भारत में सात महीने रुकना पड़ा भारी, अमेरिका में 27 साल से रह रही भारतीय मूल की महिला ICE हिरासत में, दवाइयों को लेकर भी चिंता

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अमेरिका में करीब 27 साल से रह रही भारतीय मूल की महिला वेंकट नरसमांबा वासमसेट्टी इन दिनों इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट यानी ICE की हिरासत में हैं। खास बात यह है कि वह लंबे समय से अमेरिका में रह रही थीं, उनके पास ग्रीन कार्ड था और मई 2026 में एक इमिग्रेशन जज उनके खिलाफ चल रहे पुराने निर्वासन मामले को समाप्त भी कर चुके थे। इसके बावजूद 11 अगस्त को एक नियमित ICE चेक-इन के दौरान उन्हें हिरासत में ले लिया गया। अब उनका मामला अमेरिका में लंबे समय से रह रहे अप्रवासियों के अधिकारों, स्थायी निवास की स्थिति और इमिग्रेशन कानूनों के इस्तेमाल को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।

वेंकट वासमसेट्टी के मामले की शुरुआत उस समय हुई जब वह भारत की यात्रा पर गई थीं। रिपोर्टों के अनुसार वह अपने बीमार माता-पिता की देखभाल के लिए भारत आई थीं। इसी दौरान उनकी अमेरिका वापसी में देरी हुई। परिवार और उनके वकील के अनुसार भारत में लंबे समय तक रहने के पीछे पारिवारिक और स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियां थीं। वह खुद भी कोविड-19 से संक्रमित हुई थीं और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से गुजरी थीं। अमेरिका लौटने के बाद उनकी स्थायी निवासी स्थिति को लेकर सवाल उठाए गए और सरकार की ओर से यह आरोप लगाया गया कि उन्होंने अमेरिका में अपने स्थायी निवास को छोड़ दिया था।

वेंकट के परिवार का कहना है कि उनका अमेरिका से संबंध केवल ग्रीन कार्ड तक सीमित नहीं था। उन्होंने लगभग तीन दशक अमेरिका में बिताए हैं। वह नॉर्थ कैरोलिना में विशेष जरूरत वाले बच्चों के साथ शिक्षक के तौर पर काम कर चुकी हैं। उनका परिवार भी अमेरिका में है और उनके बच्चे अमेरिकी नागरिक हैं। परिवार के मुताबिक उनके पास अमेरिका में घर, नौकरी और पारिवारिक संबंध जैसे मजबूत आधार हैं। इसलिए भारत में कई महीनों तक रहना उनके अनुसार अमेरिका से स्थायी रूप से संबंध तोड़ने का संकेत नहीं था।

वेंकट वासमसेट्टी वर्ष 2013 से अमेरिकी ग्रीन कार्ड धारक यानी lawful permanent resident रही हैं। ग्रीन कार्ड अमेरिका में स्थायी निवास का अधिकार देता है, लेकिन यह अधिकार कुछ कानूनी शर्तों के अधीन होता है। लंबे समय तक अमेरिका से बाहर रहना कभी-कभी इमिग्रेशन अधिकारियों के सामने यह सवाल खड़ा कर सकता है कि व्यक्ति वास्तव में अमेरिका में अपना स्थायी निवास बनाए रखना चाहता है या नहीं। इसी तरह के सवाल उनके मामले में भी उठे। हालांकि उनका परिवार और कानूनी पक्ष इस बात पर जोर देता है कि भारत में उनका लंबा प्रवास मजबूरी और पारिवारिक परिस्थितियों से जुड़ा था, न कि अमेरिका छोड़ने की किसी स्थायी योजना से।

मामले में सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम मई 2026 में हुआ। एक अमेरिकी इमिग्रेशन जज ने वेंकट के खिलाफ चल रहे पुराने removal यानी deportation case को समाप्त कर दिया। इसका मतलब यह था कि सरकार द्वारा पहले शुरू की गई निर्वासन प्रक्रिया उस समय आगे नहीं बढ़ी। परिवार को उम्मीद थी कि इस फैसले के बाद वह सामान्य जीवन जी सकेंगी और अमेरिका में अपने परिवार के साथ रह सकेंगी। लेकिन कुछ ही महीनों बाद अगस्त में ICE ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इस घटनाक्रम ने उनके परिवार को हैरान कर दिया।

11 अगस्त 2026 को वेंकट एक निर्धारित ICE चेक-इन के लिए पहुंची थीं। यह उनके लिए कोई अचानक छिपने या भागने की कोशिश वाला मामला नहीं बताया गया, बल्कि वह तय प्रक्रिया के तहत अधिकारियों के सामने उपस्थित हुई थीं। इसी दौरान उन्हें हिरासत में ले लिया गया। इसके बाद उन्हें जॉर्जिया स्थित एक ICE डिटेंशन सेंटर में रखा गया। रिपोर्टों के अनुसार उनकी हिरासत की जानकारी ICE के ऑनलाइन डिटेनी लोकेटर सिस्टम में भी दिखाई दी।

