
करवा चौथ पर पत्नी ने नहीं रखा व्रत तो थाने पहुंचा पति, बेवफाई का आरोप लगाकर मांगी कार्रवाई; तलाक की दी चेतावनी
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में करवा चौथ के दिन पति-पत्नी के बीच धार्मिक परंपरा को लेकर हुआ विवाद पुलिस थाने तक पहुंच गया। पत्नी द्वारा करवा चौथ का व्रत नहीं रखने और चांद की पूजा नहीं करने से नाराज एक व्यक्ति ने बदरवास थाने में लिखित आवेदन देकर शिकायत की। पति ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी उसके प्रति बेवफा है और उसे नुकसान पहुंचाना चाहती है। उसने आवेदन में यह भी चेतावनी दी कि यदि पत्नी ने उसके लिए पूजा नहीं की, तो वह उसे तलाक दे देगा।
यह मामला 29 अक्टूबर 2026 को शिवपुरी जिले के बदरवास थाना क्षेत्र के बिजरावन गांव से सामने आया। शिकायतकर्ता की पहचान करीब 30 वर्षीय बारेलाल आदिवासी के रूप में हुई है। उसने अपनी पत्नी मिथलेश आदिवासी के खिलाफ थाना प्रभारी को आवेदन दिया। इस शिकायत के सामने आने के बाद मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा में आ गया और आवेदन की तस्वीर सोशल मीडिया पर भी प्रसारित होने लगी।
हालांकि, इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि पत्नी पर लगाए गए आरोप पति की शिकायत पर आधारित हैं। पत्नी का पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए शिकायत में लिखी बातों को स्थापित तथ्य के बजाय शिकायतकर्ता के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बारेलाल आदिवासी ने बदरवास पुलिस थाने पहुंचकर अपनी पत्नी के खिलाफ आवेदन सौंपा। उसका कहना था कि उसकी पत्नी ने करवा चौथ का व्रत नहीं रखा और उसके लिए चांद की पूजा भी नहीं की। पति ने इस बात को लेकर नाराजगी जताई और पुलिस से शिकायत पर कार्रवाई करने की मांग की।
आवेदन में बारेलाल ने अपनी पत्नी का नाम मिथलेश आदिवासी बताया। उसने आरोप लगाया कि पत्नी उसके साथ बेवफाई कर रही है। इसके साथ ही उसने यह आशंका भी जताई कि पत्नी उसे मारना चाहती है। ये गंभीर आरोप हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में इनकी पुष्टि करने वाला कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है।
शिकायत में पति ने करवा चौथ की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि पत्नी उसके लिए व्रत नहीं रख रही और चांद देखकर उसकी लंबी उम्र की कामना भी नहीं कर रही। इसी बात को लेकर उसने पुलिस से हस्तक्षेप करने की मांग की।
पति की शिकायत का एक असामान्य पहलू यह था कि उसने धार्मिक रस्म पूरी नहीं होने को लेकर पुलिस से कार्रवाई की मांग की और पत्नी को तलाक देने की चेतावनी भी लिखी। आमतौर पर घरेलू मतभेदों से जुड़ी शिकायतें अलग-अलग कारणों से थाने पहुंचती हैं, लेकिन इस मामले में विवाद का प्रमुख कारण पति की शिकायत के अनुसार करवा चौथ का व्रत और पूजा नहीं करना था।
आवेदन में क्या लिखा था?
