समंदर में INS Kolkata-PNS Hunain टक्कर पर भारत ने PAK के आरोपों को किया खारिज, 1991 समझौते का दिया हवाला

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अरब सागर में भारतीय नौसेना के युद्धपोत INS Kolkata और पाकिस्तान नौसेना के जहाज PNS Hunain के बीच हुई टक्कर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पाकिस्तान की ओर से भारतीय युद्धपोत पर कथित तौर पर आक्रामक और खतरनाक तरीके से पैंतरेबाजी करने का आरोप लगाए जाने के बाद भारत ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के जवाब को टालमटोल वाला बताते हुए कहा कि भारत अपने पक्ष पर कायम है और घटना से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट रूप से सामने रख रहा है।

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 18 सितंबर को मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा कि INS Kolkata पश्चिमी अरब सागर में नियमित तैनाती पर था। इसी दौरान पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज PNS Hunain ने जिस तरह से भारतीय युद्धपोत के करीब आकर पैंतरेबाजी की, उससे टक्कर हुई। भारतीय पक्ष के मुताबिक यह कार्रवाई समुद्र में सुरक्षित दूरी और टक्कर रोकने से जुड़े नियमों के अनुरूप नहीं थी।

भारत ने पाकिस्तान के आरोपों को क्यों नकारा?

पाकिस्तान ने घटना के बाद भारत पर आरोप लगाया था कि उसके युद्धपोत ने पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज के बेहद करीब जाकर आक्रामक पैंतरेबाजी की। पाकिस्तान के अनुसार, घटना उसके विशेष आर्थिक क्षेत्र यानी Exclusive Economic Zone में हुई और उस समय उसकी नौसेना SEASPARK-26 अभ्यास कर रही थी। इस घटनाक्रम को लेकर पाकिस्तान ने भारतीय राजनयिक को तलब कर विरोध भी दर्ज कराया था।

भारत ने पाकिस्तान के इस विवरण को स्वीकार नहीं किया। MEA के अनुसार, INS Kolkata एक नियमित निगरानी और तैनाती मिशन पर था। भारतीय पक्ष का कहना है कि PNS Hunain तेज गति से उसके करीब आया और खतरनाक तरीके से ओवरटेक करने की कोशिश के दौरान दोनों जहाजों के बीच संपर्क हुआ।

विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की ओर से लगाए गए आरोप और संकेत तथ्यात्मक स्थिति को नहीं दर्शाते। भारत ने दोबारा यह स्पष्ट किया कि उसके अनुसार घटना अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई थी।

15 सितंबर की शाम क्या हुआ था?

यह घटना 15 सितंबर 2026 की शाम उत्तरी अरब सागर में हुई। भारतीय पक्ष के अनुसार, INS Kolkata उस समय नियमित समुद्री तैनाती पर था। PNS Hunain भारतीय युद्धपोत के करीब आया और उसके बाद दोनों जहाजों के बीच टक्कर हुई।

भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, PNS Hunain की गति और उसकी पैंतरेबाजी ऐसी थी कि वह सुरक्षित तरीके से भारतीय जहाज को पार नहीं कर सका। इसके बाद दोनों जहाजों के बीच मामूली टक्कर हुई।

घटना के बाद PNS Hunain को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई और वह बंदरगाह की ओर लौट गया। वहीं भारत ने कहा कि INS Kolkata को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ और वह समुद्र में अपनी तैनाती पर बना रहा।

भारत ने 1991 के समझौते का मुद्दा क्यों उठाया?

