एक थाली, कई संस्कृतियां और दिवाली का जश्न… सुकना में जवानों के बीच पहुंचे राजनाथ सिंह, बांटी त्योहार की खुशियां

1

एक थाली, कई संस्कृतियां और दिवाली का जश्न… जवानों के बीच पहुंचे राजनाथ सिंह ने बांटी त्योहार की खुशियां

दिवाली का त्योहार जब देशभर में परिवारों के साथ खुशियां मनाने का अवसर बनता है, तब देश की सीमाओं पर तैनात जवान अपनी जिम्मेदारियों के कारण घर से दूर रहते हैं। ऐसे में उनके बीच त्योहार की खुशियां बांटने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 7 नवंबर 2026 को पश्चिम बंगाल के सुकना स्थित त्रिशक्ति कोर मुख्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने भारतीय सेना के जवानों के साथ दिवाली मनाई और पारंपरिक ‘बड़ा खाना’ में हिस्सा लिया।

इस आयोजन की खास बात यह रही कि एक ही भोजन में अलग-अलग राज्यों, भाषाओं और संस्कृतियों से आने वाले सैनिक एक परिवार की तरह शामिल हुए। राजनाथ सिंह ने जवानों से बातचीत की, उनके साहस और समर्पण की सराहना की तथा उन्हें दिवाली की शुभकामनाएं दीं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि वह यहां किसी औपचारिक सरकारी दौरे पर नहीं, बल्कि अपने परिवार के सदस्यों के बीच त्योहार की खुशियां बांटने आए हैं। उन्होंने जवानों को भरोसा दिलाया कि सरकार और देश के लोग हर परिस्थिति में उनके साथ खड़े हैं।

सुकना में जवानों के साथ मनाई दिवाली

पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के पास स्थित सुकना सैन्य स्टेशन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां भारतीय सेना की त्रिशक्ति कोर का मुख्यालय स्थित है। यह कोर पूर्वी क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से जुड़े अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

राजनाथ सिंह के सुकना पहुंचने पर सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, पूर्वी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल वीएमबी कृष्णन और 33 कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल मन राज सिंह मान सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

जवानों के साथ आयोजित बड़ा खाना में रक्षा मंत्री ने हिस्सा लिया। यह सेना की एक ऐसी परंपरा है, जिसमें अधिकारी और जवान एक साथ बैठकर भोजन करते हैं। इस आयोजन का उद्देश्य आपसी जुड़ाव, समानता और सामूहिक भावना को मजबूत करना है।

एक थाली में दिखी भारत की सांस्कृतिक विविधता

बड़ा खाना केवल भोजन का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि भारतीय सेना की विविधता और एकता का प्रतीक भी बना। सेना में देश के अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों से आने वाले जवान अपनी भाषाओं, खानपान, परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान के साथ सेवा करते हैं।

दिवाली के अवसर पर जब ये सभी जवान एक साथ बैठे, तो यह दृश्य भारतीय सेना की सामूहिक भावना को दर्शाता नजर आया।

राजनाथ सिंह ने कहा कि दिवाली केवल दीप जलाने, मिठाइयां खाने और आतिशबाजी करने का त्योहार नहीं है। इसका अर्थ अंधकार से प्रकाश, नकारात्मकता से सकारात्मकता और व्यक्तिगत भावनाओं से सामूहिकता की ओर बढ़ना भी है।

उन्होंने बड़ा खाना को इसी सामूहिक भावना का उदाहरण बताया। उनके अनुसार, अलग-अलग क्षेत्रों और भाषाई पृष्ठभूमि से आने वाले सैनिक जब एक साथ बैठते हैं, तो वे एक परिवार की तरह दिखाई देते हैं।

जवानों को बताया देश की सुरक्षा का मजबूत आधार

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में सैनिकों के साहस, अनुशासन और पेशेवर दक्षता की सराहना की। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में सीमाओं की सुरक्षा करना आसान काम नहीं है। जवानों को हर समय सतर्क रहना पड़ता है और कई बार त्योहारों पर भी परिवार से दूर रहकर अपनी ड्यूटी निभानी होती है।

उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि देश की रक्षा करने वाले सैनिकों को यह महसूस हो कि वे अकेले नहीं हैं। पूरा देश उनके साथ खड़ा है।

राजनाथ सिंह ने वरिष्ठ अधिकारियों से यह भी आग्रह किया कि वे समय-समय पर जवानों के साथ पर्याप्त समय बिताएं। इससे सैनिकों में अपनापन और विश्वास बढ़ता है।

आधुनिक युद्ध अब केवल सीमा पर गोलीबारी तक सीमित नहीं

सुकना में जवानों को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज सुरक्षा चुनौतियां पारंपरिक युद्ध से कहीं आगे बढ़ चुकी हैं।

अब हाइब्रिड वॉरफेयर, प्रॉक्सी वॉर, साइबर हमले, ड्रोन से निगरानी और सूचना युद्ध जैसी चुनौतियां एक साथ सामने आती हैं।

रक्षा मंत्री के अनुसार, दुश्मन हमेशा सीधे सीमा पर आकर मुकाबला नहीं करता। वह सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाहें फैलाने, ड्रोन से संवेदनशील स्थानों की निगरानी करने और साइबर हमलों के जरिए महत्वपूर्ण प्रणालियों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकता है।

ऐसी परिस्थितियों में सैनिकों की भूमिका केवल हथियारों के साथ युद्ध लड़ने तक सीमित नहीं रह जाती। उन्हें तकनीकी रूप से जागरूक, सतर्क और हर तरह की सुरक्षा चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहना पड़ता है।

