
उत्तराखंड की अंकिता भंडारी की मौत को चार साल पूरे हो गए हैं, लेकिन इस मामले से जुड़े कुछ सवाल आज भी सार्वजनिक चर्चा में बने हुए हैं। 18 सितंबर 2026 को अंकिता की चौथी बरसी के मौके पर देहरादून के गांधी पार्क में सामाजिक संगठनों, आंदोलनकारियों और अलग-अलग समूहों ने श्रद्धांजलि सभा और प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां लिए बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंचे और अंकिता को न्याय दिलाने की मांग दोहराई। कार्यक्रम के दौरान मानव श्रृंखला भी बनाई गई और मामले से जुड़े लंबित सवालों के जवाब मांगने की बात कही गई।
अंकिता भंडारी की हत्या सितंबर 2022 में पौड़ी जिले के यमकेश्वर क्षेत्र स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट से जुड़ी घटना में हुई थी। वह वहां रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। जांच के बाद मामले में रिजॉर्ट संचालक पुलकित आर्य और दो अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चला। निचली अदालत ने तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके बावजूद घटना से जुड़े कथित VIP एंगल और जांच की प्रगति को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
चौथी बरसी पर देहरादून में जुटे लोग
अंकिता की चौथी बरसी पर गांधी पार्क में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक और जन संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। श्रद्धांजलि देने के साथ वक्ताओं ने अब तक चली कानूनी प्रक्रिया और मामले से जुड़े दूसरे पहलुओं पर चर्चा की। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि परिवार और जनता की ओर से उठाए जा रहे सवालों का जवाब स्पष्ट रूप से सामने आना चाहिए।
स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, कार्यक्रम में न्याय के लिए चल रही कानूनी लड़ाई के बारे में भी जानकारी दी गई। सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने आगे के आंदोलन और कार्यक्रमों की रणनीति पर चर्चा की। प्रदर्शन के दौरान अंकिता के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करने के साथ न्याय की मांग को दोहराया गया।
इस मौके पर हाथों में तख्तियां लेकर पहुंचे लोगों ने अलग-अलग मांगें उठाईं। इनमें मामले की जांच में पारदर्शिता, कथित VIP एंगल की निष्पक्ष जांच और परिवार को न्याय दिलाने से जुड़े मुद्दे शामिल रहे।
मानव श्रृंखला बनाकर जताया विरोध
अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच की ओर से पहले ही 18 सितंबर को गांधी पार्क में श्रद्धांजलि सभा और प्रदर्शन की घोषणा की गई थी। मंच के अनुसार, 40 से अधिक संगठनों ने कार्यक्रम को समर्थन दिया था। कार्यक्रम में मानव श्रृंखला बनाने और अंकिता को न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प लेने की बात भी कही गई थी।
आयोजकों का कहना है कि चार साल बीतने के बाद भी कुछ सवालों के स्पष्ट जवाब सामने आना बाकी हैं। खास तौर पर कथित VIP कनेक्शन को लेकर अलग-अलग समय पर उठाए गए सवालों को लेकर सामाजिक संगठनों की ओर से जांच की मांग दोहराई जाती रही है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी कथित VIP की भूमिका को लेकर उठ रहे सवाल अपने आप में किसी व्यक्ति की संलिप्तता साबित नहीं करते। उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में पुलिस ने भी अलग-अलग मौकों पर VIP की संलिप्तता को लेकर अलग स्थिति रखी है। इसलिए इस पहलू को आरोप और जांच की मांग के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
CBI जांच को लेकर क्या स्थिति है?
अंकिता भंडारी मामले में कथित VIP एंगल की जांच को लेकर उत्तराखंड सरकार ने जनवरी 2026 में केंद्र सरकार से CBI जांच की सिफारिश की थी। राज्य के गृह सचिव की ओर से केंद्र को भेजे गए पत्र में मामले में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए CBI जांच का अनुरोध किया गया था।
सरकार की इस सिफारिश के बाद भी जांच की प्रगति को लेकर सवाल उठते रहे हैं। चौथी बरसी पर आयोजित कार्यक्रमों में भी सामाजिक संगठनों और राजनीतिक समूहों ने जांच की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की।
नई टिहरी में भी महिला कांग्रेस ने इसी मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किया और जांच की प्रगति तथा रिपोर्ट से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। वहां प्रदर्शनकारियों ने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि जांच किस स्तर तक पहुंची है और अब तक क्या कार्रवाई हुई है।
VIP एंगल क्यों बना हुआ है चर्चा का विषय?