MEA ने इस मामले में भारत और पाकिस्तान के बीच अप्रैल 1991 में हुए एक महत्वपूर्ण समझौते का हवाला दिया है। यह समझौता दोनों देशों की सैन्य गतिविधियों, अभ्यासों, युद्धाभ्यासों और सैनिकों की आवाजाही के बारे में अग्रिम सूचना तथा समुद्र में सैन्य इकाइयों के बीच दूरी बनाए रखने से संबंधित है।

भारत के अनुसार, समझौते के अनुच्छेद 10 में समुद्र में नौसैनिक इकाइयों के बीच कम से कम तीन नॉटिकल मील की दूरी बनाए रखने का प्रावधान है। नई दिल्ली का आरोप है कि PNS Hunain की नजदीकी और ओवरटेकिंग की कार्रवाई इस प्रावधान के विपरीत थी।

भारत ने इसके साथ अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का भी उल्लेख किया। ये नियम समुद्र में जहाजों की आवाजाही और टक्कर रोकने के लिए बनाए गए हैं। खासतौर पर जब दो बड़े जहाज एक-दूसरे के करीब हों, तब सुरक्षित दूरी, गति और दिशा का पालन महत्वपूर्ण होता है।

भारत ने पाकिस्तान को क्या संदेश दिया?

विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान को यह सलाह दी है कि उसके सैन्य जहाज समुद्र में उचित सावधानी बरतें और भारत-पाकिस्तान के बीच लागू समझौतों के प्रावधानों का सम्मान करें।

भारत का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दोनों देशों की सैन्य इकाइयों को समुद्री सुरक्षा नियमों और द्विपक्षीय समझौतों का पालन करना चाहिए।

यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों ने घटना को लेकर एक-दूसरे के खिलाफ राजनयिक विरोध दर्ज कराया है। भारत ने 16 सितंबर को नई दिल्ली में पाकिस्तान के Charge d’Affaires को तलब कर विरोध दर्ज कराया था। इसके जवाब में पाकिस्तान ने भी भारतीय राजनयिक को बुलाकर अपना विरोध जताया।

पाकिस्तान का दावा क्या है?

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भारत के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। उसका कहना है कि घटना उस समय हुई जब पाकिस्तानी नौसेना SEASPARK-26 नामक अभ्यास कर रही थी।

पाकिस्तान ने दावा किया कि भारतीय नौसेना के जहाज ने उसके जहाज के बेहद करीब आकर कथित तौर पर आक्रामक पैंतरेबाजी की। पाकिस्तान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और 1991 के द्विपक्षीय समझौते का उल्लंघन बताया।

यानी दोनों देशों के आधिकारिक विवरण में घटना की जिम्मेदारी को लेकर स्पष्ट अंतर है। भारत का कहना है कि PNS Hunain की खतरनाक ओवरटेकिंग के कारण टक्कर हुई, जबकि पाकिस्तान का दावा है कि भारतीय जहाज ने आक्रामक तरीके से पैंतरेबाजी की।

ऐसे में घटना की पूरी तस्वीर को समझने के लिए दोनों पक्षों के दावों के अलावा नौवहन रिकॉर्ड, जहाजों की स्थिति, गति, दिशा और उपलब्ध समुद्री डेटा जैसे तकनीकी प्रमाण महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

क्या पाकिस्तान का EEZ वाला दावा भारत ने माना?

नहीं। भारत ने घटना को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुआ बताया है। पाकिस्तान ने इसे अपने Exclusive Economic Zone में हुई घटना बताया है। दोनों दावों के बीच यही एक प्रमुख अंतर है।

यहां Exclusive Economic Zone और क्षेत्रीय जलक्षेत्र के बीच अंतर समझना जरूरी है। EEZ में तटीय देश को समुद्री संसाधनों की खोज और उपयोग से जुड़े विशेष अधिकार मिलते हैं, लेकिन यह सामान्य तौर पर पूर्ण संप्रभु क्षेत्रीय जलक्षेत्र के समान नहीं होता। सैन्य जहाजों की आवाजाही से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रश्न अलग परिस्थितियों और नियमों पर निर्भर करते हैं।

भारतीय पक्ष से जुड़े रक्षा सूत्रों ने भी पाकिस्तान के इस तर्क पर सवाल उठाया है और कहा है कि जिस क्षेत्र में घटना हुई, वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात का हिस्सा था।

INS Kolkata को कितना नुकसान हुआ?

भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि टक्कर से INS Kolkata को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। MEA के अनुसार, भारतीय युद्धपोत घटना के बाद भी समुद्र में अपनी तैनाती पर बना रहा।

वहीं, भारतीय अधिकारियों के हवाले से सामने आई रिपोर्टों में PNS Hunain को नुकसान होने और उसके बंदरगाह की ओर लौटने की बात कही गई है। कुछ रिपोर्टों में जहाज के आगे के हिस्से को नुकसान पहुंचने की जानकारी दी गई है।

हालांकि, इस घटना को किसी बड़े सैन्य संघर्ष के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह समुद्र में दो नौसैनिक जहाजों के बीच हुई टक्कर है, जिसके बाद दोनों देशों ने राजनयिक विरोध दर्ज कराया है।

PNS Hunain किस तरह का जहाज है?

PNS Hunain पाकिस्तान नौसेना का एक offshore patrol vessel है। इसे समुद्री निगरानी और गश्त जैसे अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह Yarmook-class से जुड़ा जहाज है और पाकिस्तान नौसेना के समुद्री अभियानों का हिस्सा है।

इसके विपरीत INS Kolkata भारतीय नौसेना का एक बड़ा फ्रंटलाइन युद्धपोत है। दोनों जहाजों की भूमिका और आकार अलग-अलग हैं। लेकिन टक्कर के मामले में केवल जहाज का आकार ही यह तय नहीं करता कि दुर्घटना कैसे हुई। जहाज की गति, दिशा, मौसम, दृश्यता, समुद्री यातायात और चालक दल के फैसले जैसे कई कारक महत्वपूर्ण होते हैं।

क्या टक्कर जानबूझकर की गई थी?

फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर ऐसा निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि टक्कर जानबूझकर की गई थी। भारत ने PNS Hunain के व्यवहार को अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर बताया है, लेकिन उपलब्ध बयानों में इसे किसी सुनियोजित हमले के रूप में पेश नहीं किया गया है।

भारत ने अपने बयान में मुख्य रूप से समुद्री सुरक्षा, सुरक्षित दूरी और 1991 के समझौते के पालन पर जोर दिया है। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान से भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए सैन्य इकाइयों को उचित सावधानी बरतने की सलाह दी है।

इसलिए सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर सामने आने वाले ऐसे दावों से सावधान रहना जरूरी है जिनमें बिना प्रमाण के इसे जानबूझकर किया गया सैन्य हमला बताया जाए।

भारत ने पाकिस्तान के विरोध का जवाब कैसे दिया?

भारत की ओर से विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 18 सितंबर की प्रेस ब्रीफिंग में पाकिस्तान के जवाब को खारिज किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की प्रतिक्रिया अपेक्षित थी और भारत उसमें लगाए गए आरोपों को स्वीकार नहीं करता।

MEA ने एक बार फिर अपने घटनाक्रम को दोहराते हुए कहा कि INS Kolkata नियमित तैनाती पर था और PNS Hunain की कार्रवाई के बाद टक्कर हुई।

भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि घटना से INS Kolkata को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है और भारतीय युद्धपोत समुद्र में मौजूद है।

दोनों देशों ने राजनयिक विरोध क्यों दर्ज कराया?

घटना के बाद दोनों देशों ने अपने-अपने राजनयिकों को तलब किया। भारत ने पाकिस्तान के Charge d’Affaires को बुलाकर विरोध दर्ज कराया। पाकिस्तान ने भी इस्लामाबाद में भारत के Charge d’Affaires को तलब किया।

ऐसी घटनाओं में राजनयिक विरोध का उद्देश्य संबंधित देश के सामने अपनी आधिकारिक स्थिति रखना और दूसरे पक्ष के व्यवहार पर आपत्ति दर्ज कराना होता है। इसका मतलब अपने आप यह नहीं होता कि दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष शुरू हो गया है।

इस मामले में भी दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावे और आपत्तियां आधिकारिक माध्यम से रखी हैं।

समुद्र में तीन नॉटिकल मील की दूरी क्यों अहम है?