मीडिया रिपोर्टों में प्रकाशित शिकायत के अनुसार, बारेलाल ने आवेदन में अपनी पत्नी पर बेवफाई करने और उसके लिए करवा चौथ की पूजा नहीं करने का आरोप लगाया। उसने यह भी लिखा कि पत्नी उसे नुकसान पहुंचाना चाहती है।
शिकायत में पति ने बताया कि उसने पत्नी से चांद देखकर पूजा करने को कहा था, ताकि उसकी लंबी उम्र की कामना की जा सके। उसका आरोप था कि पत्नी ने उसकी बात नहीं मानी। इसी नाराजगी में उसने पुलिस को आवेदन दिया और कार्रवाई की मांग की।
आवेदन में तलाक की चेतावनी भी शामिल थी। पति ने कहा कि यदि इस बार पत्नी ने उसके लिए पूजा नहीं की, तो वह उसे तलाक दे देगा। इस कथन के कारण मामला और अधिक चर्चा में आया।
यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि किसी व्यक्ति द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत अपने आप में आरोपों का प्रमाण नहीं होती। शिकायत में दर्ज बातें उस व्यक्ति का पक्ष बताती हैं। आरोप सही हैं या नहीं, इसका पता संबंधित पक्षों से बातचीत, उपलब्ध साक्ष्यों और जरूरत पड़ने पर जांच से ही चल सकता है।
इस मामले में पत्नी की प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि उसने व्रत क्यों नहीं रखा, क्या पति-पत्नी के बीच पहले से कोई विवाद था या शिकायत में लगाए गए अन्य आरोपों पर उसका क्या कहना है।
करवा चौथ का व्रत नहीं रखने पर पति नाराज
करवा चौथ उत्तर भारत के कई हिस्सों में मनाया जाने वाला पारंपरिक पर्व है। इस अवसर पर अनेक विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। परंपरा के अनुसार, कई महिलाएं चांद देखने और पूजा करने के बाद व्रत खोलती हैं।
शिवपुरी के इस मामले में पति की शिकायत का केंद्र भी यही धार्मिक परंपरा रही। बारेलाल का कहना था कि पत्नी ने उसके लिए न तो व्रत रखा और न ही चांद की पूजा की। उसने इसे अपने वैवाहिक संबंधों और पत्नी के व्यवहार से जोड़कर देखा।
हालांकि, धार्मिक परंपराओं का पालन करना व्यक्तिगत आस्था, पसंद और परिस्थितियों से जुड़ा विषय है। किसी व्यक्ति के व्रत रखने या नहीं रखने से उसके इरादों के बारे में अपने आप निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इस मामले में पत्नी के व्रत नहीं रखने के कारणों की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
यह भी स्पष्ट नहीं है कि पति-पत्नी के बीच इस मुद्दे पर पहले कोई बातचीत हुई थी या विवाद उसी दिन शुरू हुआ। उपलब्ध रिपोर्टें मुख्य रूप से पति की शिकायत और उसके द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित हैं।
चांद देखकर लंबी उम्र की कामना करने की मांग
शिकायत में बारेलाल ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पत्नी कम से कम चांद देखकर उसकी लंबी उम्र की कामना कर सकती थी। रिपोर्टों के अनुसार, उसने आवेदन में लिखा कि उसने पत्नी से चांद देखकर पूजा करने के लिए कहा था, लेकिन पत्नी ने उसकी बात नहीं मानी।
करवा चौथ की परंपरा में चांद का दर्शन और पूजा कई परिवारों के लिए महत्वपूर्ण रस्म मानी जाती है। लेकिन किसी परिवार में इन रस्मों का पालन किस तरह होता है, यह अलग-अलग हो सकता है। इस घटना में पति ने अपनी अपेक्षा को लेकर पुलिस से शिकायत की, जबकि पत्नी की ओर से कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया।
पति की शिकायत के अनुसार, व्रत और पूजा नहीं किए जाने से वह इतना नाराज हुआ कि उसने तलाक देने की चेतावनी लिख दी। यही बात इस घटना को सामान्य पारिवारिक असहमति से आगे चर्चा में ले आई।
फिर भी, केवल एक पक्ष के आवेदन के आधार पर रिश्ते की पूरी स्थिति समझना संभव नहीं है। किसी विवाद को समझने के लिए दोनों पक्षों की बात सुनना और वास्तविक परिस्थितियों को जानना जरूरी होता है।
पत्नी पर बेवफाई और नुकसान पहुंचाने के आरोप
