बिजनौर में 75 वर्षीय बुजुर्ग पर नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म का आरोप, पहले भी POCSO केस दर्ज, पुलिस ने किया गिरफ्तार

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उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में नाबालिग बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म का एक गंभीर मामला सामने आया है। मंडावली थाना क्षेत्र में एक 75 वर्षीय बुजुर्ग पर अपने ही पड़ोस में रहने वाली नाबालिग बच्ची के साथ जबरदस्ती करने का आरोप लगा है। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और अगले ही दिन उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है और उसके खिलाफ इसी साल पहले भी पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज हो चुका है।

मामला सामने आने के बाद इलाके में सुरक्षा और बच्चों की निगरानी को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। खास तौर पर इस बात ने चिंता बढ़ाई है कि जिस व्यक्ति पर ताजा मामले में गंभीर आरोप लगा है, उसके खिलाफ पहले भी नाबालिग से जुड़े अपराध के तहत मामला दर्ज होने की जानकारी पुलिस रिकॉर्ड में मौजूद है। हालांकि किसी भी मामले में आरोप और अदालत में अपराध सिद्ध होने के बीच अंतर होता है। इसलिए आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।

बाजार की ओर जा रही थी बच्ची

पुलिस के अनुसार, घटना 5 अक्टूबर को सामने आई। पीड़ित बच्ची अपने घर से किसी काम के सिलसिले में बाजार की ओर जा रही थी। इसी दौरान कथित तौर पर उसके पड़ोस में रहने वाले बुजुर्ग ने उसे पकड़ लिया। आरोप है कि वह बच्ची को अपने घेर में ले गया, जहां उसके पशु रहते हैं। वहीं बच्ची के साथ जबरदस्ती किए जाने का आरोप लगाया गया है।

घटना के बाद बच्ची के परिवार ने मंडावली थाने पहुंचकर पुलिस को शिकायत दी। परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। शिकायत में आरोपी की पहचान हिफजुर्रहमान के रूप में बताई गई है। वह मंडावली थाना क्षेत्र के हसनपुर गांव का निवासी बताया गया है।

पुलिस के सामने मामला आने के बाद आरोपी की तलाश शुरू की गई। चूंकि शिकायत में नाबालिग बच्ची के साथ यौन अपराध का आरोप लगाया गया था, इसलिए मामले में पॉक्सो एक्ट की धाराएं भी लगाई गईं। बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने के लिए बनाए गए इस कानून के तहत ऐसे मामलों में जांच और कानूनी प्रक्रिया के लिए विशेष प्रावधान हैं।

अगले ही दिन आरोपी गिरफ्तार

मंडावली पुलिस ने शिकायत दर्ज करने के बाद आरोपी को पकड़ने के लिए कार्रवाई शुरू की। पुलिस के अनुसार 6 अक्टूबर को हिफजुर्रहमान को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद उसके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है और उसे जेल भेज दिया गया है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, परिवार की शिकायत में आरोप लगाया गया था कि बच्ची जब घर से बाहर निकली थी, उसी दौरान आरोपी ने कथित तौर पर मौका पाकर उसके साथ जबरदस्ती की। मंडावली थाने के प्रभारी निरीक्षक वीरेंद्र कुमार ने भी मामले में शिकायत मिलने और आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि की है।

पुलिस की शुरुआती कार्रवाई में आरोपी की गिरफ्तारी सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके बाद जांच के दौरान घटना से जुड़े अन्य तथ्यों को सामने लाने की कोशिश की जाएगी। जांच में पीड़िता के बयान, मेडिकल परीक्षण, घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

पहले भी POCSO एक्ट में दर्ज हुआ था मामला

इस मामले का सबसे गंभीर पहलू आरोपी का कथित पिछला आपराधिक रिकॉर्ड है। पुलिस के अनुसार हिफजुर्रहमान के खिलाफ मंडावली थाने में पहले भी पॉक्सो एक्ट से जुड़ा मामला दर्ज किया जा चुका है।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इस साल उसके खिलाफ एक अन्य मुकदमा दर्ज हुआ था। उस मामले में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के साथ पॉक्सो एक्ट की धाराएं लगाई गई थीं। पुलिस द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी में पुराने मामले को भी दर्ज आपराधिक इतिहास का हिस्सा बताया गया है।