भारत ने जिस 1991 समझौते का हवाला दिया है, उसके अनुच्छेद 10 का उद्देश्य समुद्र में सैन्य इकाइयों के बीच खतरनाक नजदीकी और संभावित दुर्घटनाओं को रोकना है। तीन नॉटिकल मील की दूरी का उल्लेख इसी संदर्भ में किया गया है।

समुद्र में युद्धपोतों की गति और आकार को देखते हुए छोटी दूरी पर अचानक दिशा बदलना जोखिम पैदा कर सकता है। खासकर जब दो देशों के सैन्य जहाज एक-दूसरे के आसपास सक्रिय हों, तब गलत अनुमान या अचानक पैंतरेबाजी से टक्कर की स्थिति बन सकती है।

भारत ने कहा है कि इस घटना के बाद भी दोनों पक्षों को संबंधित समझौतों का सम्मान करना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

2011 की घटना का भी आया संदर्भ

भारत और पाकिस्तान के नौसैनिक जहाजों के बीच समुद्र में संपर्क की एक पुरानी घटना 2011 में भी सामने आई थी। उस समय अदन की खाड़ी में पाकिस्तानी युद्धपोत PNS Babur और भारतीय नौसेना के INS Godavari से जुड़ी घटना हुई थी, जिसमें मामूली नुकसान की खबर आई थी।

हालांकि वर्तमान घटना और 2011 की घटना की परिस्थितियां अलग हैं। दोनों को सीधे एक जैसा मानना उचित नहीं होगा। लेकिन समुद्र में भारत और पाकिस्तान की नौसैनिक इकाइयों के बीच सुरक्षित दूरी और स्पष्ट संचार के महत्व को इससे समझा जा सकता है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों देशों ने घटना पर अपना आधिकारिक पक्ष सामने रख दिया है। भारत ने पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करते हुए PNS Hunain की पैंतरेबाजी को 1991 समझौते और अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के विपरीत बताया है। पाकिस्तान ने इसके विपरीत भारतीय जहाज पर आरोप लगाए हैं।

अब घटना से जुड़े तकनीकी और परिचालन विवरण महत्वपूर्ण होंगे। जहाजों की स्थिति, गति, दिशा और संचार रिकॉर्ड जैसे तथ्य सामने आने पर घटना की परिस्थितियों को और स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है।

भारत की ओर से फिलहाल यह भी साफ किया गया है कि INS Kolkata को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ और वह अपनी समुद्री तैनाती पर बना हुआ है। दूसरी ओर, PNS Hunain के क्षतिग्रस्त होने और बंदरगाह लौटने की रिपोर्ट सामने आई है।

कुल मिलाकर, INS Kolkata और PNS Hunain की टक्कर ने भारत-पाकिस्तान के बीच एक नया राजनयिक विवाद जरूर पैदा किया है, लेकिन उपलब्ध जानकारी इसे फिलहाल समुद्री घटना और उसके बाद हुए कूटनीतिक विरोध के रूप में दिखाती है। दोनों देशों के आधिकारिक दावे एक-दूसरे से अलग हैं, इसलिए घटना की जिम्मेदारी से जुड़े अंतिम निष्कर्ष के लिए स्वतंत्र और तकनीकी प्रमाणों को देखना जरूरी होगा।

भारत का मौजूदा रुख स्पष्ट है: वह पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करता है, PNS Hunain की कार्रवाई को समुद्री सुरक्षा नियमों और 1991 के द्विपक्षीय समझौते के विपरीत बताता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सैन्य इकाइयों से निर्धारित नियमों का पालन करने को कह रहा है।

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