‘मैं संत नहीं हूं, लोग अपनी श्रद्धा से चढ़ावा देते हैं’— विवादों पर पहली बार खुलकर बोलीं राधे मां

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मुंबई। आध्यात्मिक गुरु राधे मां ने लंबे समय से चल रहे विवादों और अपने निजी जीवन को लेकर पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी है। एक हालिया इंटरव्यू में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह स्वयं को कभी संत नहीं मानतीं। उन्होंने कहा कि लोग उन्हें श्रद्धा और विश्वास के कारण सम्मान देते हैं तथा जो भी भेंट या चढ़ावा मिलता है, वह पूरी तरह श्रद्धालुओं की इच्छा पर आधारित होता है। उनका कहना है कि उन्होंने कभी किसी से धन या उपहार की मांग नहीं की।

राधे मां ने कहा, “मैं संत नहीं हूं। मैं भी एक सामान्य इंसान हूं। लोग अपनी आस्था से आते हैं और अपनी इच्छा से चढ़ावा देकर जाते हैं।” उन्होंने कहा कि किसी भी श्रद्धालु पर आर्थिक योगदान देने का कोई दबाव नहीं होता और यह पूरी तरह उसकी व्यक्तिगत भावना पर निर्भर करता है। उनके अनुसार, वर्षों से उनके बारे में कई तरह की बातें कही गईं, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने काम और आध्यात्मिक मार्ग पर ध्यान केंद्रित किया।

अपने पारिवारिक जीवन का जिक्र करते हुए राधे मां ने बताया कि विवाह के बाद परिस्थितियों के कारण उन्हें अपने पति और परिवार से अलग रहना पड़ा। उन्होंने कहा कि जीवन में कई कठिन दौर आए, लेकिन उन्होंने आध्यात्मिक मार्ग को अपनाकर आगे बढ़ने का प्रयास किया। उनका मानना है कि संघर्षों ने उन्हें अधिक मजबूत बनाया और लोगों की सेवा के लिए प्रेरित किया।

इंटरव्यू के दौरान उन्होंने अपने ऊपर लगे विभिन्न आरोपों और विवादों पर भी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना था कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों को अक्सर आलोचनाओं और आरोपों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि समय के साथ कई मामलों में जांच हुई और संबंधित एजेंसियों ने अपना काम किया। उनका विश्वास है कि अंततः सत्य सामने आता है और लोगों को उसी पर भरोसा रखना चाहिए।

राधे मां ने यह भी कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण उनके भक्तों का विश्वास और आशीर्वाद है। उन्होंने दावा किया कि उनके पास आने वाले लोग किसी चमत्कार की उम्मीद से नहीं, बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन की तलाश में आते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों की समस्याएं सुनना और उन्हें सकारात्मक सोच की प्रेरणा देना ही उनके जीवन का उद्देश्य है।

अपने सार्वजनिक जीवन पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के दौर में किसी भी व्यक्ति की छवि बहुत तेजी से बनती और बिगड़ती है। उन्होंने माना कि कई बार बिना पूरी जानकारी के भी लोगों के बारे में राय बना ली जाती है। ऐसे में उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की कि वे अफवाहों के बजाय तथ्यों पर विश्वास करें और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी जानकारी प्राप्त करें।

राधे मां ने यह भी दोहराया कि वह स्वयं को किसी विशेष उपाधि से नहीं जोड़तीं। उनके अनुसार, लोगों का प्रेम और सम्मान ही उनके लिए सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति श्रद्धा से उनके पास आता है तो वह उसका सम्मान करती हैं, लेकिन किसी पर अपनी मान्यताओं को थोपने में विश्वास नहीं रखतीं।

हाल के इस इंटरव्यू के बाद राधे मां एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। उनके बयान सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किए जा रहे हैं और समर्थकों तथा आलोचकों के बीच इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह भविष्य में भी आध्यात्मिक गतिविधियों और लोगों की सेवा के कार्यों में सक्रिय रहेंगी तथा विवादों की बजाय सकारात्मक संदेश देने पर ध्यान केंद्रित करेंगी।

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