ताजा मामले में भी पुलिस ने पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इस बार दर्ज मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 65(1) और पॉक्सो एक्ट की धारा 5(J)(ii)/6 का उल्लेख किया गया है। पुराने मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 74 और 351(2) तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 7/8 का उल्लेख पुलिस रिकॉर्ड में है।

यह तथ्य जांच के दौरान इसलिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि आरोपी के पिछले मामले का विवरण पुलिस रिकॉर्ड में मौजूद है। हालांकि पुराने मामले में भी आरोप की स्थिति और न्यायिक परिणाम अलग से देखे जाने चाहिए। केवल मामला दर्ज होने का अर्थ यह नहीं होता कि अदालत ने अपराध सिद्ध कर दिया है।

POCSO एक्ट क्यों महत्वपूर्ण है?

पॉक्सो यानी Protection of Children from Sexual Offences Act बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने के लिए बनाया गया विशेष कानून है। इसका उद्देश्य बच्चों के खिलाफ यौन शोषण, यौन उत्पीड़न और अन्य संबंधित अपराधों के मामलों में विशेष कानूनी सुरक्षा उपलब्ध कराना है।

नाबालिग से जुड़े यौन अपराधों में कानून पीड़ित बच्चे की पहचान और गरिमा की सुरक्षा पर विशेष जोर देता है। ऐसे मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान बच्चे की संवेदनशील स्थिति को ध्यान में रखना आवश्यक होता है।

बिजनौर के इस मामले में भी पीड़ित बच्ची की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। यह कानूनी और नैतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। नाबालिग पीड़ित की पहचान उजागर करने वाली जानकारी साझा करना उचित नहीं है।

गांव और आसपास के क्षेत्र में चिंता

घटना के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी चिंता का माहौल है। जिस इलाके में बच्ची और आरोपी रहते हैं, वहां दोनों के पड़ोसी होने की बात सामने आई है। पड़ोस में रहने वाले लोगों के बीच विश्वास और बच्चों की सुरक्षा को लेकर ऐसे मामले गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों में बच्चे अक्सर आसपास के लोगों के साथ सामान्य रूप से संपर्क में रहते हैं। कई बार पड़ोसी, परिचित या परिवार से जुड़े लोग बच्चों के लिए परिचित चेहरे होते हैं। ऐसे मामलों में बच्चों को यह समझाना जरूरी होता है कि किसी भी व्यक्ति के साथ असहज महसूस होने पर वे तुरंत माता-पिता, अभिभावक, शिक्षक या किसी विश्वसनीय वयस्क को जानकारी दें।

बच्चों की सुरक्षा केवल घर के भीतर की जिम्मेदारी नहीं है। स्कूल, मोहल्ला, परिवार और स्थानीय प्रशासन सभी की भूमिका इसमें महत्वपूर्ण होती है। किसी भी संदिग्ध परिस्थिति की जानकारी समय पर पुलिस या संबंधित बाल संरक्षण तंत्र तक पहुंचाना जरूरी है।

पुलिस जांच में आगे क्या होगा?

आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जांच का अगला चरण महत्वपूर्ण होगा। पुलिस घटना से जुड़े तथ्यों को सत्यापित करेगी और उपलब्ध साक्ष्यों को एकत्र करेगी। पीड़िता का बयान, मेडिकल जांच और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं मामले की जांच का हिस्सा हो सकती हैं।

पुलिस को यह भी देखना होगा कि घटना किस परिस्थिति में हुई और शिकायत में बताए गए घटनाक्रम की पुष्टि किन साक्ष्यों से होती है। आरोपी और पीड़ित पक्ष के बयानों के साथ-साथ घटनास्थल और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भी जांच की जा सकती है।

यदि पुलिस को डिजिटल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मिलते हैं, तो उन्हें भी जांच में शामिल किया जा सकता है। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप उन्हें रिकॉर्ड करने पर ध्यान देती हैं।

जांच पूरी होने के बाद पुलिस अदालत के सामने संबंधित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगी। अंतिम रूप से आरोपी दोषी है या नहीं, इसका फैसला अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।

आरोपी के पिछले रिकॉर्ड ने बढ़ाई चिंता

ताजा मामले में आरोपी के खिलाफ पहले से पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज होने की जानकारी ने घटना को और गंभीर बना दिया है। पुलिस रिकॉर्ड में इसी वर्ष दर्ज एक पुराने मामले का उल्लेख है।