वेंकट के परिवार के लिए यह स्थिति इसलिए और कठिन है क्योंकि मई में उनका पिछला निर्वासन मामला समाप्त हो चुका था। परिवार और उनके वकील इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि पुराने मामले के समाप्त होने के बावजूद उन्हें दोबारा हिरासत में क्यों लिया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों की ओर से उनकी इमिग्रेशन स्थिति को लेकर अलग आधार पर नई कार्रवाई की गई है। इस वजह से मामला कानूनी रूप से जटिल हो गया है और अब उनके वकील उनकी हिरासत तथा इमिग्रेशन स्थिति को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं।

इस मामले में स्वास्थ्य से जुड़ी चिंता भी सामने आई है। रिपोर्टों में बताया गया है कि वेंकट को गंभीर डायबिटीज है और हिरासत में उनकी नियमित दवाइयों को लेकर परिवार चिंतित है। उनके समर्थकों ने आरोप लगाया है कि उन्हें अपनी जरूरी दवाइयां और स्वास्थ्य देखभाल आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रही है। ऐसी स्थिति ने उनके परिवार की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि लंबे समय से स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे व्यक्ति के लिए नियमित दवा और चिकित्सा निगरानी महत्वपूर्ण होती है।

वेंकट की बेटी यशस्विनी वासमसेट्टी खुद इमिग्रेशन कानून की वकील हैं। वह अमेरिका में कानूनी रूप से इमिग्रेशन मामलों से जुड़ी हैं और अपनी मां की स्थिति को लेकर सक्रिय रूप से आवाज उठा रही हैं। परिवार के लिए यह स्थिति भावनात्मक रूप से भी कठिन है, क्योंकि एक तरफ उनकी मां लंबे समय से अमेरिका में रह रही हैं और दूसरी तरफ उन्हें ऐसे समय हिरासत में लिया गया है जब परिवार को लग रहा था कि पुराना निर्वासन मामला समाप्त हो चुका है।

वेंकट की कहानी में भारत की यात्रा सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने 2022 या 2023 के दौरान लगभग सात महीने भारत में बिताए थे। इस दौरान उनका उद्देश्य अपने बीमार माता-पिता की देखभाल करना था। इसी अवधि में उन्हें कोविड-19 भी हुआ और उनके स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं सामने आईं। उनके परिवार का कहना है कि इतनी लंबी अवधि तक भारत में रहना अमेरिका छोड़ने का फैसला नहीं था, बल्कि पारिवारिक जिम्मेदारी के कारण उन्हें वहां रुकना पड़ा।

अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारियों की ओर से इस अवधि को अलग नजरिए से देखा गया। सरकार का पक्ष यह रहा कि लंबे समय तक अमेरिका से बाहर रहने के कारण यह सवाल उठता है कि क्या उन्होंने अपने स्थायी निवास का परित्याग किया था। स्थायी निवासी के लिए अमेरिका में अपना मुख्य निवास बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है। किसी व्यक्ति का लंबे समय तक देश से बाहर रहना अपने आप में हर मामले में ग्रीन कार्ड समाप्त नहीं करता, लेकिन परिस्थितियों के आधार पर इमिग्रेशन अधिकारी यह जांच कर सकते हैं कि व्यक्ति ने वास्तव में अमेरिका में अपना स्थायी निवास बनाए रखा है या नहीं।

वेंकट के परिवार और कानूनी पक्ष का तर्क इससे अलग है। उनका कहना है कि अमेरिका में उनके जीवन की जड़ें बहुत मजबूत हैं। उन्होंने वर्षों तक वहां काम किया, परिवार बनाया और अमेरिकी समाज में योगदान दिया। वह विशेष जरूरत वाले बच्चों को पढ़ाने वाली शिक्षिका रही हैं। उनके बच्चे अमेरिका में रहते हैं और उनके सामाजिक तथा पारिवारिक संबंध भी वहीं हैं। इसलिए भारत में कुछ महीनों का प्रवास उनके अनुसार अमेरिका से संबंध खत्म करने की इच्छा को नहीं दिखाता।

यह मामला इसलिए भी ध्यान खींच रहा है क्योंकि वेंकट का कोई आपराधिक रिकॉर्ड होने की बात सामने नहीं आई है। उनके समर्थकों और परिवार के अनुसार उनका पूरा मामला इमिग्रेशन स्थिति से संबंधित है। इसी वजह से उनकी हिरासत को लेकर कानूनी और सार्वजनिक चर्चा बढ़ गई है। लंबे समय तक अमेरिका में रहने वाले किसी व्यक्ति की इमिग्रेशन स्थिति को लेकर कार्रवाई होने से यह सवाल भी उठता है कि स्थायी निवासी के अधिकार और सरकार की इमिग्रेशन enforcement powers के बीच संतुलन किस तरह बनाया जाता है।