बारेलाल ने अपने आवेदन में व्रत नहीं रखने की शिकायत के साथ पत्नी पर बेवफाई करने और उसे मारने की मंशा रखने का आरोप भी लगाया। ये आरोप व्रत से जुड़ी नाराजगी से अलग और गंभीर प्रकृति के हैं।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में ऐसा कोई स्वतंत्र प्रमाण नहीं दिया गया है जिससे इन आरोपों की पुष्टि होती हो। पत्नी का पक्ष भी सामने नहीं आया है। इसलिए इन दावों को पति द्वारा लगाए गए आरोपों के रूप में ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
किसी व्यक्ति पर बेवफाई या नुकसान पहुंचाने की मंशा का आरोप लगना और उन आरोपों का साबित होना दो अलग बातें हैं। शिकायत मिलने पर पुलिस मामले की प्रकृति और उपलब्ध जानकारी के आधार पर उचित कदम तय कर सकती है। इस मामले में भी यह जरूरी है कि शिकायत में लिखी बातों को जांच या पुष्टि से पहले अंतिम सच न माना जाए।
शिकायत मिलने पर पुलिस ने क्या किया?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बदरवास पुलिस ने बारेलाल का आवेदन प्राप्त किया। कुछ रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की और पति-पत्नी के बीच विवाद को समझाने-बुझाने के जरिए सुलझाने की बात कही।
कोलारस के एसडीओपी संजय मिश्रा के हवाले से प्रकाशित जानकारी के अनुसार, पुलिस महिला अधिकारी के माध्यम से दोनों के बीच चल रहे मनमुटाव को दूर कराने का प्रयास करेगी। इससे संकेत मिलता है कि उपलब्ध जानकारी के समय पुलिस की प्राथमिकता दोनों पक्षों के बीच बातचीत और विवाद को शांत करने की थी।
एक अन्य रिपोर्ट में बदरवास थाना प्रभारी नवीन यादव के हवाले से कहा गया कि आवेदन देने आया व्यक्ति नशे की हालत में था। यह विवरण पुलिस अधिकारी के बयान के रूप में प्रकाशित हुआ है। इस संबंध में उपलब्ध रिपोर्टों में इससे आगे कोई विस्तृत आधिकारिक निष्कर्ष नहीं दिया गया।
फिलहाल, शिकायत दिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि पुलिस ने पति के सभी आरोपों को सही मान लिया है। न ही तलाक की चेतावनी अपने आप में तलाक की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर देती है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना कहा जा सकता है कि पति ने आवेदन दिया और पुलिस की ओर से मामले को समझने तथा मनमुटाव दूर कराने की बात सामने आई।
क्या करवा चौथ का व्रत नहीं रखने पर तलाक हो सकता है?
इस घटना के बाद यह सवाल भी उठ सकता है कि क्या पत्नी द्वारा करवा चौथ का व्रत नहीं रखने पर पति तलाक दे सकता है। इस प्रश्न का उत्तर किसी एक घटना के आधार पर नहीं दिया जा सकता। विवाह और तलाक से संबंधित कानूनी मामलों में लागू कानून, विवाह की परिस्थितियां और प्रस्तुत तथ्यों की भूमिका होती है।
सिर्फ किसी धार्मिक व्रत को नहीं रखने के आधार पर तलाक अपने आप लागू नहीं हो जाता। किसी भी वैवाहिक विवाद में कानूनी स्थिति समझने के लिए संबंधित कानून और मामले के विशिष्ट तथ्यों को देखना आवश्यक होता है।
इस मामले में पति ने शिकायत में तलाक देने की चेतावनी दी है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में तलाक की कोई कानूनी प्रक्रिया शुरू होने या अदालत में याचिका दायर होने की पुष्टि नहीं है। इसलिए इसे तलाक हो जाने या तलाक का फैसला किए जाने की घटना के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।
यह मामला फिलहाल पुलिस को दिए गए आवेदन और पति-पत्नी के बीच विवाद से जुड़ा है। आगे क्या होता है, यह संबंधित पक्षों की बातचीत और किसी भी आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना आवेदन
शिकायत की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा में आया। रिपोर्टों के अनुसार, आवेदन की तस्वीर सोशल मीडिया पर प्रसारित हुई और लोगों ने इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं।
कुछ लोगों ने घटना को असामान्य बताया, जबकि अन्य प्रतिक्रियाओं में वैवाहिक रिश्तों में भरोसे और धार्मिक अपेक्षाओं को लेकर चर्चा हुई। हालांकि, सोशल मीडिया पर लोगों की टिप्पणियां मामले की सच्चाई का प्रमाण नहीं होतीं। किसी शिकायत की तस्वीर वायरल हो जाना भी उसमें लगाए गए आरोपों को साबित नहीं करता।
