संभावना होती है। किसी राष्ट्राध्यक्ष के मामले में ऐसी जानकारी को संवेदनशील माना जा सकता है।

हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि टिश्यू से लेकर हर छोटी वस्तु को हर यात्रा में अनिवार्य रूप से रूस ले जाया जाता है—इस दावे की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। यह व्यवस्था मुख्यतः मीडिया रिपोर्टों और सुरक्षा से जुड़े पूर्व विवरणों पर आधारित है।

टॉवल और होटल की चीजों को लेकर भी सावधानी

पुतिन की विदेश यात्राओं से जुड़े पुराने विवरणों में होटल के कमरे और वहां इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं की सुरक्षा को लेकर भी विशेष सावधानी की चर्चा हुई है।

होटल में प्रवेश से पहले सुरक्षा टीम कमरे, आसपास के इलाके और कर्मचारियों की जांच कर सकती है। पुतिन के ठहरने वाले स्थान पर स्थानीय कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की जांच और सुरक्षा मंजूरी भी महत्वपूर्ण होती है।

दिल्ली में इस बार भी इसी तरह की व्यापक तैयारी की जा रही है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक पुतिन के संभावित होटल में काम करने वाले कर्मचारियों का सत्यापन किया गया है और उनकी पृष्ठभूमि की जांच दिल्ली के साथ उनके गृह राज्यों में भी की गई है।

यानी होटल की सुरक्षा केवल कमरे के दरवाजे तक सीमित नहीं है। वहां काम करने वाले कर्मचारियों से लेकर इमारत की छत और आसपास के क्षेत्र तक सुरक्षा का पूरा घेरा तैयार किया जाता है।

सबसे ज्यादा चर्चा ‘पूप सूटकेस’ की

पुतिन की सुरक्षा से जुड़ी सबसे विचित्र चर्चाओं में ‘पूप सूटकेस’ का नाम सबसे ऊपर आता है।

कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, विदेश यात्रा के दौरान पुतिन के शरीर से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों को विशेष तरीके से नियंत्रित करने की व्यवस्था की गई है। इसका कथित उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दूसरे देश की खुफिया एजेंसियां उनके स्वास्थ्य से जुड़ी जैविक जानकारी हासिल न कर सकें।

इस दावे के अनुसार उनके इस्तेमाल किए गए शौचालय और उससे संबंधित सामग्री को विशेष सुरक्षा टीम संभालती है और जैविक नमूनों को रूस वापस ले जाने की व्यवस्था की जाती है।

यह जानकारी कई वर्षों से अंतरराष्ट्रीय मीडिया में प्रकाशित होती रही है। हालांकि क्रेमलिन ने इस पूरी प्रक्रिया का आधिकारिक विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया है। इसलिए इसे पुतिन की सुरक्षा से जुड़ी रिपोर्टेड व्यवस्था के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि ऐसी जानकारी के रूप में जिसका हर विवरण आधिकारिक तौर पर प्रमाणित हो चुका है।

स्वास्थ्य की जानकारी भी बन सकती है सुरक्षा का मुद्दा

किसी राष्ट्राध्यक्ष की मेडिकल जानकारी केवल व्यक्तिगत मामला नहीं होती। वैश्विक राजनीति में किसी नेता की शारीरिक स्थिति, बीमारी या कार्यक्षमता से जुड़ी जानकारी राजनीतिक और रणनीतिक असर डाल सकती है।

इसी वजह से सुरक्षा एजेंसियां यह सुनिश्चित करने की कोशिश करती हैं कि नेता की मेडिकल जानकारी अनधिकृत तरीके से बाहर न जाए।

पुतिन के मामले में जैविक नमूनों को लेकर बताई जाने वाली सावधानियों का यही संभावित उद्देश्य है। यदि कोई विदेशी एजेंसी किसी व्यक्ति के जैविक नमूने हासिल कर ले तो उससे स्वास्थ्य, दवाओं या कुछ अन्य जैविक संकेतकों के बारे में जानकारी निकाली जा सकती है।

हालांकि आधुनिक चिकित्सा में किसी नमूने से मिलने वाली जानकारी की सीमा भी होती है और किसी व्यक्ति की पूरी स्वास्थ्य स्थिति केवल एक नमूने से निर्धारित नहीं की जा सकती।

‘Flying Kremlin’ भी रहेगा सुरक्षा का हिस्सा

पुतिन की सुरक्षा का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा उनका विशेष विमान है, जिसे मीडिया में ‘Flying Kremlin’ कहा जाता है।

