तमिलनाडु में हर नवजात पर ₹1.28 लाख का कर्ज! विजय सरकार के श्वेत पत्र में राज्य की वित्तीय स्थिति पर बड़ा खुलासा

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तमिलनाडु सरकार द्वारा जारी किए गए बहुप्रतीक्षित श्वेत पत्र ने राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार ने दावा किया है कि तमिलनाडु की कुल वित्तीय देनदारियां अब बढ़कर लगभग ₹13.18 लाख करोड़ तक पहुंच चुकी हैं। सरकार के अनुसार यदि इस कुल वित्तीय बोझ को राज्य की जनसंख्या के अनुपात में देखा जाए तो तमिलनाडु में जन्म लेने वाले प्रत्येक बच्चे पर औसतन करीब ₹1.28 लाख का कर्ज बैठता है। यह आंकड़ा सामने आने के बाद राज्य की आर्थिक स्थिति और पिछले वर्षों की वित्तीय नीतियों को लेकर राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर चर्चा तेज हो गई है।

विजय सरकार ने सत्ता संभालने के बाद से ही दावा किया था कि उसे एक भारी वित्तीय बोझ विरासत में मिला है। मुख्यमंत्री ने अपने पहले संबोधन में कहा था कि राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी और जनता के सामने वास्तविक आंकड़े रखे जाएंगे। इसी वादे के तहत सरकार ने वित्तीय स्थिति पर विस्तृत श्वेत पत्र जारी किया।

श्वेत पत्र के अनुसार तमिलनाडु का प्रत्यक्ष सरकारी कर्ज और विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों की देनदारियों को मिलाकर कुल वित्तीय दायित्व ₹13.18 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। इसमें बिजली, परिवहन, नागरिक आपूर्ति और अन्य सरकारी उपक्रमों की वित्तीय देनदारियां भी शामिल हैं। सरकार का कहना है कि केवल बजट में दिखाई देने वाले कर्ज को देखने से वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, इसलिए पहली बार व्यापक वित्तीय दायित्वों का समग्र आकलन जनता के सामने रखा गया है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान राज्य का कर्ज लगभग दोगुना हो गया है। सरकार के अनुसार वित्तीय वर्ष 2021-22 की तुलना में 2025-26 तक राज्य की देनदारियों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। श्वेत पत्र में यह चिंता भी व्यक्त की गई है कि यदि राजस्व वृद्धि और व्यय नियंत्रण के बीच संतुलन नहीं बनाया गया तो आने वाले वर्षों में वित्तीय दबाव और बढ़ सकता है।

सरकार का कहना है कि वह इस स्थिति को केवल आलोचना के लिए नहीं बल्कि सुधार के अवसर के रूप में देख रही है। वित्त मंत्री एन. मारिया विल्सन ने श्वेत पत्र जारी करते हुए कहा कि राज्य की वास्तविक आर्थिक तस्वीर को सामने लाना आवश्यक था ताकि भविष्य की नीतियां अधिक जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ बनाई जा सकें। सरकार का दावा है कि वित्तीय अनुशासन, राजस्व सुधार और व्यय प्रबंधन के माध्यम से स्थिति को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

हालांकि इस मुद्दे पर राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। विजय सरकार के सत्ता में आने से पहले पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और डीएमके नेतृत्व ने यह दावा किया था कि तमिलनाडु की वित्तीय स्थिति नियंत्रण में है और राज्य का कर्ज अनुमत सीमाओं के भीतर है। दूसरी ओर विजय और उनकी पार्टी लंबे समय से आरोप लगाते रहे हैं कि पिछली सरकार राज्य पर भारी आर्थिक बोझ छोड़कर गई है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कुल कर्ज का आंकड़ा किसी राज्य की आर्थिक स्थिति तय नहीं करता। किसी भी राज्य की अर्थव्यवस्था का मूल्यांकन उसके सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP), राजस्व संग्रह, निवेश क्षमता और विकास दर के आधार पर भी किया जाता है। तमिलनाडु देश के सबसे औद्योगिक और आर्थिक रूप से विकसित राज्यों में शामिल है तथा उसका आर्थिक आधार काफी मजबूत माना जाता है। इसके बावजूद बढ़ती देनदारियां नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बन सकती हैं।

श्वेत पत्र में यह भी संकेत दिया गया है कि आने वाले वर्षों में वित्तीय सुधारों को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता, अनुत्पादक खर्चों में कमी और निवेश आकर्षित करने वाली नीतियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मुख्यमंत्री विजय पहले भी यह कह चुके हैं कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार मुक्त और जवाबदेह प्रशासन देने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस बीच विपक्ष ने सरकार के दावों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि श्वेत पत्र में प्रस्तुत आंकड़ों का स्वतंत्र विश्लेषण किया जाना चाहिए और राज्य की आर्थिक स्थिति को राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं बल्कि तथ्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए। वहीं सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल वास्तविक स्थिति को सार्वजनिक करना और भविष्य के लिए बेहतर वित्तीय रोडमैप तैयार करना है।

कुल मिलाकर तमिलनाडु सरकार का यह श्वेत पत्र राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर एक महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है। ₹13.18 लाख करोड़ की कुल देनदारी और प्रति नवजात ₹1.28 लाख के अनुमानित ऋण बोझ जैसे आंकड़ों ने आर्थिक बहस को नया आयाम दिया है। अब आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विजय सरकार वित्तीय सुधारों के लिए कौन से कदम उठाती है और क्या वह राज्य की आर्थिक स्थिति को अधिक संतुलित और टिकाऊ दिशा में ले जाने में सफल हो पाती है।

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