अंकिता भंडारी मामले की शुरुआत से ही VIP कनेक्शन को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। घटना के बाद सामने आए कई दावों और बयानों के आधार पर यह सवाल उठा कि क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति का इस मामले से संबंध था।
हालांकि, इन दावों को लेकर आधिकारिक जांच में अलग-अलग बातें सामने आती रही हैं। जनवरी 2026 में हरिद्वार के एसपी ग्रामीण शेखर सुयाल ने कहा था कि पुलिस की जांच में किसी VIP की संलिप्तता सामने नहीं आई। उन्होंने यह भी बताया था कि जांच के दौरान जिस व्यक्ति का नाम चैट और पूछताछ में सामने आया था, पुलिस ने उसे VIP नहीं माना था।
यही अंतर इस मामले को लेकर सार्वजनिक बहस का हिस्सा बना हुआ है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि अगर किसी प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका को लेकर सवाल उठे हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। दूसरी ओर, किसी व्यक्ति के खिलाफ केवल सार्वजनिक चर्चाओं या आरोपों के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
तीन आरोपियों को हो चुकी है उम्रकैद
अंकिता भंडारी हत्याकांड में मुख्य आपराधिक मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। मामले में आरोपी पुलकित आर्य और दो अन्य आरोपियों को निचली अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
इसके बावजूद मामला पूरी तरह सार्वजनिक चर्चा से बाहर नहीं हुआ, क्योंकि कथित VIP एंगल और घटना से जुड़े कुछ अन्य सवालों पर सामाजिक संगठनों और परिवार की ओर से लगातार आवाज उठाई जाती रही है।
यही वजह है कि अंकिता की चौथी बरसी पर आयोजित कार्यक्रमों में केवल श्रद्धांजलि नहीं दी गई, बल्कि जांच और उससे जुड़े सवालों को लेकर भी प्रदर्शन किया गया।
वनंत्रा रिजॉर्ट तक भी निकाला गया मार्च
चौथी बरसी पर देहरादून के अलावा वनंत्रा रिजॉर्ट के आसपास भी कार्यक्रम हुए। कांग्रेस ने श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद रिजॉर्ट तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अंकिता को श्रद्धांजलि दी और मामले की जांच में तेजी लाने की मांग की।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अंकिता की बरसी केवल श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं है, बल्कि मामले में उठे सवालों और जांच की प्रगति पर जवाब मांगने का भी समय है। उन्होंने जांच के प्रत्येक पहलू की निष्पक्षता से पड़ताल किए जाने की मांग रखी।
इस कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक स्थिति भी रखी, लेकिन अंकिता मामले की जांच से जुड़े आरोपों और राजनीतिक दलों के बयानों को अलग-अलग समझना जरूरी है। किसी राजनीतिक दल की ओर से लगाए गए आरोपों को स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
आंदोलनकारियों की मुख्य मांगें क्या हैं?
चौथी बरसी पर आयोजित कार्यक्रमों में सामने आई मांगों का केंद्र मुख्य रूप से जांच की पारदर्शिता और न्याय रहा। संगठनों की ओर से मांग की गई कि मामले से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं की निष्पक्ष जांच हो और जिन सवालों के जवाब अब तक स्पष्ट नहीं हैं, उन्हें सार्वजनिक किया जाए।
इनमें कथित VIP एंगल की जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों की सुरक्षा, जांच की प्रगति की जानकारी और परिवार को न्याय दिलाने की प्रक्रिया को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने जैसी मांगें शामिल हैं।
कुछ संगठनों ने यह भी कहा कि अगर जांच में किसी प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, यह मांग जांच के निष्कर्ष पर आधारित कार्रवाई की बात करती है, किसी व्यक्ति को पहले से दोषी घोषित करने की नहीं।
अंकिता की मां-बाप लंबे समय से उठा रहे हैं सवाल
अंकिता के परिवार की ओर से भी समय-समय पर मामले के विभिन्न पहलुओं को लेकर सवाल उठाए गए हैं। 2026 की शुरुआत में उनके माता-पिता ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर कथित VIP एंगल की CBI जांच की मांग की थी। इसके बाद राज्य सरकार की ओर से केंद्र को जांच की सिफारिश भेजी गई।
परिवार की मांग का मुख्य आधार यह रहा है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच हो और उन्हें पूरी जानकारी मिले।
चार साल बाद भी यह मुद्दा परिवार और उत्तराखंड के सामाजिक संगठनों के लिए संवेदनशील बना हुआ है। चौथी बरसी पर आयोजित कार्यक्रमों में भी इसी भावना को व्यक्त किया गया।
उत्तराखंड में अलग-अलग जगहों पर श्रद्धांजलि
अंकिता की चौथी बरसी पर केवल देहरादून ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के दूसरे हिस्सों में भी श्रद्धांजलि और विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए। विकासनगर में उत्तराखंड क्रांति दल से जुड़े कार्यकर्ताओं और राज्य आंदोलनकारियों ने श्रद्धांजलि सभा की। उन्होंने भी कथित VIP एंगल की जांच और मामले में पारदर्शिता की मांग दोहराई।
नई टिहरी में महिला कांग्रेस ने जांच की प्रगति और रिपोर्ट से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने सरकार से मामले में स्पष्ट जानकारी देने की मांग की।
इस तरह चौथी बरसी पर अंकिता भंडारी का मामला एक बार फिर उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों में सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में रहा।
चार साल बाद भी क्यों जारी है न्याय आंदोलन?