रिपोर्टों के अनुसार पुतिन के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला विमान केवल परिवहन का साधन नहीं है, बल्कि उसमें संचार और सुरक्षा से जुड़ी विशेष क्षमताएं होती हैं।

दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन से पहले सामने आई रिपोर्टों में भी पुतिन के विशेष विमान और उससे जुड़े सुरक्षा प्रबंधों का उल्लेख किया गया है।

विदेश यात्रा के दौरान राष्ट्रपति का विमान स्वयं एक सुरक्षित कमांड सेंटर की तरह काम कर सकता है। इसमें सुरक्षित संचार, मेडिकल सुविधाएं और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं होने की रिपोर्टें सामने आती रही हैं।

बुलेटप्रूफ कार भी रूस से आ सकती है

पुतिन की सुरक्षा के लिए सिर्फ विमान ही विशेष नहीं होता। उनके काफिले में इस्तेमाल होने वाली कारों को लेकर भी बेहद सख्त व्यवस्था की जाती है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार रूसी राष्ट्रपति की विशेष बख्तरबंद लिमोजिन को कई तरह के हमलों से सुरक्षा देने के लिए डिजाइन किया गया है। इनमें गोलीबारी, विस्फोट और कुछ रिपोर्टों के अनुसार रासायनिक हमलों से बचाव की क्षमताएं भी शामिल हैं।

ब्रिक्स सम्मेलन के लिए भारत पहुंचने वाले विदेशी नेताओं के अपने वाहन और काफिले की गाड़ियों को विमान से लाए जाने की तैयारी की रिपोर्ट भी सामने आई है।

इसका फायदा यह होता है कि विदेशी सुरक्षा टीम को अपने नेता के लिए परिचित और पहले से परीक्षण किए गए वाहनों का इस्तेमाल करने का मौका मिलता है।

दिल्ली में भी कई स्तरों की सुरक्षा

पुतिन के आने से पहले दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था काफी बढ़ा दी गई है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक राजधानी में करीब 30 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। रूस और चीन की सुरक्षा टीमों के सदस्य भी अपने-अपने नेताओं के होटल पहुंच चुके हैं।

पुतिन के संभावित होटल में अलग से वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई है। होटल की सुरक्षा व्यवस्था में नीचे से लेकर छत तक कई स्तरों पर सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी रखी गई है।

इसके अलावा होटल कर्मचारियों का सत्यापन भी किया गया है।

इस तरह पुतिन की सुरक्षा में रूसी एजेंसियों और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

AI कैमरे और ड्रोन से भी निगरानी

ब्रिक्स सम्मेलन के लिए दिल्ली में आधुनिक निगरानी तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। ताजा रिपोर्टों में AI आधारित कैमरों, ड्रोन निगरानी और एंटी-ड्रोन सिस्टम का उल्लेख किया गया है।

उच्चस्तरीय नेताओं की मौजूदगी में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि जमीन के साथ-साथ आसमान और आसपास के क्षेत्रों पर भी नजर रखी जाए।

ड्रोन के जरिए संभावित खतरे को रोकने के लिए एंटी-ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी तरह AI आधारित कैमरे संदिग्ध गतिविधियों और लोगों की पहचान में मदद कर सकते हैं।

डिकॉय और रूट सीक्रेसी भी महत्वपूर्ण

VVIP सुरक्षा में एक सामान्य सिद्धांत यह है कि वास्तविक व्यक्ति की गतिविधियों और रूट को ज्यादा से ज्यादा गोपनीय रखा जाए।

कुछ रिपोर्टों में पुतिन और दूसरे BRICS नेताओं के लिए डिकॉय यानी भ्रम पैदा करने वाली व्यवस्थाओं का भी जिक्र है। हालांकि ऐसी सुरक्षा तकनीकों का वास्तविक इस्तेमाल और उसका पूरा तरीका आम तौर पर सार्वजनिक नहीं किया जाता।

सुरक्षा एजेंसियां संभावित हमलावर को भ्रमित करने के लिए यात्रा मार्ग, वाहन और समय से जुड़ी जानकारी को सीमित रख सकती हैं।

पुतिन के साथ आती है एडवांस टीम

किसी बड़े राष्ट्राध्यक्ष के दौरे से पहले उसकी सुरक्षा टीम संबंधित देश में पहुंच जाती है। पुतिन की भारत यात्रा से पहले भी रूसी सुरक्षा टीमों के दिल्ली पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

ये टीमें स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर होटल, रूट, एयरपोर्ट, कार्यक्रम स्थल और आसपास के क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था को अंतिम रूप देती हैं।

यह प्रक्रिया इसलिए जरूरी होती है क्योंकि किसी भी छोटी गलती का असर पूरे सुरक्षा तंत्र पर पड़ सकता है।

भारत में पुतिन का दौरा क्यों अहम?