ड्रोन और साइबर सुरक्षा पर विशेष जोर

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय रक्षा बलों को आधुनिक तकनीक के अनुरूप अपनी क्षमताएं लगातार विकसित करनी होंगी। ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम अब सैन्य अभियानों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते जा रहे हैं।

उन्होंने स्वदेशी रक्षा उद्योग और स्टार्टअप की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि भारत में ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम और अन्य आधुनिक सैन्य उपकरणों का निर्माण हो रहा है।

रक्षा बल भी इन तकनीकों को अपना रहे हैं। जवान ड्रोन संचालन सीख रहे हैं, साइबर सुरक्षा की समझ विकसित कर रहे हैं और नए तरीकों से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति के साथ सैनिकों का मनोबल भी मजबूत होना चाहिए। देश को विकसित राष्ट्र बनाने और मजबूत सैन्य क्षमता विकसित करने के लिए आधुनिक उपकरणों तथा मानवीय संसाधनों दोनों पर ध्यान देना जरूरी है।

LAC के पास सैन्य तैयारियों की समीक्षा

दिवाली समारोह के अलावा रक्षा मंत्री ने त्रिशक्ति कोर की परिचालन तैयारियों की भी समीक्षा की। उन्हें वास्तविक नियंत्रण रेखा के आसपास बुनियादी ढांचे के विकास और आधुनिक सैन्य उपकरणों की तैनाती के बारे में जानकारी दी गई।

सैन्य अधिकारियों ने उन्हें बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों, सुरंगों और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास से सेना की परिचालन क्षमता मजबूत हो रही है।

राजनाथ सिंह ने त्रिशक्ति कोर की तैयारियों पर संतोष व्यक्त किया और सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचे के विकास तथा स्थानीय समुदायों के कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि सुकना पूर्वी भारत की सुरक्षा व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इसकी भौगोलिक स्थिति के कारण यहां लगातार सतर्कता और मजबूत लॉजिस्टिक व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है।

सैनिकों तक जरूरी सामान पहुंचाने पर सरकार का जोर

रक्षा मंत्री ने सैन्य सुरक्षा में लॉजिस्टिक्स की अहमियत पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सुकना और आसपास का क्षेत्र अग्रिम सैन्य ठिकानों तक जरूरी सामान पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण केंद्र है।

इस मार्ग से हथियार, भोजन, दवाइयां, चिकित्सा सामग्री और सैनिकों की आवाजाही जुड़ी हुई है। इसलिए आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत रखना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क, सुरंग और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान दे रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कठिन परिस्थितियों में तैनात जवानों तक आवश्यक सुविधाएं समय पर पहुंच सकें।

सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी दिया ध्यान

अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने सैनिकों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि परिवार से लंबे समय तक दूर रहना और कठिन परिस्थितियों में लगातार जिम्मेदारी निभाना जवानों के लिए तनाव का कारण बन सकता है।

उन्होंने सैनिकों को सलाह दी कि वे अपनी भावनाओं को दबाकर न रखें। जरूरत पड़ने पर अपने साथियों से बातचीत करें और एक-दूसरे का सहयोग करें।

रक्षा मंत्री ने कहा कि सैनिकों का मनोबल और भावनात्मक स्वास्थ्य भी राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए सेना में ऐसा माहौल होना चाहिए, जहां जवान एक-दूसरे की परेशानियों को समझें और जरूरत पड़ने पर मदद करें।

पूर्वोत्तर को बताया भारत का पहला सिरा

राजनाथ सिंह ने पूर्वोत्तर भारत के महत्व पर भी विशेष रूप से बात की। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर को देश का आखिरी सिरा नहीं, बल्कि पहला सिरा समझा जाना चाहिए।

उन्होंने इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता, सांस्कृतिक विविधता और विशिष्ट परंपराओं का उल्लेख किया। उनके अनुसार, पूर्वोत्तर भारत की पहचान और राष्ट्रीय एकता का अभिन्न हिस्सा है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र की भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताएं इसे देश के लिए महत्वपूर्ण बनाती हैं। उन्होंने स्थानीय समुदायों के साथ सेना के संबंधों को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया।

जवानों के परिवारों को दिया भरोसा

दिवाली के अवसर पर राजनाथ सिंह ने जवानों और उनके परिवारों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए सैनिक अपने परिवारों से दूर रहते हैं, लेकिन उनके परिवारों का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार सैनिकों और उनके परिजनों की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।

त्योहारों पर घर से दूर रहने वाले जवानों के लिए ऐसे आयोजन भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण होते हैं। साथियों के साथ त्योहार मनाने से उन्हें परिवार जैसा माहौल मिलता है और सामूहिकता की भावना मजबूत होती है।

निष्कर्ष

सुकना में राजनाथ सिंह का जवानों के साथ दिवाली मनाना केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा। बड़ा खाना के माध्यम से अलग-अलग राज्यों, भाषाओं और संस्कृतियों के सैनिकों ने एक साथ त्योहार की खुशियां साझा कीं।

इस दौरान रक्षा मंत्री ने जवानों के मनोबल, मानसिक स्वास्थ्य, आधुनिक सैन्य तकनीक, ड्रोन, साइबर सुरक्षा और LAC के पास बुनियादी ढांचे के विकास जैसे विषयों पर भी चर्चा की।

दिवाली के इस आयोजन ने एक बार फिर भारतीय सेना की उस भावना को सामने रखा, जिसमें अलग-अलग पृष्ठभूमि से आने वाले सैनिक एक साझा उद्देश्य के लिए एक परिवार की तरह काम करते हैं।

Share it :

End