
बिहार की राजनीति में जिस तेज़ी से घटनाक्रम बदला है, उसी गति से नई सरकार की प्राथमिकताएँ भी तय होती दिख रही हैं। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद नीतीश कुमार ने जब इस बार गृह मंत्रालय अपने पास न रखने का फैसला किया, तो सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई। अंततः यह जिम्मेदारी सम्राट चौधरी को सौंप दी गई—जो बीजेपी के वरिष्ठ नेता और डिप्टी सीएम हैं। गृह मंत्रालय का कार्यभार मिलते ही उनके सामने कई ऐसी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं, जिन्हें पार करना आसान नहीं होगा।
सम्राट चौधरी को यह जिम्मेदारी ऐसे समय में मिली है जब बिहार की कानून-व्यवस्था पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है, और जनता भी सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद लगाए बैठी है। दूसरी तरफ, नीतीश कुमार लंबे समय से “सुशासन बाबू” के नाम से पहचाने जाते रहे हैं। अब उसी ‘सुशासन’ की बागडोर सम्राट चौधरी के हाथों में आ गई है। सवाल यह है कि क्या वे नीतीश कुमार की स्थापित छवि को बनाए रख पाएंगे? और क्या उन चुनौतियों पर विजय पा सकेंगे जो आज बिहार के सामने सबसे बड़ी समस्या बनी हुई हैं?
आइए समझते हैं कि सम्राट चौधरी को गृह मंत्री के पद पर रहते हुए किन मुख्य आठ चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, और कैसे ये चुनौतियाँ उनके राजनीतिक भविष्य को भी प्रभावित कर सकती हैं।
1. कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाना—सबसे बड़ी परीक्षा
बिहार वर्षों से कानून-व्यवस्था को लेकर निशाने पर रहा है। भले ही नीतीश कुमार के दौर में अपराध दर में कमी आई हो, लेकिन हाल के महीनों में चोरी, हत्या, डकैती और साइबर क्राइम की खबरों ने जनता को चिंतित किया है। गृह मंत्री बनने के बाद यह जिम्मेदारी सम्राट चौधरी की होगी कि वे पुलिस तंत्र को मजबूत करें, अपराधियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें और जनता में भरोसा पैदा करें कि “जंगलराज” का वह दौर कभी वापस नहीं आएगा।
उनके सामने चुनौती यह भी है कि वे अपने निर्णयों में निष्पक्षता बनाए रखें और राजनीतिक दबावों से ऊपर उठकर प्रशासनिक फैसले लें।
2. पुलिस सुधार—आधुनिक तकनीकों का उपयोग और फोर्स को प्रशिक्षित करना
बिहार पुलिस का ढांचा बड़ा है, लेकिन आधुनिकता और तकनीक के मामले में अभी भी काफी पिछड़ापन मौजूद है। साइबर क्राइम, डिजिटल ठगी और ऑनलाइन फाइनेंशियल अपराधों से निपटने के लिए विशेष यूनिट्स को प्रशिक्षण, टेक्नोलॉजी और बेहतर सुविधाएं देना जरूरी होगा।
सम्राट चौधरी से उम्मीद होगी कि वे पुलिस विभाग में पारदर्शिता लाएं, खाली पदों को भरें और基层 स्तर पर काम कर रहे कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाएं। पुलिसकर्मियों की कामकाजी स्थिति, ड्यूटी आवर्स और सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता में भी सुधार की आवश्यकता है।
3. दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करने की चुनौती
बिहार में गठबंधन सरकारें अक्सर विभागीय खींचतान की शिकार होती रही हैं। अब जब BJP और JDU एक बार फिर साथ आए हैं, ऐसे में गृह मंत्रालय को लेकर कई राजनीतिक संतुलन साधने होंगे।
सम्राट चौधरी के लिए यह देखना एक बड़ी चुनौती होगी कि वे अपने निर्णयों में निष्पक्ष रहें और किसी भी राजनीतिक दल के प्रभाव से मुक्त होकर प्रशासन को चलाएं।
4. अपराधियों और गैंगस्टर्स पर नकेल कसना