अंकिता भंडारी मामला उत्तराखंड में केवल एक आपराधिक घटना के रूप में नहीं देखा गया। घटना के बाद प्रदेशभर में व्यापक विरोध और आंदोलन हुए थे। महिलाओं की सुरक्षा, रोजगार के लिए बाहर जाने वाली युवतियों की सुरक्षा और प्रभावशाली लोगों की जवाबदेही जैसे मुद्दे भी इस आंदोलन से जुड़े।
समय बीतने के बावजूद जब भी मामले से जुड़े किसी नए दावे या जांच से संबंधित जानकारी सामने आती है, तो यह मामला फिर चर्चा में आ जाता है।
चौथी बरसी पर सामाजिक संगठनों ने कहा कि उनका आंदोलन किसी एक राजनीतिक दल या व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि अंकिता के परिवार को न्याय और जांच में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग से जुड़ा है।
क्या सिर्फ VIP एंगल ही मुद्दा है?
नहीं। चौथी बरसी पर सामने आई मांगों में कथित VIP एंगल के अलावा जांच की पारदर्शिता, साक्ष्यों की सुरक्षा, परिवार को न्याय और घटना से जुड़े दूसरे सवालों के जवाब भी शामिल हैं।
कुछ संगठनों ने वनंत्रा रिजॉर्ट पर हुई कार्रवाई और उससे जुड़े सवालों को भी जांच के दायरे में लाने की मांग की। हालांकि, इन मुद्दों पर उठाए गए सवालों और आरोपों का अंतिम उत्तर संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही तय हो सकता है।
यही वजह है कि मौजूदा समय में मामले के उन पहलुओं को अलग-अलग रखना जरूरी है जिन पर अदालत का फैसला आ चुका है और उन पहलुओं को भी, जिन पर सामाजिक संगठन या परिवार आगे जांच की मांग कर रहे हैं।
चार साल बाद मामला किस मोड़ पर है?
मामले के तीन मुख्य आरोपियों को निचली अदालत से आजीवन कारावास की सजा मिल चुकी है। दूसरी तरफ, कथित VIP एंगल की जांच को लेकर राज्य सरकार ने 2026 में केंद्र से CBI जांच की सिफारिश की थी।
वहीं, सितंबर 2026 में चौथी बरसी पर सामाजिक संगठनों ने देहरादून में प्रदर्शन करते हुए जांच की प्रगति और उससे जुड़े सवालों पर स्पष्ट जानकारी की मांग की है।
इसलिए चार साल बाद इस मामले की तस्वीर दो हिस्सों में दिखाई देती है। एक तरफ मुख्य हत्या मामले में अदालत से सजा हो चुकी है, जबकि दूसरी तरफ कथित VIP कनेक्शन और कुछ अन्य पहलुओं को लेकर जांच और सार्वजनिक जवाबदेही की मांग अभी भी जारी है।
अंकिता की चौथी बरसी का संदेश
18 सितंबर 2026 को देहरादून की सड़कों पर जुटे लोगों के हाथों में मौजूद तख्तियों और नारों में एक ही प्रमुख संदेश दिखाई दिया: अंकिता को न्याय मिले और मामले से जुड़े बाकी सवालों का जवाब सामने आए।
गांधी पार्क में श्रद्धांजलि सभा, मानव श्रृंखला और प्रदर्शन के अलावा वनंत्रा रिजॉर्ट तक निकाला गया मार्च भी इसी मांग का हिस्सा रहा। प्रदेश के दूसरे शहरों में भी संगठनों ने अपने-अपने तरीके से श्रद्धांजलि और विरोध कार्यक्रम किए।
चार साल का समय बीतने के बाद भी अंकिता भंडारी का नाम उत्तराखंड में महिलाओं की सुरक्षा और न्याय की बहस से जुड़ा हुआ है। अब आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कथित VIP एंगल की जांच को लेकर क्या आधिकारिक प्रगति सामने आती है और सरकार तथा जांच एजेंसियां परिवार एवं जनता की ओर से उठाए जा रहे सवालों का किस तरह जवाब देती हैं।
फिलहाल चौथी बरसी पर देहरादून में हुआ प्रदर्शन यह दिखाता है कि अंकिता भंडारी मामले को लेकर न्याय और पारदर्शिता की मांग अभी समाप्त नहीं हुई है। वहीं, जिन पहलुओं पर जांच या न्यायिक प्रक्रिया चल रही है, उनका अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक जांच और अदालत की प्रक्रिया से ही तय होगा।