ऐसे मामलों में यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इसमें शामिल लोगों की निजी जिंदगी और प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है। इसलिए आरोपों को तथ्य की तरह दोहराने या किसी एक पक्ष को दोषी ठहराने से बचना चाहिए, खासकर तब जब दूसरे पक्ष की प्रतिक्रिया उपलब्ध न हो।
धार्मिक परंपराएं और वैवाहिक रिश्तों में संवाद
यह घटना धार्मिक परंपराओं और वैवाहिक अपेक्षाओं के बीच संबंध पर भी सवाल उठाती है। करवा चौथ अनेक परिवारों के लिए भावनात्मक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। कुछ लोग इसे प्रेम और समर्पण की अभिव्यक्ति मानते हैं, जबकि व्रत रखना या न रखना व्यक्तिगत आस्था और पसंद से भी जुड़ा हो सकता है।
किसी भी रिश्ते में परंपराओं को लेकर अपेक्षाएं अलग-अलग हो सकती हैं। यदि पति-पत्नी की सोच में अंतर हो, तो संवाद और एक-दूसरे की परिस्थितियों को समझना महत्वपूर्ण होता है। धार्मिक रस्मों को लेकर असहमति होने पर विवाद को बढ़ाने के बजाय बातचीत से समाधान तलाशना कई परिस्थितियों में मददगार हो सकता है।
हालांकि, शिवपुरी के इस मामले में पति-पत्नी के बीच बातचीत का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं है। यह भी ज्ञात नहीं है कि दोनों के बीच पहले से कोई अन्य विवाद चल रहा था या नहीं। इसलिए घटना से व्यापक निष्कर्ष निकालने के बजाय उपलब्ध तथ्यों तक सीमित रहना जरूरी है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल इस मामले में उपलब्ध जानकारी पति द्वारा बदरवास थाने में दिए गए आवेदन और पुलिस की ओर से मनमुटाव दूर कराने के प्रयास तक सीमित है। पत्नी की प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है और उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस दोनों पक्षों से बातचीत कराती है या मामले में आगे कोई कार्रवाई होती है, इस बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आने पर ही घटनाक्रम की अगली स्थिति समझी जा सकेगी।
इस बीच, तलाक की चेतावनी को अंतिम निर्णय समझना उचित नहीं होगा। आवेदन देना, पुलिस की ओर से शिकायत प्राप्त करना और वैवाहिक संबंध समाप्त करने की कानूनी प्रक्रिया अलग-अलग बातें हैं।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के बदरवास थाना क्षेत्र में करवा चौथ का व्रत नहीं रखने को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद पुलिस तक पहुंच गया। बिजरावन गांव के बारेलाल आदिवासी ने अपनी पत्नी मिथलेश आदिवासी के खिलाफ आवेदन देकर आरोप लगाया कि पत्नी ने उसके लिए व्रत नहीं रखा, चांद की पूजा नहीं की और उसके प्रति बेवफाई कर रही है। उसने पत्नी द्वारा नुकसान पहुंचाए जाने की आशंका जताते हुए यह चेतावनी भी दी कि पूजा नहीं करने पर वह तलाक दे देगा।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने आवेदन प्राप्त किया और दोनों के बीच मनमुटाव दूर कराने के लिए बातचीत का प्रयास करने की बात कही। कुछ रिपोर्टों में बताया गया कि मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हुई। एक पुलिस अधिकारी के हवाले से शिकायतकर्ता के नशे में होने की बात भी प्रकाशित हुई, लेकिन उपलब्ध जानकारी में इससे आगे की विस्तृत कार्रवाई की पुष्टि नहीं है।
इस पूरे मामले में पत्नी का पक्ष सामने नहीं आया है और पति द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल इसे करवा चौथ की परंपरा को लेकर पति की ओर से की गई पुलिस शिकायत के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि आरोपों के साबित होने या तलाक हो जाने की घटना के रूप में।
तथ्य-जांच नोट: उपलब्ध रिपोर्टों में शिकायतकर्ता का नाम बारेलाल आदिवासी, पत्नी का नाम मिथलेश आदिवासी और स्थान बदरवास थाना क्षेत्र, शिवपुरी बताया गया है। पुलिस को आवेदन दिए जाने की खबर है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, एफआईआर दर्ज नहीं हुई और दोनों के बीच समझाइश कराने की बात कही गई। पत्नी का पक्ष और पति के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।