बिहार में कई जिलों में अपराधी गिरोह सक्रिय हैं। इनके नेटवर्क का सफाया कर पाना हमेशा कठिन रहा है। सम्राट चौधरी को इन पर निर्णायक कदम उठाने होंगे।
संगठित अपराध, शराब माफिया, नशीले पदार्थों का व्यवसाय और राजनीतिक संरक्षण वाले अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई उनके ‘प्रदर्शन’ की कसौटी होगी।
यदि वे इन अपराधी नेटवर्क पर मजबूत कार्रवाई करते हैं, तो इससे उनकी छवि को बड़ा फायदा मिल सकता है।
5. दहेज, महिलाओं पर अपराध और सामाजिक न्याय का मुद्दा
बिहार में महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाएं लगातार सुर्खियों में रहती हैं। दहेज उत्पीड़न, छेड़छाड़, घरेलू हिंसा और यौन अपराध जैसे मामलों पर तेज़ कार्रवाई और पीड़ितों को न्याय दिलाना बहुत जरूरी है।
गृह मंत्री के रूप में उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि महिला हेल्पलाइन, फास्ट-ट्रैक कोर्ट और पुलिस रिस्पांस सिस्टम मजबूत तरीके से काम करें। महिलाओं की सुरक्षा में सुधार सरकार की छवि को सीधे प्रभावित करेगा।
6. नक्सल प्रभावित इलाकों पर नियंत्रण
बिहार के कुछ इलाके अभी भी नक्सलवाद से प्रभावित हैं, खासकर दक्षिण और मध्य क्षेत्रों में। हालांकि पिछले एक दशक में नक्सल गतिविधियां धीमी पड़ी हैं, लेकिन खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।
सम्राट चौधरी को सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाना होगा, इंटेलिजेंस नेटवर्क मजबूत करना होगा और विकास कार्यों को बढ़ावा देकर नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
7. बिहार में शराबबंदी की चुनौती
नीतीश कुमार की शराबबंदी नीति ने बिहार में बड़ी राजनीतिक और सामाजिक बहस छेड़ दी थी। इसके लागू होने के बाद तस्करी बढ़ी, अवैध शराब का व्यापार भी फैल गया।
अब चूंकि गृह मंत्रालय सम्राट चौधरी के पास है, तो उन्हें कानून को लागू कराने और अवैध तस्करी पर रोक लगाने के लिए बेहद सख्त रणनीति अपनानी होगी। शराबबंदी पर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है, ऐसे में सम्राट चौधरी के कदम बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
8. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ‘सुशासन मॉडल’ को बनाए रखना
नीतीश कुमार की पहचान “सुशासन बाबू” के रूप में इसलिए बनी क्योंकि उन्होंने प्रशासनिक सुधार, सड़क निर्माण, कानून-व्यवस्था और सामाजिक नीतियों के जरिए बिहार में स्थिरता लाई।
अब जब गृह विभाग सम्राट चौधरी के पास है, तो उनसे उम्मीद की जाएगी कि वे उसी सुशासन का स्तर बनाए रखें। यदि वे इस स्तर पर खरे उतरते हैं, तो यह उनका राजनीतिक रुतबा बढ़ाएगा और उन्हें राज्य का मजबूत नेता बनने में सहायता मिलेगी।
अगर वे इस कसौटी पर खरे नहीं उतर पाए, तो विपक्ष इसे मुद्दा बनाकर सरकार पर निशाना साध सकता है।
निष्कर्ष
बिहार के नए गृह मंत्री के रूप में सम्राट चौधरी का कार्यकाल कई मायनों में महत्वपूर्ण होने वाला है। यह न केवल उनके राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी परीक्षा है, बल्कि सरकार की स्थिरता और जनता के विश्वास से भी जुड़ा हुआ है।
कानून-व्यवस्था, अपराधियों पर कार्रवाई, महिलाओं की सुरक्षा, पुलिस सुधार, नक्सल उन्मूलन और शराबबंदी—इन सब क्षेत्रों में उनके कदम तय करेंगे कि वे बिहार की जनता के बीच कितनी मजबूत छाप छोड़ पाते हैं।
यदि वे इन चुनौतियों का सामना मजबूती से करते हैं, तो वे न केवल “सुशासन” की परंपरा आगे बढ़ाएंगे, बल्कि खुद भी एक प्रभावशाली प्रशासक के रूप में उभर सकते हैं।