वेंकट का मामला अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है जिनके पास ग्रीन कार्ड है और जो लंबे समय के लिए विदेश यात्रा करते हैं। विदेश यात्रा के दौरान परिवार में बीमारी, चिकित्सा जरूरत या अन्य व्यक्तिगत परिस्थितियों के कारण कई लोगों को अपेक्षा से अधिक समय तक अपने देश में रुकना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में अमेरिका में स्थायी निवास बनाए रखने से जुड़े नियम महत्वपूर्ण हो जाते हैं। वेंकट का मामला इस बात की याद दिलाता है कि लंबे समय तक विदेश में रहने वाले ग्रीन कार्ड धारकों को अपनी इमिग्रेशन स्थिति को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए।

हालांकि वेंकट के मामले में यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि उनके खिलाफ आगे क्या अंतिम कानूनी फैसला होगा। उन्हें हिरासत में लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि उन्हें निश्चित रूप से अमेरिका से निर्वासित कर दिया जाएगा। इमिग्रेशन मामलों में व्यक्ति को कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है और अदालत के सामने अपने पक्ष को रखने का अवसर मिल सकता है। उनके वकील भी उनके मामले में कानूनी विकल्पों पर काम कर रहे हैं।

मई में पुराने मामले को समाप्त करने वाले इमिग्रेशन जज के फैसले के बावजूद अगस्त में हुई नई हिरासत ने मामले को और जटिल बना दिया है। परिवार का कहना है कि वे इस घटनाक्रम को समझने और वेंकट को कानूनी राहत दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। इस बीच उनके समर्थकों ने सार्वजनिक स्तर पर भी मामले को उठाया है। उनकी बेटी और परिवार से जुड़े लोगों ने वेंकट की स्थिति को लेकर लोगों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की है।

वेंकट की स्वास्थ्य स्थिति इस मामले को और संवेदनशील बनाती है। गंभीर डायबिटीज के साथ हिरासत में रहना नियमित चिकित्सा देखभाल की मांग करता है। परिवार को चिंता है कि अगर उन्हें आवश्यक दवाइयां या उचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिली तो उनकी सेहत खराब हो सकती है। ऐसे मामलों में हिरासत केंद्रों पर स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और बंदी की व्यक्तिगत मेडिकल जरूरतें महत्वपूर्ण हो जाती हैं।

इस मामले ने अमेरिकी इमिग्रेशन नीति को लेकर चल रही व्यापक बहस को भी नया संदर्भ दिया है। ICE अमेरिका में इमिग्रेशन कानून लागू करने वाली प्रमुख संघीय एजेंसी है और वह उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है जिनकी इमिग्रेशन स्थिति कानून के तहत विवादित हो। लेकिन जब किसी लंबे समय से रह रहे ग्रीन कार्ड धारक को हिरासत में लिया जाता है, तो उसके स्थायी निवास, विदेश में बिताए समय और अमेरिका से उसके संबंधों का आकलन महत्वपूर्ण हो जाता है।

वेंकट के मामले में परिवार का कहना है कि उन्होंने अमेरिका को अपना घर माना है। उनके बच्चों का जीवन अमेरिका में है, उनका पेशेवर जीवन वहीं रहा है और उन्होंने लंबे समय तक अमेरिकी समुदाय में काम किया है। विशेष जरूरत वाले बच्चों को पढ़ाने का उनका अनुभव भी उनके लंबे पेशेवर जीवन का हिस्सा है। इसलिए परिवार इस बात पर जोर दे रहा है कि भारत में उनकी लंबी यात्रा को उनके पूरे जीवन के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

वहीं, इमिग्रेशन कानून में केवल परिवार या नौकरी के संबंध ही नहीं, बल्कि विदेश में रहने की अवधि और व्यक्ति की परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं। इसी वजह से वेंकट का मामला केवल एक महिला की हिरासत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थायी निवासियों के लिए विदेश यात्रा और अमेरिका में अपने निवास को बनाए रखने के बीच संतुलन का उदाहरण बन गया है।

वेंकट की हिरासत के बाद उनके परिवार ने उनके लिए समर्थन जुटाने की कोशिश शुरू की है। उनके मामले को सार्वजनिक रूप से सामने लाने वाले लोगों ने यह सवाल उठाया है कि यदि किसी व्यक्ति का पुराना deportation case समाप्त हो चुका है, तो बाद में उसे किस आधार पर दोबारा हिरासत में लिया गया। परिवार चाहता है कि इस पूरी प्रक्रिया को कानूनी रूप से स्पष्ट किया जाए और वेंकट को उचित चिकित्सा तथा कानूनी सहायता मिले।