किसी व्यक्ति के खिलाफ पहले मामला दर्ज होना और किसी अपराध में अदालत द्वारा दोषी ठहराया जाना दो अलग-अलग बातें हैं। इसलिए पिछले मामले को लेकर भी न्यायिक स्थिति को अलग से देखना जरूरी है। फिर भी पुलिस रिकॉर्ड में ऐसे मामले का होना जांच एजेंसियों के लिए प्रासंगिक जानकारी हो सकता है।

यदि कोई व्यक्ति पहले से किसी गंभीर मामले में जांच या कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रहा हो और बाद में उसके खिलाफ इसी प्रकार का नया आरोप सामने आए, तो पुलिस उसके आपराधिक इतिहास और दोनों मामलों के बीच किसी संभावित संबंध को भी देख सकती है।

बच्चों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

बिजनौर की घटना एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल सामने लाती है। नाबालिग बच्चे अक्सर अपने आसपास मौजूद लोगों पर भरोसा करते हैं। इसलिए अभिभावकों के लिए बच्चों के साथ खुला संवाद बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

बच्चों को यह बताया जाना चाहिए कि उनका शरीर और उनकी व्यक्तिगत सीमाएं महत्वपूर्ण हैं। यदि कोई व्यक्ति उन्हें असहज महसूस कराता है, जबरदस्ती करता है या किसी ऐसी गतिविधि के लिए दबाव डालता है जिसे वे नहीं चाहते, तो उन्हें तुरंत किसी भरोसेमंद वयस्क को बताना चाहिए।

बच्चों को डराकर चुप कराने के बजाय उन्हें अपनी बात खुलकर रखने का माहौल देना भी जरूरी है। कई मामलों में बच्चे घटना के बाद डर, शर्म या दबाव के कारण तुरंत बात नहीं कर पाते। ऐसे में परिवार की संवेदनशील प्रतिक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है।

कानून और समाज दोनों की जिम्मेदारी

नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराध केवल कानूनी मामला नहीं हैं, बल्कि समाज के लिए भी गंभीर चिंता का विषय हैं। कानून आरोपी के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता तय करता है, लेकिन अपराध की रोकथाम के लिए सामाजिक स्तर पर भी जागरूकता आवश्यक है।

परिवारों को बच्चों की गतिविधियों और सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना चाहिए, लेकिन इसका मतलब बच्चों पर हर समय निगरानी रखना नहीं है। ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि बच्चों को सुरक्षित तरीके से अपनी समस्याएं बताने की क्षमता और विश्वास दिया जाए।

स्कूलों और स्थानीय संस्थानों में भी बच्चों को सुरक्षा से संबंधित जानकारी दी जा सकती है। उन्हें यह समझाया जा सकता है कि किसी भी प्रकार का अनुचित व्यवहार होने पर वे चुप न रहें और मदद मांगें।

मामले में अब अदालत की भूमिका अहम होगी

पुलिस द्वारा आरोपी की गिरफ्तारी मामले की कानूनी प्रक्रिया का केवल एक चरण है। इसके बाद जांच, साक्ष्य संग्रह, बयान और अदालत में कानूनी कार्रवाई जैसे चरण सामने आएंगे। आरोपी को अदालत में अपना पक्ष रखने का अधिकार होगा और अभियोजन पक्ष को भी अपने आरोपों को साक्ष्यों के आधार पर साबित करना होगा।

इसलिए फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

फिलहाल पुलिस ने यह स्पष्ट किया है कि शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। साथ ही पुलिस रिकॉर्ड में आरोपी के खिलाफ पहले दर्ज पॉक्सो मामले का भी उल्लेख है।

बिजनौर के मंडावली क्षेत्र का यह मामला बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता सामने लाता है। नाबालिग बच्ची के साथ कथित अपराध के बाद पुलिस की त्वरित गिरफ्तारी कार्रवाई हुई है, लेकिन अब जांच की गुणवत्ता और कानूनी प्रक्रिया यह तय करेगी कि मामले में उपलब्ध साक्ष्यों से क्या तथ्य सामने आते हैं। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात पीड़ित बच्ची की सुरक्षा, गोपनीयता और अधिकारों की रक्षा करना है।

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