पुतिन का दिल्ली दौरा केवल ब्रिक्स सम्मेलन की वजह से महत्वपूर्ण नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति के बीच द्विपक्षीय बातचीत भी प्रस्तावित है।

दोनों नेताओं के बीच ऊर्जा, व्यापार, रक्षा और रणनीतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। भारत और रूस के बीच रक्षा संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं और रूस भारत के प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं में भी शामिल है।

ऐसे में पुतिन की यात्रा के दौरान सुरक्षा के साथ-साथ कूटनीतिक गतिविधियां भी बेहद महत्वपूर्ण रहेंगी।

हर Touch की सुरक्षा के पीछे क्या सोच है?

पुतिन की सुरक्षा को लेकर सामने आने वाली कहानियां पहली नजर में असाधारण लग सकती हैं—खाना टेस्ट होना, निजी पानी, विशेष कार, मोबाइल लैब, इस्तेमाल की वस्तुओं पर नजर और यहां तक कि जैविक अपशिष्ट को लेकर विशेष व्यवस्था।

लेकिन VVIP सुरक्षा का मूल उद्देश्य एक ही होता है—किसी भी संभावित खतरे को पहले ही रोक देना।

एक राष्ट्राध्यक्ष को निशाना बनाने की कोशिश केवल हथियार से नहीं हो सकती। भोजन, पानी, जैविक खतरे, साइबर हमले, ड्रोन और यहां तक कि स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी सुरक्षा के व्यापक दायरे में आ सकती है।

इसीलिए आधुनिक राष्ट्राध्यक्ष सुरक्षा में व्यक्ति के शरीर के आसपास एक बहुस्तरीय सुरक्षा कवच बनाया जाता है।

भारत में भी सुरक्षा का अभेद्य घेरा

पुतिन की भारत यात्रा के दौरान उनकी रूसी सुरक्षा टीम और भारतीय सुरक्षा एजेंसियां मिलकर काम करेंगी। दिल्ली पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और रूसी सुरक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय पहले से चल रहा है।

भारत की ओर से भी होटल, कार्यक्रम स्थल, एयरपोर्ट और यात्रा मार्गों को सुरक्षित करने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

ब्रिक्स सम्मेलन में कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष और वरिष्ठ नेता हिस्सा ले रहे हैं, इसलिए सुरक्षा का स्तर सामान्य VVIP यात्रा से भी अधिक है।

पुतिन की सुरक्षा का सबसे बड़ा नियम—कुछ भी सामान्य नहीं

पुतिन के विदेश दौरों से जुड़ी सार्वजनिक रिपोर्टों से एक बात स्पष्ट होती है कि उनकी सुरक्षा में सामान्य चीजों को भी संभावित जोखिम के नजरिए से देखा जाता है।

खाना केवल खाना नहीं है—वह संभावित सुरक्षा जोखिम हो सकता है।

पानी केवल पानी नहीं है—उसकी जांच जरूरी हो सकती है।

होटल का कमरा केवल ठहरने की जगह नहीं है—वह पहले से सुरक्षा जांच का विषय बन सकता है।

और उनके इस्तेमाल की वस्तुएं केवल कचरा नहीं मानी जातीं—वे संभावित जैविक जानकारी का स्रोत हो सकती हैं।

यही वजह है कि पुतिन की विदेश यात्राओं के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कई परतों में काम करती दिखाई देती है।

हालांकि उनकी सुरक्षा से जुड़े कई विवरण सार्वजनिक रिपोर्टों, सूत्रों और वर्षों से प्रकाशित मीडिया जांच पर आधारित हैं। वास्तविक सुरक्षा व्यवस्था का पूरा स्वरूप स्वाभाविक रूप से गोपनीय रहता है।

अब जब पुतिन भारत पहुंचने वाले हैं और दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं, उनकी सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर दुनिया का ध्यान खींच रही है। उनके विमान से लेकर होटल, काफिले, भोजन और निजी सुरक्षा टीम तक हर स्तर पर सावधानी बरती जा रही है।

यानी दिल्ली में पुतिन की मौजूदगी सिर्फ एक राजकीय यात्रा नहीं होगी, बल्कि उसके साथ सुरक्षा की ऐसी कई परतें भी चलेंगी, जिनका बड़ा हिस्सा आम लोगों की नजरों से पूरी तरह दूर रहेगा।

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