
कोलकाता में फुटबॉल प्रेमियों के लिए लियोनेल मेसी का आगमन किसी सपने के सच होने जैसा था। ‘GOAT टूर’ के तहत आयोजित यह कार्यक्रम न सिर्फ एक स्पोर्ट्स इवेंट था, बल्कि भारतीय फुटबॉल प्रशंसकों के लिए भावनाओं से जुड़ा एक ऐतिहासिक पल भी माना जा रहा था। साल्ट लेक स्टेडियम में हजारों दर्शक अपने पसंदीदा खिलाड़ी की एक झलक पाने के लिए घंटों पहले पहुंच चुके थे। लेकिन यह उत्साह उस समय निराशा में बदल गया, जब मेसी को महज 22 मिनट में ही स्टेडियम छोड़कर जाना पड़ा। इस अचानक हुए घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए और सोशल मीडिया पर अटकलों का दौर शुरू हो गया।
कार्यक्रम की शुरुआत से पहले ही माहौल बेहद जोशीला था। आयोजकों ने इसे भव्य बनाने के लिए बड़े-बड़े दावे किए थे। स्टेडियम में सुरक्षा व्यवस्था, मंच सज्जा और फैन एक्टिविटीज़ की योजना बनाई गई थी। माना जा रहा था कि मेसी न सिर्फ मंच पर समय बिताएंगे, बल्कि प्रशंसकों को संबोधित भी करेंगे। लेकिन जैसे ही कार्यक्रम आगे बढ़ा, व्यवस्थाओं में खामियां सामने आने लगीं, जिसने पूरे आयोजन की दिशा ही बदल दी।
बताया जा रहा है कि सबसे बड़ी वजह भीड़ नियंत्रण से जुड़ी समस्याएं रहीं। साल्ट लेक स्टेडियम में दर्शकों की संख्या उम्मीद से कहीं ज्यादा पहुंच गई थी। एंट्री गेट्स पर अव्यवस्था, अंदर सीटिंग को लेकर भ्रम और सुरक्षा कर्मियों की कमी ने हालात को तनावपूर्ण बना दिया। जैसे-जैसे भीड़ बेकाबू होती गई, आयोजकों और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता भी बढ़ती गई। ऐसी स्थिति में किसी भी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है।
सूत्रों के अनुसार, मेसी की सुरक्षा टीम ने हालात का आकलन करने के बाद यह फैसला लिया कि उन्हें ज्यादा देर तक स्टेडियम में रखना सुरक्षित नहीं है। भीड़ का दबाव, स्टेज के आसपास बढ़ती हलचल और कार्यक्रम की रूपरेखा में स्पष्टता की कमी ने जोखिम को और बढ़ा दिया। यही वजह मानी जा रही है कि मेसी को निर्धारित समय से काफी पहले कार्यक्रम छोड़ने का निर्णय लिया गया।
इसके अलावा, कार्यक्रम के संचालन में भी तालमेल की कमी देखी गई। मंच पर क्या होगा, मेसी की भूमिका क्या रहेगी और दर्शकों को क्या देखने को मिलेगा—इन बातों को लेकर स्पष्ट योजना नहीं थी। इससे न केवल प्रशंसकों में भ्रम फैला, बल्कि आयोजन से जुड़े लोगों के बीच भी असमंजस की स्थिति बनी रही। ऐसे में समय पर कार्यक्रम को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया।
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि मेसी की शारीरिक थकान और यात्रा कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए उनकी मौजूदगी सीमित रखी गई थी। हालांकि, आयोजकों की ओर से इसे लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई, जिससे अटकलों को और हवा मिली। दर्शकों को उम्मीद थी कि मेसी काफी देर तक मंच पर रहेंगे, लेकिन अचानक उनके जाने से लोग खुद को ठगा हुआ महसूस करने लगे।
मेसी के स्टेडियम छोड़ते ही वहां मौजूद प्रशंसकों में नाराजगी फैल गई। कई लोग नारेबाजी करते नजर आए, तो कुछ ने सोशल मीडिया पर अपनी निराशा जाहिर की। फुटबॉल प्रेमियों का कहना था कि इतने बड़े खिलाड़ी के लिए कार्यक्रम का प्रबंधन ज्यादा प्रोफेशनल होना चाहिए था। कोलकाता जैसे शहर में, जहां फुटबॉल की गहरी परंपरा रही है, इस तरह की अव्यवस्था लोगों को और ज्यादा खली।
आयोजकों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठे। आलोचकों का मानना है कि टिकट बिक्री और प्रचार पर ज्यादा ध्यान दिया गया, जबकि जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं को नजरअंदाज किया गया। भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और कार्यक्रम संचालन—इन तीनों मोर्चों पर चूक सामने आई। अगर समय रहते हालात को संभाल लिया जाता, तो शायद मेसी को इतनी जल्दी स्टेडियम छोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि किसी भी हाई-प्रोफाइल इवेंट में केवल स्टार पावर काफी नहीं होती। दर्शकों की उम्मीदें, सुरक्षा मानक और आयोजन की स्पष्ट योजना—इन सभी का संतुलन जरूरी होता है। मेसी जैसे वैश्विक आइकन से जुड़े कार्यक्रम में छोटी सी चूक भी बड़े विवाद का रूप ले सकती है।
हालांकि, मेसी की ओर से इस पूरे मामले पर कोई सीधी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उनके प्रशंसकों को अब भी इस बात का अफसोस है कि वे अपने हीरो को ज्यादा देर तक देख नहीं पाए। वहीं, आयोजन से जुड़े लोग इसे परिस्थितिजन्य फैसला बता रहे हैं और कह रहे हैं कि सुरक्षा को प्राथमिकता देना मजबूरी थी।
कुल मिलाकर, साल्ट लेक स्टेडियम में मेसी का सिर्फ 22 मिनट रुकना किसी एक वजह का नतीजा नहीं था, बल्कि यह कई चूकों और परिस्थितियों का संयुक्त परिणाम माना जा रहा है। यह घटना भविष्य में होने वाले बड़े खेल आयोजनों के लिए एक सबक है कि उत्साह के साथ-साथ जिम्मेदारी और पेशेवर प्रबंधन कितना जरूरी है। फुटबॉल प्रेमी अब उम्मीद कर रहे हैं कि आगे चलकर ऐसे आयोजनों में बेहतर तैयारी देखने को मिलेगी, ताकि उनका जुनून किसी अव्यवस्था की भेंट न चढ़े।