यह भी महत्वपूर्ण है कि इस मामले में अभी सभी कानूनी पहलू सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हुए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में वेंकट के भारत में रहने की अवधि और वर्ष को लेकर थोड़ा अंतर दिखाई देता है, लेकिन सभी प्रमुख रिपोर्टें इस बात पर सहमत हैं कि उन्होंने अमेरिका से लंबे समय तक बाहर रहकर अपने बीमार माता-पिता की देखभाल की थी और इसी अवधि को उनकी इमिग्रेशन स्थिति के विवाद का आधार बनाया गया। इसी तरह यह भी सामने आया है कि मई 2026 में उनके खिलाफ पहले चल रहा removal case समाप्त कर दिया गया था और अगस्त में उन्हें ICE ने हिरासत में लिया।

मामले का अगला चरण कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। वेंकट के वकील उनकी हिरासत, स्थायी निवासी की स्थिति और नए इमिग्रेशन मामले को लेकर अदालत में अपना पक्ष रख सकते हैं। यदि अदालत उनके पक्ष में फैसला देती है तो उन्हें हिरासत से राहत मिल सकती है। यदि सरकार अपने आरोपों को आगे बढ़ाती है तो उन्हें फिर से इमिग्रेशन प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल अंतिम परिणाम सामने नहीं आया है।

वेंकट के परिवार के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता उनकी रिहाई और स्वास्थ्य की सुरक्षा है। खास तौर पर उनकी डायबिटीज और नियमित दवाइयों की जरूरत को देखते हुए परिवार चाहता है कि हिरासत के दौरान उन्हें पर्याप्त चिकित्सा सुविधा मिले। इस बीच उनकी बेटी, जो खुद इमिग्रेशन कानून की वकील हैं, कानूनी रास्ते तलाश रही हैं और परिवार के पक्ष को सार्वजनिक रूप से सामने ला रही हैं।

इस घटना से भारतीय मूल के अमेरिकी समुदाय में भी चिंता पैदा हुई है। अमेरिका में लंबे समय से रह रहे कई भारतीय परिवारों के लिए ग्रीन कार्ड उनकी स्थायी जिंदगी का आधार है। विदेश यात्रा के दौरान परिवार में बीमारी या आपातकालीन परिस्थितियों के कारण लंबे समय तक बाहर रहने की स्थिति बन सकती है। ऐसे मामलों में इमिग्रेशन नियमों की जानकारी और उचित कानूनी सलाह का महत्व और बढ़ जाता है।

कुल मिलाकर, वेंकट नरसमांबा वासमसेट्टी का मामला एक ऐसी भारतीय मूल की महिला की कहानी है, जिसने करीब 27 साल अमेरिका में बिताए, लंबे समय तक शिक्षक के रूप में काम किया और 2013 से ग्रीन कार्ड धारक रही हैं। अपने बीमार माता-पिता की देखभाल के लिए भारत में कई महीने रुकने के बाद उनकी स्थायी निवासी स्थिति पर सवाल उठे। अमेरिका लौटने के बाद उनके खिलाफ removal proceedings शुरू हुईं, लेकिन मई 2026 में इमिग्रेशन जज ने उस पुराने मामले को समाप्त कर दिया। इसके बावजूद 11 अगस्त को नियमित ICE चेक-इन के दौरान उन्हें हिरासत में ले लिया गया और बाद में जॉर्जिया के एक ICE डिटेंशन सेंटर में रखा गया।

अब उनका मामला अमेरिकी इमिग्रेशन व्यवस्था में स्थायी निवासियों के अधिकार, लंबे समय तक विदेश में रहने के प्रभाव और ICE की हिरासत प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। उनकी स्वास्थ्य स्थिति, खासकर गंभीर डायबिटीज और नियमित दवाइयों की जरूरत, इस मामले को और संवेदनशील बनाती है। हालांकि उनके परिवार और वकील उनकी स्थिति को लेकर चिंतित हैं, लेकिन आगे का अंतिम कानूनी परिणाम अभी स्पष्ट नहीं है। फिलहाल वेंकट हिरासत में हैं और उनका परिवार उन्हें कानूनी राहत दिलाने तथा आवश्यक चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित कराने के प्रयास में जुटा है। यह मामला उन सभी ग्रीन कार्ड धारकों के लिए भी महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है जो लंबे समय के लिए अमेरिका से बाहर यात्रा करते हैं और यह समझना चाहते हैं कि विदेश में बिताया गया समय उनकी स्थायी निवासी स्थिति को किस तरह प्रभावित कर सकता है।

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